Saturday, July 21, 2018

Dr Miss Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018 by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper  and Hero Sagar Central
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कल 08 मार्च 2018 को दैनिक समाचार पत्र "पत्रिका" एवं हीरो सागर सेंट्रल द्वारा एक भव्य समारोह में विभिन्न कार्यक्षेत्रों विशिष्ट महिलाओं को सम्मानित किया गया । इस अवसर पर मुझे (डॉ शरद सिंह को) तथा मेरी दीदी डॉ वर्षा सिंह को भी सम्मान प्रदान किया गया। तस्वीरें उसी समारोह की ...
Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper
Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Varsha Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Central Sagar

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper
and Hero Sagar Central
Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper
and Hero Sagar Central
Dr (Miss) Sharad Singh Honored on International Women's Day 2018  by Patrika News Paper and Hero Sagar Central

हार्दिक धन्यवाद दैनिक समाचार पत्र "पत्रिका" एवं हीरो सागर सेंट्रल 🙏💐

चर्चा प्लस : व्हाट्सएप्प को घातक हथियार बना रहा है ‘मॉब लिंचिंग’ - डॉ. शरद सिंह ‘दबंग मीडिया’ में

मुझे प्रसन्नता है कि ‘दबंग मीडिया’ ने मेरे लेख को प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
आभारी हूं 'दबंग मीडिया' की और भाई हेमेन्द्र सिंह चंदेल बगौता की जिन्होंने मेरे इस समसामयिक लेख को और अधिक पाठकों तक पहुंचाया है.... 

चर्चा प्लस : व्हाट्सएप्प को घातक हथियार बना रहा है ‘मॉब लिंचिंग’  - डॉ. शरद सिंह in Dabang Media

Wednesday, July 18, 2018

व्हाट्सएप्प को घातक हथियार बना रहा है ‘मॉब लिंचिंग’ - डॉ. शरद सिंह .. चर्चा प्लस

Dr (Miss) Sharad Singh
चर्चा प्लस : 
   व्हाट्सएप्प को घातक हथियार बना रहा है ‘मॉब लिंचिंग’
   - डॉ. शरद सिंह
जहां एक ओर दुनिया में भारत की एक सुदृढ़ और प्रभावी राष्ट्र की छवि बनने की आया की जा रही है, वहीं मॉब
लिंचिंग द्वारा किसी निर्दोष की नृशंसतापूर्वक हत्या की जा रही हो तो दुनिया तो उंगली उठाएगी ही। जब बेंगलुरु में गूगल का सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंधी भीड़ की हैवानीयत का शिकार होता है तो अमेरिकी न्यूज एजेंसी तत्काल आंकड़ा देती है कि मई 2018 तक 25 निर्दोष व्यक्ति मॉब लिंचिंग में अपने प्राण गवां चुके हैं और इसमें व्हाट्सएप्प पर फैलाई गई अफवाह की अहम भूमिका रही। अब यदि इस तथ्य को सिर्फ़ यह कह कर ठुकरा दिया जाए कि अमेरिका में भी हत्याएं होती हैं, तो यह भीरुता ही होगी। ऐसी घटनाएं जघन्य हैं और इन्हें राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझा कर इनकी गंभीरता की अनदेखी नहीं की जा सकती है।  
Charcha Plus - Whatsapp Ko Ghatak Hathiyar Bana Raha Hai Mob Lyching  - Charcha Plus Column by Dr Sharad Singh
    ‘मॉब
लिंचिंग’ अर्थात् अफवाह के आधार पर भीड़ द्वारा किसी व्यक्ति को नृशंसतापूर्वक जान से मार डालना। बच्चा चोरी की अफवाहों के चलते पीट-पीट कर मार डालने की घटनाओं में एक घटना और जुड़ गई जब कर्नाटक के बीदर जिले में बच्चा चोरी के शक में चार युवकों पर भीड़ ने हमला बोल दिया जिनमें एक की मौत हो गई।  बच्चा चोर के शक में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने का एक और मामला सामने आया है। कर्नाटक में बीदर जिले के एक गांव में शुक्रवार को भीड़ ने हैदराबाद निवासी और गूगल में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर मोहम्मद आजम उस्मानसाब की हत्या कर दी, जबकि उसके तीन दोस्त घायल हो गए। मारे गए युवक की उम्र मात्र 28-30 वर्ष थी। उसकी हत्या के साथ ही समाप्त हो गए उसके और उसके परिवार के सपने, खुशियां और भविष्य। वे तीन दोस्त थे जिनमें एक कतर निवासी मोहम्मद सलहम था जो उसका कजिन था। वह छुट्टियां मनाने भारत आया था। हैदराबाद लौटते समय वे तस्वीरें खींचने के लिए एक छोटे से गांव के पास रुक गए। वहां कुछ स्कूली बच्चों को देखकर उन्होंने उन्हें चॉकलेट खाने के लिए दीं। यह चॉकलेट सलहम कतर से लाया था। एक विदेशी समेत कुछ अजनबियों द्वारा बच्चों को चॉकलेट देने पर स्थानीय लोगों ने उन्हें बच्चा चोर समझ लिया। इस बीच उनकी तस्वीरें वाट्सएप ग्रुप में फैल गईं। मारे गए युवक का कसूर यही था कि वह दुर्भावनाग्रस्त किसी ऐसे व्यक्ति के व्हाट्सएप्प मैसेज का शिकार हो गया जो निर्दोषों को मार कर अराजकता का माहौल खड़ा करना चाहता था। व्हाट्सएप्प मैसेज को वायरल करने और उसे सच मान लेने वाले जुनूनी इंसानों का भी विवेक मानो मर गया था जो उन्होंने एक पल को भी नहीं सोचा कि यह ख़बर सच है या नहीं? यदि उस ख़बर के सच होने का अंदेशा था भी, तो मात्र संदेह के आधार पर किसी को पीट-पीट कर मार डालने का अधिकार किसी को भी नहीं है। देश में आखिर कानून व्यवस्था भी तो है और कानून व्यवस्था की हालत इतनी भी खराब नहीं है कि उसे पूरी तरह अविश्वास के कटघरे में खड़ा कर दिया जाए। आखिर वह कानून व्यवस्था ही है जिसने इस नृशंस हत्या के अपराध में 30 लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए लोगों में वाट्सएप ग्रुप का एक एडमिनिस्ट्रेटर भी शामिल है। उसने ही बच्चा चोर गिरोह के बारे में अफवाह फैलाई थी और भीड़ को उकसाया था। साथ ही उस व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया जिसने हमले की तस्वीरें खीचीं थीं और उन्हें फैलाया था।
इस घटना ने सारी दुनिया के सामने भारत की छवि को जबर्दस्त धक्का पहुंचाया है। अमेरिकी न्यूज एजेंसी सीएनएन ने याद दिलाया कि मई माह तक भारत में 25 लोग मॉब लिचिंग के शिकार हो चुके है। सीएनएन के अनुसार पिछले साल 134 मिलियन स्मार्टफोन भारत में बिके जिसके चलते हर तीसरे भारतीय के पास स्मार्टफोन मौजूद है। ब्रिटिश न्यूज एजेंसी बीबीसी ने इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से समाचार जारी किया कि ये संदेश एक स्थानीय व्यक्ति ने भेजा था। उस व्यक्ति ने व्हाट्सएप्प पर संदेश भेजा था, “लाल कार में जा रहे इन लोगों को बच के न जाने दिया जाए, ये बच्चा चोर हैं।“ इस संदेश के साथ बच्चों को चॉकलेट बांट रहे चार लोगों का वीडियो भी था। ये संदेश कर्नाटक के बीदर ज़िले के मुरकी और आसपास के गांवों में व्हाट्सएप्प समूहों में भेजा गया था। स्वयं भारतीय समाचार चैनल एनडीटीवी ने भयावह आंकड़े सामने रखे कि एक साल के भीतर भारत के नौ राज्यों में व्हॉट्सएप्प पर बच्चा चोरी की अफवाहों के कारण 27 मासूम लोगों को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। एक आंकड़ा और कि एक ही तारीख 17 मई 2018, जिस दिन झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में बच्चा चोरी की अफ़वाहों के बीच दो जगहों पर उग्र भीड़ ने छह लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।
जर्मन न्यूज एजेंसी डॉचवैले ने मॉब लिचिंग के विरोध में किए गए एक प्रदर्शन की तख़्ती की फोटो के साथ बेंगलुरु की घटना को जारी किया। तख़्ती पर लिखा था-‘‘वी वुंट लेट हिन्दुस्तान बिकम लिंचिस्तान। वी शेल डिफेण्ड द ह्यूमेनिटी टिल द वेरी एण्ड’’। अर्थात् ‘‘हम हिन्दुस्तान को
लिंचिस्तान नहीं बनने देंगे। हम अंतिम दम तक मानवता की रक्षा करेंगे।’’ जब कोई विदेशी न्यूज ऐजेंसी इस तरह के समाचार सप्रमाण प्रकाशित या प्रमाणित करे तो देश का सिर शर्म से झुकना स्वाभाविक है।
ऐसे समाचारों का प्रतिकार करने अथवा लज्जित होने से समस्या सुलझने वाली नहीं है। वस्तुतः ढूंढना होगा उन कारणों को जो इस तरह की घटनाओं के पीछे निहित हैं। पता लगाना होगा उन अवसरवादियों का जो अपनी दुर्भावना को पूरा करने के लिए व्हाट्सएप्प जैसे लोगों को लोगों को जोड़ने वाले साधन को लोगों के खिलाफ एक हथियार के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। सचेत रहना होगा उन ग्रुप मेंबर्स को जो अपने एडमिन पर भरोसा करके अपराध के सहभागी बन बैठते हैं। कोई भी ऐसी अफवाह यदि व्हाट्एप्प के माध्यम से फोन पर आए तो उसे पुलिस के पास कम्प्लेंट के रूप में फार्वर्ड कर देना बेहतर होगा। लेकिन बहुत से लोग पुलिस से दूर रहना ही पसंद करते हैं, ऐसे लोग को चाहिए कि वे संदिग्ध मैसेज को तत्काल डिलीट कर दे। लगातार इस तरह की हिंसक घटनाओं के बाद तो होश आ ही जाना चाहिए। जब व्हाट्सएप्प उपयोगकर्त्ता सजग रहेंगे तो ऐसी नृशंस घटनाएं भी नहीं घट सकेंगी।
हिंसक और अराजकता फैलाने वाले मैसेज को वायरल करने से पहले एक पल ठहर कर सोचना जरूरी है कि दूर दूसरे शहर में मौजूद कोई अपना परिचित या कोई परिवारजन भी कभी ऐसी उन्मादी भीड़ का शिकार हो सकता है, यदि ऐसी घटनाएं नहीं थमीं तो।    
                 -------------------

#शरदसिंह #सागरदिनकर #दैनिक #मेराकॉलम     #Charcha_Plus #Sagar_Dinkar #Daily
#SharadSingh #MobLynching #Bengaluru #बेंगलुरू #मॉबलिंचिंग #हिंसा #अराजकता

Tuesday, July 10, 2018

चर्चा प्लस ... बच्चियों की सुरक्षा के लिए लेने होंगे कठोर निर्णय - डॉ. शरद सिंह

Dr (Miss) Sharad Singh
चर्चा प्लस
बच्चियों की सुरक्षा के लिए लेने होंगे कठोर निर्णय
- डॉ. शरद सिंह
भोपाल, फिर मंदसौर और अब सतना .... बच्चियों की उम्र चार से छः वर्ष और बलात्कार जैसा जघन्य अपराध, वह भी बर्बरता की सारी सीमाएं तोड़ते हुए। चार से छः वर्ष की जिस उम्र में नन्हीं बच्चियां सही ढंग से गुड्डे-गुड़ियों से भी नहीं खेल पाती हैं, उस उम्र में उन्हें जिस दरिंदगी का शिकार बनाया जा रहा है, यह किसी भी प्रकार से क्षम्य नहीं है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा है कि वे पूरा प्रयास करेंगे कि ऐसे बलात्कारियों को फांसी की सजा दी जाए। यही मांग कर रही है आम जनता भी। कठोर दंड ही अंकुश लगा सकता है इस जघन्य अपराध पर। 
Charcha Plus -Bachchiyo Ki Suraksha Ke Liye Lene Honge Kathor Nirnay - Charcha Plus Column by Dr Sharad Singh
मंदसौर की घटना के घाव अभी ताज़ा ही थे कि सतना में एक और वारदात हो गई। मानो बलात्कारियों ने मानवता को तो कही दफ्न कर दिया है और उनके मन में कानून का भय रह नहीं गया है। अपराध अन्वेषण ब्यूरो की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार बलात्कार के मामले में मध्यप्रदेश पहले स्थान पर है। प्रदेश में बलात्कारियों के हौसले इतने बुलन्द है कि प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ अरसा पहले एक नन्हीं बच्ची को बलात्कारी अपनी दरिंदगी का शिकार बना कर एक मंत्री के आवास के पास फेंक गया।
पिछले कुछ समय में इस तरह के अपराध तेजी से बढ़े हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में सात साल की बच्ची के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की वारदात के बाद सतना जिले में चार साल की मासूम के साथ एक दरिंदे ने हैवानियत की। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, उचेहरा थाने के नजदीक परसमनिया पठार इलाके में चार साल की एक बच्ची सोमवार को गंभीर हालत में पाई गई। बच्ची अपने आंगन में सो रही थी, तभी आरोपी महेंद्र सिंह (23) मासूम को अपने साथ ले गया और दुष्कर्म के बाद जब उसे लगा कि बच्ची की जान चली गई है, तो उसे निर्जन स्थान पर फेंककर भाग गया। बेटी के लापता होने पर परिजन और गांव वाले उसे तलाशने निकले तो वह गंभीर हालत में मिली। उसे अस्पताल ले जाया गया। गांव वालों ने आरोपी की खोजा और उसकी पिटाई करने के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया। बताया जाता है कि उक्त आरोपी युवक संविदा शिक्षक के पद पर कार्य कर चुका है जो कि और अधिक चिंतनीय बात है। यदि शिक्षाजगत में ऐसे अपराधी मानसिकता वाले व्यक्ति काम करेंगे तो नाबालिगों पर हमेशा अपराध का साया मंडराता रहेगा।
कठुआ की घटना से द्रवित मेनका गांधी पॉक्सो यानी यौन उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण के क़ानून में अब बलात्कार के लिए फांसी की सज़ा जोड़ने की अपील की थी। इससे पहले बीजेपी शासित तीन राज्यों- राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा में नाबालिग से बलात्कार पर क़ानून बना चुकी है। इस संदर्भ में कुछ लोगों ने प्रश्न उठाए थे कि बलात्कार के लिए फांसी की सज़ा होगी तो मुजरिम डरेंगे यह सच है लेकिन फांसी कैसे होगी? क्या किसी सुनवाई के बिना किसी को फांसी की सज़ा सुनाई जा सकती है? किसी को फांसी देने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आरोपी सचमुच बलात्कारी है या नहीं? जैसे उन्नाव के मामले में उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने कहा था कि उनके पास आरोपी के खि़लाफ़ कोई सबूत नहीं है. तो बिना किसी सबूत के किसी को कैसे फांसी दे सकते हैं ? लेकिन यह भी विचारणीय है कि ऐसे मामलों में पुलिस के दायित्व को कम कर के नहीं आंका जा सकता हैं गवाह और सबूत पुलिस जुटाती है। यह उसका काम है। यदि कोई प्रबल राजनीतिक दबाव न हो तो वह अपने कर्त्तव्य को भली-भांति निभाती है। बेहतर यह है कि बलात्कारियों के बचने के रास्तें ढूंढने के बजाए पुलिस का मनोबल बढ़ाया जाए जिससे वह तपरता से सबूत जुटा सके। जब सबूत होंगे तो बलात्कारी को फांसी के फंदे से कोई नहीं बचा सकेगा।
आए दिन बढ़ती जा रही बलात्कार की घटनाओं को देखते हुए कड़े-से कड़ा दंड जरूरी हो चला हैं एक ऐसा दंड जिससे अपराधी अपराध करने से पहले सौ बार सोचे। भोपाल, फिर मंदसौर और अब सतना....बच्चियों की उम्र चार से छः वर्ष और बलात्कार जैसा जघन्य अपराध, वह भी बर्बरता की सारी सीमाएं तोड़ते हुए। चार से छः वर्ष की जिस उम्र में नन्हीं बच्चियां सही ढंग से गुड्डे-गुड़ियों से भी नहीं खेल पाती हैं, उस उम्र में उन्हें जिस दरिंदगी का शिकार बनाया जा रहा है, यह किसी भी प्रकार से क्षम्य नहीं है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा है कि वे पूरा प्रयास करेंगे कि ऐसे बलात्कारियों को फांसी की सजा दी जाए। यही मांग कर रही है आम जनता भी। कठोर दंड ही अंकुश लगा सकता है इस जघन्य अपराध पर।
------------------------

(दैनिक सागर दिनकर, 04.07.2018 )
          ---------------------------

#शरदसिंह#सागरदिनकर#दैनिक#मेराकॉलम#Charcha_Plus#Sagar_Dinkar#Daily
#SharadSingh#rape#girls#punish#ChiefMinister#Shivraj Singh #PascoAct#भोपाल#मंदसौर#सतना#बच्चियां#बलात्कार#फांसी#सज़ा#अपराध#मुख्यमंत्री#शिवराजसिंह#पास्कोएक्ट

चर्चा प्लस ... और वे निकल पड़ीं सड़कों पर आधी रात को - डॉ. शरद सिंह

Dr (Miss) Sharad Singh
चर्चा प्लस  
... और वे निकल पड़ीं सड़कों पर आधी रात को
           - डॉ. शरद सिंह
सऊदी अरब में महिलाओं को ड्राइविंग का अधिकार देने का ऐतिहासिक फैसला रविवार को लागू कर दिया गया। वे आधी रात को सड़कों पर निकल पड़ीं अपनी खुशी को प्रकट करनेके लिए। स्पष्ट है कि उस देश में महिलाएं अधिकार पाती जा रही हैं जहां सदियों से औरतों के अधिकारों के बारे में ठीक से सोचा भी नहीं गया। लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ने वाली साउदी अरब की महिलाओं ने गोया दुनिया भर के देशों को समझा दिया है कि यदि देश का अर्थतंत्र सुदृढ़ करना है तो महिलाओं की क्षमता पर विश्वास करना सीखना होगा और उन्हें सड़ी-गली रूढ़ियां से आजाद करना होगा। 
Charcha Plus -Aur Ve Nikal Padi Sadakon Pr Adhi Raat Ko - Charcha Plus Column by Dr Sharad Singh
               
सऊदी अरब में महिलाओं को ड्राइविंग का अधिकार देने का ऐतिहासिक फैसला 24 जून 2018 को लागू कर दिया गया। स्मरण रहे कि यह ऐतिहासिक फैसला कोई सरकारी रियायत या सामाजिक उपकार नहीं है। इसके लिए साउदी महिलाओं ने अट्ठाईस वर्ष लम्बा संघर्ष किया। इसकी शुरुआत तब हुई थी जब सऊदी की 40 महिलाओं ने नवंबर 1990 में रियाद में एक साथ गाड़ी चलाई। यह प्रतिबंध के खिलाफ पहली बार सार्वजनिक तौर पर विरोध था। इन महिलाओं को एक दिन के लिए जेल हुई और साथ ही पासपोर्ट भी जब्त कर लिया गया था।
सितंबर 2007 में महिला ऐक्टिविस्ट्स ने तत्कालीन किंग अब्दुल्लाह को ड्राइविंग से बैन हटाने के लिए 1000 हस्ताक्षरों के साथ एक याचिका दी। इसके बाद मार्च 2008 में वजेहा-अल हुवैदर नाम की एक ऐक्टिविस्ट ने यू-ट्यूब पर गाड़ी चलाते हुए एक विडियो पोस्ट किया। जून 2011 को फेसबुक पर ‘वूमेन टू ड्राईव’ नाम का कैंपेन लॉन्च किया गया। इससे भड़क कर सरकार की ओर से कठोर कदम उठाए गए और महिलाओं की ड्राइविंग से जुड़े 70 केस दर्ज किए गए। कुछ को गिरफ्तार भी किया गया। इस भी महिलाएं न डरीं और न रुकीं। अक्टूबर 2013 को दर्जनों महिलाओं ने ड्राइविंग करते हुए अपनी फोटो और विडियोज ऑनलाइन शेयर किए। संघर्ष जारी रहा। नवंबर 2014 में ऐक्टिविस्ट लूजा इन हथलाउल और मायसा अल अमूदी को 73 दिनों तक हिरासत में रखा गया। यूएई से सऊदी अरब तक ड्राइव करने की कोशिश के बाद इन पर आतंकवाद से जुड़े अपराध दर्ज किए गए। महिलाओं द्वारा अपना सांर्ष जारी रखने और लगातार मांग किए जाते रहने पर किंग सलमान ने मामले को अपने संज्ञान में लिया और सितंबर 2017 को महिलाओं के ड्राइविंग को मंजूरी का आदेश दिया। फिर भी इसे लागू होने में लगभग नौ माह लग गए। अंततः 24 जून 2018 को महिलाओं को ड्राइविंग सीट मिल ही गई।
साउदी महिलाओं ने इस फैसले को सही ठहराने वाला एक धमाकेदार उदाहरण भी दुनिया के सामने रख दिया। सऊदी अरब में महिलाओं के ड्राइविंग करने पर लगा प्रतिबंध हटने के बाद साउदी महिला असील अल हमद फॉर्मूला वन कार चलाने वाली पहली महिला बन गईं। उन्होंने यह उपलब्धि फ्रांस में हासिल की। असील ने फ्रेंच ग्रां प्री से पहले ‘ले कास्टेलेट सर्किट’ पर यह कार चलाई। एफ वन टीम रैनो ने उन्हें यह अवसर दिया। असील रैनो टीम की ’पैशन परेड’ का हिस्सा हैं। सऊदी अरब की मोटर स्पोर्ट्स की पहली महिला सदस्य असील वही कार चलाती दिखीं जिससे 2012 में अबू धाबी में किमी राइकोनेन ने जीत दर्ज की थी।
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का यह फैसला देश के सबसे बड़े सामाजिक सुधारों में से एक है। यह उनके तेल पर अर्थव्यवस्था की निर्भरता खत्म करने की योजना का भी मुख्य हिस्सा है। दाऊद बताते हैं कि अगर हर साल देश में महिलाओं के रोजगार से जुड़ने का आंकड़ा एक प्रतिशत भी रहता है तो यह श्रमिक बाज़ार में हर साल 70,000 और महिलाओं को जोड़ेगा। महिलाओं की भागीदारी आर्थिक विकास दर में 0.9 प्रतिशत का योगदान देगी। अकेले इस फैसले से तेल पर आधारित अर्थव्यवस्था वाले देश सऊदी को अरबों डॉलर की कमाई होगी। बताया जा रहा है कि साल 2030 तक अकेले इतनी कमाई होने की उम्मीद है जितनी सरकारी कंपनी अरमाको के 5 प्रतिशत शेयर को बेचने से होने वाली है। विगत वर्ष सितंबर में किंग सलमान ने अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान द्वारा सुधारों को लागू किए जाने के बाद महिलाओं के ड्राइविंग पर लगे बैन को हटाने का आदेश दिया था।
सरकार के इस फैसले के बाद रविवार को महिलाएं व्यस्त सड़क पर वाहन चलाती नजर आईं। रियाद में गाड़ियों के काफिले के साथ भी महिलाएं देखी गईं। इस फैसले के साथ ही दुनिया में अब ऐसा कोई देश नहीं बचा है, जहां महिलाओं की ड्राइविंग पर रोक हो। दुनिया भर की महिलाओं ने सऊदी अरब के इस फैसले का खुल कर स्वागत किया। सऊदी अरब के इस फैसले को वहां के आर्थिक जगत में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि के रूप में देखा जा रहा है। दुबई में रहने वाले और ब्लूमबर्ग में मध्य पूर्व के चीफ अर्थशास्त्री के रूप में काम करने वाले जियाद दाऊद ने इस पर बताया, ’ड्राइविंग से बैन हटाने पर नौकरी करने वाली महिलाओं की संख्या में वृद्धि के आसार हैं, इससे पेशेवरों की संख्या बढ़ेंगी और यह कुल आय में वृद्धि करेगा।’ ब्लूमबर्ग इकनॉमिक्स के मुताबिक, इस फैसले से 2030 तक सऊदी 90 अरब डॉलर से ज्यादा कमा सकता है। साउदी अरब के ऊर्जा मंत्री खालिद अल-फालिह ने भी माना है कि बैन हटाने का मतलब है कि महिलाएं और अधिक सशक्त होंगी। नौकरी के क्षेत्र में उनकी भागीदारी और बढ़ेगी, ऐसे में मुझे लगता है कि यह फैसला देश में महिलाओं के रोजगार को बढ़ाने में योगदान देगा।
लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ने वाली साउदी अरब की महिलाओं ने गोया दुनिया भर के देशों को समझा दिया है कि यदि देश का अर्थतंत्र सुदृढ़ करना है तो महिलाओं की क्षमता पर विश्वास करना सीखना होगा और उन्हें सड़ीगली रूढ़ियां से आजाद करना होगा।
               ------------------
(दैनिक सागर दिनकर, 28.06.2018 )          ---------------------------
#शरदसिंह #सागरदिनकर #दैनिक #मेराकॉलम     #Charcha_Plus #Sagar_Dinkar #Daily
#SharadSingh #Saudi Arabia #Women #Driving #साउदीअरब #औरतें #ड्राइविंग

योग ने बनाई है सेहत भी पहचान भी - डॉ. शरद सिंह ... चर्चा प्लस

Dr (Miss) Sharad Singh
चर्चा प्लसः
योग ने बनाई है सेहत भी पहचान भी
   - डॉ. शरद सिंह                          
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भले ही 21 जून को मनाया जाना है लेकिन उसका उत्साह महीने भर से छाया हुआ है। आज सभी एकमत से स्वीकार करते हैं कि योग ने जहां हमें सेहत दी है वहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान भी दी है। वस्तुतः योग स्वस्थ जीवन जीने की शैली है और अब जरूरत है इसे उस निचले तबके तक पहुंचाने की जहां कुपोषण का साम्राज्य है और सेहत के प्रति जागरूकता का तो नामोनिशान भी नहीं है। अब प्राथमिकता भी यही होनी चाहिए कम पढ़ा-लिखा और जीवन के हर कदम पर रोजी-रोटी के लिए जूझने वाला तबका भी दो पल के लिए अपनी सेहत के बारे में सोचे और योग को अपनाए। तभी सही मायने में स्वस्थ भारत की परिकल्पना साकार हो सकेगी। भूख, गरीबी और दिहाड़ी के बीच की यह डगर कठिन है किन्तु असंभव कुछ भी नहीं है अगर हम ठान लें।    
Charcha Plus -Yoga Ne Banai Sehat Bhi Pahachan Bhi - Charcha Plus Column by Dr Sharad Singh
   
“योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है; मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है; विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। यह व्यायाम के बारे में नहीं है, लेकिन अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है। हमारी बदलती जीवन-शैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है। तो आएं एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को गोद लेने की दिशा में काम करते हैं।“ ये शब्द थे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग की पैरवी करते हुए। इसके बाद 11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 177 सदस्यों द्वारा 21 जून को “ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस“ को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, जो संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव के लिए सबसे कम समय है। परिणामतः 21 जून को “ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस“ घोषित किया गया। इस एक घोषणा से सारी दुनिया योग से जुड़ गई। इसमें कोई संदेह नहीं है कि योग सिर्फ कसरत नहीं है बल्कि यह स्वस्थ जीवन जीने की एक शैली है और प्रधानमंत्री मोदी ने इस जीवनशैली को ग्लोबल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार संसार के सबसे पहले योगी हैं भगवान शिव। वैदिक ऋषि-मुनियों ने शिव द्वारा प्रदत्त योग को अपनी जीवनशैली बनाया और उसका विशद विवरण ताड़पत्रों पर लिखा। योगाभ्यास के प्रामाणिक सूत्र लगभग 3000 हजार ईसापूर्व सिन्धुघाटी सभ्यता के अवशेषों में मिलते हैं। लगभग 200 ईसापूर्व योग पर एक ग्रंथ लिखा गया था जिसका नाम था ‘‘योगसूत्र’’। हिन्दू, जैन, बौद्ध इन सभी धर्मों में योग के महत्व को प्रतिपादित किया गया है। भारत की यह प्राचीनतम परम्परा समूचे विश्व को हमेशा आकर्षित करती रही है। आज हॉलीवुड के नामचीन सितारे भी अपनी फिटनेस बनाए रखने के लिए योग करते हैं, फिर वो चाहे किम कर्देशियन हो या जेनीफर लोपेज। बस, हम आम भारतीय ही अपनी रोजी-रोटी के चक्कर में इस जीवनशैली से दूर होते चले गए। मानो हमारी भागमभाग वाली दिनचर्या ने हमें अपनी सेहत के बारे में सोचने से ही रोक दिया। आमतौर पर औसत भारतीयों को अपनी सेहत की सलामती की याद तभी आती है जब उसे डॉक्टरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में ढेर सारी दवाओं और ढेरों परहेज के साथ वही जीवनचर्या अपनानी पड़ती है जिसे योग में बताया गया है।
मुझे याद है कि 12 मई 2016 को उज्जैन सिंहस्थ के दौरान ‘अंतर्राष्ट्रीय विचार महाकुंभ’ में योग पर चर्चा के दौरान मैंने तत्कालीन पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे से प्रश्न किया था कि गंदी बस्तियों और  झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को सेहत के प्रति जागरूक करने के लिए क्या कोई ऐसा मॉडल बनाया जा सकता है जो उन्हें योग से जोड़ सके? इस पर उन्होंने उत्तर दिया था कि ‘‘हां, इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।’’ और फिर स्व. दवे ने योग पर चर्चा करने धर्मशाला से आए बौद्ध भिक्षु से इस बारे में राय मांगी थी। सिंहस्थ विचार महाकुंभ के बाद मेरी दोबारा अनिल माधव दवे जी से भेंट नहीं हो सकी और मुझे पता नहीं चल सका कि इस संबंध में शासन की कोई राय बनी या नहीं। किन्तु प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह योग को संयुक्तराष्ट्र संघ से अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित कराया और इससे उन सेलीब्रटीज़ को जोड़ा जो निचले तबके के दिलों पर भी राज करते हैं, इससे आशा बंधी है कि एक दिन वह तबका भी अपनी सेहत के लिए योग का सस्ता नहीं बल्कि निःशुल्क, सुंंदर और टिकाऊ रास्ता अपना लेगा। अब प्राथमिकता भी यही होनी चाहिए कम पढ़ा-लिखा और जीवन के हर कदम पर रोजी-रोटी के लिए जूझने वाला तबका भी दो पल के लिए अपनी सेहत के बारे में सोचे और योग को अपनाए। तभी सही मायने में स्वस्थ भारत की परिकल्पना साकार हो सकेगी। आखिर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो योग ने बनाई है हम भारतियों की सेहत भी और भारत की पहचान भी।        
         ----------------------------

(दैनिक सागर दिनकर, 20.06.2018 )
          ---------------------------
#शरदसिंह #सागरदिनकर #दैनिक #मेराकॉलम     #Charcha_Plus #Sagar_Dinkar #Daily
#SharadSingh #Yoga  #InterNationalYogaDay #योग #अंतर्राष्ट्रीयोगदिवस

Friday, June 15, 2018

‘नई दुनिया’ (In All Editions) के ‘अधबीच’ कॉलम में

‘नई दुनिया’ (In All Editions) के ‘अधबीच’ कॉलम में आज (15.06.2018) मेरा यह लेख प्रकाशित हुआ है...आप भी पढ़िए ! इस लिंक पर भी आप इसे पढ़ सकते हैं- https://naiduniaepaper.jagran.com/Article_detail.aspx… 
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार ‘नई दुनिया’