Friday, January 2, 2026

शून्यकाल | नए साल में कुछ लक्ष्य तय करें सिर्फ़ अपने नहीं, पूरी दुनिया के लिए | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | नयादौर

शून्यकाल
नए साल में कुछ लक्ष्य तय करें सिर्फ़ अपने नहीं, पूरी दुनिया के लिए
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

हर नए साल में हम अपने व्यक्तिगत लक्ष्य तय करते हैं। इस बार निजी लक्ष्यों के साथ ऐसे लक्ष्य भी तय करें जिनसे हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी एक अच्छा वातावरण मिले। हम जानते हैं कि आजकल क्लाइमेट चेंज सबसे चिंताजनक विषय है। मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव अब हमें मौसम में बदलाव के रूप में दिखाई दे रहे हैं। कहीं सूखा पड़ रहा है, कहीं बाढ़ आ रही है, कहीं जंगल में आग लग रही है या सुनामी आ रही है, और कई गंभीर नतीजे सामने आ रहे हैं। लेकिन अभी भी देर नहीं हुई है। पूरी दुनिया इस दिशा में कोशिश कर रही है। अगर हम भी नए साल में कुछ ऐसे लक्ष्य तय करें जिनसे क्लाइमेट चेंज की रफ्तार धीमी हो सके, तो यह हमारे भविष्य और हमारी धरती के लिए अच्छा होगा। तो आइए कुछ ऐसे लक्ष्य तय करें जिन्हें हम अपनी रोजाना की जिंदगी में अपना सकें और उन्हें आसानी से हासिल कर सकें।
     
      इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है। नए साल के शुरू में हर बार कड़ाके की ठंड पड़ती है। पड़नी भी चाहिए। यह जलवायु के लिए अच्छा संकेत होता है किन्तु इसके बाद अगर भीषण गर्मी पड़ जाए तो स्थिति चिंताजनक हो उठती है। आमतौर पर हम मौसम के अनुरूप अपने लिए व्यवस्थाएं कर के निश्चिंत हो जाते हैं और मौसम का सामना कर लेते हैं लेकिन हमें मौसम के उस बदलाव को भी ध्यान से देखना चाहिए जो जलवायु परिवर्तन के यप में हमारे सामने आ रहा है। जाने-माने वैज्ञानिकों के अनुसार, 2027 में दुनिया एक और रिकॉर्ड तोड़ गर्म साल देख सकती है, क्योंकि उत्सर्जन में वृद्धि और अल नीनो जैसे तूफानों से मौसम की घटना के प्रभाव के कारण वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहा है, जो सर्दियों में चरम पर होता है और वैश्विक औसत तापमान को अपने चरम पर पहुंचाता है। इसका असर इस साल यानी 2026 में भी दिख सकता है क्योंकि हम विकास के नाम पर जंगलों की अंधाधुंध कटाई कर रहे हैं, जलाशयों को सुखा रहे हैं और सूर्य के ताप को सोख कर वातावरण गर्म करने वाले कांक्रीट की बस्तियां बसाते जा रहे हैं। जो हवा है वह प्रदूषित है, पानी प्रदूषित है और भूमि बंजर होती जा रही है। मुट्ठी भर खेती से अरबों लोगों का पेट नहीं भरा जा सकता है। हम विकल्प के रूप में कम पानी में पैदा होने मोटे अनाज को चुन रहे हैं लेकिन वह भी कब तक साथ देगा? अपना भविष्य हमें ही सोचना होगा। 
वस्तुतः वैश्विक जलवायु प्रणाली 5 भागों से बनी है- वायुमंडल, स्थलमंडल, जलमंडल, क्रायोस्फीयर और जीवमंडल। वैश्विक जलवायु कई कारकों से प्रभावित होती है, जिसमें सूर्य, सूर्य के सापेक्ष अंतरिक्ष में पृथ्वी की स्थिति, और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन जैसे मानव निर्मित कारक शामिल हैं। पेरिस समझौते में बताए गए अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा न रखने के लिए, 2030 तक उत्सर्जन को 45ः कम करने और 2050 तक नेट जीरो तक पहुंचने की जरूरत है। जबकि आज जीवित मनुष्यों के समय के पैमाने पर पृथ्वी की जलवायु पर मानवीय गतिविधियों के प्रभाव अपरिवर्तनीय हैं, भविष्य में तापमान में होने वाली हर थोड़ी सी वृद्धि से कम गर्मी होती है जो अन्यथा हमेशा के लिए बनी रहेगी। इसलिए क्लाइमेट प्लेज 2040 तक नेट-जीरो कार्बन तक पहुंचने की प्रतिबद्धता है।
ये प्रयास बहुत बड़े पैमाने के लगते हैं, लेकिन असल में हमारे छोटे-छोटे व्यक्तिगत प्रयास इन्हें लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वह कैसे? आइए देखें।
सबसे पहले हमें प्लास्टिक बैग और बोतलों का इस्तेमाल करने से मना करना चाहिए। असल में, प्लास्टिक का इस्तेमाल हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है और इस हानिकारक हिस्से से छुटकारा पाने के लिए हमें अपनी आदतें बदलनी होंगी। प्लास्टिक सस्ता और टिकाऊ है और इसने मानवीय गतिविधियों में क्रांति ला दी है। आधुनिक जीवन इस बहुमुखी पदार्थ का आदी और निर्भर है, जो कंप्यूटर से लेकर चिकित्सा उपकरणों से लेकर खाद्य पैकेजिंग तक हर चीज में पाया जाता है। दुर्भाग्य से, अनुमान है कि हर साल 8.5 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा प्लास्टिक कचरा हमारे महासागरों में फेंका जाता है। समुद्र वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर हम इसी तरह समुद्र में प्लास्टिक कचरा फेंकते रहे, तो 2050 तक महासागरों में वजन के हिसाब से मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक होगा। यह समुद्री जीवन के लिए हानिकारक होगा। खासकर मूंगा चट्टानों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। सवाल यह उठता है कि समुद्र के पास जाए बिना, हम उसे प्लास्टिक कचरे से कैसे भर रहे हैं? इसका सीधा सा जवाब है कि हम सीधे तौर पर ऐसा नहीं कर रहे हैं, बल्कि कचरा फेंकने वाले हमारे द्वारा फेंके गए कचरे को नदियों, तालाबों और महासागरों में अवैध रूप से फेंक रहे हैं, जिसका निपटान नहीं किया जा सकता। प्लास्टिक कचरे से न सिर्फ पानी में बल्कि जमीन पर भी प्रदूषण होता है, जिसका असर मौसम पर पड़ रहा है। यही वजह है कि अब मौसम का पैटर्न पहले जैसा नहीं रहा। पिछले साल 2025 में गर्मी फरवरी महीने में ही शुरू हो गई थी। मौसम जितनी तेजी से अपना पैटर्न बदल रहा है, उतनी तेजी से हम इसे ठीक नहीं कर सकते। हालांकि, अगर हम अपनी लाइफस्टाइल को इको-फ्रेंडली बनाएं तो इस बदलाव की रफ्तार को धीमा कर सकते हैं। हमें उन चीजों का इस्तेमाल कम करना चाहिए जो मौसम को नुकसान पहुंचा रही हैं। इस दिशा में प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना सबसे जरूरी कदम होगा। बेशक, हमने प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने की कोशिश शुरू कर दी है, लेकिन इसकी रफ्तार धीमी है। हमें अपनी कोशिशों को तेज करना होगा ताकि प्लास्टिक कचरे से होने वाले नुकसान को कम से कम किया जा सके।
खाने से होने वाला प्रदूषण भी क्लाइमेट पर बुरा असर डाल रहा है। हमारा खाना ही हमारा दुश्मन बनता जा रहा है। खाने से होने वाले प्रदूषण को कैसे कम किया जा सकता है? सच तो यह है कि फूड सेक्टर से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए प्रोड्यूसर से लेकर कंज्यूमर तक, सभी स्टेज पर बदलाव की जरूरत है। अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा शाकाहारी खाना शामिल करके हम ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को काफी कम कर सकते हैं। ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली चीजों - जैसे मांस और डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे मक्खन, दूध, पनीर, मांस, नारियल तेल और पाम तेल - के बजाय कम प्रदूषण फैलाने वाली चीजों - जैसे बीन्स, छोले, दालें, मेवे और अनाज - का ज्यादा सेवन करें। अपनी खाने की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके हम अपने पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को काफी कम कर सकते हैं। यह बदलाव हर लिहाज से सेहत और क्लाइमेट दोनों के लिए फायदेमंद होगा। पिछले दशक में, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित पश्चिमी देशों में शाकाहारी बनने का चलन बढ़ा है। इसके पीछे कोई धार्मिक कारण नहीं है, बल्कि कार्बन फुटप्रिंट कम करने की इच्छा है। इसीलिए, जो लोग पीढ़ियों से मांस खा रहे थे, वे भी वीगन बन रहे हैं। ऐसे प्रयास क्लाइमेट में कार्बन फुटप्रिंट कम करने की दिशा में बहुत मायने रखते हैं। इसलिए, हमें भी अपने खाने के व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए ताकि हम भी कम से कम कार्बन फुटप्रिंट छोड़ें।
हमें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में प्रदूषण कम करने के लिए कदम उठाने चाहिए। यह कैसे मुमकिन है? कोई बड़ी बात नहीं, बस कुछ कदम उठाकर प्रदूषण कम किया जा सकता है। प्रदूषण कम करने के सबसे अच्छे तरीके हैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना, इस्तेमाल न होने पर लाइट बंद करना, रीसायकल और दोबारा इस्तेमाल करना, प्लास्टिक बैग को श्नाश् कहना, जंगल की आग और धूम्रपान कम करना, एयर कंडीशनर के बजाय पंखे का इस्तेमाल करना, हवा, पानी, सौर, थर्मल, बायोमास ऊर्जा जैसी रिन्यूएबल एनर्जी को प्राथमिकता देना। याद रखें कि हर इंसान को सांस लेने के लिए शुद्ध हवा चाहिए और हर कोई एयर प्यूरीफायर नहीं खरीद सकता। इसीलिए हवा को साफ रखना जरूरी है! हर इंसान को पीने के लिए शुद्ध पानी चाहिए और हर कोई वॉटर प्यूरीफायर नहीं खरीद सकता। इसीलिए पानी को साफ रखना जरूरी है! इसलिए, यह जरूरी है कि हम प्रदूषण के खिलाफ अपनी आदतें बदलें और रोजमर्रा की जिंदगी में साफ-सफाई अपनाएं। इन लक्ष्यों को अपनाकर और पूरा करके ही हम क्लाइमेट चेंज की गति को धीमा कर सकते हैं, और इस तरह अपने भविष्य और अपने ग्रह को एक स्वस्थ क्लाइमेट दे सकते हैं। अगर हम संक्षेप में देखें, तो नए साल के लिए हमारे लक्ष्य ये होने चाहिए - प्रदूषण-मुक्त, फॉसिल फ्यूल के इस्तेमाल में जितनी हो सके उतनी कमी, हमारी खाने की आदतों में हेल्दी बदलाव, जंगलों और हरियाली की रक्षा करना, प्रकृति से प्यार करना और अपनी जरूरतों को कम करना ताकि हम अपना कार्बन फुटप्रिंट कम कर सकें। पानी बचाना भी जरूरी है। यह बहुत जरूरी है। सिर्फ इन लक्ष्यों को अपनाकर और पूरा करके ही हम क्लाइमेट चेंज की रफ्तार को धीमा कर सकते हैं, और इस तरह अपने भविष्य और अपने ग्रह को एक हेल्दी माहौल दे सकते हैं। क्या हम इन लक्ष्यों को पूरा नहीं कर सकते हैं इस नए साल में? 
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