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Wednesday, April 16, 2025

डॉ सुश्री शरद सिंह के साहित्यिक अवदान पर श्यामलम की आठवीं साहित्य परिक्रमा में चर्चा

निःशब्द सा अनुभव कर रही हूं...  अभिभूत हूं.. भावुकता में हूं... सागर शहर की अग्रणी संस्था जो साहित्य संस्कृत कला एवं भाषा के लिए समर्पित है, "साहित्य परिक्रमा" उसका वह आयोजन है जिसमें होने का  सपना यहां का हर साहित्यकार देखता है... 
🚩अपने शहर में, अपनों के द्वारा, अपने साहित्य पर चर्चा ... इससे बढ़कर उपलब्धि भला और क्या हो सकती है? बस, यही कह सकती हूं कि यह आयोजन मेरे लिए अमूल्य है... अतुलनीय है... अनन्य है .....
🚩हार्दिक आभार श्यामलम संस्था 🚩🙏🚩
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Wednesday, December 18, 2024

हार्दिक आभार " दैनिक भास्कर " मेरे बुंदेली ग़ज़ल संग्रह "सांची कै रए सुनो, रामधई" के लोकार्पण के समाचार को प्रमुखता से स्थान देने के लिए

हार्दिक आभार " दैनिक भास्कर " मेरे बुंदेली ग़ज़ल संग्रह  "सांची कै रए सुनो, रामधई" के लोकार्पण के समाचार को प्रमुखता से स्थान देने के लिए 🙏

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Sunday, March 13, 2022

स्त्री जीवन और सृष्टि में सौंदर्य का आह्वान करती है। - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

"जब एक स्त्री कविता रचती है तो उसकी कविताओं में वात्सल्य सहित नौ रस मौज़ूद होते हैं, छूटता है तो मात्र वीभत्स रस। क्योंकि स्त्री जीवन और सृष्टि में सौंदर्य का आह्वान करती है तथा सत्यम,शिवम, सुंदरम का अनुकरण करती है। वह द्रवित होती है दूसरों का दुख देख कर और प्रफुल्लित होती है अपने हृदय की अनुभूतियों से। कवयित्री आज्ञा तिवारी की कविताओं में सौंदर्य है, प्रेम है, प्रकृति है किन्तु इसके साथ ही सामाजिक विसंगतियों के प्रति गहरी पीड़ा भी है। अपने पहले काव्य संग्रह में ही वे अपनी वैचारिक परिपक्वता एवं भावनात्मक अवगाहन से प्रभावित करती हैं।" - मुख्य अतिथि के रूप में मैंने (डॉ (सुश्री) शरद सिंह ने ) अपने उद्बोधन में कहा साथ ही 'मलयालम साहित्य की दादी' कही जाने वाली सुप्रतिष्ठित कवयित्री स्व. बालमणि अम्मा के जीवन के प्रसंगों पर भी चर्चा की। अवसर था सागर नगर के साहित्यकार, पत्रकार, चिंतक "स्व.जी. पी. चतुर्वेदी अनंत स्मृति पर्व 2022" का। जिसके अंतर्गत साहित्यकार सम्मान एवं पुस्तक विमोचन समारोह भी सम्पन्न हुआ।
      वरदान होटल में आयोजित इस समारोह में श्री पूरन सिंह राजपूत कवि
को सम्मानित किया गया तथा कवयित्री श्रीमती आज्ञा तिवारी 'मधु' के प्रथम काव्य संग्रह "मन का मधुमास" का विमोचन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता की नगर के प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ सुरेश आचार्य जी ने, मुख्य वक्ता थे टीकाराम त्रिपाठी जी एवं विशिष्ट अतिथि थे पंडित पीएन भट्ट ज्योतिषाचार्य जी। आलेख वाचन किया डॉ अशोक तिवारी ने। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्री बृज बिहारी उपाध्याय ने किया। कवयित्री आज्ञा तिवारी का परिचय पड़ा श्री कपिल बैसाखी आने तथा कवि पूरन सिंह जी का परिचय पड़ा श्री हरि सिंह ठाकुर जी ने। सम्मान पत्र का वाचन किया श्री रमाकांत शास्त्री जी ने तथा स्वागत भाषण दिया श्री उमाकांत मिश्र, श्यामलम अध्यक्ष ने।
इस अवसर पर कवि श्री मुकेश तिवारी द्वारा अपने प्रभावी गायन के साथ स्मृति गीत प्रस्तुत किया।
      समारोह में नगर के साहित्यकारों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
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Friday, February 18, 2022

स्व. पुष्पदंत हितकर एक सरल हृदय व्यक्ति थे - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

मित्रो, मैं बताना चाहूंगी कि मेरे शहर में साहित्य, कला, भाषा और संस्कृति को समर्पित संस्था है "श्यामलम"।साहित्यकारों एवं कलाकारों के दिवंगत होने पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से इस संस्था की स्थापना श्री उमाकांत मिश्र जी ने अपने अग्रज बॉलीवुड अभिनेता स्व. श्यामाकांत मिश्र जी की स्मृति में की थी। क्योंकि, कई बार यह होता है कि  साहित्यकार एवं कलाकारों के परिजन भी समाज में उनके महत्व को समझ नहीं पाते हैं किंतु जब इस प्रकार के आयोजन में वहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति अपने श्रद्धासुमन अर्पित करता है तो परिजन को भी यह गौरव महसूस कर पाते हैं कि उनके अपने परिवार का सदस्य समाज में कितना महत्वपूर्ण स्थान रखता था। इस प्रकार की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करते समय आर्थिक रूप से समर्थ अथवा असमर्थ का भेदभाव नहीं किया जाता है अपितु सभी के लिए समान भावना से श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाती है।    
      एक पवित्र उद्देश्य को लेकर स्थापित श्यामलम संस्था का कारवां जैसे-जैसे बढ़ता गया, वह बहुआयामी क्षेत्रों में विस्तारित होता गया। यह अपने आप में एक अनूठी और अद्वितीय संस्था है।
       🚩इसी श्यामलम संस्था ( Shyamlam Kala ) द्वारा आज  आयोजित श्रद्धांजलि सभा में सागर नगर के हम सभी साहित्यकारों ने अपने वरिष्ठ साथी स्वर्गीय पुष्पदंत हितकर जी को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनका विगत 15 फरवरी 2022 को देहावसान हो गया था। इस अवसर पर मैंने उस आलेख का अंश पढ़ा जो अपने कॉलम "सागर : साहित्य एवं चिंतन" के अंतर्गत 12 सितम्बर 2018 को मेरी दीदी डॉ वर्षा सिंह जी ने पुष्पदंत हितकर जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर लिखा था। अंशवाचन के साथ ही मैंने अपने श्रद्धासुमन भी अर्पित किए.......

पुष्पदंत हितकर जी को विनम्र श्रद्धांजलि - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय
नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा
न्यन्यानि संयाति नवानि देही।।
         अर्थात....जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर नये वस्त्रों को ग्रहण करता है, उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर को त्यागकर नये शरीर को प्राप्त करती है।

पुरानी तेरे को त्याग चुके हमारे वरिष्ठ साथी पुष्पदंत हितकर जी का स्मरण करती हूं उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करती हूं 🙏
..........

एक साहित्यकार अपने विचारों और अपनी कृतियों अपनी रचनाओं के रूप में हमेशा हमारे साथ अस्तित्व में रहता है और इसीलिए जो मैं मेरी दीदी डॉक्टर वर्षा सिंह द्वारा लिखा गया लेख का अंश यहां पढ़ने जा रहे हो उसमें वर्तमान काल का संबोधन है अतः उसे उसी रूप में स्वीकार करें यह लेख 12 सितंबर 2018 को आचरण में प्रकाशित हुआ था जिसे मेरी दीदी डॉ वर्षा सिंह ने अपने कॉलम  "सागर : साहित्य एवं चिंतन" के अंतर्गत कवि "पुष्पदंत हितकर सहज अभिव्यक्ति ही जिनकी खूबी है" - शीर्षक से एक लेख हितकर जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को रेखांकित करते हुए लिखा था। उसी का एक अंश मैं यहां प्रस्तुत कर रही हूं....

"कवि हितकर के जीवन पर अपने माता-पिता के धार्मिक विचारों एवं सहृदयता का गहरा प्रभाव पड़ा। सागर विश्वविद्यालय से बी.एस-सी. फाइनल तक शिक्षा ग्रहण करने वाले पुष्पदंत हितकर ने सन् 1975 से लेखन कार्य आरम्भ किया। साहित्य में रुचि रखने वाले कवि हितकर की कविताएं अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहीं।
साहित्य सेवा के साथ ही पुष्पदंत हितकर समाज सेवा से जुड़ गए। इसी तारतम्य में जैन छात्र समिति के द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका ‘रश्मि’ का संपादन किया। इसी दौरान उन्हें जैन संतो ंके समागम में काव्यपाठ का सुअवसर प्राप्त हुआ। सन् 1993 में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आचार्य श्री विद्यासागर महराज का सानिध्य प्राप्त होने के साथ ही कवि हितकर को गजरथ स्मारिका का संपादन करने का अवसर भी प्राप्त हुआ। कवि हितकर का अभी तक कोई काव्य संकलन तो प्रकाशित नहीं हो सका है किन्तु नगर की साहित्यिक गोष्ठियों में उनकी सक्रियता निरंतर बनी रहती है।

पुष्पदंत हितकर यह मानते हैं कि यदि प्रत्येक मनुष्य मनुष्यता का पाठ पढ़ ले और स्वयं को बुराईयों से बचा ले तो व्यक्तिगत कठिनाईयों के साथ ही समाज में व्याप्त बुराईयां भी दूर हो सकती हैं। ‘‘हमें ऐसे इंसान चाहिए’’ शीर्षक कविता में उन्होंने अपनी इसी आकांक्षा को व्यक्त किया है -
क्या ज़रूरी है कि हम
गीता कुरान पर हाथ रख कर
झूठी कसमें खाएं
गुनाहों को छिपाने के लिए
और गुनाह करते जाएं।
हमें तोड़ने वाले धर्म नहीं
जोड़ने वाले मन चाहिए।
प्रार्थना, इबादत तो हम कभी भी
बैठ कर कर लेंगे
जो दूसरों के दुख-दर्द को समझें
हमें ऐसे इंसान चाहिए

कवि पुष्पदंत हितकर सरल शब्दों में अपने भाव व्यक्त करने वाले लगनशील कवि हैं, जो सागर की साहित्यिकता में वृद्धि करते रहते हैं।"
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पुष्पदंत हितकर जी एक सरल हृदय व्यक्ति थे। उन्हें मेरा विनम्र नमन 🙏
विनम्र श्रद्धांजलि 🙏
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Newspapers of 19.02.2022