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My Editorials - Dr Sharad Singh

Thursday, August 20, 2026

बतकाव बिन्ना की | काकरोच सोई तभईं होत आएं जो घरे गंदगी मच जाए | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह | बुंदेली कॉलम

बतकाव बिन्ना की
काकरोच सोई तभईं होत आएं जो घरे गंदगी मच जाए 
- डॉ. (सुश्री) शरद सिंह


भैयाजी के इते तो मनो गदर मची हती। भैयाजी हाथ में दवा छिरकवे को स्प्रे लए हते और भौजी अपने हाथ में चप्पल ले के ठाड़ी हतीं।
‘‘जो का हो रओ भैयाजी?’’ मैंने भैयाजी से पूछी।
‘‘अरे, घरे मुतके काकरोच हो गए। जिते देखो उतई से मूंड़ निकार के झांकन लगत आएं।’’ भैयाजी दरवाज़ा की दरार में दवा छिरकत भए बोले। इत्तई में बा दरार से एक काकरोच बिलबिलात भओ बायरे निकरो। भौजी पे आव देखी ने ताव औ अपनी हाथ में लई चप्पल से चटाक दीनां ऊं काकरोच खों दे मारो। बा बिचारो उतई चपट गओ। हो गओ ऊको नाम नाम सत्त!
‘‘जो का करो भौजी? ऐसे काए मार दओ ऊको?’’ मैंने भौजी से पूछी।
‘‘काए ने मारो जाए? जे बिमारियन की जड़ आएं।’’ भौजी अपनी सफलता पे मुस्कुरात भईं बोलीं।
‘‘बा तो ठीक आए, पर भैयाजी तो सोई दवा छिरक रए। दवा से ई तो बा मर जातो।’’ मैंने भौजी से कई।
‘‘अरे जा कओ के हमने ऊको झट्टई मुक्ति दोआ दई, ने तो कछू देर तो बा छटपटात रैतो।’’ भौजी मुस्कात भईं बोलीं।
‘‘मनो भौजी आपकी जा हरकत कऊं काकरोच पार्टी वारन खों पता पर गई तो बे भौतई नाराज हुइएं।’’ मैंने भौजी को तनक डराओ।
‘‘बे काए खों नाराज हुइएं? हमने तो असली काकरोच मारो, बे तो नकली वारे ठैरे।’’ भौजी बोलीं।
‘‘अब चाए नकली होंए औ चाए असली, पर नांव तो धरे आएं काकरोच पार्टी। बा बी राजनीति वारी पार्टी। औ जां राजनीति घुसी उते दोंदरा मचत देर नई लगत। कओ कोऊ आपको ट््रोल करन लगे।’’ मैंने कई।
‘‘सो नांव धरे से का हुइए? का बे असली वारे काकरोच हो जैहैं का?’’ भौजी निष्फिकर भाव से बोलीं।
‘‘फेर बी!’’ मैंने कई।
‘‘फेर बी का? जे ठैरे घिनऊं से कीरा औ बा ठैरे आजकाल के ज्वान। उने जो पुसाओ बा उन्ने नांव धर लओ।’’ भौजी बोलीं।
‘‘मनो उनें कोऊ पसंद नई कर रओ।’’ मैंने कई।
‘‘ने करे, ऊसे का हुइए? उने जोन करने सो करहें।’’ भौजी बोलीं।
‘‘उते जंतर-मंतर में नईं देखो रओ का के बा काकरोच वारन ने कैसी दोंदरा मचाई हती?’’ अब के भैयाजी ने मोसे पूछी।
‘‘काए नईं देखी? जोन टीवी वारन ने ने दिखाई बा बी सोसल मीडिया वारन ने दिखा दई रई। औ सई कई जाए तो उन ओरन से जेन जी वारों खों दम मिलत रई।’’ मैंने भैयाजी से कई।
‘‘जे बात! जेई तो हम कए रए के बे ओरें ज्वान ठैरे। औ उन्ने नांव ऊंसई नईं धरो रओ, बा का आए के हमने कऊं पढ़ो रओ के कोऊ सयानपत्ती वारे ने बेरोजगारन खों काकरोच कए दओ रओ। बस, ओई से इन ओरन खों सूझी औ इन्ने काकरोच पार्टी नांव धर लओ।’’ भौजी बोलीं।
मोए भौजी की नालेज पे बड़ो प्राउड फील भओ।
‘‘भौजी, आप तो बड़ी अपडेट होत जा रईं।’’मैंने भौजी की तारीफ करी।
‘‘बा जो कंगना घांईं लुगाइयां भक्ति दिखाने के लाने बात बेबात फुदक रईं तो हम ओरन खों तो अपडेट भओ ई चाइए।’’ भौजी बोलीं।
‘‘उनकी फुदकवे की ने कओ भौजी, बे अपनी माननीय सांसद आएं।’’ मैंने भौजी से कई।
‘‘सो का, ईसे का हो गओ? उने तो एकई जने दिखा रओ। काए से बोई एक ठो खों गरिया-गरिया के अपनी भक्ति दिखाई जा सकत आए।’’ भौजी बोलीं।
‘‘तुम ओरें बी, कां की राजनीति की बतकाव ले बैठीं? अपन ओरन के बतकाव करे से कछू नईं भओ जा रओ।’’ भैयाजी बोले।
‘‘ने होए, का कछू होए जेई के लाने बतकाव करी जात आए?’’ भौजी भैयाजी से बोलीं। उने भैयाजी को ऐसो कैबो ने पुसाओ।
‘‘अब तुम काए काकरोच बनी जा रईं? तनक गम्म खाओ।’’ भैयाजी भौजी से बोले।
‘‘हम काए खों काकरोच बनहें? जो हमें कछू बनने हुइए तो हम जेन-जी बनहें, नें तो अल्फा-जी बनहें।’’ भौजी बोलीं।
‘‘ई उम्मर में जेन-जी?’’ भैयाजी भौजी को मजाक उड़ात भए बोले।
‘‘काए? जेन-जी खों आप उम्मर से जेई लाने जोर रए के बे सबरे पढ़ाई की उमर वारे मोड़ा-मोड़ी आएं। पर आप जे ने भूलो के उनके संगे उनके मताई-बाप सोई उते पौंच गए रए। सो का हम उने सपोर्ट कर के जेन-जी नईं कहा सकत?’’ भौजी बोलीं।
भौजी के जे तेवर देख के मोए भारी अचरज भओ। काए से के जंतर-मंतर को मामलो निपटे तो अब मुतको टेम हो गओ। मनो ऐसो लग रओ हतो के भौजी पे ऊको गहरो असर परो। तभईं तो बे जेन-जी होबे की बात कर रईं।
‘‘भौजी, मोए आप जेन-जी से कछू ज्यादई प्रभावित दिखा रईं। मोए नईं पतो रओ के उनको आप पे इत्तो गहरो असर परहे।’’ मैंने भौजी से कई।
‘‘काए हमाए पे परो असर भर तुम ओरन खों दिखा रओ औ उन ओरन पे परो असर नईं दिखा रओ जोन पैले गरियात फिरे औ फेर जेन-जी के जीततई साथ उने काकरोच से अलग बोल के उनकी जयकारे करत फिर रए।’’ भौजी तुरतईं बोलीं।
‘‘बात तो आप सई कए रईं भौजी! मोए का, खुद जेन-जी वारों को पतो ने रओ हुइए के एक दिनां उनईं खों तरीफ की जयमाल पहनाई जान लगहे।’’ मैंने भौजी से कई।
‘‘जेई तो राजनीति आए बिन्ना! राजनीति की थारी में गोल वारे भटईं-भटा रैत आएं। तनक में इते लुढ़के, तनक में उते लुढ़के। औ जोन लुढ़वो जानत आए बोई सफल रैत आए।’’ अब की भैयाजी मोसे बोले।
‘‘सई में भैयाजी, अपन ओरन खों लुढ़कवो ने आओ।’’ मैंने तनक दुखी होत भए कई।
‘‘अपन पब्लिक आएं बिन्ना! पैले तो अपन लुढ़कवो कभऊं सीख नईं सकत, औ दूसरो के जो सीख बी लें तो कां लुढ़कहें? अपन खों तो कोऊ तरफी जाओ कटनेई परहे।’’ भैयाजी ने बड़ो गंभीर उत्तर दओ।
‘‘ठीक कै रए भैयाजी! पर एक बात तो समझबे वारी आए के जे जो काकरोच वारे आएं उन्ने बड़ो सोच के जे नांव धरो। काए से काकरोच सोई तभई होत आएं जो घरे गंदगी मच जाए। राजनीति में काकरोच के पनपबे से समझ जाओ चाइए के ब्यवस्था में भौतई गंदगी मच गई आए।’’ मैंने कई।
‘‘जेई तो बात आए बिन्ना! ने पेपर लीक होतो औ ने काकरोच वारे मूंड उठाउते। बे तो मनो जताओ चात आएं के जो आप हमें नईं देखो चात हो तो जा ब्यवस्था की गंदगी साफ कर लेओ।’’ भौजी बोलीं। 
‘‘सई कई भौजी! ब्यवस्था में तो कुल्ल गदर मची आए। कऊं फोकट के पइसा बांटे जा रए तो कऊं एकई चीज पे चार दार टैक्स ले के खून चूसो जा रओ। ऊपे बी अपने एमपी में तो चाए डीजल-पेट््रोल होए, चाए चूला की गैस, दूसरे प्रदेसों से ज्यादई रैत आए।’’ मैंने कई।
‘‘जेई लाने तो अपने एमपी के लाने स्लोगन बनाओ गओ रओ के -‘एमपी अजब है,गजब है’। बा स्लोगन बनाबे वारो भौतई बुद्धिमान रओ। भले ऊने पयग्टन के लाने जे लिखो, मनो होत सबरी दसा पे फिट आए।’’ भैयाजी हंसत भए बोले।
इत्ते में एक काकरोच औ दरार से निकर आओ औ भौजी ने ऊको बी अपनी चप्पल से तिया-पांचा कर दओ।
सो, बे ओरे हो गए असली वारे काकरोच मारबे में बिजी औ मैंने अपनी दुकान उते से बढ़ा लई ने तो बा स्प्रे की बदबू से मोरो मूंड़ चकरान लगतो। 
ऐई साथ बतकाव हती सो बढ़ा गई, हंड़ियां हती सो चढ़ा गई। अब अगले हफ्ता करबी बतकाव, तब लों जुगाली करो जेई की। मनो सोचियो जरूर ई बारे में के जो ब्यवस्था सुदर जाए तो काकरोच घांईं पार्टी रए पाहें? पर ईके पैले जे साई सोचने परहे के का सच्ची में ब्यवस्था सुदर पाहे?   
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बुंदेली कॉलम | बतकाव बिन्ना की | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | प्रवीण प्रभात
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