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Friday, May 29, 2026

शायर डॉ बशीर बद्र साहब को विनम्र श्रद्धांजलि - डॉ सुश्री शरद सिंह

अलविदा मेरे पसंदीदा शायर बशीर बद्र साहब ... आप अपनी शायरी में  हमेशा जिंदा रहेंगे 😔
▪️ वर्षों पहले मेरे शहर सागर में ही उनके साथ एक कवि - सम्मेलन मुशायरा पढ़ने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ था... इससे पहले वह मुझे सुखद आश्चर्य में डाल चुके थे, हुआ यूं था कि तत्कालीन बहुचर्चित साहित्यिक पत्रिका "सापेक्ष"  के लिए विजय वाते जी ने बशीर बद्र साहब से एक  इंटरव्यू लिया था जिसमें उन्होंने शायरी में नएपन का उदाहरण देते हुए मेरे एक शेर को उद्धृत किया था। जब वह विशेषांक मेरे हाथों में आया तो अगर सीधे-सीधे कहा जाए तो मैं बेहोश होते-होते बची क्योंकि यह मेरे लिए अत्यंत सुखद आश्चर्य था कि जिस शायर की शायरी को मैं बहुत पसंद करती हूं और जिन्हें मैं एक उम्दा शायर मानती हूं उन्होंने मेरे शायरी को रेखांकित किया यह उनकी सहजता और शायरी के प्रति समर्पण था कि जिन्होंने सिर्फ़ शायरी को पहचाना, पहचान के आधार पर शायरी को नहीं... यही उनका बड़प्पन था जिसने मेरे दिल को छू लिया था...
▪️ अपने इंटरव्यू में डॉ बशीर बद्र साहब ने कहा था -
"कुछ लोग ग़ज़ल की पुरानी परम्पराओं और नई बदली हुई जुबान को खूबसूरती से मिला कर नई ग़ज़ल लिख रहे हैं। इस तरह नई गज़ल की नई रूह सामने आ रही है। मसलन, शरद सिंह का ये शेर -
     फिर हवा के हाथ में हैं शीत के नेजे नुकीले,
     फट गया है ताप का अस्तर, चलो, चलना कहां है ?"
- डॉ. बशीर बद्र, सापेक्ष-32, ग़ज़ल विशेषांक
(यह विशेषांक आज भी मेरे पास सुरक्षित है एक अविस्मरणीय कृति के रूप में)
#बशीरबद्र #अलविदाडॉबशीरबद्र #mytribute #DrBashirBadr 
#डॉसुश्रीशरदसिंह #DrMissSharadSingh

Thursday, February 21, 2019

नामवर सिंह ने अपने मानक स्वयं गढ़े - डॉ शरद सिंह

Tribute to Nambar Singh by Dr Sharad Singh
            विनम्र श्रद्धांजलि 🙏
"श्रद्धेय नामवर सिंह वे विरले साहित्यालोचक थे जिन्होंने अपना मानक स्वयं गढ़ा। उन्होंने  दूसरी परंपरा की खोज करके हिन्दी साहित्य को एक नई दिशा दी। नामवर जी का जाना हिन्दी साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। विनम्र श्रद्धांजलि !" - डॉ शरद सिंह

"आलोचकों की प्रथम पंक्ति में जिनका नाम आता है उनमें से एक हैं नामवर सिंह। हिन्दी साहित्य में नामवर सिंह होने का अर्थ क्या है? इस पर बड़ी सजगता से कलम चलाई है सदानंद शाही ने।"
- ‘‘सामयिक सरस्वती’’ पत्रिका के जुलाई-सितम्बर 2016 अंक में मेरे संपादकीय से...डॉ शरद सिंह

"वरिष्ठ आलोचक नामवर सिंह ने टिप्पणी की थी कि ‘‘अपनी आलोचनात्मक क्षमता के द्वारा मुक्तिबोध ने प्रमाणित कर दिया कि कोई भी चीज तभी स्पष्ट होती है जब कम-से-कम एक ईमानदार व्यक्ति मौजूद हो।’’" - ‘‘सामयिक सरस्वती’’ पत्रिका के अप्रैल-जून 2017 अंक में मेरे संपादकीय से...डॉ शरद सिंह

Thursday, December 27, 2018

साहित्यकार रमेश दुबे की पांचवीं पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि - डॉ शरद सिंह

Tribute  by Dr Sharad Singh to Late Ramesh Dutt Dubey on his Fifth Death Anniversary
सागर के दिवंगत साहित्यकार रमेश दुबे की पांचवीं पुण्यतिथि दिनांक 23.12.2018 पर श्यामलम् संस्था द्वारा जे.जे. इंस्टीट्यूट, सिविल लाइन्स, सागर में आयोजित कार्यक्रम में सागर नगर के हम सभी साहित्यकारों ने स्व. दुबे जी का पुण्य स्मरण किया। "जब कोई साहित्यकार दुनिया से विदा लेता है तो वह अपने पीछे एक लेखकीय परम्परा छोड़ जाता है..." - डॉ शरद सिंह
Tribute  by Dr Sharad Singh to Late Ramesh Dutt Dubey on his Fifth Death Anniversary

Tribute  by Dr Varsha Singh to Late Ramesh Dutt Dubey on his Fifth Death Anniversary

Tribute  by Dr Sharad Singh to Late Ramesh Dutt Dubey on his Fifth Death Anniversary

Tribute  by Dr Sharad Singh to Late Ramesh Dutt Dubey on his Fifth Death Anniversary

Tribute  by Dr Sharad Singh to Late Ramesh Dutt Dubey on his Fifth Death Anniversary

Tribute  by Dr Sharad Singh to Late Ramesh Dutt Dubey on his Fifth Death Anniversary

Tribute  by Dr Sharad Singh to Late Ramesh Dutt Dubey on his Fifth Death Anniversary

Tribute  by Dr Sharad Singh to Late Ramesh Dutt Dubey on his Fifth Death Anniversary

Tribute  by Dr Sharad Singh to Late Ramesh Dutt Dubey on his Fifth Death Anniversary
 
Tribute  by Dr Sharad Singh to Late Ramesh Dutt Dubey on his Fifth Death Anniversary