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My Editorials - Dr Sharad Singh

Thursday, July 2, 2026

बतकाव बिन्ना की | मंदर में घपला करे से जो उने डर नईं लगो?| डाॅ (सुश्री) शरद सिंह | बुंदेली कॉलम

बतकाव बिन्ना की  
मंदर में घपला करे से जो उने डर नईं लगो?  
- डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
       हमें एक घटना याद आ रई, बरसो पैले की। का भओ रओ के पन्ना के जुगल किसोर मंदर में में एक दार चोरी भई। किसोर जू के मुकुट, मुरली औ सबरे जेवर ऊ भड़या ने चुरा लए। संकारे मंदर खुलो तो पुजारी जू ने हल्ला मचाओ। भीड़ लग गई। पुलिस आ गई। सबरे ऊ भड़या खों गरयान लगे के जीने बी जुगल किसोर जू के जेवर चुराए ऊकी ठठरी बंधे, ऊको कीरा परें, ऊपे जुगल किसोर जू की गाज गिरे। जांच सुरू करी गई। पब्लिक तो ऊंसई खोंखिया रई हती सो ऊने सोई पुलिस पे दबाव डारो। पुलिस के लाने सोई जे बड़े सरम की बात हती। सो पुलिस वारे ऊ भड़या खों पकरबे के लाने जुट परे। दोई दिनां में जा साबित हो गओ के जो पुलिस चाए तो कोनऊं बदमास बच नईं सकत। ऊ भड़या पकरो गओ औ किसोर जू के सबरे जेवर उतई मंदर के कुंआ में मिले। काए से के ऊ भड़या ने बा जेवर बांध के कुआ में लटका दए रए। ऊकी सेाच से के पुलिस को तो पतो परहे नईं। मनो पुलिस औ ऊके कुत्ता ने सूंघ-सांघ के बा जेवर ढूंढ निकारे। इत्तोई नोंई, पुलिस ने ऊ भड़या खों भी पकर लओ। जबे पब्लिक खों भड़या के बारे में पता परी तो सबरे अकबका के रए गए। काए से के बा भड़या और कोऊ नईं मंदर को पुजारी ई रओ। पब्लिक ने ऊ पुजारी खों औ गरियाओ। ऊ पे केस चलो। मनो सायद बा ऊ टेम पे जमानत पे छूटो रओ। सायद ईसे कहने पर रए के जा भौत पैले की बात आए। हम हते लोहरे ऊ टेम पे, सो जित्ती याद आ रई बता रए। फेर पता परी के ऊ पुजारी खों अपने करम पे इत्तो पछताओ भओ के ऊने ओई कुंआ में कूंद के अपने प्रान दे दए। इत्तई नईं, कछू समै बाद पता परी के ऊके घरे औ दो-तीन मौतें भईं। सो सबई कैत्ते के किसोर जू ने ऊको दंड दओ। बाकी काम बी तो ऊने बुरौ करो रऔ।
एसईं एक घटना औ भई रई। छतरपुर में हरपालपुर की रस्ता पे एक छोटो सो मंदर रओ। अब तो बा बड़ो बन गओ हुइए। मनो ऊ टेम पे बा छोटो सो रओ। ऊकी मानता ऊ टेम पे बी रई। अब हमें जे ध्यान नोंई के बा किसन जू को मंदर रओ के रामजी को, मनो इन्हई दोई में से एक को रओ हुइए। काए से के कोऊ ने मनौती पूरी होबे पे उते चांदी को मुकुट चढ़ाओ रओ। मुकुट चढाए चार दिनां भए नईं के एक दारूखोर भड़या रात को मंदर में घुसो औ बा मुकुट ले भगो। ऊको दारू के लाने पइसा चाउने रए सो ऊने जे न सोची के भगवान को मुकुट आए के कोन को आए? ऊने तो उठाओ औ चलतो बनो। दूसरे दिनां कोऊ ने बताओ के मंदर के लिंगे बा दारूखोर को घूमत देखो रओ। अब सबरे ऊको ढूंढबे में जुटे। ऊको कऊं पतो ने परो। बाद में पता परी के बा रातई खों कोनऊं टिरक में चढ़ के कानपुर भाग गओ रओ। इते पुलिस छतरपुर औ हरलपालपुर में ऊको ढूंढत फिरई हती, मनो बा तो उते कानपुर में दारू सूंट रओ हतो। फेर एक दिनां बड़ो गजब को भओ। बा दारूखोर भड़या गांव लौट आओ। ऊने बा मुकुट बी मंदर खों दे दओ। पुलिस ने ऊंसे पूछी के अब तक कां रए औ अब काए लौटे औ संगे जा मुकुट लौटाबे की तुमें काए सूझी? सो ऊ भड़या ने मजे की किसां सुनाई। ऊने बताई के ऊके लिंगे पइसा ने हते औ ऊको दारू की तलब लग रई हती। सो ऊने बिगैर कछू सोचे-बिचारे मंदर में से मुकुट चुरा लओ औ कानपुर भाग गओ। उते एक चोरी को समान खरीदबे वारे खों मुकुट बेंचो औ पईसा ले के दारू पियन लगो। रात की बेरा जब बा सोओ सो ऊको लगो के कोनऊं सीना पे चढ़ो बैठो। साना पे चढ़ो बा मानुस बिगैर मुकुट के भगवान की मूरत घांई दिखा रओ तो। दो रातें औ जेई भओ। ईंसे बा दारूखोर डरा गओ। ऊके मन में आई के ऊसे गलती हो गई, अब ऊको मुकुट वापस कर दओ चाइए। मनो बा तो ऊको बेंच चुको हतो। ऊने सोची के अब का करो जाए? जो कऊं बा ऊ चोरबजार वारे से मांगबे जैहे सो बा न लौटाहे। सो ऊ दारूखोर ने बा चोरबजार वारे के इते सेंध लगाई औ मुकुट ले भगो। ईके बाद बा वापस गांव वापस पौंचो औ ऊने मुकुट सोई मंदर खों लौटा दओ। चोरी करबे के कारन ऊको सजा तो भई, मनो कर्री ने भई। उते के लोग कैत्ते के जो बा मुकुट ने लौटातो तो भगवान ऊको पटक-पटक के मारते। बाकी बा चोरबजार वारो सोई पकरो गओ। ऊके तो पइसा बी गए औ मुकुट बी गओ। औ पुलिस के डंडा परे सो अलग से। अब बुरए काम को बुरौ अंत तो होतई आए।
सो जे दो किसां सो हमें याद आ रई। अब आप ओरन जानतई आओ के जे किसां हमें याद काए आई? ठीक समझे आप ओरें! अरे रामलला के इते चंदा के पइसा में गड़बड़ी भई सो हमें जे दोईं घटना याद आ गईं। ऊंसई अपने इते जब कछू होत आए तो मुतकी पुरानी बातें याद आन लगत आएं। जैो कोऊं के इते कोनऊं दिल के दौरा से सांत हो गओ होए तो सबरे जने जो उते जुटत आएं बे अपनी-अपनी सुनान लगत आएं के हमाए फूफा के संगे बी ऐसोई भओ रओ, तो हमाई मौसी के संगे बी ऐसई भओ रओ। मनो कोनऊं के इते समै के पैले मोड़ा या मोड़ी पैदा हो जाए सो सबई खों याद आन लगत आए के हमाए इते बी ऐसो भओ रओ। ऐसे समै सबई जनमपतरी खोल के बैठ जात आएं के कोन के इते सतमासी भई औ कोन के इते अठमासा भओ। जो कोऊ एक खों मलेरिया हो जाए सा बाकी सब जनों खों अपनों-अपनों मलेरिया याद आन लगत आए। सो जे तो बड़ी बात आए। इत्ते नोंने रामलला। इत्तो नोंनो मंदर। इत्ते अच्छे से प्रानप्रतिष्ठा भई रई के आज लौं आंखन के आगे दिखात आए। बाकी हम आज लौं रामलला के दरसनों के लाने ने जा पाए। हमने एक भैयाजी से तो यां तक कै रखी आए के जो हमें संगे ने लिवा गए अरै दरसन ने कराई तो आपके लाने पाप परहे। बाकी सांची तो जा आए के जबे रामलला को बुलावो आहे तभई उते जाबे खों मिलहे औ तभईं दरसन हो पाहें। 
बाकी जब से हमने बा खबर सुनी के उते चंदा के पइसा को घपला हो गओ, तभई से हमें जे दोई किसां याद आन लगीं। सो का आए के जोन ने रामलला के चंदा के पइसा डकारे उनें पचहे नईं, जे बात तो तै कहाई। एक तो भड़याई ऊंसई बुरऔ काम आए, ऊपे से मंदर में भड़याई? ईसे बढ़के औ कछू बुरौ काम होई नईं सकत आए। सो हम अपने जी खों जेई तसल्लसी दे रए के एक न एक दिनां सबरे भड़या हरों खों सजा जरूर मिलहे। इते अंधेर बी औ देर बी आए, मनो उते देर भले होए पर अंधेर ने हुइए।         
बाकी बतकाव हती सो बढ़ा गई, हड़ियां हती सो चढ़ा गई। अब अगले हप्ता करबी बतकाव तब तक लौं जेई की जुगाली करो। मनो सोचियो जरूर के बे ओरें कित्ते ढीठ आएं के इत्ते पापुलर मंदर में घपला करे से जो उने डर नईं लगो? रामलला के पइसा चुरात समै उनको जी ने कांपो? अब रामलला उनखों दंड दैहें के नईं?    
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बुंदेली कॉलम | बतकाव बिन्ना की | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | प्रवीण प्रभात
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Wednesday, July 1, 2026

चर्चा प्लस | हम कितने तैयार हैं प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | सागर दिनकर


चर्चा प्लस 
हम कितने तैयार हैं प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए?   
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह                                                                                   
      एक दिन अचानक सभी के मोबाईल पर रेड अर्लट बजा। चेतावनी थी मौसम विभाग की ओर से। साथ ही मैसेज भी था कि तीन घंटे में तेज हवाएं चलेंगी। तीन क्या, तेरह घंटे निकल गए लेकिन रेड अलर्ट वाली तेज हवाएं नहीं चलीं। बहरहाल, लोगों को रेड अर्लट बजने का अनुभव तो हुआ। लेकिन यदि सही में तेज तूफानी हवाएं चलतीं तो आमजन को क्या करना चाहिए इसका उन्हें कोई पता नहीं था। चूंकि तूफानी हवाएं नहीं चलीं तो मामला हंसी-मजाक में दब गया। लेकिन प्रकृति कभी मजाक नहीं करती। इसका जाता उदाहरण वेनेजुएला में आया भूकंप है। गूगल के मौसम विभाग ने चेतावनी भी दी थी किन्तु हताहतों की संख्या दस हजार से अधिक रही। क्योंकि उन्हें पता नहीं था कि वे अपना बचाव कैसे करें? वेनेजुएला कैरेबियन प्लेट पर स्थित है। भूकंपों की यह श्रृंखला 7.2 तीव्रता के भूकंप से शुरू हुई और 39 सेकंड बाद पास ही में 7.5 तीव्रता का एक और भूकंप आया। वेनेजुएला सम्हल नहीं सका। क्या हम सम्हल सकेंगे?


24 जून  2026 को वेनेजुएला में  शाम के समय दो शक्तिशाली भूकंप आए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार पहले 7.1 और दूसरे 7.5 तीव्रता के भूकंप ने काराकास में कई इमारतें गिरा दीं। लोग सड़कों पर आ गए। सुनामी की चेतावनी भी जारी की गई। पहला भूकंप 7.1 तीव्रता का था, जिसका केंद्र मोरॉन समुदाय के पश्चिम में था। ये देश के कैरेबियन तट पर स्थित है, काराकास से करीब 168 किलोमीटर दूर। इसकी गहराई 13 किलोमीटर थी। कुछ मिनट बाद दूसरा और भी बड़ा 7.5 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। केंद्र मोरॉन से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था। इन भूकंपों ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। लोग सड़कों पर निकल आए, इमारतों की दीवारें गिर गईं और धूल के गुबार उठते दिखे। इसके साथ ही कई राज्यों में झटके महसूस किए गए, खासकर काराकास के अल्तामिरा इलाके में भारी नुकसान हुआ। लोगों से बाहर रहने और आफ्टरशॉक्स से सावधान रहने की अपील की गई।
भूकंप पृथ्वी की टेक्टॉनिक प्लेट्स की गति से होते हैं। वेनेजुएला कैरेबियन प्लेट और साउथ अमेरिकन प्लेट की सीमा पर स्थित है।  भूगर्भीय वैज्ञानिकों के अनुसार कैरेबियन प्लेट साउथ अमेरिकन प्लेट के सापेक्ष पूर्व दिशा में लगभग 20 मिलीमीटर प्रति वर्ष की गति से खिसक रही है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से ट्रांसफॉर्म बाउंड्री है, जहां प्लेट्स एक-दूसरे के बगल से गुजरती हैं, जैसे सैन सेबेस्टियन और एल पिलार फॉल्ट स जब प्लेट्स फंस जाती हैं और तनाव बढ़ता है, तो अचानक फिसलन होती है, जिससे भूकंप आता है। इस बार के भूकंप उथले थे (10-13 किमी गहराई), इसलिए उनका प्रभाव ज्यादा था। उथले भूकंप सतह पर ज्यादा कंपन पैदा करते हैं। यह क्षेत्र सदियों से सक्रिय है। सन 1812 और 1900 में भी काराकास के आसपास 7$ तीव्रता के भूकंप आए थे. इस प्लेट बाउंड्री का बड़ा हिस्सा श्लॉक्डश् है यानी तनाव जमा हो रहा है, जो 8 तीव्रता तक के भूकंप पैदा कर सकता है। इस डबलेट इवेंट (फोरशॉक के तुरंत बाद मेनशॉक) ने ऊर्जा रिलीज की, जो क्षेत्र की जटिल भू-संरचना का नतीजा है। उत्तर पश्चिम और दक्षिण पूर्व दिशा की सहायक फॉल्ट्स भी यहां सक्रिय हैं, जो स्ट्राइक-स्लिप मोशन पैदा करती हैं।
ध्यान देने की बात यह है कि वेनेजुएला ‘‘रिंग ऑफ फायर’’ का हिस्सा नहीं है,  जहां भूकंप, विशेष रूप से उच्च तीव्रता वाले भूकंप, अपेक्षाकृत आम हैं। यही कारण है कि इस तीव्रता का भूकंप वेनेजुएला जैसे स्थान पर जापान की तुलना में कहीं अधिक नुकसान पहुंचा। क्योंकि ‘‘रिंग ऑफ फायर’’  में या उसके निकट होने कारण जापान इस प्रकार की घटनाओं के लिए कहीं अधिक तैयार रहता है। वहां बच्चों को भी स्कूल में प्रशिक्षण्या दिया जाता है कि भूकंप की चेतावनी मिलने पर स्वयं को किस तरह सुरक्षित रहना है। हमारे देश में आम नागरिकों को नही पता कि बाढ़, भूकेप या ट्विस्टर आने पर किस तरह अपना बचाव करना है? 
ऐसा नहीं है कि कैरेबियन प्लेट में पहले कभी भूकंप नहीं आए, कैरेबियन प्लेट के दक्षिणी भाग में बड़े भूकंप आते रहते हैं। पिछले 100 वर्षों में इस क्षेत्र में 7 या उससे अधिक तीव्रता के पांच भूकंप आ चुके हैं। सितंबर 2025 में, उत्तरी वेनेजुएला में दो भूकंपों का एक साथ कहर बरपा लेकिन इसकी तीव्रता वर्तमान भूकंप से कम थी यानी रिक्टर स्केल पर 6.2/6.3 तीव्रता। यद्यपि 6.3 तीव्रता का भूकंप भी बड़ा होता है, लेकिन यह प्रायः व्यापक, विनाशकारी क्षति का कारण नहीं बनता है। 7.5 तीव्रता का  भूकंप अन्य भूकंपों की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली होता है।  इसमें खराब ढंग से निर्मित या बिना सुदृढ़ीकरण वाली इमारतों को भारी नुकसान पहुंचता है। जिससे अधिक जनहानि भी होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष की घटना तीव्रता और उत्सर्जित ऊर्जा के आधार पर पिछले वर्ष की तुलना में कम से कम 63 गुना अधिक शक्तिशाली थी । उत्तरी वेनेजुएला में आए इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के बारे में यूएसजीएस के  आकलन के अनुसार, ष्कुल मिलाकर, इस क्षेत्र की आबादी भूकंप के झटकों के प्रति संवेदनशील संरचनाओं में रहती है, हालांकि कुछ संरचनाएं भूकंप प्रतिरोधी भी हैं। सबसे अधिक संवेदनशील भवन प्रकार बिना सुदृढ़ीकरण वाली ईंटों की चिनाई और मिट्टी के ब्लॉक से निर्मित हैं।
2018 में,  7.3 तीव्रता का भूकंप वेनेजुएला के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के कम आबादी वाले क्षेत्र (काराकास क्षेत्र में नहीं) के तट से काफी दूर उत्तर में आया था। इस घटना के परिणामस्वरूप मध्यम स्तर की क्षति हुई और कुछ लोगों की मौत हुई।
सन 1997 में,  कैरियाको के उत्तर में अंतर्देशीय क्षेत्र में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम 81 लोगों की मौत  हुई थी।  सन 1967 में, तटरेखा के पास 6.6 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 240 लोगों की मौतें हुई और ऊंची-ऊंची अपार्टमेंट इमारतों के ढहने सहित व्यापक क्षति हुई थी। सन् 97 वर्ष पूर्व, सन् 1929 में, समुद्र तट से दूर 6.7 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके परिणामस्वरूप सुनामी भी आई थी। ताजा भूकंप यानी जून 2026 में  आए दोहरे भूकंपों की घटना वेनेजुएला के आबादी वाले हिस्सों में, समुद्र तट से दूर नहीं, बल्कि अंतर्देशीय क्षेत्र में हुई, यह एक 7.5 तीव्रता के भूकंप से होने वाले दोहरे भूकंपों की तुलना में अधिक समय तक चली और इसलिए पिछली सदी में आए किसी भी भूकंप की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली रही। यूएसजीएस का अनुमान है कि मृतकों की संख्या 1,000 से अधिक हो जाएगी और संभावित रूप से 10,000 से भी अधिक हो सकती है।
वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप का भारतीय उपमहाद्वीप की जियोलॉजिकल (भूगर्भीय) संरचना से सीधा संबंध नहीं है, लेकिन भूवैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के अनुसार यह भारत के लिए सजग रहने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की एक बहुत बड़ी चेतावनी जरूर है।
वेनेजुएला में जो तबाही हुई, वह हमें निम्नलिखित कारणों से भारतीय उपमहाद्वीप के लिए सबक देती है कि भारत में हिमालयी क्षेत्र, उत्तर-पूर्व के राज्य, अंडमान-निकोबार, गुजरात, कच्छ और दिल्ली-एनसीआर अत्यधिक संवेदनशील भूकंपीय ज़ोन 4, 5  में आते हैं। इन क्षेत्रों के नीचे इंडियन प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिससे कभी भी वेनेजुएला जैसे या उससे भी बड़े तीव्र झटके (8.0$ मैग्नीट्यूड) आ सकते हैं।
वेनेजुएला के भूकंप के कुछ दिन दिल्ली, एमसीआर और उत्तर भारत के कई शहरों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। वेनेजुएला में आए भूकंप का केंद्र धरती की सतह से काफी उथला था (10 से 20 किलोमीटर की गहराई), जिसके कारण धरती की सतह पर कंपन बहुत भयानक हुआ। हिमालय और उत्तर भारत के भूकंप भी अक्सर उथले होते हैं, जो अत्यधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।
वेनेजुएला में भारी तबाही का एक बड़ा कारण वहां की इमारतों का भूकंपरोधी न होना था। ठीक इसी तरह, दिल्ली-एनसीआर और देश के अन्य संवेदनशील शहरों में अधिकांश निर्माण अनियोजित हैं। यदि भारत में ऐसा भूकंप आता है, तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। भूकंपीय संवेदनशीलतारू नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, भारत के 29 प्रमुख शहर उच्च भूकंप जोखिम वाले क्षेत्रों में स्थित हैं।
प्रकृति में होने वाले निरंतर परिवर्तन जिन्हें हम जलवायु परिवर्तन भी कहते हैं लगातार किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा की चेतावनी दे रहा है लेकिन हम कागजी कार्यवाहियों में व्यस्त हैं। न तो गगनचुंबी इमारतों की ठीक से जांच होती है कि वे भूकंपरोधी हैं या नहीं और न भूकंप के समय सुरक्षित रहने का उपाय आमजन को सिखाया जाता है। यह कटु सत्य है कि जिन शहरों में इमारतों के आग से बचाव के उपाय की ही जांच नहीं की जाती है वहां प्राकृतिक आपदा से बचाव कहां सिखाया जाएगा? अब खुद आमजन को प्राकृतिक आपदा से बचना सीखना होगा जबकि यह आपदाप प्रबंधन तथा जिला प्रशासनों का दायित्व है।                                -----------------------
(दैनिक, सागर दिनकर में 01.07.2026 को प्रकाशित) 
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