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Sunday, March 15, 2026

साहित्य अकादमी के "स्मरण मुक्तिबोध" में सारस्वत अतिथि डॉ (सुश्री) शरद सिंह

"मुक्तिबोध न तो पूरी तरह  साम्यवादी थे और न वामपंथी, वे मूल रूप से सिर्फ मानवतावादी थे। यह बात उनकी कहानियां "ब्रह्मराक्षस का शिष्य" और "क्लॉड ईथरली" जैसी कहानियां पढ़ने के बाद भली-भांति समझा जा सकता है। मुक्तिबोध की रचनाओं को पुनर्व्याख्यायित किया जाना आवश्यक है।"- बतौर सारस्वत अतिथि मैंने मुक्तिबोध के व्यक्तित्व एवं विचारों पर अपने विचार रखे।
🚩अवसर था "स्मरण मुक्तिबोध" का। जिसकी अध्यक्षता की डॉक्टर हरिशंकर दुबे जी ने।
,🚩हार्दिक आभार मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक आदरणीय डॉ.विकास दवे जी, मुक्तिबोध सृजन पीठ के निदेशक आदरणीय ऋषि कुमार मिश्र जी एवं  श्यामलम संस्था सागर के अध्यक्ष आदरणीय उमाकांत मिश्र जी 🚩🙏🚩
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Saturday, March 23, 2024

अपनी पुस्तक के पाठक के साथ डॉ (सुश्री) शरद सिंह

14 मार्च 2024 को एक ख़ूबसूरत  पल आया जब मैं टहलती हुई उस ओर जा पहुंची जहां साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तकों की प्रदर्शनी लगी थी... मैंने देखा कि दो पाठक मेरी पुस्तक "बुंदेली लोककथाएं" अपने हाथों में लिए हैं... मैंने उनमें से एक से पूछा "आप बुंदेलखंड के हैं?" तो उस व्यक्ति ने जवाब दिया "नहीं, हम ओड़ीसा के हैं।" 
     उसका उत्तर सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ। फिर उस व्यक्ति ने बताया कि वह हिंदी जानता है तथा विभिन्न क्षेत्रों के लोक जीवन के बारे में जानना चाहता है। जब उसे यह पता चला कि यह किताब मेरी है तो उसने तुरंत हस्ताक्षर के लिए किताब मेरे आगे बढ़ा दी। एक अहिंदी भाषी का हिंदी क्षेत्र की लोकसंस्कृति के प्रति यह प्रेम देखकर मेरा मन भावुक हो उठा ... सचमुच लोक संस्कृति में व्यक्तियों को परस्पर जोड़ने की क्षमता होती है....🚩
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डॉ (सुश्री) शरद सिंह की साहित्य अकादमी के साहित्योत्सव में अन्य साहित्यकारों से भेंट

14 मार्च 2024 ... कहानीपाठ के मेरे सत्र के उपरांत लाउंज में चंद्रकांता जी से चर्चाएं हुईं ... विशाखापत्तनम की प्रो. शेषा रत्नम भी हमसे आ जुड़ीं... सीधी के मिश्र जी ... कई परिचित, नवपरिचित साहित्यकारों से चर्चाएं ... परस्पर संवाद का माहौल ... 
फिर वेन्यू से बाहर निकल कर आदरणीय शिवनारायण जी के सौजन्य से एक प्रतिभावान ऊर्जावान कवयित्री अंजू रंजन जी ( Anju Ranjan ) से उनके कार्यालय में  सुखद भेंट हुई।
     साहित्यिक समारोह विमर्श और परिचय दोनों का दायरा बढ़ाते हैं...
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Wednesday, March 20, 2024

डॉ (सुश्री) शरद सिंह साहित्य अकादमी के विश्व के सबसे बड़े साहित्योत्सव में (प्रथम दिवस)

#प्रथमदिन #नईदिल्लीमें #साहित्यअकादमी 
🚩 रवींद्र भवन के अकादमी परिसर में आयोजित विश्व के सबसे बड़े साहित्योत्सव ... मेरा प्रथम दिवस ... सबसे पहले मीराबाई सभागार ढूंढना था मुझे, जहां अगले दिन मेरा कहानी पाठ था। वहां व्यवस्थाएं इतनी अच्छी थीं कि मीराबाई सभागार का तुरंत पता चल गया ... और संयोग कि मीराबाई सभागार के द्वार पर ही भेंट हो गई महुआ माजी से। एक ज़िंदादिल महिला। हम कई वर्ष बाद मिले।
    🌹 इसके बाद पूर्व परिचितों से मिलने का सिलसिला चल निकला... डॉ बलराम जी, डॉ शिवनारायण जी, डॉ उर्मिला शिरीष जी, अशोक मिश्र जी,  डॉ दामोदर खड़से जी, डॉ मीनाक्षी जोशी जी ...। बोधिसत्व जी, आभा बोधिसत्व जी और शकुंतला तरार जी से यूं तो परिचय रहा किन्तु भेंट पहली बार हुई... यह बात और है कि ऐसा लगा नहीं कि पहली बार मिल रहे हैं... हंसी के ठहाके और आत्मीयता का माहौल ...
     इस दौरान गहन चर्चाएं भी हुईं और सहभोज का आनंद भी लिया... कई सत्र अटैण्ड किए .... चिंतन मनन के लिए ढेर सारी ख़ुराक मिली... प्रत्येक सत्र बहुभाषी थे अतः विभिन्न भाषाओं की प्रतिनिधि अपने विचार कहानी, कविता एवं अनुभवों के रूप में सामने रख रहे थे .... अत्यंत सारगर्भित...

      बहरहाल, चर्चाओं की विस्तार से चर्चा फिर कभी ... शाम लगभग छ: साढ़े छ: बजे एक रेस्टोरेंट की ओर निकल पड़ी गोलगप्पे खाने ... मित्रों का साथ हो तो गोलगप्पे और स्वादिष्ट लगते हैं 😀... 
     🍿 रेस्टोरेंट जाते समय मुझे नहीं पता था कि उसे रेस्टोरेंट में एक बिग सरप्राइस मेरा इंतजार कर रहा है....
  Date : 13.03.2024
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