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My Editorials - Dr Sharad Singh

Wednesday, November 4, 2020

चर्चा प्लस | ‘चार्ली हेब्दो’ जनित अशांति और संयम का अस्त्र | डाॅ शरद सिंह

चर्चा प्लस
‘चार्ली हेब्दो’ जनित अशांति और संयम का अस्त्र
 - डाॅ शरद सिंह
 किसी की भावनाओं को भड़काना सबसे आसान होता है यदि पता चल जाए कि वह किसके प्रति सबसे अधिक संवेदनशील है। ‘‘चार्ली हेब्दो’’ ने सटायर के नाम पर हमेशा भावनाओं को ही चोट पहुंचाया है और भड़काया है। इस बार उसके भड़कावे की आंच हमारे देश की सड़कों तक आ पहुंची। ऐसे समय में सामूहिक गुस्से का फ़ायदा उठाने वाले भी सक्रिय हो उठते हैं और आम जनजीवन की शांति भंग कर देते हैं। तब संयम ही वह अस्त्र होता है जो प्रत्येक आतंकी और कट्टरपंथी गतिविधियों को सौ प्रतिशत पराजित करता है। 
हाल ही में फ्रांस की व्यंग्य पत्रिका ‘‘चार्ली हेब्दो’’ ने एक बार फिर पूरे विश्व की शांति भंग कर दी है। ‘‘चार्ली हेब्दो’’ ने उस कार्टून को फिर से प्रकाशित कर दिया जिस पर एक बार पहले भी नृशंस गोलीकांड हो चुका है। इस बार कार्टून प्रकाशित होने के बाद राजधानी पेरिस में एक युवक ने एक स्कूली शिक्षक की सिर काटकर नृशंस हत्या कर दी थी। युवक ने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि शिक्षक ने अपने विद्यार्थियों को पैगंबर मोहम्मद का एक कार्टून दिखाया था। इस युवक को भी तुरंत ही मौत के घाट उतार दिया गया। युवक की पहचान एक चेचेन्या निवासी के तौर पर की गई और इस संबंध में कई गिरफ्तारियां भी की गईं। इस घटना के बाद एक बार फिर बहस छिड़ गई है वैश्विक आतंकवाद पर। 

पेरिस की घटना के बाद दुनिया के हर देश में विचारधारा के दो धड़े दिखाई देने लगे हैं। एक धड़ा वह जो शिक्षक के मारे जाने की निंदा कर रहा है तथा इसे आतंकवादी गतिविधि मान रहा है और दूसरा धड़ा वह जो शिक्षक के मारे जाने का समर्थन करता है। इस बहस की आंच से भारत भी अछूता नहीं है। मानवतावाद का हिमायती भारत और भारतीय कभी भी हिंसा का समर्थन नहीं करते हैं किन्तु कुछ लोगों की भावनाओं को इतनी अधिक ठेस पहुंची कि उन्होंने सड़कों पर निकल कर फ्रांस के राष्ट्रपति का विरोध किया ओर शिक्षक की हत्या किए जाने का समर्थन किया। ऐसे संवेदनशील समय में कुछ बुद्धिजीवियों ने भी संयम का साथ छोड़ कर ऐसे बयान दे दिए जो भारतीय परिप्रेक्ष्य में उचित नहीं कहे जा सकते हैं। असल दोषी ‘‘चार्ली हेब्दो’’ है। किसी की धार्मिक भावनाओं के साथ अनावश्यक छेड़-छाड़ करना कतई उचित नहीं कहा जा सकता है जैसे कि शिक्षक की हत्या भी मानवता का हनन ही कहा जाएगा। बेशक धार्मिक कट्टरता से किसी का भला नहीं होता लेकिन धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से भी किसी का भला नहीं होता है। ऐसी घटनाओं का सबसे अधिक लाभ उठाते हैं आतंकी संगठन। आम जनता समझ भी नहीं पाती है कि उन्हें किस तरह उकसाया जा रहा है। जब तक उन्हें समझ में आता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

आतंकवादी गतिविधियों के दो उदाहरण ऐसे हैं जिन्हें सभी आसानी से समझ सकते हैं। 9/11 की घटना जिसमें न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया गया था जिसमें अनेक निरपराध लोग मारे गए थे। साल 2001 में 11 सितंबर को अमेरिका में हुए आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। इस हमले में अमेरिका का वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। दो विमानों को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के टॉवर्स में टकरा दिया, जबकि तीसरे विमान से पेंटागन पर हमला किया गया। इन हमलों में 2,996 लोगों की मौत हो गई थी और 6,000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। अमेरिका ने इस हमले का बदला लिया और पाक के एबटाबाद में 2 मई 2011 को अमेरिकी कमांडो ने एक ऑपरेशन में अलकायदा चीफ ओसामा बिन लादेन को मौत के घाट उतार दिया। इस हमले के बाद अमेरिका ने सुरक्षा नीति में व्यापक बदलाव किए गए। दूसरी घटना भारत में मुंबई पर आतंकी हमले की। मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले इस हमले को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने अंजाम दिया था। उन्होंने देश की आर्थिक राजधानी में कई स्थानों को निशाना बनाया था। इस हमले में 166 बेगुनाह लोग मारे गए थे। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस स्टेशन के अलावा आतंकियों ने ताज होटल, होटल ओबेरॉय, लियोपोल्ड कैफे, कामा अस्पताल और दक्षिण मुंबई के कई स्थानों पर हमले शुरू कर दिया था। एक साथ इतनी जगहों पर हमले ने सबको चौंका दिया था। 

भारत को अब तक अनेक बार आतंकी गतिविधियों का शिकार होना पड़ा है। 1991 पंजाब हत्याकांड, 1993 मुंबई बम धमाके, 1993 चेन्नई में आरएसएस कार्यालय में बमबारी, 2000 चर्च बमबारी, 2000 लाल किला आतंकवादी हमला, 2001 भारतीय संसद हमला, 2002 मुंबई बस बमबारी, 2002 अक्षरधाम मंदिर पर हमला, 2003 मुंबई बम बमबारी, 2004 असम में धमाजी स्कूल बमबारी, 2005 दिल्ली बम विस्फोट, 2005 भारतीय विज्ञान संस्थान शूटिंग, 2006 वाराणसी बमबारी, 2006 मुंबई ट्रेन बमबारी, 2006 मालेगांव बमबारी, 2007 समझौता एक्सप्रेस बमबारी, 2007 हैदराबाद बमबारी, 2007 अजमेर दरगाह बमबारी, 2008 जयपुर बमबारी, 2008 बैंगलोर सीरियल विस्फोट, 2008 अहमदाबाद बमबारी, 2008 दिल्ली बम विस्फोट, 2008 मुंबई हमले, 2010 पुणे बमबारी, 2010 वाराणसी बमबारी, 2011 मुंबई बमबारी, 2011 दिल्ली बमबारी, 2012 पुणे बमबारी, 2013 हैदराबाद विस्फोट, 2013 श्रीनगर हमला, 2013 बोध गया बमबारी, 2013 पटना बम विस्फोट, 2014 छत्तीसगढ़ हमला, 2014 झारखंड विस्फोट, 2014 चेन्नई ट्रेन बमबारी, 2014 असम हिंसा, 2014 चर्च स्ट्रीट बम विस्फोट, बैंगलोर, 2015 जम्मू हमला, 2015 गुरदासपुर हमला, 2015 पठानकोट हमला, 2016 उरी हमला, 2016 बारामुल्ला हमला, 2017 भोपाल उज्जैन पैसेंजर ट्रेन बमबारी, 2017 अमरनाथ यात्रा हमला, 2018 सुक्का हमला आदि अनेक आतंकवादी घटनाएं हैं जिन्होंने भारत की शांति को समय-समय पर चोट पहुंचाई। लेकिन आतंकवाद के विरुद्ध भारत का दृष्टिकोण हमेशा एकदम स्पष्ट रहा है। सन् 2019 की 11 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि ‘‘आज आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है जिसने विचारधारा का रूप ले लिया है। उन्होंने साथ ही कहा कि आतंक की जड़ें हमारे पड़ोस में पनप रही हैं लेकिन हम इसका मजबूती से सामना कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। आतंकवादियों को पनाह और प्रशिक्षण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए भारत पूर्ण रूप से सक्षम है और हमने इसे करके दिखाया भी है।’’ यही तो है भारतीय दृष्टिकोण और दृढ़ता जिसने हर अशांति से देश को उबारा है।

ऐसे समय में जब विश्व कोरोना आपदा जैसे विकट संकट से जूझ रहा है, ऐसी घटनाओं के प्रति संयम बरतना जरूरी है जो भावनाओं को ठेस पहंचाने और भड़काने के लिए ही की गई हों। विकसित देशों की अपेक्षा हमारा देश अधिक संकटों से घिरा हुआ है। कोरोना आपदा ने लाखों लोगों की नौकरियां छीन ली हैं। उद्योग-धंघे एक बार फिर अपना पांव जमाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कोरोना आपदा के कारण हमारी जीवनचर्या पूरी तरह से बदल चुकी है। अब सेहत की सुरक्षा हमारा पहला मुद्दा है। इन परिस्थितियों में ‘‘चार्ली हेब्दो’’ जैसी पत्रिका को नकारना ही उचित कदम होगा। सटायर का अर्थ किसी की निजता को चोट पहुंचाना नहीं होता है।  अतः जिस प्रतिक्रिया की वे उम्मीद करते हैं, वह प्रतिक्रिया उन्हें नहीं मिलेगी तो वे स्वयं पराजित हो जाएंगे। प्रत्येक विपरीत परिस्थितियों में संयम का अस्त्र सबसे अधिक कारगर होता है।      
                  
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(दैनिक सागर दिनकर में 04.11.2020 को प्रकाशित)
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5 comments:

  1. गम्भीर विषय पर बहुत संतुलित लेखन के लिए साधुवाद 💐🍁💐

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    1. हार्दिक धन्यवाद 🙏🙏🙏

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  2. मीना भारद्वाज जी,
    यह मेरे लिए प्रसन्नता का विषय है कि मेरी पोस्ट आपने चर्चा मंच में शामिल की है। चर्चा मंच से जुड़ना हमेशा सुखद लगता है। आपका हार्दिक आभार एवं धन्यवाद 🙏
    - डॉ शरद सिंह

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  3. bhut bdiya post likhi hai aapne Ankitbadigar ki traf se dhanyvaad

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