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Monday, June 16, 2025

"कविता के सरोकार" विषय पर संबोधन | मुख्य अतिथि डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पुस्तक चर्चा


कल मैंने विवेकानंद अकादमी में पुस्तक परिचर्चा में मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्ज्वलित किया तथा "कविता के सरोकार" विषय पर अपना संबोधन दिया। - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

Yesterday, as a chief guest I have lit the lamp and address on "the Concerns of poetry" in a book discussion at Vivekanand Academy.


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#bookdiscussion #पुस्तकचर्चा 

Monday, October 14, 2024

प्रगतिशील विचारधारा परंपराओं का परिष्कार करती है - मुख्य अतिथि डॉ (सुश्री) शरद सिंह, महेंद्र फुसकेले स्मृति अलंकरण समारोह 2024

"कुछ लोग भ्रमवश प्रगतिशील विचारधारा को लोककला एवं लोक परंपरा विरोधी मान लेते हैं जबकि प्रगतिशील विचारधारा कला और परंपराओं का विरोध नहीं बल्कि परिष्कार करती है, उनमें नवीन तत्वों एवं विचारों का समावेश कर उसे विस्तार देती है। इसका उदाहरण प्रगतिशील कलाकार समूह यानी पीएजी के रूप में देखा जा सकता है जिसकी स्थापना सूजा, रजा, एमएफ हुसैन और बाकरे जैसे दिग्गज कलाकारों ने की थी। हिंदी साहित्य में प्रगतिशील विचारों के समर्थक रहे नामवर सिंह जो स्व. महेंद्र फुसकेले जी के घनिष्ठ परिचित थे।" अपने यह विचार मुख्य अतिथि के रूप में उद्बोधन देते हुए मैंने यानी आपकी इस मित्र (डॉ सुश्री शरद सिंह) ने व्यक्त किए। 
      ❗️अवसर था कल शाम, 13.10.2024 को प्रगतिशील साहित्यकार महेंद्र कुमार फुसकेले जी के तृतीय पुण्य स्मरण का आयोजन तथा सम्मान समारोह। 
      ❗️स्थानीय सरस्वती पुस्तकालय  एवं वाचनालय में आयोजित इस समारोह में तृतीय "महेंद्र फुसकेले स्मृति अलंकरण" सागर के प्रसिद्ध लोक गायक एवं कवि हरगोविंद विश्व जी को प्रदान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता की नगर के वयोवृद्ध कवि लक्ष्मी नारायण चौरसिया जी ने। विशिष्ट अतिथि थे श्री टीकाराम त्रिपाठी जी। डॉ गजाधर सागर एवं कैलाश तिवारी विकल ने फुसकेले जी पर केंद्रित आलेख पढे। फुसकेले जी की पुत्रवधु कवयित्री श्रीमती नमृता फुसकेले ने हरगोविंद विश्व जी के परिचय का वाचन किया तथा डॉ नलिन निर्मल ने सम्मान पत्र का वाचन किया। 
    ❗️ प्रगतिशील लेखक संघ की सागर इकाई के अंतर्गत आयोजित इस समारोह में  महेंद्र फुसकेले,  प्रेमचंद तथा हरिशंकर परसाई पर केंद्रित तथा श्री मुकेश तिवारी जी द्वारा संपादित एक स्मारिका का विमोचन भी किया गया। 
    ❗️इस समारोह के संकल्पनाकार थे स्व. महेंद्र फुसकेले जी के पुत्र प्रगतिशील लेखक संघ की सागर इकाई के सचिव वरिष्ठ अधिवक्ता एवं  साहित्यकार पेट्रिस फुसकेले जी। आयोजन का कुशल संचालन किया श्रीमती निरंजन जैन जी ने।
    इस अवसर पर श्यामलम अध्यक्ष श्री उमाकांत मिश्र, दैनिक आचरण के संपादक एवं पूर्व विधायक सुनील जैन, पाठकमंच सागर के अध्यक्ष श्री आर के तिवारी, शायर डॉ गजाधर सागर, शायर अशोक मिजाज़, डॉ अनिल जैन गीतकार डॉ श्याममनोहर सीरोठिया, कवि एवं अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ मनीष झा, श्रीसरस्वती पुस्तकालय एवं वाचनालय के सचिव श्री शुकदेव तिवारी, कवि पूरन सिंह राजपूत, कवि वीरेंद्र प्रधान, सुश्री सुमन झुड़ेले, श्रीमती ममता झुड़ेले, श्रीमती ममता भूरिया, श्रीमती अर्चना प्यासी, पत्रकार मनीष दुबे आदि बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित रहे।

छायाचित्र साभार : भाई डॉ. नलिन निर्मल तथा भाई एड. पेट्रिस फुसकेले 🙏
 #डॉसुश्रीशरदसिंह #DrMissSharadSingh #महेंद्रफुसकेलेस्मृतिअलंकरण #महेंद्रफुसकेले @followers @highlight

Monday, March 20, 2023

पं. ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी जन्मजयंती समारोह | मुख्य अतिथि डॉ (सुश्री) शरद सिंह

"कल (19.03.2023) 115 वें जन्म जयंती पर्व पर पण्डित ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी को सागर साहित्यकार संघ ने याद किया। पण्डित श्री ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी के 115 वें जन्म स्मरण दिवस आदर्श संगीत महाविद्यालय सागर से जे जे फाऊँडेशन वा संस्था श्यामलम सागर ने कवि सम्मेलन का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार टीकाराम त्रिपाठी रूद्र ने की तथा मुख्य आतिथ्य सुश्री डा.शरद सिंह का रहा। स्वागत भाषण में साहित्यकार आशीष ज्योतिषी ने दादा ज्योतिषी के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में काव्यपाठ करने वाले कवि सुश्री डा.शरद सिंह, पी आर मलैया,पैट्रिस फुसकेले, देवीसिंह राजपूत, अंबर चतुर्वेदी चिंतक,सुनीला सर्राफ, डा चंचला दवे,नम्रता फुसकेले,मुकेश तिवारी,पुष्पेन्द्र दुबे कुमार सागर, आशीष ज्योतिषी,डा नलिन जैन, टीकाराम त्रिपाठी रूद्र रहे।बेहतरीन गीत,गजल,क्षर छंद वा प्रगतिशील कविताओ की प्रस्तुति देकर कवियो ने ज्योतिषी जो को याद किया। कार्यक्रम का संचालन डा नलिन जैन ने किया तथा कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारो के प्रति आभार श्यामलम अध्यक्ष उमाकांत मिश्र जी ने किया।"
    (- यह समाचार भाई डॉ नलिन जैन की फेसबुक वॉल से साभार 🙏)
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Sunday, March 19, 2023

मुनि क्षमा सागर जी का स्मरण समारोह | मुख्य अतिथि डॉ (सुश्री) शरद सिंह

"मुनि क्षमा सागर की कविताएं समय से संवाद करती हैं। मुनिश्री पूर्णतः आत्मान्वेषी थे।  मुनिश्री ने भारी-भरकम उपदेश नहीं दिए बल्कि अपने अनुभवों से यह बताया कि व्यक्ति किस तरह से आत्मसाक्षात्कार कर सकता है। वे प्रकृति प्रेमी थे इसीलिए उनकी कविताओं में सूर्य, हवा, चिड़ियां बिम्ब के रूप में मौजूद हैं। लेकिन उनकी रचनाओं में प्रकृति के इन तत्वों की उपस्थिति  गहन जीवन दर्शन कराती है। वस्तुतः जिसने मुनि क्षमा सागर की कविताओं में चिड़िया की उपस्थिति के महत्व को समझ लिया मानो उसने मानव जीवन के मूल दर्शन को समझ लिया।" मुख्य अतिथि के रूप में मैंने ये विचार प्रस्तुत किए। 
    अवसर था मुनि क्षमा सागर जी की दो पुस्तकों "आत्मान्वेषी" और "Mind Your Karma" का लोकार्पण तथा उनकी चुनी हुई कविताओं का संग्रह "अपना घर" पर चर्चा समारोह का। 
    यह मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे मुनिश्री से कई बार विभिन्न स्थानों पर भेंट करने का तथा साहित्य चर्चाएं करने का अवसर मिला जैसे सागर में ही अंकुर मंदिर, मोराजी मंदिर, खुरई में, बीना बारह में तथा शाहपुर में उनसे भेंट हुई थी। व्हिच इतने बड़े दार्शनिक थे उतने ही उम्दा साहित्यकार एवं कवि। उनकी कविताओं में चिड़िया की उपस्थिति बहुतायत रही है।  बारे में मैंने कई बार सोचा। चिड़िया ही क्यों? तितली अथवा कोई और पंखोंवाला प्राणी क्यों नहीं? इस चिंतन-मनन किया और मुनिश्री की कविताओं को बार-बार पढ़ा। फिर मुझे समझ में आया कि चिड़िया के रूप में उन्होंने एक अद्भुत बिम्ब तलाशा था। उनकी कविताओं की चिड़िया के मूल में गौरैया है। एक घरेलू पक्षी। जिसे मनुष्यों के बीच रहना है और अपनी अलग दुनिया बसाना है। गौरैया जो बहुत नन्हां, कोमल और असहाय-सा प्रतीत होने वाला सुंदर जीव है, अपनी कर्मठ प्रवृत्ति और लगन से सबको चकित करता रहता है। मुनि क्षमा सागर चिड़िया के बहाने बहुत गहन बातें कही हैं।
       शाहपुर में जब मेरी उनसे अंतिम भेंट हुई थी उस समय वे तपस्या की उस पराकाष्ठा में पहुंच चुके थे जहां उनके लिए बातचीत करना संभव नहीं था। वे कृषकाय हो चुके थे। फिर भी मैं उनसे यह पूछे बिना नहीं रह सकी कि उन्हें कैसा महसूस हो रहा है? मेरे प्रश्न के उत्तर में उन्होंने उस कक्ष के उस रोशनदान की ओर संकेत किया था जहां  एक चिड़िया बैठी थी अर्थात वे स्वयं को एक चिड़िया की भांति महसूस कर रहे थे। 
        आज का यह समारोह पूर्व सांसद दादा श्री लक्ष्मी नारायण यादव के सानिध्य में तथा व्यंग्य विधा के पुरोधा डॉ सुरेश आचार्य की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। समारोह की मुख्य अतिथि थी मैं डॉ (सुश्री) शरद सिंह। डॉ आशुतोष मिश्र एवं श्रीमती निरंजना जैन ने मुनि श्री के काव्य संग्रह पर अपने विशिष्ट वक्तव्य दिए। श्यामलम संस्था तथा पं. ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह का संचालन किया डॉ अमर जैन ने। 
आचरण 20.03.2023⬇️
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