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Sunday, March 15, 2026

साहित्य अकादमी के "स्मरण मुक्तिबोध" में सारस्वत अतिथि डॉ (सुश्री) शरद सिंह

"मुक्तिबोध न तो पूरी तरह  साम्यवादी थे और न वामपंथी, वे मूल रूप से सिर्फ मानवतावादी थे। यह बात उनकी कहानियां "ब्रह्मराक्षस का शिष्य" और "क्लॉड ईथरली" जैसी कहानियां पढ़ने के बाद भली-भांति समझा जा सकता है। मुक्तिबोध की रचनाओं को पुनर्व्याख्यायित किया जाना आवश्यक है।"- बतौर सारस्वत अतिथि मैंने मुक्तिबोध के व्यक्तित्व एवं विचारों पर अपने विचार रखे।
🚩अवसर था "स्मरण मुक्तिबोध" का। जिसकी अध्यक्षता की डॉक्टर हरिशंकर दुबे जी ने।
,🚩हार्दिक आभार मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक आदरणीय डॉ.विकास दवे जी, मुक्तिबोध सृजन पीठ के निदेशक आदरणीय ऋषि कुमार मिश्र जी एवं  श्यामलम संस्था सागर के अध्यक्ष आदरणीय उमाकांत मिश्र जी 🚩🙏🚩
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