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My Editorials - Dr Sharad Singh

Thursday, June 4, 2026

बतकाव बिन्ना की | जे छुटकुल नेता हरें औ अर्जुन के तीर | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह | बुंदेली कॉलम

बतकाव बिन्ना की  
जे छुटकुल नेता हरें औ अर्जुन के तीर 
- डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
       जा राजनीति बी गजबई की चीज आए। जोन की लाग लग गई बा सातमें आसमान पे औ जोन की ने लगी बा कऊं को नईं। चार दिनां से भैया औ भौजी बायरे गए सो उनसे बतकाव ने हो पा रई, बाकी असल तो आप ओरें हो जोन से जी भर के बतकाव करी जा सकत आए। का आए के जब कोऊ बड़ो चुनाव जीत जात आए तो ऊके गुट के छुटभैया हरें ऐसे उचकत फिरत आएं मनो सगरे तीर उनईं ने चलाए नए होंए। बे इतरान लगत आएं। कछू के कछू बकन लगत आएं। जे बरहमेस चलत आ रओ। जेई टाईप की दो किसां आएं महाभारत वारे अर्जुन औ भीम की। सो, पैले सुनों आ ओरें अर्जुन की किसां।
का भओ के जबे महाभारत की लड़ाई खतम भई तो पांडव हरन खों राज मिल गओ। एक दिनां अर्जुन ने दरबार में कई के ‘‘हम सबसे बड़े तीरंदाज आएं। जो हमने अपने तीर से कर्ण खों ने मारो होतो तो आज कओ दुर्योधन हरें इते बैठे राज करत दिखाते। बा हमई हते जोन ने भीष्मपितामह जू के लाने अपने तीरन से बिछौना सो बना दओ रओ। औ हमई हते जोन ने अपने तीर से धरती खों फाड़ के भीष्मपितामह जू को पानी पिलाओ रओ।’’
उते जोन चमचा टाईप के दरबारी हते बे अर्जुन की जा बात सुन के उनके जैकारे लगाऊंन लगे। जा देख के किसन भगवान खों अच्छो नई लगो। उन्ने अर्जुन से कई के ‘‘बा सब तो ठीक आए, मनो तुमें ऐसो बखान नईं करो चाइए। सब कछू तुमाओ करो भओ नइयां।’’
जा सुन के अर्जुन खों लगो के किसन भगवान हमाए सारथी बने रए, जेई से अपनी तारीफ ने सुन के इने बुरौ लग रओ आए। सो बा बोलो के ‘‘आप सबई जान लेओ के हमाए रथ को हांकबे वारे जे किसन जू रए जेई से हम सई-सई तीर चला पाए।’’
ऊकी बात सुन के किसन भगवान समझ गए के जा अर्जुन ऐसे ने मानहे, ईकी आंखें खोलनई परहें।
कछू नईं! किसन भगवान ने घूमबे को प्रोगराम बनाओ। बे पाचों पांडो हरों खों ले के चल परे। एक जांगा पे पतरी सी नदी परी। ऊमें पानी बी कमई रओ। अर्जुन ने अपनों रथ बा नदी में उतार दओ के नदी पार करी जा सके। सबरे भैयन को रथ नदी पार पौंच गए मनो अर्जुन को रथ बीच नदी में पौंच के धसन लगो। अर्जंन ने भौतई कोसिस करी पर रथ को धंसबो ने थमो। अब अर्जुन तनक घबड़ानों। बा रथ से उतर के रथ को चका उठाबे की कोसिस करन लगो। पर कछू फरक ने परो। तब ऊने किसन भगवान से कई के ‘‘आप रथ पे बैठे आओ, जेई से जो धंसत जा रओ आए। अब तनक उतर आओ।’’
किसन भगवान अर्जंन के कए पे रथ से उतर गए। उनके उतरतई सात रथ के चका औ तेजी से धंसन लगे। अर्जंुन रथ के चका निकारबे के लाने जित्तो जोर लगातो, उत्तई बे धंसन लगते। अर्जंन थक गओ। तब ऊने किसन भगवान से पूछी के ‘‘जो सब का हो रओ? सबके रथ कढ़ गए, मनो मोरो रथ बीता भर पानी बारी नदी में बूड़त जा रओ। हमें तो कछू समझ में नईं आ रओ। हम उतर गए, आप उतर गए रथ पे कोनऊं ने बचो फेर बी रथ फंसो डरो। मनो चुल्लू भर पानी में डूब के मरो चात होए। कछू समझ नईे आ रई के जे का लीला आए?’’
‘‘बात जे आए अर्जुन के तुमा जे रथ खों ने तो हमने सम्हारो रओ और ने तो तुमने। ईको सम्हारबे वारो भौतई वजनदारी वारो आए। औ अबे उन्हई की वजनदारी के कारन तुमाओ रथ धंसो जा रओ।’’ किसन भगवान ने समझाई।
‘‘सो को आ बे? जिनके कारन हमाए रथ की जे दसा भई जा रई।’’ अर्जुन ने पूछा।
‘‘तनक इते आओ औ देखो को आ तुमाए रथ पे?’’ किसन भगवान बोले।
‘‘को आ?’’ कैत भए अर्जुन ने ऊ तरफी देखी जी तरफी किसन भगवान देख रए हते।
‘‘उते का दिखा रओ? उते तो पतरो सो झंडा लगो आए। उते तो एक ठंइयां बंदरा लौं नइयां।’’ अर्जुन बमकत भओ बोलो।
जेसई अर्जुन ने इत्तो बोलो के बा पतरो सो झंडा जोर से हलो औ ऊमें से हनुमान जू निकरे औ अर्जुन से बोले के ऐसो कै के तुमने ठीक नईं करो।’’
फेर बे गायब हो गए। जा देख-सुन के अर्जुन घबड़ानों।
‘‘जे हनुमान जू इते का कर रए हते? औ अब कां चले गए? अरे, जे हमाओ रथ तो ऊपरे निकर आओ।’’ कैत भओ अर्जुन थर-थर कांपन लगो।
‘‘अर्जुन भैया, तुम आओ मूरख। अरे हनुमान जू तो पूरे जुद्ध के टेम पे अपन दोई के संगे रए। तुमाए रथ खों बेई तो दाबे रए ने तो कर्ण के तीरन की आंधी में तुमाओ रथ उड़ गओ होतो औ तुम धूरा चाट रए होते। हनुमान जू तुमाए रथ के झंडा पे सवार रए आए जेई से तुमाओ रथ सई-सई चलत रओ। जेई से तुम जीत पाए।’’ किसन भगवान ने असल बात बताई। फेर बोले के तुमने बंदरा वारी बात बोल के उने नाराज कर दओ आए। सो लौट के चलबी तो उनसे माफी मंगा लइयो।’’
जा सुन के अर्जुन रोन लगो औ बोलो के ‘‘हमाओ दिमाग चल गओ रओ। हमें घमंड आ गओ रओ। हम आप से माफी मांगत आएं औ संगे हनुमान जू के सोई पांस पकर लेबी।’’ अर्जुन बोलो।
‘‘तुमें कछू करबे की जरूरत नइयां, बस इत्तई करो के जुद्ध जीतबे पे घमंड ने करियो। घमंड को फल करओ होत आए।’’ किसन भगवान बोले।
अर्जुन खो अपनी गलती समझ में आ गई औ ऊने घमंड करबो छोड़ दओ। मनो आजकाल के छुटकुल नेता हरो के समझ के लाने कोनऊं ने तो किसन भगवान आएं औ ने तो हनुमान जू। सो बे तो इतरातई रैंहें। संगे कछू बी बकत रैंहे।
रई दूसरी किसां की बात, बोई भीम वारी तो सो बा अगली बेर सुनाबी। ने तो दोई गड्मड् हो जाहे।
बाकी बतकाव हती सो बढ़ी गई, हड़ियां हती सो चढ़ा गई। अब अगले हप्ता करबी बतकाव तब तक लौं जेई की जुगाली करो। मनो सोचियो जरूर के कोनऊं बी राजनीतिक पार्टी के छुटुकुल नेता हरें बकर-बकर कर के अपनी पार्टी खों कित्तों नुकसान पौंचात आएं? सो इनपे लगाम कैसे लग सकत आए?      
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बुंदेली कॉलम | बतकाव बिन्ना की | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | प्रवीण प्रभात
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