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Saturday, August 15, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | उते नमक कानून तोड़ो गओ औ इते गानों गा के साथ दओ गओ रओ | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टाॅपिक एक्सपर्ट 🇮🇳

उते नमक कानून तोड़ो गओ औ  इते गानों गा के साथ दओ गओ रओ 🇮🇳

- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

अंग्रेजन की गुलामी से आजादी के लाने सागर में अपने सागर वारन ने बी कोनऊं कसर ने छोड़ी रई। सबसे पैले तो बात करी जाए 1842 की जबे बुंदेलखंड को पैलो संग्राम भओ। मधुकर शाह बुंदेला जू ने अंग्रेजन खों छठीं को दूद याद करा दओ तो। बा तो ठठरी के बंधे गद्दार ने उनें सोऊत में पकरवा दओ। मधुकर शाह बुंदेला जू खों इतई सागर की जेल में रखो गओ औ इतई उने फांसी दई गई। जे खबर जेसईं सागर वारों खों लगी, बे कसम खान लगे के अब तो अंग्रेजन खों भगा के रैबी। सो, जब-जब बायरे कछू कोसिस करी गई तो सागर वारों ने उनको साथ दओ। भौत जने जेल गए, गोलियां औ लट्ठ खाए। राजाराम बोहरे, सेठ प्यारेलाल जैन शाहगढ़ वारे, साबूलाल जू घांई मुतके रए जोन ने आगूं आ के लड़ाई लरी। बलेह गांव के तो सबई जने आजादी के लाने कूंद परे हते। 
     कओ जात आए के गांधी जू सोई सागर आए रए। ऊंसई बी जबे गांधी जू ने उते दांडी में नमक कानून तोड़ो, सो ऊ टेम पे इते सागर में गाने गा-गा के लुगाइन लौं ने साथ दओ रओ-
सुन लेओ जालिम हमें सोई 
नमक तोड़बे  जाने है
गांधी जू को संग निभाने है,
अंग्रेजन खों मार भगाने हैं....

एसईं एक औ गानो गाओ जात रओ -
मैंहगो नमक हमें नई खाने
अंग्रेजन को सबक सिखाने
आए हमाए ऐंगर गांधी
जेई बात हमखों समझाने…
 सो, का बच्चा, का बुड्ढा औ का लुगाइयां सबई ने गुलामी से आजादी पाबे के लानें अपनी जान लड़ा दई रई। तब कऊं जा के जा आजादी मिली। सो ई आजादी को मोल समझो चाइए औ ईको सम्मान करो चाइए। सो सबई जने याद राखियो के हमें अपनी आजादी की इज्जत राखने है, ईको दुरुपयोग नईं करने। सबई खों स्वतंत्रता दिवस की हमाई भौत-भौत बधाई पौंचे!
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Saturday, August 8, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | जे कछू आवारागर्दी बढ़त नईं जा रई अपने ई सहर में? | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टाॅपिक एक्सपर्ट
जे कछू आवारागर्दी बढ़त नईं जा रई अपने ई सहर में?
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
आजकाल तो कऊं कछू घटे ऊकी रपट तो पांछू लिखाई जाती आए, पैले ऊके वीडियो वायरल होन लगत आएं। ऐसईं पिछली एकई हप्ता में हमें सोसल मीडिया पे दो-चार वीडियो देखबे खों मिल गए। एक वीडियो में चार-छै लड़का एक मोड़ा की धुनाई कर रए हते। दूसरी वीडियो में दो मोड़ियां दो-चार मोड़ों से झगर रईं हतीं, वा बी बीच रोड पे। देखत-देखत में मोड़ा हरें मोड़ियन खों लपाड़े मारन लगे। जोई टाईप की एक औ वीडियो हती जीमें एक मोड़ा रोड कनारे एक मोड़ी खों पीट रओ तो। बा सब देख के हमें लगी के अपने ई सागर में जो का हो रओ? मोड़ियां रस्ता चलत पिट रईं! मनो हमें ज्यादा गम्म नईं खाने परो। काए से के दूसरे दिनां हमें अपने इते की बा वीडियो दिखा गई जीमें एक मोड़ी एक चौराए पे दो-तीन मोड़ों के संगे दिखा रई ती औ ऊके एक हात में छोटी सी तलवार घांई एक हथियार दिखा रओ थो। बा मोड़ी हथियार घुमा-घुमा के बतकाव कर रई हती। हमें लगो के अपने सहर में पिटत भईं दुखियारी मोड़ियां भर नोंई, ऐसी बीरंगनाएं सोई आएं जो खुले में हथियार लए मोड़ों के संगे घूम रईं। जा देख के हमें लगो के कछू ज्यादई स्मार्ट नईं होत जा रओ अपनों सहर। औ रई सई कसर पूरी कर देत आएं तला में कुद्दी मार के मरबे वारे। अब आप सोच रए हुइयो के का हम जेई टाईप की वीडियो देखत रैत आएं? सो ऐसो आए के सोसल मिडिया वारे अपने इते के लोकल चैनल वारे जे दिखात रैत आएं। सो दसा पता परत रैत आए। सो, अपने इते के कानून वारन खों बी जे आवारागर्दी पे तनक लगाम लगाओ चाइए। ने तो कोऊ दिनां कछू बड़ो घटहे तो पछतानों परहे। काए ठीक कई न!
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Saturday, July 25, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | तला में कूंदे से कछू हल निकलहे का, जिनगी इत्ती फालतू की नोंई | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली

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तला में कूंदे से कछू हल निकलहे का, जिनगी इत्ती फालतू की नोंई
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
   अभईं चार दिनां पैले हम घूमबे के लाने तनक देर को कारीडोर पे गए रए। ऊ दिनां तनक उमस हती सो कारीडोर पे तला की हवा खा के अच्छो सो लगो। उते रेलिंग पे कछू दूर लौं जाली लगी दिखानी सो बतकाव होन लगी के लोग इते से तला में कूंद-कूंद के अपनी जान देन लगे जेई से जाली लगाने पर रई। कारीडोर से तला को देखबे को मजा खराब हो जाहे। सो, हमने कई के ईसे का, जो इते जाली लगाई जाहे सो कूंदबे वारे उते से कूंद जाहें। कूंदने वारन खों का? मनों बात तो जे आए के जान काए खों दई जाए? जिनगी इत्ती फालतू की आए का? अरे, सबई की जिनगी में कोऊ ने कोऊ दुख पीरा लगी रैत आए। कभऊं-कभऊं ऐसो समै बी आत आए जबें मरबे को जी करन लगत आए। हमाई जिनगी में बी ऐसो समै आओ रओ, कोरोना के टेम पे। मनों हमने सोची के हमाई मताई औ दीदी ने अपनी जिनगी लगा दई हमें खुसी से राखने खों, तो अब उन ओरन के ने रैने पे का हमें सोई मर जाने चाइए? उनके किए-धरे पे पानी फेर दओ चाइए? कभऊं नईं। हमाए ऐसो करे से उनें दुख हुइए, बे जां बी हुइएं। संगे हमने जेबी सोची के जो हमाई घड़ी आ गई होती तो कोरोना से हम सोई निपट गए होते। जो ऊपरवारे ने हमें छोड़ दओ तो कछू सोच के छोड़ी हुइए। औ सई में, हमने जीने की हिम्मत करी तो मुतके लोगन ने हमाओ साथ दओ। सो, खुद को मारबे से कछू नई मिलत। जो खुद पे भरोसो राखो औ जीबे की हिम्मत करो, लोगन से बात करो, सो बा दुख, पीरा औ मुसीबत पांछे छूटत जात आए। अब तनक सोचियो के तुमने तो तला में कुद्दी लगा दई औ मर गए, मनों तुमाए पांछू रै गए मताई,बाप, बैन,भाई तुमाए लानें कित्ते कलपहें? सो, बहादुरी मरबे में नोंईं जीबे में आए। सो तला खों सुसाइड प्वाइंट ने बनाओ औ बहादुरी से जिंदा रओ!
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Saturday, July 18, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | अबे लौं में हमने जोई पाओ के सागर से नोंनो कोनऊं सहर नोंई | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

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अबे लौं में हमने जोई पाओ के सागर से नोंनो कोनऊं सहर नोंई
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
हमाई जे बात पढ़ के, के सागर से नोंनो  कोनऊं सहर नोंई, बायरे वारे सोचहें के ईमें का खास? अपनों सहर सो सबई खों नोंनो लगत आए। औ भीतरे वारे सोचहें के आज जे बर्यान लगीं, ने तो सबसे नोंनो होबे की ऐसी का आए इते? सो, आप सब ओरें तनक सहूरी धरो औ हमाई जे एक्पर्ट राय ध्यान से पढ़त जाओ!
       का आए के अपनों जो सागर सई मायने को सागर आए। ईको लंबो-चौंड़ो इतिहास आए। जबे अपन मानुस हरें मों बोलत ने जानत्ते ऊ टेम पे बी अपने पुरखा इते रैत्ते। ऊ टेम पे इते रैबे वारे अपने पुरखन ने इतई आगी जलाबी सीखी औ इतई फथरा के औजार बनाने सीखे। जबके ऊ टेम पे इते कोनऊं अनवरसिटी ने हती। अब जे ने पूछन लगियो के अनवरसिटी बने के बाद इते का-का आबिष्कार भए। काए से के इते के आबिस्कारन को अनवरसिटी से कोऊ लेबो-देबो कभऊं रहओ नईं। अब का तेल भरे की कुप्पी घांईं कारीडोर की डिजाइन अनवरसिटी वारन ने बनाईं? कभऊं नईं! बाकी जा सब छोड़ो, अपने सागर को करेजा भौत बड़ो आए। इते जोन एक बेर आत आए बा इतई को हो जात आए। इते के लोग सबखों गले लगात आएं। जेई से मुतके अधिकारी रिटायर होबे के टेम पे इतई को ट्रांसफर ले लेत आएं। उने पतो आए के बे जात-जात इते कित्तोई खात-खवाई कर लें, इते कोऊ ने बोलहे। भौतई दयालु औ सहनसील आएं इते के लोग। खैर, कछू नईं, जेई तो खूबी आए इते की। बाकी जे सोई आए के अपने सागर में हिंदू, मुसलमान, जैन, सिख, ईसाई, बौद्ध - मने सबई हिलमिल के रैत आएं। सबरे एक-दूसरे के त्योहार पे खुसियां मनात आएं। इते बृंदाबन बाग आए तो जामा मस्जिद भी आए। इते गौराबाई को जैन मंदिर आए तो सेंट पीटर्स चर्च औ गुरुद्वारा साहिब भी आए। इते करोड़ों की लगत्त से संत रविदास जू को मंदर बी बन रओ। मनें सागर में इत्ती खूबी आएं के बा सबरी आजई नईं गिनाईं जा सकत। सो, जा कॉलम पढ़त रहियो औ खूबी जानत रहियो! राम-राम!
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Tuesday, July 14, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | जो रोडें बरसात के पैले ठीक कर दईं जाएं तो रिपटबे को मजा कैसे मिलहे | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

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जो रोडें बरसात के पैले ठीक कर दईं जाएं तो रिपटबे को मजा कैसे मिलहे
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
      भौत पैले एक फिल्मी गाना बजत्तो के “हम जो रिपट जाएं तो हमें ना उठियो”। भौत दिनां बाद अभईं रेडुवा पे ऊ गाना फेर के सुनाई परो। बा गाना सुनाबे वारे ने बताओ के जो गाना “नमक हलाल” फिलम को रओ। बा अमिताभ बच्चन औ स्मिता पाटिल की फिलम रई। बाकी गाना लिखो रओ अनजान साब ने। ई मोसम में जो गाना सुन के हमाए दिमाग की बत्ती जल गई। हमें लगो के गाना लिखबे वारे को नांव भलेई “अनजान” रओ मनों बे कभऊं ने कभऊं अपने सागर जरूर आए हुइएं औ उने इते की जानकारी हती। ऊंसई बिट्ठल भाई पटेल जू के संगे बालीबुड के लोग सागर आत-जात रैत्ते। एकाध दफा अनजान साब सोई आ गए हुइएं। हो सकत के कछू लोगन को ई बारे में पतो होए, मनों हमें तो जो गाना सुन के लगो के आए हुइएं। काए से के रिपटबे वारी रोडें तो इतई सागर में गारंटी से पाई जात आएं। जो सागर सिटी स्मार्ट सिटी बन गई सो ऊसे का? कोऊ अपनी परंपरा औ संस्कार थोड़ेई भुला सकत आए? अब ब्याओ मेंई देख लेओ के प्री-वेडिंग शूट से ले के स्टेज पे दूला-दुलैया को नचबो लौं हो जात आए, मनों ऊ के बाद बी दुलैया की ‘मों दिखाई’ की रसम तो होतई आए। आप सोच रए हुइयो के हम कां से कां पौंच गए, सो बात जे आए के हम जे बताबे की कोसिस कर रए के रिपटा वारी रोडें रखा के प्रसासन परंपरा खों निभा रओ। सो रिपटबे पे बुरौ ने मानियो। तनक सोचो के  जो सहर की सबरी रोडें बरसात के पैले ठीक कर दईं जाएं तो रिपटबे को मजा कैसे मिलहे? सो, अब जोन दिनां आप रिपटो सो प्रसासन खों ने गरियाइयो, बल्कि खुद खों अमिताभ बच्चन औ स्मिता पाटिल समझियो। संगे हड्डी वारे डाक्टरन खों बी याद कर लइयो, काए से के रिपटबे के बाद बेई भली करहें।
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Sunday, July 5, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | झला परन लगे, अब उठ बैठो खतरा वारे घर औ स्कूलों के लाने | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टाॅपिक एक्सपर्ट
झला परन लगे, अब उठ बैठो खतरा वारे घर औ स्कूलों के लाने
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
एक कहनात सबई ने सुनी हुइए ‘आवन लगी बरात, सो ओटन लगे कपास’। मने जबे खबर मिलीं के बरात बस दोरे पे आनेई वारी आए सो घराती-बाराती दोई के लाने हुन्ना-लत्ता बनाबे के लाने सूत-कपास तैयार करन लगे। अब आपई सोचो के का इत्ती झट्टई हुन्ना-लत्ता तैयार हो पाहें? औ का तुमाए हुन्ना-लत्ता के लाने बरात दोरे पे ठाड़ी-ठाड़ी बाट जोहत रैहे? रार सो परहेई। जेई दसा अपने इते उन घरों औ स्कूलों की रैत आएं जोन पुराने पर के गिरबे के जोग हो गए। ने तो जोन रिपेयरिंग मांग रए। सई पूछी जाए तो ऐसे घरों औ स्कूलों खों यां तो गिरा दओ चाइए, ने तो समै रैत में उनकी रिपेयरिंग करा दओ चाइए। मगर अपने इते ऐसो कभऊं होत आए का? राम के नांव लेओ! ऐसो कभऊं नईं होत। इते तो जब झला परन लगत आएं तब परसासन के लाने कोऊ-कोऊ अखबार वारे याद दिलान लगत आएं के मालक झला परन लगे मने बरसात दोरे पे ठाड़ी। अब अपनी आंखन खों खोलके तनक उन ओरें घरों औ स्कूलों खों हेर लेओ जो रग्दा गिरे में गिर सकत आएं। तब कऊं नोटशीट पे चिरइयां बैठत आएं। मुतकी बेर ऐसो हो चुको के रग्दा परे में मने भारी बारिश होत बेरा ऐसे मकान धंसक गए, ने तो उनकी छतें गिर परीं। औ तो औ पर की सालों में जिला अस्पताल की छतें लौं चुअत रईं।
      अबकी साल सोई जेई भओ जा रओ के बरयाबर के झला परबे सुरू भए, बरसात को आबो पक्को हो गओ मनों सई-सई जे नईं पतो के कोन सो घर बरसात में गिरबे जोग आए औ कोन से स्कूलन में छत टपकबे को खतरा आए। मनों अबे बी टेम आए जो तनक फुरती दिखाई जाए सो बड़ो नुसकान से बचो जा सकत आए। काए सई कई के नईं!
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Saturday, June 27, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | डिवाइडर ने भओ टकरौंदा हो गओ, रोजीना दो-चार टकरा रये | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टाॅपिक एक्सपर्ट
डिवाइडर ने भओ टकरौंदा हो गओ, रोजीना दो-चार टकरा रये
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
मकरोनिया से दीनदयाल नगर जाबे वाली रोड के बारे में कछु कैबे जी डरात आए। जे ने समझियो के उते कौनऊं भूत-प्रेत दोंदरा दे रये औ ने जा सोचियो के उते कोनऊं कटर-मटर चलाबे वारे फिर रये । हऔ, ने उते भूत-प्रेत आएं औ ने कटरबाज, ऊ रोड पे तो बड़े-बड़े मॉल, बड़ी-बड़ी होटलें, बड़ो सो सनीमा औ भौत बड़ो सो अस्पताल आए। आप ओरें जो ई रोड पे कम चलत आओ औ बे बायरे वारे जोन ने ई रोड के बारे में सुन तो रखो आए मनों ऊपे से चले नइयां, सबई सोच रए हुइयो के इत्ती नोंनी रोड खों हम डराए वारी काए कै रए? सो भैया औ बैन हरों बात जे आए के ऊ रोड पे जात-आत टेम जोई डर लगत रैत आए के कऊं गाड़ी डिवाइडर पे ने चढ़ जाए। काए से  के चार-पांच बेर तो हम खुदई अपनी सगी आंखन से देख चुके के कैसे देखत-देखत चार चका वारी डिवाइडर पे जा चढ़ी। दो पहिया सोई टकरात देखी। ऐसे टेम पे जा सोच के जी कंपत आए के उनकी जांगा कभऊं अपनी वारी गाड़ी चढ़ गई तो? फेर तो उतई की कोनऊं अस्पताल में डरें दिखाहें।
हमाओ जे डर बेफालतू को नोंई। आप खुदई अखबार उठा के देख लेओ, डिवाइडर से कोऊं ने कोऊं गाड़ी टकराबे की खबर रोजीना जरूर पढ़बे खों मिल जैहे। कभऊं-कभऊं तो तीनेक गाड़ियां टकराबे की खबर मिलत आए। बाकी जे बात सोई सोचबे वारी आए के‌ ऐसे टकरौंदा डिवाइडर की खबर अखबार में छपत आए, मोबाइल में चलत आए, मनों परसासन के जिम्मेवारन खों नईं मिलत का? उते गलत पार्किंग करबे वारन की गाड़ियन में तारे चटकाबे वारे सो खूब‌ घूमत रैत आएं मनों ईपे कोनऊं ध्यान नईं दे रओ के उते डिवाइडर के नांव पे बन गओ टकरौंदा। सो, आप सबई से जेई बिनती आए के जो ऊ तरफी जाइयो सो बच के जाइयो!
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Tuesday, June 23, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | मानसून खों ने कोसों, इते तो ऊंसईं सब काम लेट होत आएं | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टाॅपिक एक्सपर्ट 
मानसून खों ने कोसों, इते तो ऊंसईं सब काम लेट होत आएं
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
परों एक भैयाजी  बजरिया में टकराने। कुल्ल मईना बाद मिले, मनों हालचाल पूछने की जांगा अपने माथे को पसीना पोंछत भए कैन लगे के “जा मानसून ने अच्छो दगा करो, 15 जून लौं आत-आत ऐसो धीमों पर गओ के 25 जून लौं ने आहे। जा तो भौतई गलत बात आए।” 
पसीना मानों हमें सोई चुआ रओ हतो पर हमने उनसे कई के “मानसून खों आप ने कोसों। ईमें मानसून को कोनऊं दोस नईयां।”
“काए ने कोंसो जाए? आते आबे में बा लेट कर रओ के नईं?” भैयाजी बिगड़त भए बोले।
तब हमने उनें समझाओ, “भैयाजी, सई में ईमें ऊको कोनऊं दोस नईयां, बा तो अपने इते की चलन में चल रओ।”
“का मतलब?” भैयाजी ने पूंछी।
“मतलब जे आए भैयाजी के अपने इते मकरोनिया से सदर वारी आरओबी कित्ते साल में बनीं, तनक याद करो? अपने लाखा बंजारा जू की स्टेच्यू ने   कित्तो इंतजार करो अपनों मों दिखाबे खों बा सोई याद कर लेओ। अभईं कछू समै पैले अपने इते सिविल लाइंस की टिरेफिक लाईट कित्ते हप्ता बंद रई तनक याद करियो!” हमने भैयाजी खों गिनवाबो सुरू करो।
“सो, ईंसे मानसून को का लेबोदेबो?” भैयाजी ने मोंसे पूछी।
“बोई तो हम बता रए। तनक गम्म तों खाओ। का आपखों पतो के 46 किमी पाईप लेन बदली जानी आए के जींसे पीबे के लाने साफ पानी मिल सके। पर भओ का आए के 4 माए में खाली 700 मीटर पाईप लेन बदली गई आए। सो, जब इते इत्ती सुस्ती से हरय-हरय काम होत है, सो मानसून सोई सोंचत हुइए के टेम पे पौंच के इते को चलन काए बिगारो जाए!” हमने भैयाजी खों औ अच्छे से समझाई। भैयाजी खों समझ में आ गई औ बे अपनों मूंड़ हिलात भए बढ़ गए। 
मनों हमने सई कई के नईं? जो सई लगे तो मानसून खों कोसें से पैले तनक जे जरूर सोंच लइयो के इते कोनऊं काम टेम पे होत आएं के नईं!
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Saturday, June 13, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | तनक बतइयो के जे हादसा ओ मारकाट पे लगाम को लगाहे | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टाॅपिक एक्सपर्ट
तनक बतइयो के जे हादसा ओ मारकाट पे लगाम को लगाहे
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
परों हमारी काम कामवाली बाई ने हमें बताई के एक दिनां उकी पड़ोसन की मुंदरी खो गई रई तो बा अपनी पड़ोसन कों एक गुनिया के इते लिवा ले गई रई। बा गुनिया ने कछू मंतर सो पढ़ो औ चुटकी भरे भभूत दे के बोलों के तुमाई मुंदरी पूरब दिसा में गिरी आए। उतई एक बरिया को पेड़ आए। ओई के तरे कल संकारे ढूंढियो, मुंदरी मिल जैहे। औ दूसरे दिनां सई में बरिया तरे मुंदरी मिल गई। बाई की बात सुन के हमें कै आई के कऊं बा गुनिया के चिनारी वाले ने तो नई चुराई हती? तुम ओरन खों जा गुनिया-मुनिया के इते जाबे के बजाए थाने जा के रपट लिखानी रई। ईपे उने हमसे जो कई ऊको सुन के हम सोई सोंच में पर गए। बाई ने हमसे कई के बे ओरें बा कटर औ चाकू वारन कों तो रोक ने पा रए, भला बे हमाई पड़ोसन की मुंदरी की रपट कां से लिखते? हमने बाई खों समझाई के ऐसो नइयां, पुलिस तुमाई मुंदरी सोई ढूंढ देती। बाई हमाई बात सुन के हमपे दया दिखात भई बोली के जो आप कै रईं सो माने ले रए।
     बाकी हमने बाद में सोंची के सहर में दसा सो सई में खराब चल रई। रोजीना अखबार में एक ने एक कटर चलबे की, नें तो चाकू चलबे की खबर पढ़ें को मिलन लगी आए। पैले इत्तो गदर तो नें मचो रैत्तो। औ ऊंसई सहर में हादसा बढ़त जा रए। औ काएं नें बड़हें, लोहरे-लोहरे लड़का-बच्चा गाड़ी धौंकत रैत आएं। रई सई कसर रोड के डिबाइडरन ने पूरी कर रखी आए। अब का पब्लिक खों जा मारकाट औ हादसा रोकबे के लाने गुनिया हरों के इते जाने परहे? अब जे परसासन वाले औ जिम्मेवार हरें पब्लिक को भरोसो टूटबे से पैले तनक सोंच के बताएं के जे हादसा ओ मारकाट पे लगाम को लगाहे?
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Monday, June 8, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | सिर्फ एक दिनां नोंईं, हर दिन मनो चाहिए पर्यावरण दिवस | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टाॅपिक एक्सपर्ट
सिर्फ एक दिनां नोंईं, हर दिन मनो चाहिए पर्यावरण दिवस
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
कढ़ गओ 05 जून। मन गओ पर्यावरण दिवस। गड्ढा खुदो, पौधा लगे, भासन भए, रासन भए, पेड़ बचाबे पे बड़ी-बड़ी बातें भईं। सब कछू अच्छो-अच्छो भओ। मनो दूसरे दिनां कोनऊं ने खबर लई के उनके लगाए पौधन को का भओ? नईं लई हुइए। काए से के दूसरे दिनां तो जे देखने परत आए के पौधा लगाते भए की फोटू अखबार में छपी के नईं। औ जो फोटू संगे खबर छप गई तो ऊको सोसल मीडिया में भी डारबे को काम रैत आए। सो, दूसरे दिनां कोन खों परी के पौधन कों हेरबे जाए। ऊंसई पर्यावरण दिवस तो एक दिनां को रैत आए जोन टाईप से शिक्षक दिवस, महिला दिवस, फादर दिवस मने किसम-किसम को दिवस। एक दिनां लुगाइयन के जैकारे करे और दूजे दिनां से बोई मार-कुटव्वल। जो पेरेंट्स डे भओ तो एक दिनां मताई-बाप खों गिफट-मिफट दे के पूछ लओ औ दूसरे दिनां से मूंड़ से मूंड़ जोर के सोचन लगे के अब कोन से वाले भैया के इते उने टिपाओ जाए? बस, जेई दसा रैत आए पर्यावरण की। ने तो आपई सोचो के जो हरेक साल लगाए गए पौधा सई से रै पाते औ बड्डे हो पाते तो आज पर्यावरण बचाबे की फ़िक्र ने करने परती। तनक जा बी सोचियो के पड़ोस के जिला में, जोन अपनईं संभाग में आए छतरपुर को बक्सवाहा में हीरा निकारबे के लाने पेड़े कट  रए औ अबे औ कटहें। का कोनऊं इते चीं बी बोल रओ? कोनऊं नईं! चलो उते की छोरो, अपने इते सागर में कालोनियां तो मनों मुतकीं बढ़ गईं लेकन का सहर में उत्ते पेड़ें लगाए गए? जो लगाए जाते तो पूरी गरमी नौतपा घांईं काए खों तपती? सो, भैया-भैन हरों, अपन खों पर्यावरण दिवस एक दिनां मना के नईं रै जाने, हर दिन मनाने है। तभईं अपन औ अपनों सहर अच्छें रैहें।
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Saturday, May 9, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | कछू घटबे के बादई काए पतो परत के उते सुरच्छा उपाय ने हते | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टाॅपिक एक्सपर्ट
कछू घटबे के बादई काए पतो परत के उते सुरच्छा उपाय ने हते
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

तला के इते पुराने सरकारी बस स्टैंड के लिंगे एक होटल की रसोई में आगी लग गई। मनो बा बड़ो पुरानो औ फेमस होटल आए। जबे हम उतई पास के स्कूल में पढ़ाबे को काम करत्ते ऊ टेम पे हमने उते के खीब समोसा खाए। कभऊं-कभऊं लौटत बेरा घरे सोई ले जात्ते। ऊ टेम पे बा तनक टपरा घांईं रई, बाकी ऊ टेम पे बी खींब चलत्ती। बाकी जे सब छोर के असल बात पे आओ जाए के ऊ होटल में आगी लगी। उते खाबे वारे, उते काम करबे वारे सबई घबड़ा गए। घबड़ाने वारी बातई रई। आगी से सबई खों डर लगत आए। आगी बुझाबे वारों ने मेनत करी औ आगी बुझा दई। तब कऊं जा के सुरच्छा को वारन खों ग्यान प्राप्त भओ के उते आगी से बचबे के सुरच्छा उपाय ने हते। मनो मामलो औ बिगर सकत्तो। 
बाकी सोचबे वारी बात जे आए के सहर में जित्ते बी बड़े-छोटे होटल औ ढाबा आएं उनमें सुरच्छा के इंतजाम कित्ते आए? औ दूसरी सोचबे वारी बात जे आए के होटलन की तो जांचें होत रैत हुइएं फेर जा चूक कोन से भई? मनो हमें पतो आए के चूक कोन से भई औ कैसे भई। आप सोचहो के हमें कैसे पतो? सो, सूदी सी बात आए के जबलौं कछू बुरौ ने हो जाए, तबलौं जिम्मेदारन की आंखें मिंची रैत हैं। हमाई ने मानो तो रोड डिवाइडरन खों देख लेओ। जब लौं उते दस-बीस गाड़ियां ने भिड़ जाएं जिम्मेदारन खों दिखात नईंयां। सो, कोऊ समै रैते देखबे की आदत डरवाओ उने जीसें औ कछू बुरौ ने घटे।
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Saturday, May 2, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | क्रूज की सवारी नोंनी आए, मनो सबक ले लइयो बरगी हादसा से | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

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क्रूज की सवारी नोंनी आए, मनो सबक ले लइयो बरगी  हादसा से
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

 पानी में तैरतो क्रूज होय औ ऊमें बर्थडे पार्टी करी जाए, घूमो जाए, एंज्वाय करो जाए जे सबई खों पुसात आए। अपने इते लाखा बंजारा झील की क्रूज में अबई पिछले मईना  एक कवि सम्मेलन लौं करो गओ रओ। मनो झील होय, झील में क्रूज होय तो ऊमें सवारी करबे को सबई को जी करत आए। सवारी करो बी चाइए। हमने सोई एक दार सवारी करी रई। मनो बरगी बांध में क्रूज पलटबे के हादसे खों ध्यान राखियो औ ऊसे सबक जरूर लइयो। का आए के उते सुरच्छा के नियमों की भारी अनदेखी करी गई। बरगी बांध में क्रूज पलट गओ। ऊ समै ऊपे 30 घूमबे वारे सवार हते। कओ जा रओ आए के क्रूज वारन खों मोसम बदरने औ तेज हवा चलबे की चेतावनी सोई दई गई रई। जीपे ध्यान नई दओ गऔ। इत्तोई नईं, पता परी आए के क्रूज पे इत्ते लाईफ जैकेट ने हते जित्ते लोग ऊपे सवार हते। जोन ने लाईफ जैकेट पहन पाई बे बच गए औ उनमें से बी कछू ऐसे रए जोन ठीक से ने पैन्ह पाए, उनको पतो नईं। अब जा तीनों गलती क्रूज चलाबे वारन की कहाई, मनो जान तो गई निरदोसन की। 
सो पैली बिनती तो प्रसासन से आए के बे अपने इते के क्रूज की जांच-पड़ताल कर लेवें के ऊमें सुरच्छा के सबरे उपाय हैं के नईं? संगे उते के कर्मचारियन खों भी समझा देबें के बे कैसऊं बी लापरवाई ने करें। मोसम को खयाल राखें। औ जेई बिनती क्रूज पे घूमने वारों से आए के बे सोई खतरों के खिलाड़ी ने बनें औ अपनी सुरच्छा पे ध्यान देबें। लाईफ जैकेट जरूर पैन्हें। फेर क्रूज खों एन्जाय करें। काए से के जान आए तो जहान आए। सो, बरगी बांध के बैकवाटर के क्रूज हादसा से सबक लेबो जरूरी आए।   
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Saturday, April 25, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | बे टीचर आएं मकोय के जरेटा नोईं, उने सोई लू-लपट लगत है | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

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बे टीचर आएं मकोय के जरेटा नोईं, उने सोई लू-लपट लगत है
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

 जनगनना होए चाए ढोरन  गिनबे को काम सरकारी टीचरन की ड्यूटी पैले लगा दई जात आए। मने गिनवाबे वारों को उनकी योग्यता पे पूरो भरोसो कहानों। जे नोंनी बात आए। लेकन उतई जब बात रैत आए अपने मोड़ा-मोड़ी औ पोता-पोती खों स्कूल में भरती करबे की सो सरकारी टीचरन वारो बा भरोसो कपूर घांईं उड़ जात आए। ऊ टेम पे सरकारी टीचरन के पढ़ाए पे भरोसो नईं रैत, ऊ टेम पे पिराइवेट स्कूलें दिखात आएं। चलो कछू नईं जे तो बरहमेस से होत आ रओ। चुनाव कराने होए सो टीचर औ पब्लिक खों गिनने होए सो टीचर। मनों टीचर कम परे में आंगनबाड़ी वारी सोई लगा दईं जात आएं। बे तो ऊंसईं कच्ची लोई  कहानी। जित्तो ऊनसे बन परत आए उत्तो बे जी-जान से फारम भरवाऊत रैत आएं। बाकी जे ने पूछियो के कित्तो सई कर पाऊत आएं औ कित्तो नईं? काए से के ऊमें उनको कोनऊं दोस नईं रैत। अब मनों कोनऊं प्रायमरी वारे खों सीदे यूपीएससी की परीच्छा में बैठा देओ तो बा कोसिस तो करहे, मनो परीच्छा में कित्तो सई लिख पाहे जे को कै सकत आए? चलो, जेबी सई। अब ड्यूटी तो सबई खों करनेई पड़त आए। सो करन देओ ड्यूटी।
   मनों जे बात सोई सोचबे की आए के गनना को काम मूंड़ चटकाबे वारी गरमी में काए कराओ जा रओ? सो, आप कैहो के जे मई-जून मेंईं तो टीचरन की छुट्टियां रैत आएं। चलो जे बी ठीक बात आए। पर एसी कमरा में बैठ के आडर देबे वारों खों तनक सोचो चाइए के 44-45 डिगरी से ऊपरे जात भई गरमी में उने दोरे-दोरे फिरा के उनकी पूरई छुट्टी करबे की मंसा आए का? जा काम का साजे मोसम में कराओ नईं जा सकत? काए से बे टीचर आएं मकोय के जरेटा नोईं, उने सोई लू-लपट लगत आए। तरे ऊपरे वारे सबई जने तनक सोचियों ई बारे में।    
 
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Monday, April 20, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | जो कछू सीखने होए सो जे बच्चा हरों से सीखो, जिनगी बन जैहै | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

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जो कछू सीखने होए सो जे बच्चा हरों से सीखो, जिनगी बन जैहै
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
 
   का आए के अभई एमपी बोर्ड 10वीं के रिजल्ट खुले रए जीमें पन्ना जिले के गुन्नौर तसील के छोटे से गांव हिनौता की बिन्ना प्रतिभा सिंह सोलंकी ने गजबई  कर दओ। ऊने 500 में 499 नंबर ला के टॉप करो। इत्ते नंबर कछू कहाऊत आएं। ऊने जा दिखा दओ के जो मन में लगन होए तो कोनऊ बी मोड़ी कछू बी कर सकत आए। तनक सोचियो के बा मोड़ी स्कूल में पढ़बे के लाने 8 किमी रोजीना बस से ग्राम गन्नौर लौं आत-जात्ती। घरे लौट के बी बा खींबई पढ़त्ती। प्रतिभा के पिताजी भारतेंद्र सिंह उतई गांव में रोजगार सहायक आएं औ मताई सरकारी स्कूल में टीचर आएं। मने मीडिल किलास फैमिली कहाई। अपनी प्रतिभा से सबई खों चौंकाबे वारी प्रतिभा आईएस बनो चाऊत आए। रामधई, राम जी ऊकी मनोकामना पूरी करें ! 
     बाकी ई दार के दसमीं बोर्ड के रिजल्ट के टापर हरों की जा खासियत रई के उनमें कोनऊं धन्ना सेठ के इते के नोंई। कोऊ किसान को मोड़ा-मोड़ी आओ तो कोऊ छोटे सरकारी करमचारी को। एक मोड़ा को बापू तो फुलकी की ठिलिया लगाऊत आए। मने कोनऊं भौतई खात-पीयत घर को नोंई। मनो, पइसा की कमी, सुविदा की कमी कछू बी इने अव्वल आबे से रोक ने सको। सो, इन ओरन से हमें कछू सीखबो चाइए। का आए के मुतके जने तनक मुस्किल आए में घबड़ान लगत आएं। उने सूझत नइयां के का करो जाए। ऐसे में बे कछू ने कछू गलत कदम उठान लगत आएं। सो, भैया औ बैन हरों मुस्किल में रै के कैसे सफलता पाई जि सकत आए, जा सीखने होए तो जे टापर बच्चा हरों से सीखो।  सई में जिनगी बन जैहै।
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Saturday, April 11, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | मोसम बदलो, बे बदले मनो आप अपनो ख्याल राखियो | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

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मोसम बदलो, बे बदले मनो आप अपनो ख्याल राखियो

- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

    मोसम फेर के गरम होन लगो आए। घाम मूंड़ चटकान लगो आए। सो, तनक सावधानी तो राखने परहे ने तो तबीयत खराब होबे में देर न लगहे। सेअत कैसे सई राखी जाए ऊके बारे में घाघ औ भड्डरी ने भौतई नोंने उपाय बताए हैं। ऊमें से कछू तो हमने पिछली हप्ता बताई रई, आज सोई कछू बताहें, मनो पैले उनकी बतकाव कर लई जाए जोन बदल गए। आईजी मैडम सो रिटायर हो के चली गई, सो लगो के बड़ी कुर्सी पे कोनऊं मैडम ने रैहें तो सूनो लगहे। मनो अब जी जुड़ाओ के कलेक्टर मैडम इते आ रईं। बाकी अबे लौं जो कलेक्टर साब रए उनखों ले के पब्लिक बड़़ी कनफुजिआत रई। मने पब्लिक खों खुदई पता न परत्ती के बा कलेक्टर साब से खुस आए के खफा आए? मनो बे अपनी समझ की डबिया अबे बी खोले से डरा रए के कऊं बे फेर के लौट ने आएं। अब ईको का मतलब आए बा आप ओरें अटकलें लगाइयो। हम तो अब कर रए सेअत की बतकाव।
भुनसारे खटिया से उठि के पिये तुरतै पानी।
ऊके घर मा वैद ना आवे बात घाघ के जानी।।
मने जो संकारे से उठ के सबसे पैले पानी पीयत आए बा कभऊं बीमार नईं परत आए औ ऊके घरे कभऊं बैद मने डाक्टर नई आत आएं। मनो आज के जमाना में डाक्टर ऊंसईं घरे नईं आत आए। औ कऊं आबे को भूले से मान गओ तो तगड़ी फीस ले लेत आए। जेई से सेअत के लाने एक कहनात औ गांठ बांध लेओ-
जेठ मास जो दिन में सोए।
ऊको जर असाढ़े  रोए।।
सो, सई टेम पे सोओ, सही टेम पे उठो करे औ धूप-गरमी से अपनो बचाव करियो, सो सब ठीक रैहे। राम-राम !
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Saturday, April 4, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | बड़े पते की आएं जे कहनातें, इनें छुड्डा में गठियां लेओ | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

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बड़े पते की आएं जे कहनातें, इनें छुड्डा में गठियां लेओ
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

  मार्च को मईना लगत साथ ऐसी गरमी परन लगी रई मनो मई को मईना आ गओ होए। कछू नई तो पूरो मईना तपो। बस, अखीर-अखीर में नाएं-माएं पानी गिरन लगो। बा जोन मोसम बिभाग वारे कैत आएं ने के गरज के संगे छींटें परहें, सो, ऐसोई कछू होन लगो। ई टाईप से मोसम बदले में तबीयत सोई बिगरन लगत आए। ऊंसई देखो जाए तो मार्च औ अप्रेल को मईना चैत औ बैसाख कहाउत आएं, जोन के लाने घाघ औ भड्डरी ने खींब पते की कहनातें कईं आएं। जेसे चैत के लाने उन्ने खाबे-पीबे को सई हिसाब बताओ आए के का खाओ चाइए औ का नईं खाओ चाइए - 
चैते गुड़, बैसाखे तेल, 
जेठे महुआ, आषाढ़े बेल 
- मने चैत में गुड़, बैसाख में तलो-फुलो, जेठ के मईना में महुआ औ असाढ़ मईना में बेल नईं खाओ चाइए। जेई के संगे घाघ कैत आएं के का खाओ चाइए जोन से सेअत सही रए-
चैत मास में नीम सेवती,
बैसाखहि में खाय बासमती
- मने चैत में नीम की नईं-नईं पत्तियां खाए से औ बैसाख में बासमती घांई बिना मांड़ को भात खाए से सेअत अच्छी रैत आए।
     बाकी घाघ औ भड्डरी ने मोसम के लाने सोई कओ आए के-
चैत मास दसमी खड़ा, जो कहुं कोरा जाइ।
चौमासे भर बादरा, भली-भां‍ति बरसाइ।।
- मने चैत मईना के शुक्ल पक्ष की दशमी को जो बदरा ने छाएं तो पूरे चौमासे झमाझम पानी बरसत आए।  मनो उतई जो-
जब बरखा चित्रा में होय
सगरी खेती जावै खोय
- मने जो चित्रा नक्षत्र में पानी बरस गओ तो समझो सगरी खेती चौपट। सो, इन कहनातों को फिजूल ने मानियो, जे सेअत ठीक राखबे औ मोसम की दसा समझबे को गुर बताउतीं आएं। अगली दफा कछू औ कहनातें बताबी,जो लौं इनें छुड्डा में गठियां लेओ। राम-राम !
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Saturday, March 28, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | अब झटका जोर से लगहे, बिजली वारे अगले महिना से झटका देबे वारे आएं | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

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अब झटका जोर से लगहे, बिजली वारे अगले महिना से झटका देबे वारे आएं
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
     ई साल सबरे त्योहार  जल्दी- जल्दी कढ़ गए सो गर्मी को मौसम सोई तनक जल्दी आ गओ। ऊको बी लगो हुइए के पेड़-मेंड़ सो कटत जा रए सो अपन सोई मार्च के मइना से अपनो दम दिखान लगें। जो बात होए दम दिखाबे की तो बिजली के झटका से बड़ो दम तो कोनऊं को हो नई सकत। नईं-नईं, बा वारो झटका नोईं जो बिजली के तार छूबे से लगत आए। हम बा वारे झटका की कै रए जोन बिजली के बिल को छूबे से लगत आए। हऔ बिजली विभाग वारे अगली माह से जोर को झटका देबे वारे आएं। टैरिफ सो बढ़ाई रए आएं औ ऊपे से जे सोई तै कहानो के जोन ने संझा बिरियां छै से दस बजे लौं बिजली से चलत वारीं बड़ी चीजें चलाईं उने अच्छे पइसा घलहें। 
     चलो मान लओ के तेल वारे देसन में चल रई लड़ाई के चलत भए डीजल, पेटरोल पे कोनऊं संकट आ सकत आए, मनो जे बिजली वारे काए दाम बढ़ा रए। चलो जे बी मान लई के गरमी खपत बढ़बे के कारन दाम बढ़ा रए। सो का बरसात सुरू होबे पे टैरिफ कम कर देहें? रामधई! ऐसो कभऊं नईं होत के रुपइया भरे बढ़ाए गए दाम पूरे रुपइया घटे होंए। भौत करी तो आठ पईसा ने तो दस पईसा घटा के खुनखुना पकरा दओ जात आए। सो, अगली मईना से जोर को झटका खाबे को तैयार रहियो औ पसीना पोंछत रहियो। जो हो सके तो ठिलिया से ले के बरफ को गोला खात रहियो। ईसे कूलर, पंखा चलाबे की जरूरत ने परहे। जै राम जी की!
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Tuesday, March 24, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | होंए जालपा चाए ज्वाला माई,परन न देवें दुख की छांई | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

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होंए जालपा चाए ज्वाला माई,परन न देवें दुख की छांई
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
चैत की नवरातें आतई साथ पूरे सागरे में देवी मैया के जयकारे गूंजने लगत आएं। चाए दीनदुखी होंएं, चाए सुखी मानुस, सबई माता के दोरे पे माथा टेकबे के लाने निकर परत आएं। कोऊ रानगिर वारी हरसिद्धि माई के लिंगे जात आए तो कोऊ बाघराज वारी हरसिद्धि माई के इते। ऊंसई अपने सागरे में माई के दरबार चारों खूंट में आए। जेई लाने तो भगतें गाई जात आएं के-
होंए जालपा चाए ज्वाला माई। परन ना देवें दुख की छांई ।।
   सागर से खुरई जात में जरुआखेड़ा से जलंधर के लाने रोड  कटत आए। आप जोन जलंधर पौंचे सो मनो ज्वाला देवी के दरबार के दोरे पे पौंच गए। उते ऊंची पहरिया पे माई को मंदिर आए। जो छिड़ियां चढ़ के ऊपरे ज्वालामाई के दरबार में पौंचो तो भौतई अच्छो लगत आए, काए से उते से चारो तरफी पहरियां दिखात आएं। बे पहरियां बी अबे जंगल वारी आएं। ज्वालामाई की सौं, उते भौतई नोनों लगत आए। ऐसो लगत आए के उते सजीवन माता उतर आई होंए।
   मनो होत का आए के जां सब साफ-सुथरो होय, लोग बी नोने जी से कऊं पौंचें तो उते देवी मैया को वास सो फील होत आए। माता सो माता आएं, बे अपने बच्चन खों चाए दो लपाड़े लगा लेवें मनो कभऊं साथ नईं छोरत आएं। मनों अपन ऐसो काम काए खरें के माई अपन खो थपड़िआएं। कैबे को मतलब जे के जो अपन अपने पूरे सागरे खों साफ-सुथरो औ अच्छो राखें तो हरसिद्धि माई, जालपा माई औ ज्वाला माई सबई की किरपा अपने सहर पे बनी रैहे।  सो, बोलो जै माई की!    
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Saturday, March 14, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | पब्लिक खों अंधरा काए बनात रैत | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टॉपिक एक्सपर्ट | पब्लिक खों अंधरा काए बनात रैत | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम
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पब्लिक खों अंधरा काए बनात रैत
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
         दो दिनां पैले की बात आए हम मकरोनिया चौराए से कढ़े, वा बी रात के साढ़े ग्यारा बजे। अब आप ओरें सोचहो के हम रात को साढ़े ग्यारा बजे उते कां फिर रए हते? काए से अपने इते को जो चलन आए के जोन बात जानो चाइए ऊ छोर के ई जानबे में ज्यादा मन लगत आए के को कां, काए को,  कोन के संगे घूम रओ तो? सो ऐसे जिज्ञासुअन के लाने बताबो जरूरी आए के हम अनरय करके बंडा से लौट रए हते। अनरय मने कोनऊं के घरे गमी के बाद को पैलो त्योहार। पर गई ठंड? चलो, अब आगे की असल बात सुनो के हमने मकरोनिया चौराए पे देखी के उते मसीन से गड्ढा सो खोदो जा रओ तो। बा देख के हमाए मों से निकरो के “इते जो का हो रओ?” जा सुन के हमाए डिराइवर भैया ने कई के “को जाने का करत रैत आएं? कभऊं गोलचक्का (रोटरी) पटा देत आएं, तो कभऊं जा तिकुनियां (आईलैंड) बना देत आएं। अब को जानें का कर रए?” 
     “हमें लगत आए के जे फेर के इते रोटरी बना रए।” हमाई संगवारी बोलीं। तभई हमाई संगवारी के संगवारे बोले के “हमें तो लग रओ के कछू पानी की पाईप को काम आए।” 
   “अरे नईं, आप ओरें का जानों के उने खुदई पता ने हुइए के बे इते काए के लाने गढ़ा खोद रए।” संगवारे के सालेजू ने ठिठोली करी। जा सब सुन के मोए बा एक हाथी औ चार अंधरा की किसां याद आ गई। जीमें चारों अंधरा हाथी खों थथोल-थथोल के अपनों-अपनों बखान करत आएं। बाकी अपने सागरे में सोई दसा अंधरन घांईं आए। करबे वारन के अलावा कोनऊं खों पतो नईं रैत के कब कां, का होन लगहे। पब्लिक को पइसा, मनो पब्लिक खों पैले नईं बताओ जात के का करबे जा रए। अरे एक ठइयां न्यूज छपाबे में का जा रओ? जे पब्लिक खों अंधरा सो काए बनात रैत आएं? तनक सोचियो!
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Saturday, March 7, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | बे उते इमली के पत्ता पे कुलाटां खा रए | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टॉपिक एक्सपर्ट | बे उते इमली के पत्ता पे कुलाटां खा रए | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम
टाॅपिक एक्सपर्ट
बे उते इमली के पत्ता पे कुलाटां खा रए
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
     कछू जने कछू ज्यादई स्याने होत आएं। पलकां पे परे-परे मोबाईल पे उंगरिया फेर-फेर के मनो स्क्रीन की मसाज कर रए होंए, लेकन जो उनसे पूछो के काए भैया, ऊ कार्यकरम आप ने दिखाने? सो, बे जेई कैंहें के का कएं बेजा बिंधे रए। मनो ऊनसे ज्यादा बिजी तो ई दुनिया ने हुइए। जेई से बा कहनात कई जात आए के फुरसत के मारे टेम नइयां। बाकी अपने इते एक से बढ़ के एक कहनात कई जात आएं। जैसे, चित्त तुमाई पट्ट तुमाई - मने दोई तरफी से लाभई-लाभ। जाके जैसी नदियां- नारे ऊसईं ओके भरका - मने जोन जैसो हुइए वा की संगत औ करम सोई ऊसईं हुइएं। एक कहनात औ आए जो सबई खों पता आए के जबरा मारे औ रोन न दे। मने एक तरफी तो परेसान कर रए औ ऊपे से सिकायत बी नईं करन दे रए।

     आप ओरें सोच रए हुइयो के जे सबरी कहनातें हमें काए याद आ रईं? सो, बात जे आए के अपने ई सहर में टिरेफिक की दसा ऊंसईं होत जा रई के इते के बराती ने उते के न्यौतार। मने कोऊ पूछबे, देखबे वारो नइयां। खास- खास चौराए में टिरेफिक की बत्ती हप्ता-खांड़ बंद डरी रैत आए, मनो कोनऊं खों फिकर नईं। झुंड के झुंड कुत्ता सगरे में फिर रए, मनो कोनऊं खों फिकर नईं। औ बा टाटा की लेन सो भांटा निकरी। कां तो चौबीस घंटा पानी की कई गई रई, मनों दो दिनां में नल आ जाएं सो खुद को रामधनी समझो। लीकेज देखबे वारो सो ऊंसई कोनऊं नईंयां। सो, अखीर में जे कहनात औ सुन लेओ के अपन इते टेंसूआं ढा रए औ बे उते इमली के पत्ता पे कुलाटां खा रए। अब ईको मतलब आप ओरें खुदई सोचियो। जै रामजी की!
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