Wednesday, September 6, 2017

चर्चा प्लस ... ब्लू व्हेल गेम करता है माइण्ड ट्रेप : दृढ़ रहिए-सुरक्षित रहिए ... डॉ शरद सिंह

Dr (Miss) Sharad Singh

मेरा कॉलम चर्चा प्लस (06.09.2017 दैनिक सागर दिनक में )
 

ब्लू व्हेल गेम करता है माइण्ड ट्रेप : दृढ़ रहिए-सुरक्षित रहिए 
- डॉ. शरद सिंह 

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में में 14 वर्षीय एक लड़के ने ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल चैलेंज के अंतिम चरण को पूरा करने के लिए सातवीं मंजिल से कूदकर खुदकुशी कर ली थी। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर का एक छात्र ’ब्लू व्हेल गेम’ का शिकार होते-होते बचा। सातवीं कक्षा का यह छात्र गेम की आखिरी स्टेज को पूरा करने के लिए स्कूल की तीसरी मंजिल से छलांग लगा रहा था, तभी उसे टीचर ने सुरक्षित बचा लिया। ’ब्लू व्हेल गेम’ के 50वें चरण को पूरा करने के लिए तीसरी मंजिल से नीचे कूद रहा था। ऐसा करने पर उसे दो करोड़ रुपए मिलने का दावा किया गया था। दमोह और हरदा जैसे छोटे शहर भी इसकी चपेट से नहीं बचे। वीडियो गेम अपने-आप में एक ऐसा जुनून पैदा करता है जिससे छुटकारा पाना कठिन होता है। ’ब्लू व्हेल गेम’ इस जुनून की एक आत्मघाती कड़ी है। बेशक यह माइण्ड ट्रेप गेम है लेकिन इससे बड़ी आसानी से बचा जा सकता है। इससे बचने का रास्ता है- दृढ़ मानसिक स्थिति और दृढ़ इच्छाशक्ति। 
Charcha Plus Column of Dr Sharad Singh in "Sagar Dinkar" Daily News Paper

देश के विभिन्न हिस्सों में खतरनाक रूप लेते वीडियो गेम ’ब्लू व्हेल चैलेंज’ के खतरे मध्य प्रदेश में भी नज़र आने लगे हैं। इसकी गंभीरता को भांपते हुए अगस्त के पहले पखवाड़े में ही राज्य के तकनीकी शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार), स्कूल शिक्षा एवं श्रम राज्यमंत्री दीपक जोशी ने मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर इस गेम को प्रतिबंधित करने की मांग की थी। मंत्री जोशी ने जावड़ेकर को सोमवार को लिखे पत्र में कहा था कि इस गेम के जाल में फंसकर बच्चे आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठा रहे हैं। यह स्थिति चिंताजनक है। यद्यपि, खत मिलने के पहले ही सरकार ने ब्लू व्हेल चैलेंज को प्रतिबंधित कर दिया। राज्यमंत्री दीपक जोशी ने प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा एवं प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा को भी इस गेम से होने वाले नुकसान के प्रति शैक्षणिक संस्थाओं के बच्चों को जागरूक करने के संबंध में जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
भारत सरकार ने गूगल इंडिया, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया और प्रमुख सोशल मीडिया साइटों से इस गेम के लिंक हटाने के लिए कहा। सारकार की ओर से इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप से कहा था कि ब्लू व्हेल चैलेंज से जुड़े लिंक फौरन हटाए जाएं। मंत्रालय के वरिष्ठ निदेशक अरविंद कुमार ने 11 अगस्त 2017 को निर्देश जारी किया था। इस गेम पर प्रतिबंध की आशंका को देखते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पहले ही कई प्रॉक्सी यूआरएल या आईपीएड्रेस बना लिए गये थे। इसके मद्देनजर ही सरकार ने अपने निर्देश में सर्च इंजन और सोशल मीडिया वेबसाइट से ब्लूव्हेल चेलैंज गेम से मिलते जुलते नाम वाले या यूआरएल वाले गेम के लिंक भी हटाने को कहा था।
विगत दिनों ब्लू व्हेल गेम एक नई मुसीबत बनकर सामने आया है। तमाम प्रयासों के बाद भी यह ना सिर्फ सरकार के लिए बल्कि शिक्षण संस्थानों के लिए भी एक चुनौती बना हुआ है। इसके लिए आईटी मंत्रालय से लेकर सीबीएसई बोर्ड ने सर्कुलर जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि इसे रोकने के हरसंभव प्रयास किए जाए। इस गेम को खेलते हुए अभी तक दुनिया भर में 200 से ज्यादा लोग अपनी जान दे चुके हैं। भारत कई युवा और स्कूली बच्चे इसके प्रभाव में आ कर आत्मघात कर चुके हैं।


गेम को बनानेवाला और एडमिन :
सन् 2016 में इस गेम के डेवलपर फिलिप वुडकिन को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। उस वक्त 15 बच्चों ने आत्महत्या की थी। वुडकिन साइकोलॉजी का स्टूडेंट रहा है। वुडकिन ने पुलिस को बताया था कि उसका मकसद समाज की सफाई करना है। वुडकिन के मुताबिक जो अपने जीवन का मूल्य नहीं समझते वो समाज के लिए कचरा हैं और उनकी सफाई करना जरूरी है।
अच्छी ख़बर यह है कि इसी माह ब्लू व्हेल गेम की एडमिन लड़की गिरफ्तार कर ली गई है। वह रूस की रहनेवाली 17 वर्षीय लड़की है। यह गेम रूस में भी कई बच्चों की जान ले चुका है। संबंधित समाचारों के अनुसार लड़की पर आरोप है कि जानलेवा ब्लू व्हेल चैलेंज गेम के पीछे उसी का हाथ है। लड़की शिकार को धमकी दिया करती थी कि अगर उसने ब्लू व्हेल टास्क पूरा नहीं किया तो वह उसे और उसके परिवार का खून कर देगी। ब्लू व्हेल चैलेंज उन्हीं लोगों को अपना शिकार बनाता है, जो तनाव जूझ रहे हैं और आत्महत्या करने के बारे में सोचते हैं। रूसी पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का फुटेज जारी किया गया है। आरोपी लड़की मनोविज्ञान की छात्रा है और उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। अदालत में हुई पेशी के बाद उसे तीन साल के लिए जेल भेज दिया गया है। 


क्या है ब्लू व्हेल गेम?
यह एक सेल्फ डिस्ट्रक्टिव चैलेंज गेम है। जो इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के अनेक देशों में खेला जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार खेल कथित तौर पर एक श्रृंखला मे होते हैं जिसमें खिलाड़ियों को कहने के लिये 50-दिन की अवधि में कई कार्य आवंटित किया जाता है, जिसकी अंतिम चुनौती में खिलाड़ी को आत्महत्या करने को बोला जाता है। शब्द “ब्लू व्हेल“ बीच्ड व्हेल्स की घटना से आता है, जोकि आत्महत्या से जुड़ा हुआ था।
ब्लू व्हेल से बच्चों के मरने का सिलसिला जारी है। इन मौतों का कारण है वो चैलेंज, जो ये गेम खेलने वाले बच्चों को दिए जाते हैं। इन चैलेन्जेस के बारे में जानना जरूरी है जिससे बच्चों की संदिग्ध गतिविधियों को आसानी से पहचाना जा सके। इसी बात को ध्यान में रखते हुए गेम के चैलेन्जेस की जानकारी एन.सी.पी.सी.आर. अर्थात् नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेकशन ऑफ चाइल्ड राईट्स ने अपनी वेबसाइट पर दी है-
1. हाथ पर रेजर की मदद से अंग्रेजी का अक्षर और नंबर ’एफ 57’ कुरेदना और उसकी फोटो क्यूरेटर को भेजना।
2. सुबह 4ः 30 बजे उठना और वो डरावने, विकृत वीडियोज देखना जिन्हें क्यूरेटर ने आपको भेजा है।
3. बाजू को अपनी नसों के पास से होते हुए रेजर से काटना। ये कट ज्यादा गहरे नहीं होने चाहिए। केवल 3 कट हों और उनकी फोटो क्यूरेटर को भेजना।
4. एक पेपर शीट पर व्हेल बनाना और उसकी फोटो क्यूरेटर को भेजना।
5. अगर आप ’व्हेल बनने को तैयार’ हैं तो पैरों पर रेजर से ’यस’ का निशान बनाना। अगर आप तैयार नहीं हैं, तो आपको खुद को सजा देनी है और कई कट खुद को मारने होंगे।
6. हाथ पर ‘एफ 40’ का निशान बनान और उसे क्यूरेटर को भेजना।
7. सुबह 4:20 बजे उठना है और जो छत सबसे ऊंची हो वहां पहुंचना है।
8. रेजर से हाथ में व्हेल की आकृति बनाना और उसकी फोटो क्यूरेटर को भेजना।
9. पूरा दिन डरावने वीडियोज देखना।
10. जो संगीत क्यूरेटर आपको भेजे उन्हें ध्यानपूर्वक सुनना।
11. अपने होंठो को काटना।
12. अपने साथ कुछ भी ऐसा करना जिससे आपको दर्द का अनुभव हो।
13. सबसे ऊंची छत पर पहुंचो और वहां किनारे पर कुछ देर खड़े रहो।
14. किसी पुल पर जाओ और वहां किनारे पर खड़े रहो।
15. छत पर जाकर किनारे पर बैठो और अपने पैरों को हिलाओ।
16. सुबह 4:20 पर उठो और रेलवे लाइन पर जाओ।
17. पूरे दिन किसी से भी बात मत करो।
18. हर रोज अपने शरीर पर एक कट मारो।
19. ऊंची बिल्डिंग से कूद जाओ और अपनी जिंदगी को खत्म करो।
20. किसी क्रेन पर चढ़िए या इसकी कोशिश करिए।
खेलने वाले के दिमाग़ में यह बिठा दिया जाता है कि यदि एक बार गेम खेलना शुरू कर दिया, तो वो इसे बीच में नहीं छोड़ सकता। यदि गेम को बीच में छोड़ दिया तो एडमिन आपका फोन हैक कर लेगा और फोन की सारी डिटेल हैक एडमिन के पास चली जाएगी। अगर कोई बीच में गेम छोड़ना चाहे, तो एडमिन की तरफ से धमकी मिलती रहती है कि उसे या फिर उसके माता-पिता को जान से मार दिया जाएगा।


गेम से बचने के तरीके :
यह साफ़तौर पर माइण्ड ट्रेप गेम है। इस गेम के ट्रेप से बड़ी आसानी से बचा और बचाया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले जरूरी है दृढ़ मानसिक स्थिति और दृढ़ इच्छाशक्ति। दरअसल, इस गेम में आत्मघात वही कर रहे हैं जो कमजोर इच्छाशक्ति के हैं, भावुक हैं अथवा जुनूनी हैं। दृढ़इच्छाशक्ति बनाए रखने पर इस गेम के प्रभाव से आसानी से दूर रहा जा सकता है अथवा इससे बाहर निकला जा सकता है। दमोह और हरदा जैसे छोटे शहर भी इसकी चपेट से नहीं बचे। वीडियो गेम अपने-आप में एक ऐसा जुनून पैदा करता है जिससे छुटकारा पाना कठिन होता है। ’ब्लू व्हेल गेम’ इस जुनून की एक आत्मघाती कड़ी है। बेशक यह माइण्ड ट्रेप गेम है लेकिन इससे बचा जा सकता है बड़ी आसानी से। इससे बचने का रास्ता है इसके लिए सबसे पहले जरूरी है दृढ़ मानसिक स्थिति और दृढ़ इच्छाशक्ति।
मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक इस गेम के एडिक्ट ज्यादातर लोग डिप्रेशन के शिकार होते हैं। ऐसे में यदि आपके घर का कोई मेंबर डिप्रेशन का शिकार है तो उसे सोशल मीडिया से दूर रखा जाए। इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में बच्चों में वर्चुअल वर्ल्ड का एडिक्शन होता है। ऐसे में घरवाले बच्चों पर नजर रखें और उनकी इंटरनेट हैबिट पर खास ध्यान दें। इसके अलावा बच्चों को घर में इस तरह का माहौल दें कि वह मां-बाप से कोई बात छिपाए नहीं। वे बच्चों को इस बात का विश्वास दिलाएं कि यदि वे गेम में शामिल हो भी गए हैं तो किसी भी समय उसे छोड़ सकते हैं। गेम का एडमिन उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। एडमिन की धमकियों के विरुद्ध वे सामान्य पुलिस अथवा साईबर सेल की मदद ले सकते हैं। उन्हें डांटने के बजाए उनका आत्मविश्वास जगाएं।
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Tuesday, August 15, 2017

आजादी के बाद ही मिल सकी महिलाओं को स्वतंत्रता ... डॉ विद्यावती 'मालविका'

स्वतंत्रता दिवस पर मेरी मां का साक्षात्कार आज "पत्रिका" समाचार पत्र में...15 अगस्त 2017
         धन्यवाद "पत्रिका" !
यह मेरा सौभाग्य है कि मैं विदुषी वरिष्ठ साहित्यकार डॉ विद्यावती 'मालविका' जी की बेटी हूं ... यह सौभाग्य हर जन्म में मुझे मिले यही कामना है।
Dr Vidyawati 'Malavika' Senior Author and mother of writers sister Dr Varsha Singh and Dr Sharad Singh



Monday, August 14, 2017

पाठकमंच की समीक्षा गोष्ठी में डॉ शरद सिंह

पाठक मंच की सागर (मध्यप्रदेश) इकाई में डॉ (सुश्री) शरद सिंह ने डॉ सुरेश शुक्ल ‘चन्द्र’ द्वारा लिखित नाट्य-पुस्तक ‘भूमि की ओर’ की समीक्षा की। दिनांक : 13.08.2017
Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017
Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017
Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017
Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017
Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017
Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017
Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017

Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017
Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017
Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017
Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017
Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017
Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017
Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017

Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017

Dr Sharad Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017

Dr Varsha Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017

Dr Varsha Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017

Dr Varsha Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017

Dr Varsha Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017

Dr Varsha Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017

Dr Varsha Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017

Dr Varsha Singh at Pathak Manch Sagar MP, 13.08.2017

Wednesday, August 9, 2017

चर्चा प्लस ... आज भी प्रासंगिक है भारत छोड़ो आंदोलन ... डॉ शरद सिंह

Dr (Miss) Sharad Singh
"आज जब एक ओर से पाकिस्तान और दूसरी ओर से चीन आतंक और धमकियों का सहारा ले कर प्रभावी होने की निरंतर कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में ‘‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’’ के नारे की भांति ‘‘पड़ोसी देशो आतंक और दीदीगिरी छोड़ो’’ का नारा बुलंद करने का समय है और इस आज के नारे को अपनी प्रभुता के साथ दुनिया के सामने रखने के लिए हम ‘‘भारत छोड़ो आंदोलन’’ से बहुत कुछ सीख सकते हैं, प्रेरणा ले सकते हैं।" दैनिक सागर दिनकर में  प्रकाशित मेरे कॉलम #चर्चा_प्लस में आज (09.08.2017 को ) पढ़िए.... 
चर्चा प्लस
भारत छोड़ो आंदोलन (9 अगस्त) के 75 वें वर्ष पर विशेष :
आज भी प्रासंगिक है भारत छोड़ो आंदोलन                                                                                                                          - डॉ. शरद सिंह                                                                        

आज युवावर्ग स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष को इतिहास की चंद घटनाओं या फिर सिलेबस में दिए गए एक चैप्टर की तरह याद कर के भूलने लगता है। आज जब एक ओर से पाकिस्तान और दूसरी ओर से चीन आतंक और धमकियों का सहारा ले कर प्रभावी होने की निरंतर कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में ‘‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’’ के नारे की भांति ‘‘पड़ोसी देशो आतंक और दीदीगिरी छोड़ो’’ का नारा बुलंद करने का समय है और इस आज के नारे को अपनी प्रभुता के साथ दुनिया के सामने रखने के लिए हम ‘‘भारत छोड़ो आंदोलन’’ से बहुत कुछ सीख सकते हैं, प्रेरणा ले सकते हैं।  
Charcha Plus Column of Dr Sharad Singh in "Sagar Dinkar" Daily News Paper
 
नौ अगस्‍त 2017 को भारत छोड़ो आंदोलन के 75 साल पूरे होने पर संसद के दोनों सदनों में एक दिन की विशेष बैठक का आयोजन रखा गया। इस दिन सदन में और कोई दूसरा काम नहीं होगा, यह तय किया गया। इस दिन भारत छोड़ो आंदोलन को याद करते हुए देश की आज़ादी में आंदोलन की भूमिका के महत्व पर चर्चा होगी। चर्चा आरंभ करने का दायित्व लोक सभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राज्य सभा में वित्त मंत्री अरुण जेटली का तय किया गया है। लोक सभा में विपक्ष की तरफ़ से मल्लिकार्जुन खड़गे, मुलायम सिंह यादव और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा समेत सभी एनडीए के घटक दल और विपक्षी दलों के सभी प्रमुख नेता चर्चा में भाग लेंगे। राज्य सभा में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, नेता विपक्ष ग़ुलाम नबी आज़ाद, राम गोपाल यादव, शरद यादव, सीताराम येचुरी, सतीश चंद्र मिश्रा समेत सभी दलों के प्रमुख नेता भी चर्चा में भाग लेंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम में देश के युवाओं का आह्वान किया था कि वे ‘संकल्प से सिद्धि’ का अभियान छेडें। असल में यह आंदोलन भारत से गरीबी, भ्रष्टापचार, आतंकवाद, जातिवाद और सांप्रदायिकता को मार भगाने का संकल्प होगा। उन्होंने कहा था कि 1942 से 1947 तक के पांच वर्षों में समूचा राष्ट्र अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट हो गया था। प्रधानमंत्री मोदी कहा करते हैं कि वह देश की स्वतंत्रता के बाद पैदा हुए और उन्हें  स्वरतंत्रता संग्राम में भाग लेने का सुअवसर नहीं मिला। यही बात देश के अधिकांश युवाओं पर भी लागू होती है। भारत छोड़ो आंदोलन की 75 वीं जयंती ‘देश की खातिर अपना जीवन उत्सर्ग करने से वंचित रहे’ उन सब युवा भारत वासियों के लिए इस बात का एक मौका होगा कि वे ‘देश के लिए जिएं’ और उन सपनों को पूरा करें जो हमारे स्वततंत्रता सेनानियों ने इसके बारे में देखे थे।
संसद द्वारा ‘‘भारत छोड़ो आंदोलन’’ को यूं सम्मान दिया जाना इस अर्थ में बहुत महत्वपूर्ण है कि आज युवावर्ग स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष को इतिहास की चंद घटनाओं या फिर सिलेबस में दिए गए एक चैप्टर की तरह याद कर के भूलने लगता है, ऐसे उपभोक्तावादी दौर में किसी ऐसे आंदोलन के प्रति युवाओं का ध्यान आकर्षित किया जाना अर्थपूर्ण है जिस आंदोलन ने देश की स्वतंत्रता प्राप्ति में अहम् भूमिका निभाई। यह वही आंदोलन था जिसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने प्राणों को दांव पर लगा दिया था और ब्रिटिश सरकार को यह जता दिया था कि अब किसी भी अहिंसात्मक तरीके से आजादी ले कर रहेंगे।
गांधीजी ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद का रक्तहीन अंत कर एक नए युग की शुरुआत करना चाहते थे। गांधीजी ने समाचारपत्र ‘‘हरिजन’’ में अंग्रेजों का आह्वान करते हुए लिखा था कि “भारत को ईश्वर के भरोसे छोड़ कर चले जाओ और यदि यह अधिक हो तो उसे अराजकता की स्थिति में छोड़ दो” । इसी आह्वान को क्रियाशील रूप में लाने के लिए सन् 1942 ई. में गांधीजी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन  चलाया। उन्होंने नारा दिया “अंग्रेजों भारत छोड़ो” । भारत छोड़ो आन्दोलन चलाए जाने की स्थिति उत्पन्न होने के कई कारण थे -
क्रिप्स मिशन की असफलता से यह स्पष्ट हो गया कि अंग्रेजों का लक्ष्य भारत को स्वतंत्र करने का नहीं है। विश्व जनमत को अपने पक्ष में लाने के लिए अंग्रेजों ने इस नाटकीय स्वांग का प्रदर्शन किया था। प्रसिद्ध राजनीतिक विचारक लास्की ने भी स्पष्ट रूप से लिखा था कि चर्चिल की सरकार ने सर स्टेफर्ड क्रिप्स को भारत की समस्या का हल करने के लिए सच्चे इरादे से नहीं भेजा था। असली विचार भारत को स्वाधीनता देना नहीं, बल्कि मित्र राष्ट्रों की आंखों में धूल झोंकना था।
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान की सेना निरंतर आगे बढ़ रही थी इससे भारतीय प्रदेशों को भी खतरा उत्पन्न हो गया था। गांधीजी ने यह अनुभव किया कि हम भारत की सुरक्षा तभी कर सकते हैं जब अंग्रेज भारत छोड़ देंगे। उनका कहना था कि “अंग्रेजों, भारत को जापान के लिए मत छोड़ो। भारत को भारतीयों के लिए व्यवस्थित रूप में छोड़ जाओ”। ब्रिटिश सरकार जापान की सेनाओं  का मुकाबला करने में असफल रही।
बर्मा में रह रहे भारतीयों के साथ अंग्रेज दुर्व्यवहार करते थे। बर्मा से आने वाले भारतीय शरणार्थियों के साथ पशुवत व्यवहार किया जा रहा था। गांधीजी ने सन् 1942 में लिखा था, “भारतीय और यूरोपीय शरणार्थियों के व्यवहार में जो भेद किया जा रहा है और सेनाओं का जो बुरा व्यवहार है उससे अंग्रेजों के इरादों और घोषणाओं की तरफ अविश्वास बढ़ रहा है” ।
पूर्वी बंगाल में बहुत से लोगों को बिना मुआवजा दिए उनकी जमीनों से वंचित किया गया। सेना के लिए किसानों के घर जबरदस्ती खाली करवाए गए जिससे भारतीयों में असंतोष फैला।
देश की असंतोषजनक आर्थिक स्थिति ने भी महात्मा गांधी को भारत छोड़ो आंदोलन चलाने के लिए बाध्य किया।देश में महँगाई बहुत तेजी से बढ़ रही थी, जिससे आम जनता का जीवन दूभर हो गया था।  देश की दयनीय स्थिति के लिए गांधीजी ने अंग्रेज सरकार को जिम्मेदार माना।
देश का तत्कालीन वातावरण अंग्रेजों के विरुद्ध था।  27 जुलाई, 1942 को अंग्रेजी सरकार ने लंदन के एक ब्राडकास्ट में यह घोषित किया कि भारत को युद्ध का आधार बनाया जायेगा और इसके लिए सभी सम्भव एवं आवश्यक कारवाई की जाएगी। इससे अंग्रेजों का ध्येय और स्पष्ट हो गया। ऐसी स्थिति में कांग्रेस ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ आरम्भ करने का निश्चय किया।
मुम्बई में 7 अगस्त, 1942 को कांग्रेस का अधिवेशन प्रारम्भ हुआ। महात्मा गांधी ने समिति के समक्ष 8 अगस्त को भारत छोड़ो का अपना ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया। उस प्रस्ताव में कहा गया कि भारत में ब्रिटिश शासन का तात्कालिक अंत मित्र राष्ट्रों के आदर्शों की पूर्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसी पर युद्ध का भविष्य, स्वतंत्रता तथा प्रजातंत्र की सफलता निर्भर है।  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने पूरे आग्रह के साथ ब्रिटिश सत्ता को हटा लिए जाने की मांग की है। कांग्रेस के इसी अधिवेशन में महात्मा गांधी ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’  का नारा बुलंद किया तथा देश को करो या मरो  का संदेश दिया। महात्मा गांधी ने 140 मिनट के अपने लम्बे भाषण में कहा, “मैं फौरन आजादी चाहता हूं, आज रात को ही, कल सवेरे से पहले आजादी चाहता हूं।“
महात्मा गांधी के उस भाषण पर टिप्पणी करते हुए पट्टाभि सीतारमैय्या ने लिखा कि “गांधीजी उस दिन एक अवतार एवं पैगम्बर की प्रेरक शक्ति से प्रेरित होकर बोल रहे थे।”
गांधीजी ने अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में 13 सूत्रीय कार्यक्रम रखे। दिनांक 8 अगस्त को भारत छोड़ो प्रस्ताव पास हुआ। 9 अगस्त को महात्मा गांधी सहित सभी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। गांधीजी को आगाखां महल में कैद रखा गया और अन्य नेताओं को अहमदनगर किले में ले जाया गया। गिरफ्तारी की बात गुप्त रखी गयी। फिर भी ख़बर आग की तरह फैल गई। सरकार की दमन नीति ने जनता में विद्रोह की भावना पैदा कर दी।  जनता ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। रेलवे और पुलिस थानों को जला दिया गया। गांधीजी की जय, गांधीजी को छोड़ दो और अंग्रेजों  भारत छोड़ों के नारों से आकाश गूंज उठा। सरकार ने शांतिपूर्ण जुलूस पर लाठी चार्ज करवा दिया। एक लाख से अधिक आंदोलनकारी जेल में बंद कर दिए गए। 
सरकार का दमन चक्र बहुत कठोर था और क्रांति को दबाने के लिए पुलिस राज्य की स्थापना की गई। जनता के हिंसात्मक कार्यों और सरकारी दमन से गांधीजी का हृदय चीत्कार उठा। अतः उन्होने आत्मशुद्धि के लिए जेल में ही उपवास शुरू कर दिया। तेरह दिन के बाद गांधीजी की हालत दयनीय हो गई । किंतु गांधीजी ने सफलतापूर्वक उपवास समाप्त किया। 6 मई, 1944 को गांधीजी को जेल से रिहा करना पड़ा।
भारत छोड़ो आंदोलन का यह पूरा घटनाक्रम भले ही घटनाओं और तारीखों का एक क्रम मात्र प्रतीत हो लेकिन जरूरत है इस आंदोलन में मौजूद भावना को पहचानने की। इस आंदोलन ने भारतीयता को समूचे विश्व में प्रतिष्ठापित करते हुए दमनकारियों को खुल कर ललकारने और उनका विरोध करने की भावना को जगाया। आज जब एक ओर से पाकिस्तान और दूसरी ओर से चीन आतंक और धमकियों का सहारा ले कर प्रभावी होने की निरंतर कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में ‘‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’’ के नारे की भांति ‘‘पड़ोसी देशो आतंक और दीदीगिरी छोड़ो’’ का नारा बुलंद करने का समय है और इस नारे को अपनी प्रभुता के साथ दुनिया के सामने रखने के लिए हम ‘‘भारत छोड़ो’’ से बहुत कुछ सीख सकते हैं, प्रेरणा ले सकते हैं। निःसंदेह, देश की आजादी और प्रभुसत्ता के संदर्भ में ‘‘भारत छोड़ो’’ आंदोलन हमेशा प्रासंगिक रहेगा।
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Thursday, August 3, 2017

Dr (Miss) Sharad Singh with Greenery

सावन और हरियाली हो तो मन बाग-बाग हो जाता है...!   (03. 08. 2017)
Dr (Miss) Sharad Singh with Greenery
Dr (Miss) Sharad Singh with Greenery
Dr (Miss) Sharad Singh with Greenery
Dr (Miss) Sharad Singh with Greenery
Dr (Miss) Sharad Singh with Greenery
Dr (Miss) Sharad Singh with Greenery
Dr (Miss) Sharad Singh with Greenery
Dr (Miss) Sharad Singh with Greenery
 

Between Sagar to Bina ... एक रेलवे क्रॉसिंग का बंद फाटक.... रेल के इंतज़ार में हवाखोरी ... (02.08.2017)

Between Sagar to Bina ... एक रेलवे क्रॉसिंग का बंद फाटक .... रेल के इंतज़ार में हवाखोरी ... Dr (Miss) Sharad Singh (02.08.2017)

A Selfie via Mirror - Dr (Miss) Sharad Singh - 29.07.2017

Selfie via Mirror - Dr (Miss) Sharad Singh - 29.07.2017 at Bhopal, MP, India
During Dr (Miss) Sharad Singh at Pavas Vyakhyan Mala 2017
A Selfie via Mirror - Dr (Miss) Sharad Singh - At Bhopal - 29.07.2017