बतकाव बिन्ना की | कछू जने बरहमेस दिलों में रैत आएं | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह | बुंदेली कॉलम
बतकाव बिन्ना की
कछू जने बरहमेस दिलों में रैत आएं - डाॅ. (सुश्री) शरद सिंह
“काय भौजी का हो गओ? उदासी-सी दिखा रईं।” मैंने भौजी से पूछी।
‘‘हऔ, जी अच्छो-सो नईं लग रओ।’’ भौजी बोलीं।
‘‘ठंड-मंड लग गई का?’’ मैंने फेर के पूछी।
‘‘नईं ठंड तो नईं लगी, मनो ठंड बढ़ गई कहानी। आज सो सील लहर चल रई।’’ भौजी ऊंसई मरी-मरी सी बोलीं।
‘‘आपकी तबीयत ठीक नई लग रई। कछू दवा-दारू ला देवें?’’ मैंने भौजी से पूछी।
‘‘नईं दवाई की जरूरत नइयां औ दारू कोनऊं ई घरे पियत नइयां।’’ पांछू से भैयाजी की आवाज सुनाई परी।
मैंने मुड़ के देखी। भैयाजी कऊं से चले आ रए हते।
‘‘आप कां चले गए रए? इते भौजी कित्ती उदासी बैठीं। कऊं इनकी तबीयत तो नईं बिगर गईं?’’ मैंने भैयाजी से गई।
‘‘ने कऊं! बस, इतई लौं गए हते मोंमफली लेबे के लाने।’’ भैयाजी बोले।
‘‘जे कोन सो टेम आए मोंमफली खाबे को? मोंमफली सो संझा खों अच्छी लगत आए।’’ मैंने कई।
‘‘जे लेओ! इनकी सुनो! मोंमफली खाबे को बी भला कोनऊं टेम होत आए? बा तो जब मन करे सो मसक लेओ।’’ कैत भए भैयाजी ने मोंमफली को पुड़ा खोलो औ उतई एक स्टूल पे फैला दओ।
‘‘लेओ चलो खाओ।’’ भैयाजी बोले।
‘‘हऔ आप खों तो बस खाबे की परी रैत आए। जे नईं देखत के कोऊ खों जी कैसो हो रओ।’’ भौजी तुनकत भईं बोलीं।
‘‘अब हम का करें ई में? हम तो कै रए के तुम सोई अपनो जी सम्हारो।’’ भैयाजी ने भौजी से कई औ फेर मोसे कैन लगे,‘‘तुमई बताओ बिन्ना के जियत-मरत पे भला कोन को बस आए?’’
‘‘काए का हो गओ?’’ मैंने पूछी।
‘‘तुमाई भौजी धर्मेन्द्र जू की बड़ी फैन रईं, सो उनके जाबे से जे भौतई दुखी आएं। अब हम सोई फैन रए, आज भी फैन आएं, मनो हमें बी दुख हो रओ के बे अब नई रए, पर ऐसे जी दुखाबे से का हुइए? जाने सो सबई खों एक ने एक दिन आए। उनको बी टेम आ गओ रओ। जा तो जे सोचो के कछू बुरौ में बी कछू अच्छाई होत आए। बे पैली बेर अस्पताल में भरती भए सो कोनऊं ने गलत खबर उड़ा दई के बे चल बसे। सबई खों झटका सो लगो। सबई ने भौतई दुख जताओ। फेर खबर मिली के बे तो जिन्दा आएं। सबई ने झूठी खबर वारन खों जी भर के गरियाओ। मनों ईको दूसरो पहलू सोई देखों जाए सो पतो परहे के धर्मेन्द्र जू खों अपने जीयत में एक दार फेर के पता पर गई हुइए के उनके चाउने वारे आज बी उने कित्तो जबरदस्त चाऊत आएं। उने जे जान के अच्छो बी लगो हुइए। ने तो चाए कित्तो भी बड़ो फिलम वारो होए सबके भाग ऐसे नईं होत के परदे से रिटायर होबे के बाद बी उने कोऊ याद रखे औ इत्तो चाहे, जा कम ई होत आए।’’ भैयाजी बोले।
‘‘बात सो आप सांची कै रए। बाकी चैनल वारों खों तनक जांच लओ चाइए रओ। बाकी जा आपने सई कई के कोऊ-कोऊ ऐसो भाग वारो होत आए जोन को बाद में बी ऊके चाउने वारे पूछत रएं। न जाने कितेक हीरो-हिरोईन आज कां जी खा रए, के मर खप गए पतो ई नईयां। कोऊ-कोऊ को तो अखीर समै भौत बुरौ रओ। ‘दस्तक’ जैसी फिलिम से हिट भईं औ फेर मुतकी फिल्में करीं बा रेहाना सुल्तान बड़े बुरए दिन गुजार रईं। पर की साल खबर छपी रई के उनके दिल को कोनऊं इलाज होने रओ मगर उनके पास पइसा ना हतो, सो तब जावेद अख्तर ने उनकी पइसा से मदद करी। ने तो एक टेम रओ के उनकी फिलम के लाने लोगन की लेन लगी रैत्ती। औ कओ जात आए के अपने टेम की सबसे बड़ी हिरोईन मीना कुमारी सोई बड़ी गरीबी में मरीं। जोन अस्पताल में बे मरीं उते को बिल देबे जोग पइसा उनके पास ने हतो।’’ मैंने भैयाजी से कई।
‘‘हऔ जा तो हमने सोई पढ़ो रओ। औ एक हती हिरोइन विम्मी। बे ‘हमराज’ फिलम में सुनीलदत्त के संगे आई रईं। औ बी फिलम करी उन्ने। उनकी बी दसा भौत खराब रई। उनके मरे के बाद तो उनकी ठठरी खों हाथ-ठिलिया पे धर के ले जाओ गओ रओ। जब के बे सुपरहिट हिरोइन रईं। ऐसई सी दसा परवीन बाबी की भई रई। बे इत्ती अकेली पड़ गई रईं के उनकी लहास तीन दिनां तक उनके घरे डरी रई औ कोनऊं ने खबरई ने लई।’’ भैयाजी ने बताई।
‘‘जा सब सुन के अच्छो सो नई लगत। काए से के जो का आए के जब कोऊ की मार्केट वैल्यू रए सो ऊको देवी-देवता बना के पूजो औ जबे मार्केट वैल्यू ने रए तो ऊकी खबरई ने लेओ, जो का आए?।’’ मैंने कई।
‘‘जे ई तो दुनिया आए बिन्ना! चढ़त सूरज के संगे सबई ठाड़े रैत आएं औ डूबत सूरज के संगे कोऊ रैनो नईं चात।’’ भैयाजी बोले।
‘‘बड़े पते की बात करी आपने।’’ मैंने भैयाजी से कई।
‘‘जेई सो हम तुमाई भौजी खों समझा रए के धर्मेन्द्र जू अच्छे से रए औ अच्छे से गए। उनके चाउने वारे उने बरहमेस चाऊत रए। जा भौत बड़ी बात आए। औ आगे बी उने कोऊ ने भूल पाहे। सो इत्तो गम्म ने करो। बाकी जे हम मानत आएं के गम्म तो होत आए। हमें तुमें, सबई खों गम्म हो रओ। बाकी हम जे सोई चात आएं के औ हीरो हिराईनों खों सोई पब्लिक को ऐसई प्यार मिलो चाइए। जा भौत बड़ी औ भाग वारी बात आए।’’ भैयाजी बोले।
‘‘हऔ हम सोई समझ रए, मगर का करें जी दुखी सो हो गओ आए।’’भौजी बोलीं।
‘‘तुम तो बिहार में भए चुनाव औ ऊके बाद बोले जा रए बोलन पे ध्यान देओ, तुमाए सबरे दुख दूर हो जैहें। कओ गुस्सा में तुम फनफनान लगो।’’ भैयाजी हंसत भए बोले।
‘बोलन की ने कओ, ऊमें तो अत्तें मचीं। जी के मन में जो आ रओ, बा बोई अल्ल-गल्ल बोलत फिर रओ।’’ भौजी बोलीें।
भौजी को मूड तनक ठीक सो दिखान लगो। बे सोई मोंमफली उठा के चटकान लगीं।
बाकी बतकाव हती सो बढ़ा गई, हंड़िया हती सो चढ़ा गई। अब अगले हफ्ता करबी बतकाव, तब लों जुगाली करो जेई की। मनो सोचियो जरूर के जोन में कछू अच्छो करबे की दम होत आए बे कछू जने बरहमेस दिलों में रैत आएं। सांची कई के नईं?
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