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Wednesday, March 26, 2025

'नाट्य संगीत की रचना प्रक्रिया' पर दिव्य रंग एकता वेलफेयर फाउंडेशन की राष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ (सुश्री) शरद सिंह विशिष्ट अतिथि वक्ता

"मनुष्य का संगीत से संबंध उसे समय से ही जुड़ जाता है जब उसे शब्द स्वर या राग का भी ज्ञान नहीं होता यानी शैशवावस्था में मां की लोरी के साथ ही संगीत जीवन में प्रवेश कर जाता है और मां की थपकी प्रथम ताल वाद्य होती है जो सुरताल से मनुष्य के अवचेतन को जोड़ देती है।" बतौर नाट्य समीक्षक मैंने यह भी कहा कि " कुछ नाट्य संस्थाएं छोटे शहरों में मंचन करते समय यह सोचकर लाइट इफेक्ट या साउंड इफेक्ट में लापरवाही कर देती हैं कि वहां छोटी-मोटी कमी को भला कौन समझेगा? जबकि उसी नाटक को जब वे दिल्ली या किसी बड़े शहर के थिएटर में करते हैं तो पूरी तरह से चौकन्ने होकर कि कहीं कोई भूल-चूक न रह जाए। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रही हूं। इस प्रकार की लापरवाही रंगमंच के लिए उचित नहीं है। क्योंकि नाटक चाहे जहां मंचित किया जाए लाइट और साउंड इफेक्ट दोनों उसमें प्रभाव उत्पन्न करने लिए जरूरी होते हैं।" बतौर अतिथि वक्ता मैंने अपने विचार रखे। 
    🚩 अवसर था दिव्य रंग एकता वेलफेयर फाउंडेशन के द्वारा स्व. श्री अशोक गोपीचंद रायकवार जी की स्मृति में  "दिव्य रंग अशोक" का तीन दिवसीय नाट्य समारोह के आरंभ का।  संगोष्ठी का विषय था- “नाट्य संगीत की रचना प्रक्रिया: चर्चा एवं विश्लेषण”।
       🚩कार्यक्रम की अध्यक्षता की दिल्ली से पधारे  स्वतंत्र थिएटर निदेशक, डिजाइनर एवं अभिनेता अवतार साहनी जी ने। मेरे साथी वक्ता थे भोपाल से आईं संगीत नाटक अकादमी अवार्डी अंजना पुरी जी,  रंग विदूषक भोपाल के अजय कुमार जी, नई दिल्ली की नाट्य समीक्षक ममता धवन जी, तथा सागर के रंगकर्मी एवं ईएमआरसी के डायरेक्टर भाई पंकज तिवारी जी।
      🚩संगोष्ठी का संचालन किया डॉ. अश्विनी सागर रायकवार ने। 
     🚩उल्लेखनीय है कि इस आयोजन को करके अपने स्वर्गीय पिताश्री के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का विशिष्ट कार्य किया अग्रज स्व. अशोक गोपीचंद रैकवार जी की  पुत्री अनामिका सागर, पुत्र अश्विनी सागर तथा उनके दामाद आशुतोष बनर्जी ने। यह तीनों भी रंग कर्म से सघनता से जुड़े हुए हैं। तीन दिवसीय समारोह में एक नाटक का निर्देशन स्वयं अनामिका सागर ने किया है वह एक संवेदनशील अभिनेत्री भी है। ... 
...और मेरी प्यारी भतीजी भी 🌹 😊🌹
(26.03.2025)
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Wednesday, December 25, 2024

भाषाई कौशल और रोजगार विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ (सुश्री) शरद सिंह का व्याख्यान

"भाषाई दक्षता जीवन में किसी भी क्षेत्र में सफलता की पहली शर्त है भाषा चाहे जो भी हो उसमें निपुणता एवं परिपक्वता आवश्यक है जिससे संबंधित विषय के बारे में आत्मविश्वास और दक्षता के साथ अपनी बात रखी जा सके। भाषा अभिव्यक्ति और संवाद का माध्यम है और उसमें कौशल रोजगार की सफलता को सुनिश्चित करता है। एक अपढ़ भिखारी भी अपने भाषाई कौशल से आपको पैसे देने को विवश कर देता है। फिर एक पढ़ा लिखा व्यक्ति तो अपने भाषाई कौशल से बहुत उन्नति कर सकता है। यदि आप मातृभाषा के अतिरिक्त एक से अधिक भाषा सीख सकें तो यह और भी अच्छा है।" - बतौर सारस्वत वक्ता आपकी इस मित्र डॉ (सुश्री) शरद सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए।
     अवसर था 24.12.2024 को पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर (म.प्र.) में "कौशल सम्वर्द्धन : स्वरूप एवं संभावनाएं" पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतर्गत भाषण कौशल और रोजगार विषय पर मैंने अपना वक्तव्य दिया। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन सागर विधायक श्री शैलेंद्र जैन जी ने किया। इस आयोजन में खंडवा से डॉ श्रीराम सिंह परिहार, छतरपुर से डॉ बहादुर सिंह परमार, बनारस से डॉक्टर विवेकानंद उपाध्याय के साथ ही सागर स्थित विवेकानंद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजय तिवारी एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री टीकाराम त्रिपाठी जी की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
     यह समूचा आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ सरोज गुप्ता जी के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का बेहतरीन संचालन किया डॉ राना कुंजर सिंह ने।

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