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Friday, January 31, 2020

शून्यकाल ... असंवेदना का वायरस और युवाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति - डाॅ. शरद सिंह

Dr (Miss) Sharad Singh
शून्यकाल  
असंवेदना का वायरस और युवाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति                                                 
  - डाॅ. शरद सिंह                                                                                            
       राष्ट्रवाद, बौद्धिकवाद, स्त्रीविमर्श जैसे बड़े-बड़े भारी-भरकम से लगने वाले शब्द कभी-कभी बहुत छोटे और हल्के लगने लगते हैं। जब एक युवती सामूहिक दुष्कर्म के बाद गला घोंट कर मार दी जाती है, वह भी एक तरफा प्रेम के चलते। दो विविध आपराधिक घटनाएं। फिर भी दोनों में एक समानता कि इनमें अपराधी युवा थे। वे युवा जिनके खेलने, खाने और पढ़ाई-लिखाई कर कैरियर बनाने के दिन थे। बुंदेलखंड हमेशा शांत क्षेत्र रहा है। यहां सौहार्द्र् का वातावरण रहा है। बेशक यहां दशकों तक दस्यु-समस्या अवश्य रही किन्तु वह भूख, ग़रीबी और आपसी दुश्मनी से उपजी हुई समस्या थी जिस पर लगभग काबू पाया जा चुका है। लेकिन आज अपराध उन हाथों से किए जा रहे हैं जिनके द्वारा कभी किसी तरह के हिंसा किए जाने की उम्मींद सपने में भी नहीं रहती है। ऐसा क्या बदल रहा है कि मासूम से लगने वाले युवा पेशेवर अपराधियों जैसे नृशंस अपराध करने लगे हैं? 
अभी हाल ही में सागर संभाग मुख्यालय के आनंद नगर क्षेत्र में एक ऐसी लोमहर्षक वारदात हुई जिनसे सभी को सकते में डाल दिया। मकान के बाहर वाले गेट पर ताला लटक रहा था। मकान के अंदर से दुर्गंध आ रही थी। पुलिस ने जाकर दरवाजे में लगा ताला तोड़ अंदर जाकर देखा तो हॉल से लगे कमरे में तीन शव बिस्तर पर पड़े थे। तीनों मृतकों की पहचान रिटायर्ड आर्मीमैन रामगोपाल पटेल 40 वर्ष, उसकी पत्नी भारती 35 वर्ष और पुत्र छोटू पटेल 16 वर्ष के रूप में की गई जबकि मृतक रामगोपाल का बड़ा बेटा विकास 18 वर्ष लापता था। पुलिस को मौके से 7 सात लाइनों का एक पत्र मिला जिसमें लिखा था कि इसका जिम्मेदार मैं खुद हूं। मैं मरने जा रहा हूं, मुझे मत ढूंढ़ना। यद्यपि इसमें किसी का नाम नहीं लिखा था। विशेष बात यह है कि विकास और उसका छोटा भाई आदर्श आर्मी स्कूल में कक्षा 12 वीं और 7 वीं के  छात्र थे। विकास के बारे में पुलिस को पता चला कि वह बिगड़ी हुई प्रवृत्ति का था। उसके नाना ने बताया कि एक बार उसने पिता का एटीएम कार्ड चोरी कर 40 हजार रुपए निकाल लिए थे। पहले यह माना जा रहा था कि विकास ने अपने माता-पिता और छोटे भाई को ज़हर दे कर मार डाला किन्तु पीएम रिपोर्ट तथा और जांच-पड़ताल के बाद पता चला कि उसने अपने माता-पिता को गोली भी मारी थी। बात इतनी ही नहीं रही, हैवानीयत की हद तो यह कि वह तीन दिन तक यावों के पास खना पकाता खाता रहा और अपने स्कूल में गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में भी सामान्य भाव से शामिल हुआ। ऐसा कृत्य वह भी मात्र 18 वर्ष की आयु के युवक द्वारा किया जाना स्तब्ध कर देने वाला है। आखिर उस युवक में इतनी हैवानीयत कहां से आई? अपने माता-पिता और छोटे भाई को जान से मारना, फिर उनके शव के साथ तीन दिन घर में न केवल रहना बल्कि खाना पका कर खाना, यह सुनने में इंसानी कृत्य नहीं लगता है। लिहाजा प्रश्न वही उठता है कि वह युवक इंसान से ऐसा हैवान कैसे बन गया? जब वह बिगड़ने की राह पर चल पड़ा था तब क्या उस पर अंकुश लगा पाना संभव नहीं था?
Dainik Bundeli Manch -  Shoonyakaal, असंवेदना का वायरस और युवाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति - Dr Sharad Singh, 31-01-2020
       एक और घटना, ठीक उसके बाद। इलाका वही सागर संभागीय मुख्यालय से लगा हुआ मेनपानी ग्रामीण क्षेत्र। अब मेनपानी पहले जैसा ग्रामीण क्षेत्र भी नहीं रह गया है। लेकिन यहां आज भी खुले में शौचमुक्त अभियान को मुंह चिढ़ाती और झूठे आंकड़ों की पोल खोलती स्थितियां जघन्य अपराध को जाने-अनजाने अवसर दे रही हैं। एक युवती जिसकी सप्ताह भर बाद शादी होनी थी, सुबह खुले में शौच के लिए निकली। एक तरफा प्रेम में अंधा हो चला युवक उसकी ताक में घात लगाए बैठा था। उसने युवती के साथ न केवल बलात्कार किया बल्कि उसका गला दबा कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस घटना में भी एक और युवा अपने अपराध से मानवता को शर्मसार कर गया। इस प्रकार की प्रवृत्ति युवाओं में तेजी से बढ़ती जा रही है। न तो सागर संभाग के लिए इस प्रकार की घटना पहली घटना है और न ही युवाओं द्वारा किए जाने वाले अपराधों के आंकड़ों में यह पहली घटना है। एक तरफा प्रेम का हिंसक अंत एक पीढ़ी पहले तक नहीं था किन्तु अब यह अपराध आए दिन कहीं न कहीं घटित होता रहता है। यह आपराधिक ढिठाई इन युवाओं में कहां से आ रही है? क्या माता-पिता अपने बच्चों की हरकतों से बिलकुल बेख़बर हो चले हैं? पुलिस के दायित्व से भी कहीं पहले माता-पिता और परिवार का दायित्व होता है बच्चों और युवाओं की हरकतों पर ध्यान रखने का।
इसका एक उत्तर छतरपुर की उस घटना में भी मौजूद है जो प्रत्यक्षतः आपराधिक तो नहीं है किन्तु मानवता को शर्मसार करने वाली अवश्य है। समाज में बेटियों का प्रतिशत घटने का कारण यही है कि परिवार बेटों की चाह में बेटियों को दुनिया में ही नहीं आने देना चाहते हैं। यदि बेटियां दुनिया में आ भी जाएं तो उनकी उपेक्षा की जाती है। बुंदेलखंड भी इस मानसिक कुरीति से अछूता नहीं है। लेकिन उस मां के बारे में सोचिए जिसने तीन बेटों को जन्म देते हुए सोचा होगा कि ये तीनों नहीं तो कम से कम एक तो बुढ़ापे का सहारा बनेगा और मृत्यु होने पर मुखाग्नि देगा। उस मां ने अपने तीनों बेटों के लिए रात-रात भर जागते समय कभी नहीं सोचा होगा कि उसके मरने पर उसका एक भी बेटा उसके अंतिम संस्कार के लिए नहीं आएगा। वह अभागी मां अपनी मृत्यु के पूर्व एक वुद्धाश्रम में रह रही थी। उसकी मृत्यु पर जब उसके छोटे बेटे को सूचना दी गई तो उसने यह कह कर मां का अंतिमसंस्कार करने से मना कर दिया यदि वह आएगा तो उसकी पत्नी उसे छोड़ देगी। यह घटना किसी मेट्रो महानगर में घटी होती तो शायद आश्चर्य नहीं होता किन्तु घनी सामाजिकता वाले बुंदेलखंड के छतरपुर में ऐसी घटना चौंकाने वाली थी। सोचने की बात है कि जब पारिवारिक वातावरण इतना दूषित होने लगेगा तो युवाओं पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा? सच तो यह है कि असंवेदना का वायरस बीमार कर रहा है मानसिकता को जिससे माता-पिता में असंवेदनशीलता बढ़ रही है और युवाओं में अपराध में प्रवृत्ति होते जा रहे हैं। असंवेदना के इस वायरस को फैलाने में इंटरनेट और सेाशल मीडिया की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है।     
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(छतरपुर, म.प्र. से प्रकाशित "दैनिक बुंदेली मंच", 31.01.2020)
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Friday, August 24, 2018

चर्चा प्लस ... इंटरनेट गेमर्स के निशाने पर बच्चे और युवा - डॉ. शरद सिंह

 
चर्चा प्लस : इंटरनेट गेमर्स के निशाने पर बच्चे और युवा - डॉ. शरद सिंह
Dr (Miss) Sharad Singh
चर्चा प्लस :
इंटरनेट गेमर्स के निशाने पर बच्चे और युवा
- डॉ. शरद सिंह
कुछ अरसा पहले ‘ब्लू व्हेल’ नाम के इन्टरनेट गेम ने दुनिया भर में कई युवाओं की जान ले ली थी। दुनिया भर में अनेक देशों ने इस गेम को न केवल प्रतिबंधित किया था बल्कि इसे न खेले जाने के लिए मुहिम भी चलाई। ब्लू व्हेल के बाद आया ‘किकी चैलेंज’। किकी चैलेंज से भी अधिक घातक सिद्ध हुआ ‘मैरी पौपिंस चैलेंज’। इसी क्रम में अब आ गया है एक घातक व्हाटएप्प गेम -‘मोमो’। ऐसा लगता है मानो कुछ साईको किस्म के गेमर्स युवा जगत को आत्मघाती उन्माद की दुनिया में ले जाना चाहते हैं। यह वह संकट है जिसके प्रति युवाओं का सचेत रहना जरूरी है। 
इंटरनेट गेमर्स के निशाने पर बच्चे और युवा - डॉ. शरद सिंह ... चर्चा प्लसColumn of Dr (Miss) Sharad Singh in Sagar Dinkar News Paper
जिसने भी यह खबर सुनी वह चौंक गया। चौंकना स्वाभाविक था। आखिर 14 साल की उम्र भला कोई ऐसी उम्र होती है जिसमें फांसी लगा कर आत्महत्या करने का विचार आए और उसे अमल भी कर लिया जाए। शायद इंटरनेट की दुनिया में पहुंच कर बच्चे यह भी सीख रहे हैं कि आत्मघाती कदम कैसे उठाए जाते हैं। घटना मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की है। मोबाइल पर गेम खेल रही 14 साल की बेटी को डांट लगाना मां को भारी पड़ गया। कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली बच्ची ने कमरा बंद करके खुद को फांसी लगा ली। घर में सबकुछ ठीकठाक चल रहा था और 14 साल की बच्ची अपनी मां के फोन पर गेम खेल रही थी। बच्ची की मां ने उसे फोन छोड़कर पढ़ाई करने को कहा तो वह अपने कमरे में चले गई। मां ने उसे आवाज लगाई तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने उसके कमरे की खिड़की खोलकर देखा तो वह स्तब्ध रह गईं। बच्ची फंदे पर लटकी हुई थी। जब उसे अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यदि इस प्रश्न का उत्तर ढूंढा जाए कि यह आत्मघाती कदम उस नन्हीं बच्ची को कैसे सूझा होगा? तो उंगली इंटरनेट की ओर उठती है।
मोबाईल और इंटरनेट बच्चों और युवाओं सहज ही आकर्षित कर लेते हैं। मुझे आद है अपनी सागर से भोपाल की वह छोटी-सी यात्रा। राज्यरानी एक्सप्रेस की उस इकलौती चेयरकार में एक युवा मां अपने दो साल के बच्चे के साथ सफर कर रही थी। लगभग छब्बीस-सत्ताईस हज़ार कीमत का मोबाईल फोन उसने अपने बेटे के हाथ में दे रखा था। फोन की कीमत शायद इससे भी अधिक रही हो। उसका बेटा मोबाई के बटन दबाता जिससे की-पैड टोन बजती और वह खुश हो कर हाथ हिलाने लगता। इस फेर में कई बार उसके हाथ से फोन छूट कर गिरा। ऐसा लगता था जैसे आर्थिक रूप् से समृद्ध उस युवा मां को न तो अपने कीमती मोबाईल फोन की चिन्ता थी और न अपने बेटे पर पड़ने वाले फोन के दुष्प्रभाव की। उस नन्हें बच्चे पर फोन के रेडिएशन पर असर की परवाह थी। उसे तो मजा आ रहा था अपनी समृद्धि का प्रदर्शन करने में। मुझे विचार आया कि वह बच्चा ज़रा बड़ा होगा तब भी उसके हाथों में मोबाईल होगा। तब वह उन चीजों से रूबरू होगा जो उसे उस उम्र में देखनी भी नहीं चाहिए और उसे टोकने वाला कोई नहीं होगा। ऐसे ही बच्चे युवावस्था में पहुंचते-पहुंचते हानिकारक साईट्स और गेमर्स के हत्थे चढ़ जाते हैं।
कुछ समय पहले इन्टरनेट पर एक गेम आया था- ब्लू व्हेल। इस ब्लू व्हेल गेम की वजह से भारत समेत कई देशों में किशोरों और बच्चों द्वारा आत्महत्या करने के मामले सामने आए थे। लगभग 130 से ज्यादा जान गई थीं ब्लू व्हेल गेम के कारण। इस गेम के तहत खुद को हर रोज किसी न किसी तरह से नुकसान पहुंचाना होता था 50वें दिन खुद की जान लेने के साथ यह गेम खत्म होती थी अब व्हाट्सअप मंच पर उपलब्ध ‘मोमो’ से भी वैसा ही खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। ब्लू व्हेल गेम के बाद अब इस नए व्हाट्सएप गेम ‘मोमो’ ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। यह खतरनाक गेम खासतौर से किशोरों और बच्चों को अपना निशाना बनाने की कोशिश में है। विशेषज्ञों ने दुनियाभर के माता-पिता को चेताया है कि यह व्हाट्सएप गेम ब्लू व्हेल गेम की तरह घातक साबित हो सकती है। इस गेम के जरिए यूजर को हिंसक तस्वीरें भेजी जाती हैं। अगर यूजर इसे खेलने से मना करता है, तो उसे धमकाने की भी कोशिश की जाती है। इस गेम के लिए जो डरावनी तस्वीर इस्तेमाल की जा रही है, उसे जापानी कलाकार मिदोरी हायाशी ने बनाया था। हालांकि मिदोरी का इस गेम से कोई लेना-देना नहीं है। अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में एक 12 साल की लड़की की संदिग्ध मौत के पीछे इसी गेम को माना जा रहा है। पुलिस का भी यह मानना है कि मोमो गेम की चुनौती के तहत बच्ची ने संभवतः आत्महत्या का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करने की भी कोशिश की थी। अर्जेंटीना में प्रशासन ने इस संबंध में लोगों को जागरूक करने की मुहिम भी शुरू कर दी है।
इससे पहले सोशल मीडिया पर ‘‘आइस बकेट’’ चैलेंज चला था जिसमें बर्फ से भरी बाल्टी को अपने सिर पर उड़ेलना था और ऐसा करते हुए अपना वीडियो अपलोड करना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर करने लगा किकी चैलेंज। कनेडियन हिप हॉप सुपरस्टार ड्रेक के लेटेस्ट ऐल्बम स्कॉर्पियन के हिट सॉन्ग ‘इन माय फीलिंग’ पर शुरू हुआ ‘किकी चैलेंज’ दुनियाभर में वायरल हो गया। इसमें सिलेब्रिटीज के भी शामिल हो जाने से अधिक से अधिक लोगो को इसने आकर्षित किया। आम लोग भी इस चैलेंज को पूरा करने में जुट गए। सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि स्पेन, अमेरीका, मलेशिया और यूएई में लोग इस चैलेंज वीकार करने लगे और दूसरों के लिए मुसीबत खड़ी करने लगे। यहां तक कि पुलिस को एडवाइजरी तक जारी करनी पड़ी जिसमें लोगों से अपील की गई कि वे कीकी चैलेंज को स्वीकार न करें यह खतरनाक हो सकता है। अमेरिकी पुलिस ने इसे सबसे खतरनाक डांस मूव बताया। वहीं फ्लोरिडा की पुलिस ने यह डांस मूव करते हुए पकड़े जाने पर 1000 डॉलर का जुर्माना लगाने का एलान किया। भारत में यूपी और दिल्ली समेत कई राज्यों में पुलिस ने चेतावनी जारी की। इस चैलेंज में कैनेडियन रैपर ड्रेक के गाने ‘इन माय फीलिंग’ पर लोग चलती गाड़ी से उतरकर डांस स्टेप करते थे। इस दौरान गाड़ी की रफ्तार बहुत धीमी होती थी। चैलेंज की खास बात है कि डांस के बाद वापस चलती गाड़ी में ही बैठना होता है।
इसी तरह का घातक चैलेंज है मैरी पौपिंस चैलेंज। इसमें किसी ऊंचाई पर चढ़ कर एक खुले छाते के सहारे नीचे कूद पड़ना होता है। इस चैलेंज में भी कई लोगों ने अपनी जान गंवाई। चैलेंज वाले इन गेम्स के क्रम में अब आ धमका है ‘मोमो’ गेम। इसका प्लेटफार्म व्हाट्सएप्प होने से इसके अधिक से अधिक वायरल होने की संभावना है। भले ही भारत में एक बार में व्हाट्सएप्प मैसेज को पांच से अधिक फॉवर्ड करने पर रोक लगा दी गई है लेकिन खतरों से भरे इस गेम का खतरा सिर्फ सजगता से ही टाला जा सकता है। माता-पिता, अभिभावकों, मित्रों और शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए बच्चों और युवाओं की मोबाईल और इंटरनेट गतिविधियों पर ध्यान रखना होगा, तभी सुरक्षित रहेंगे बच्चे और युवा।
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(Sagar Dinkar, Daily, 22.08.2018)
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