Friday, June 13, 2014

सुबह से शाम तेरा इंतेज़ार ...

A Shayari of Dr Sharad Singh

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर...

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  2. बहुत सुन्दर भाव विचारणीय और सराहनीय ..सब कुछ सह लेता है ये कोमल है तो बज्र भी
    भ्रमर ५

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