Wednesday, April 4, 2018

Social service By Dr (Miss) Sharad Singh

Social service By Dr (Miss) Sharad Singh and Dr Varsha Singh, 01.04.2018
प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी 01 अप्रैल 2018 को श्रीराम सेवा समिति ने सागर रेलवे स्टेशन पर निःशुल्क पेयजल व्यवस्था आरम्भ की। इस उद्घाटन के अवसर पर मैंने और मेरी दीदी डॉ वर्षा सिंह ने भी रेलयात्रियों को पानी पिलाया।🚰🥛इस आत्मिक सुख का अनुभव करने हेतु आमंत्रित करने के लिए भाई विनोद रामदास तिवारी का हार्दिक आभार 🙏 🌸इस अवसर पर समाजवादी चिंतक श्री रघु ठाकुर, सागर नगर विधायक श्री शैलेंद्र जैन, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री राजेंद्र जारोलिया, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री अजय तिवारी, सागर नगरनिगम अध्यक्ष श्री राजबहादुर सिंह, पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री जे पी पांडे तथा नवदुनिया के स्थानीय संपादक श्री प्रमोद चौबे आदि बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। 📌दिनांक : 01 अप्रैल 2018
Social service By Dr (Miss) Sharad Singh and Dr Varsha Singh, 01.04.2018

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Aacharan, Sagar Edition, 02.04.2018 .. Social service By Dr (Miss) Sharad Singh and Dr Varsha Singh, 01.04.2018

Navdunia, Sagar Edition, 02.04.2018  .. Social service By Dr (Miss) Sharad Singh
and Dr Varsha Singh, 01.04.2018

Dainik Bhaskar, Sagar Edition, 04.04.2018   .. Social service By Dr (Miss) Sharad Singh
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Pradesh Today, Sagar Edition, 02.04.2018  .. Social service By Dr (Miss) Sharad Singh
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Sagar Dinkar, Sagar Edition, 02.04.2018  .. Social service By Dr (Miss) Sharad Singh
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Deshbandhu, Sagar Edition, 02.04.2018  .. Social service By Dr (Miss) Sharad Singh
and Dr Varsha Singh, 01.04.2018

Monday, March 26, 2018

अमूल्य चित्र कथाक्रम-2012 लखनऊ के ... डॉ शरद सिंह

Kathakram 2012 -Lucknow- Dr (Miss) Sharad Singh

Kathakram 2012 -Lucknow- Khashi Nath Singh ji - Photo Click by Dr (Miss) Sharad Singh

प्रिय मित्रो, आज वो तस्वीरें शेयर कर रही हूं जो लखनऊ के कथाक्रम-2012 आयोजन के दौरान स्टेट गेस्ट हाऊस में सुबह के नाश्ते के पहले मेरे मोबाईल कैमरे से हमने खींची थीं। उस दौरान श्रद्धेय काशीनाथ सिंह जी और मैंने अमरीक सिंह दीप जी की पगड़ी अपने सिर पर धारण की थी.... और वह पल कम से कम मेरे लिए हमेशा अविस्मरणीय रहेगा। क्योंकि एक पवित्र पगड़ी को अपने सिर पर धारण करने के बाद जो मुझे सुखद अनुभूति हुई वह शब्दों में बयान कर पाना संभव नहीं है।
इनमें से श्रद्धेय काशीनाथ सिंह जी की तस्वीर मैंने क्लिक थी तथा शेष वहीं के एक अटैडेट ने क्लिक की थीं। तस्वीरों में हैं - श्रद्धेय काशीनाथ सिंह जी, परमानंद श्रीवास्तव जी, अमरीक सिंह दीप जी, दादा भाई दिनेश कुशवाहा जी, भाई अशोक मिश्रा जी और मैं डॉ. (सुश्री) शरद सिंह।
उन दिनों मेरे पास Nokia N73 मोबाईल हुआ करता था। ये फोटो उसी से क्लिक की गई थीं। 
 
Kathakram 2012 -Lucknow- From Left - Dr Sharad Singh, Khashi Nath Singh ji, Parmanand Shrivastav and Amrik singh Deep

Kathakram 2012 -Lucknow - Parmanand Shrivastav and Dr Sharad Singh
Kathakram 2012 -Lucknow- From Left - Amrik singh Deep , Dinesh Kushawah, Dr Sharad Singh, Ashok Mishra and Parmanand Shrivastav

Kathakram 2012 -Lucknow- From Left - Kashi Nath Singh ji , Dr Sharad Singh, Parmanand Shrivastav and Amrik singh Deep
Kathakram 2012 -Lucknow- From Left -Dinesh Kushawah, Dr Sharad Singh, Ashok Mishra and Parmanand Shrivastav

Dear Friends, Today I am sharing pictures which were taken from my mobile camera before breakfast in state guest house during the Kathakram-2012, Lucknow. At that time, the Respected Kashinath Singh ji and I used to wear on our head the 'Pagari' (Turban) of Amrik Singh Deep ji .... and that moment will always be unforgettable for me at least. Because after holding a Sacred Turban on my head, it is not possible to make a statement in the words which I have experienced.
The picture of Kashinath Singh ji was a click by me and the rest of the an attendant.
In the photographs - Respected Kashinath Singh ji, Parmanand Shrivastav ji, Amrik Singh Deep ji, Dada Bhai Dinesh Kushwaha ji, Bhai Ashok Mishra ji and I Dr. (Miss) Sharad Singh.
In those days I used to have a Nokia N73 mobile. These photos were clicked from the same.

Wednesday, March 21, 2018

चर्चा प्लस ... विश्व जल दिवस (22 मार्च) पर विशेष : जल रहेगा तो जीवन रहेगा - डॉ. शरद सिंह

Dr (Miss) Sharad Singh
चर्चा प्लस
विश्व जल दिवस (22 मार्च) पर विशेष :
जल रहेगा तो जीवन रहेगा
- डॉ. शरद सिंह

जल ही जीवन है वर्ष 2018 के लिए जल दिवस की थीम रखी गई है -‘नेचर फॉर वाटर’’ यानी ‘‘जल के लिए प्रकृति’’। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी और प्राकृतिक तत्वों में संतुलन बना रहेगा तो जल भी बचा रहेगा। हमें याद रखना होगा कि दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन शहर में आगामी अप्रैल माह से 4 लाख लोगों को नल बंद करने की योजना बना रहा है। और वह दिन होगा -‘जीरो डे’। कहीं हम भी इसी भविष्य की ओर तो नहीं बढ़ रहे? जो जल रहेगा तो जीवन रहेगा, वरना बिन पानी सब सून.....
विश्व जल दिवस (22 मार्च) पर विशेष : जल रहेगा तो जीवन रहेगा - डॉ. शरद सिंह - चर्चा प्लस  - Lekh for Column - Charcha Plus by Dr Sharad Singh in Sagar Dinkar Dainik

वर्ष 2018 के लिए जल दिवस की थीम रखी गई है -‘नेचर फॉर वाटर’’ यानी ‘‘जल के लिए प्रकृति’’। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी और प्राकृतिक तत्वों में संतुलन बना रहेगा तो जल भी बचा रहेगा। हमें याद रखना होगा कि दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन शहर में आगामी अप्रैल माह से 4 लाख लोगों को नल बंद करने की योजना बना रहा है। और वह दिन होगा -‘जीरो डे’। मेरी पीढ़ी तक के वे लोग जिन्होंने हिन्दी माध्यम सरकारी स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा पाई होगी उन्होंने ककहरा के अभ्यास में यह पाठ अवश्य पढ़ा होगा-‘घर चल, जल भर‘। हमें जल का महत्व हर कदम पर सिखाया और समझाया गया लेकिन मानो हमने अपने तमाम पाठ बहुत जल्दी भुला दिए। हमारी लापरवाहियों के कारण जल का संकट आज एक वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है। इस संकट को महसूस करते ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने जल संरक्षण की ओर सारी दुनिया का ध्यान आकृष्ट करने का निश्चय किया और वर्ष 1993 में संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा के द्वारा प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को विश्व जल संरक्षण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। जल का महत्व, आवश्यकता और संरक्षण के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये इसे पहली बार वर्ष 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में “पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन” की अनुसूची 21 में आधिकारिक रुप से जोड़ा गया था और वर्ष 1993 से इस उत्सव को मनाना शुरु किया। वर्ष 2017 के लिए थीम थी “अपशिष्ट जल प्रबंधन“। जिसे हम आत्मसात नहीं कर सके। सच तो यह है कि हमारी योजनाओं और उन योजनाओं के अमल होने में दो ध्रुवों जितनी दूरी होती है। केन्द्र, राज्य, निकाय आदि हर स्तर पर बड़ी-बड़ी बातें करते हुए हमने अपशिष्ट जल के प्रबंधन की योजनाओं पर हवाई मंथन किया। क्रियान्वयन के मामले में हमेशा की तरह फिसड्डी रहे। जबकि देश के लगभग हर शहर और हर गांव में पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। किसान नहरों और बांधों से, यहां तक कि पेयजल की सप्लाई लाईनों को तोड़ कर, पंक्चर कर के पानी चुराने को विवश हैं। जो पानी पीने के लिए काम में लाया जाना चाहिए उससे खेत सिंचते हैं या फिर उसका अपव्यय कर के उसे नालियों में बहा दिया जाता है। यह सारी अव्यवस्थाएं और अपव्यय इसलिए है कि हम जल प्रबंधन की बातें करना भर जानते हैं, जल प्रबंधन करना नहीं।
हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए जल के अनेक स्रोत कुओं, बावड़ियों और तालाबों के रूप में हमारे लिए छोड़े लेकिन हम इतने लापरवाह निकले कि उन्हें ढंग से सहेज भी नहीं पा रहे हैं। देश भर में हज़ारों कुए, तालाब और बावड़ियां सूख गईं सिर्फ़ हमारी लापरवाही के कारण। आज भी अनेक कुए ऐसे हैं जो तिल-तिल कर मर रहे हैं। उनका पानी प्रदूषित हो चुका है। हम उस पानी का प्रदूषण दूर कर उसे उपयोगी बना सकें इसके बदले मानो प्रतीक्षा करते हैं कि कब वह कुआ मर जाए और उस ज़मीन पर कोई रिहाइशी बिल्डिंग या शॅापिंग काम्प्लेक्स बना सकें। दुख की बात है कि हम अपनी भावी पीढी के लिए कितने और कैसे जलस्रोत छोड़ जाएंगे, यह भी नहीं सोच रहे हैं। मुझे आज के इस हालात पर राजा मिडास की कहानी याद आती है। यूनानी राजा मिडास को धन-संपत्ति की इतनी अधिक भूख थी कि उसने देवताओं से यह वरदान मांग लिया कि वह जो भी छुए वह सोने में बदल जाए। मिडास वरदान पा कर बेहद खुश हुआ। उसका महल, उसका बिस्तर, उसकी सारी वस्तुएं उसके छूते ही सोने की बन गईं। लेकिन जल्दी ही उसे परेशानियों का सामना करना पड़ा। क्यों कि उसका भोजन-पानी भी उसके छूते ही सोने में बदल गया। यहां तक कि जब उसने अपनी बेटी को दुआ तो वह भी सोने की गुड़िया में बदल गई। तब उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और वह रो-रो कर देवताओं से माफी मांगने लगा। काल्पनिक कथाओं में देवता प्रसन्न हो कर माफ कर देते हैं लेकिन यदि हम जलस्रोतों को सुखा कर पर्यावरण से खिलवाड़ करते रहेंगे तो हम स्वयं को माफ करने के योग्य भी नहीं रहेंगे। आखिर प्रत्येक प्राणी के लिए जल का होना जरूरी है। पानी के बिना कोई भी प्राणी अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकता है। अब तो इस बात की भी संभावना व्यक्त की जाने लगी है कि यदि तृतीय विश्वयुद्ध हुआ तो वह पानी के लिए ही होगा। दरअसल, पानी किसी भी प्राणधारी की बुनियादी आवयकता होती है।
क्या कभी किसी ने सोचा था कि एक दिन देश ऐसी भी स्थिति आएगी कि पानी के लिए धारा 144 लगाई जाएगी अथवा पेयजल के स्रोतों पर बंदूक ले कर चौबीसों घंटे का पहरा बिठाया जाएगा? किसी ने नहीं सोचा। लेकिन वर्ष 2016 की गर्मियों में ऐसा ही हुआ। पिछले दशकों में पानी की किल्लत पर गंभीरता से नहीं सोचे जाने का ही यह परिणाम है कि शहर, गांव, कस्बे सभी पानी की कमी से जूझते दिखाई पड़े। देश के कई हिस्सों में पानी की समस्या अत्यंत भयावह रही। विगत वर्ष महाराष्ट्र में कृषि के लिए पानी तो दूर, पीने के पानी के लाले पड़ गए थे। जलस्रोत सूख गए थे। जो थे भी उन पर जनसंख्या का अत्यधिक दबाव था। सबसे शोचनीय स्थिति लातूर की थी। पीने के पानी के लिए हिंसा और मार-पीट की इतनी अधिक घटनाएं सामने आईं। कलेक्टर ने लातूर में 20 पानी की टंकियों के पास प्रशासन को धारा 144 लगानी पड़ी। मध्यप्रदेश में भी पानी का भीषण संकट मुंह बाए खड़ा रहा। प्रदेश की करीब 200 तहसीलों सूखाग्रस्त और 82 नगरीय निकायों में भी गम्भीर पेयजल संकट का सामना करते रहे। मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में और भी अजीब स्थिति रही। वहां की नगर पालिका के चेयरमैन के अनुसार किसान पानी न चुरा पाएं, इसलिए नगरपालिका की ओर से लाइसेंसी हथियार शुदा 10 गार्ड तैनात किए। गर्मी का मौसम फिर दस्तक दे रहा है और यह दौर फिर आने वाला है।
इंसान जल की महत्ता को लगातार भूलता गया और उसे बर्बाद करता रहा, जिसके फलस्वरूप आज जल संकट सबके सामने है। आंकड़े बताते हैं कि विश्व के 1.5 अरब लोगों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। प्रकृति इंसान को जीवनदायी संपदा जल एक चक्र के रूप में प्रदान करती है, इंसान भी इस चक्र का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। चक्र को गतिमान रखना प्रत्येक व्यक्ति की ज़िम्मेदारी है। इस चक्र के थमने का अर्थ है, जीवन का थम जाना। प्रकृति के ख़ज़ाने से जितना पानी हम लेते हैं, उसे वापस भी हमें ही लौटाना है। धरातल पर तीन चौथाई पानी होने के बाद भी पीने योग्य पानी एक सीमित मात्रा में ही उपलब्ध है। उस सीमित मात्रा के पानी का इंसान ने अंधाधुध दोहन किया है। पेयजल की अनुपलब्धता वाले क्षेत्रों में पीने के पानी के लिए प्रत्येक महिला को लगभग औसतन 6 कि.मी. की पदयात्रा करनी पड़ती है।
प्रत्येक क्षेत्रीय संस्कृति में प्रकृति के महत्व को जीवन से बड़ी सहजता और सुंदरता से जोड़ा गया है। बुन्देली संस्कृति में ही देखें तो हम पाएंगे कि प्रकृति के प्रत्येक तत्वों से किस प्रकार मानवीय रिश्ते जोड़े गए हैं। मकरसंक्रांति के अवसर पर गाए जाने वाले ‘बाम्बुलिया’ नामक लोकगीतों में नर्मदा तथा अन्य नदियों से जिस प्रकार रिश्तों को जताया जाता है वह उल्लेखनीय है। नर्मदा नदी के दर्शन करने पहुंचने वाली टोली नर्मदा के पास पहुंचती है तो गा उठती है-
नरमदा मैया ऐसे तौ मिलीं रे
ऐसे तौ मिलीं के जैसे मिले मताई औ बाप रे
नरबदा मैया हो.....
नरबदा मोरी माता लगें रे
अरे, माता तौ लगें रे, तिरबेनी लगें मोरी बैन रे
नरबदा मैया हो.....
हमने अपने अतीत में प्रकृति को अपने जीवन के हर सुख-दुख से जोड़ा और उसे अपने संस्कारों को साथी बनाया। जैसे, विवाह के अवसर पर विभिन्न पूजा-संस्कारों के लिए जल की आवश्यकता पड़ती है। यह जल नदी, तालाब अथवा कुए से लाया जाता है। अनेक क्षेत्रों में प्रसव के बाद प्रसवा के दूध की कुछ बूंदें कुए के जल में डाली जाती हैं जो एक जननी का दूसरी जननी के प्रति आभार प्रदर्शन और बहनापे का प्रतीक होता है। सरकारी योजनाओं से कहीं अधिक हमें जरूरत है अपने जल स्रोतों से इसी प्रकार के आत्मिक संबंधों को पुनर्जीवित करने की। जब हम प्रकृति के तत्वों को अपना सगा-संबंधी समझेंगे तभी हम उनके क्षरण को रोक सकेंगे और प्रकृतिक तत्वों के क्षरण को रोक कर जल की उपलब्धता भी बढ़ा सकेंगे। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जल संरक्षण के लिए जरुरत है उस जागरुकता की, जिसमें हर आयुवर्ग का व्यक्ति पानी को बचाना अपना धर्म या अपना बुनियादी कर्त्तव्य समझे।
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(दैनिक सागर दिनकर, 21.03.2018 )
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Saturday, March 17, 2018

Dr (Miss) Sharad Singh as Main Speaker at PG College Garhakota

Dr (Miss) Sharad Singh as Main Speaker at PG College Garhakota- 12.03.2018 
12 मार्च 2018 शासकीय पी.जी. काॅलेज गढ़ाकोटा (सागर) के सभागार में मुख्य वक्ता के रूप में मैंने (डाॅ.शरद सिंह) डाॅ.घनश्याम भारती द्वारा संपादित पुस्तक ‘ हिन्दी की प्रतिनिधि कहानियां’ के लोकार्पण एवं प्रतिभा सम्मान समारोह कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डाॅ.एस.एम.पचौरी, मुख्य आतिथि पं. अभिषेक भार्गव, विशिष्टअतिथि नगर पालिका गढ़ाकोटा के अध्यक्ष भरत चौरसिया, उपाध्यक्ष मनोज तिवारी, जनभागीदारी समिति अध्यक्ष महेश सिंह ठाकुर उपस्थित थे ।
तस्वीरें उसी अवसर की....
Dr (Miss) Sharad Singh as Main Speaker at PG College Garhakota- 12.03.2018

Dr (Miss) Sharad Singh as Main Speaker at PG College Garhakota- 12.03.2018

Dr (Miss) Sharad Singh as Main Speaker at PG College Garhakota- 12.03.2018

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Dr (Miss) Sharad Singh as Main Speaker at PG College Garhakota- 12.03.2018

Dr (Miss) Sharad Singh as Main Speaker at PG College Garhakota- 12.03.2018

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