Tuesday, June 23, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | मानसून खों ने कोसों, इते तो ऊंसईं सब काम लेट होत आएं | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टाॅपिक एक्सपर्ट 
मानसून खों ने कोसों, इते तो ऊंसईं सब काम लेट होत आएं
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
परों एक भैयाजी  बजरिया में टकराने। कुल्ल मईना बाद मिले, मनों हालचाल पूछने की जांगा अपने माथे को पसीना पोंछत भए कैन लगे के “जा मानसून ने अच्छो दगा करो, 15 जून लौं आत-आत ऐसो धीमों पर गओ के 25 जून लौं ने आहे। जा तो भौतई गलत बात आए।” 
पसीना मानों हमें सोई चुआ रओ हतो पर हमने उनसे कई के “मानसून खों आप ने कोसों। ईमें मानसून को कोनऊं दोस नईयां।”
“काए ने कोंसो जाए? आते आबे में बा लेट कर रओ के नईं?” भैयाजी बिगड़त भए बोले।
तब हमने उनें समझाओ, “भैयाजी, सई में ईमें ऊको कोनऊं दोस नईयां, बा तो अपने इते की चलन में चल रओ।”
“का मतलब?” भैयाजी ने पूंछी।
“मतलब जे आए भैयाजी के अपने इते मकरोनिया से सदर वारी आरओबी कित्ते साल में बनीं, तनक याद करो? अपने लाखा बंजारा जू की स्टेच्यू ने   कित्तो इंतजार करो अपनों मों दिखाबे खों बा सोई याद कर लेओ। अभईं कछू समै पैले अपने इते सिविल लाइंस की टिरेफिक लाईट कित्ते हप्ता बंद रई तनक याद करियो!” हमने भैयाजी खों गिनवाबो सुरू करो।
“सो, ईंसे मानसून को का लेबोदेबो?” भैयाजी ने मोंसे पूछी।
“बोई तो हम बता रए। तनक गम्म तों खाओ। का आपखों पतो के 46 किमी पाईप लेन बदली जानी आए के जींसे पीबे के लाने साफ पानी मिल सके। पर भओ का आए के 4 माए में खाली 700 मीटर पाईप लेन बदली गई आए। सो, जब इते इत्ती सुस्ती से हरय-हरय काम होत है, सो मानसून सोई सोंचत हुइए के टेम पे पौंच के इते को चलन काए बिगारो जाए!” हमने भैयाजी खों औ अच्छे से समझाई। भैयाजी खों समझ में आ गई औ बे अपनों मूंड़ हिलात भए बढ़ गए। 
मनों हमने सई कई के नईं? जो सई लगे तो मानसून खों कोसें से पैले तनक जे जरूर सोंच लइयो के इते कोनऊं काम टेम पे होत आएं के नईं!
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Thank you Patrika 🙏
Thank you Dear Reshu Jain 🙏
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1 comment:

  1. हम लोग अक्सर हर बात का दोष मौसम या किसी और पर डाल देते हैं, लेकिन अपने आसपास की समस्याओं को नहीं देखते। आपकी पोस्ट ने बहुत आसान और मजेदार तरीके से यह बात समझाई है कि जब हमारे यहां कई काम समय पर नहीं होते, तो मानसून को दोष देना भी ठीक नहीं है।
    बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.

    अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
    धन्यवाद!

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