Wednesday, June 3, 2020

चर्चा प्लस - ताला खुला है पर ख़तरा नहीं टला है - डाॅ शरद सिंह


Dr (Miss) Sharad Singh    
चर्चा प्लस
ताला खुला है पर ख़तरा नहीं टला है
 - डाॅ शरद सिंह

         सब्र  से  इम्तिहान  देना है
         मौत से ज़िंदगी को लेना है
एक सुहानी सुबह। एक छोटा दूकानदार पूजापाठ कर के तैयार होता है। उसके चेहरे पर चमक है। उसके पत्नी-बच्चों के मन में उत्साह है। उसके माता-पिता उसे आशीर्वाद देते हैं। भले ही इन सभी के मन में एक भय है, कोरोना संक्रमण का। लेकिन 68 दिन बाद अपनी छोटी-सी दूकान खोलने और रोजी-रोटी की ओर एक बार फिर कदम बढ़ाने का उत्साह उसे कोरोना संक्रमण के डर को पीछे छोड़ देता है। वह अपने चेहरे पर मास्क पहन कर घर से बाहर निकलता है। जब वह अपनी दूकान के सामने पहुंचता है तो बंद शटर को देख कर उसकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। वह अपने साथ लाई अगरबत्ती जला कर अपने इष्टदेव को याद करते हुए अपनी बंद दूकान का शटर खोलता है। पूरे 68 दिन बाद। वह उन दूकानदारों में से था जिसे लाॅकडाउन के दौरान दूकान खोलने की अनुमति नहीं मिली थी। एक रात पहले तक वह धड़कते दिल से लाॅकडाउन 5.0 की प्रतीक्षा कर रहा था जिसमें उसका भविष्य तय होना था। लेकिन उस संशय से परे अनलॉक की घोषणा की गई। जिससे उसे अपनी दूकान खोलने की छूट मिल गई। कुछ शर्तों के साथ। ये शर्तें मौत से ज़िन्दगी हासिल करने की शर्तें हैं। बेहद जरूरी। यह कोई कहानी नहीं है। यह सच्ची घटना है जो लाॅकडाउन अनलाॅक होने पर घटित हुई।
Charcha Plus Column by Dr Sharad Singh, 03.06.2020
.     24 मार्च 2020 को लॉकडाउन की घोषणा की गई थी उसके बाद 31 मई तक चार चरणों में लॉकडाउन रहा। कोरोना वायरस के कारण लगा लॉकडाउन अब खत्म हो गया है। इस बार लॉकडाउन की जगह अनलॉक शब्द का प्रयोग किया गया है। यद्यपि कंटेनमेंट क्षेत्रों में लॉकडाउन 30 जून तक रहेगा। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अनलाॅक की घोषणा करते हुए कहा कि- ‘‘लॉकडाउन के चौथे चरण के समाप्त होने के बाद पांचवा चरण अनलॉक 1.0 चरण होगा। हम इसमें भारत सरकार की गाइड लाइन का पूरा पालन करेंगे। साथ ही प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से आर्थिक गतिविधियां संचालित करेंगे। ’’ इस अनलाॅक के लिए जो गाईडलाईन जारी की गई है उसमें जिलों में अधिक प्रभावित मोहल्ला, कॉलोनी इत्यादि क्षेत्र कंटेनमेंट एरिया में 30 जून, 2020 तक लॉकडाउन यथावत् लागू रहेगा। कंटेनमेंट क्षेत्रों में केवल आवश्यक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा प्रदेश का शेष क्षेत्र सामान्य क्षेत्र होगा। रात्रिकालीन कर्फ्यू का समय अब रात्रि 9 बजे से सुबह 5 बजे तक होगा। इस दौरान अत्यावश्यक गतिविधियों को छोड़कर लोगों का आवागमन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा।

कंटेनमेंट क्षेत्र के बाहर 8 जून 2020 से धार्मिक स्थल, सार्वजनिक स्थान पूजा स्थल, होटल, रेस्तरां, अन्य आतिथ्य सेवाएं तथा शॉपिंग मॉल प्रारंभ होंगे। अभी शैक्षणिक संस्थाएं बंद रहेंगीं। परंतु 12वीं की परीक्षाओं हेतु विद्यालय खोले जाएंगे। बाद में स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक, प्रशिक्षण, कोचिंग संस्थान आदि को खोलने का निर्णय सभी लोगों के साथ परामर्श कर जुलाई में लिया जाएगा। प्रदेश में सिनेमा हॉल, व्यायामशाला, स्विमिंग पूल, मनोरंजन पार्क, थिएटर, बार और ऑडिटोरियम, सभा कक्ष मैरिज गार्डन आदि। सामाजिक, राजनीतिक, खेल, मनोरंजन, शैक्षणिक,  सांस्कृतिक, धार्मिक कार्य और अन्य बड़ी सभाएं आदि गतिविधियां पूर्णरूप से बंद रहेंगी। इन्हें पुनः प्रारंभ करने का निर्णय बाद में लिया जाएगा। इंदौर, उज्जैन, नीमच और बुरहानपुर के नगरीय क्षेत्रों के बाजारों की एक चौथाई दुकानें बारी-बारी से खुलेंगीं। भोपाल के बाजारों की एक तिहाई दुकानें बारी-बारी से खुलेंगीं। देवास, खंडवा नगर निगम तथा धार एवं नीमच नगर पालिका क्षेत्र की आधी-आधी दुकानें बारी-बारी से खुलेंगीं परंतु स्टैंड अलोन दुकानें व मोहल्ले की दुकानें इस प्रतिबंध से मुक्त रहेंगीं। इनके अलावा शेष प्रदेश में दुकानों के खुलने पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। सभी शासकीय और प्रायवेट कार्यालय इंदौर, उज्जैन और भोपाल नगर निगम क्षेत्र में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ और शेष प्रदेश में पूरी क्षमता से खोले जाएंगे। उन्हें स्क्रीनिंग और स्वच्छता का ध्यान रखना होगा। थर्मल स्केनिंग, हैंड वाश और सैनिटाइजर का प्रावधान सभी प्रवेश और निकास द्वारों और सामान्य क्षेत्रों में किया जाएगा। फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा। कार्यस्थलों के प्रभारी यह सुनिश्चित करेंगे कि श्रमिकों के बीच पर्याप्त दूरी हो, पारियों के बीच पर्याप्त अंतराल हो, कर्मचारियों के भोजन के अवकाश का समय अलग-अलग हो, आदि। सार्वजनिक स्थानों, कार्यस्थलों और परिवहन के दौरान, फेस कवर (मास्क) पहनना अनिवार्य होगा। सार्वजनिक स्थानों पर कम से कम 6 फीट (2 गज) की दूरी बनाएं रखनी चाहिए। एक समय में 5 से अधिक व्यक्तियों को दुकान मे प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। सार्वजनिक सभाएं प्रतिबंधित रहेंगी। विवाह संबंधी समारोह में मेहमानों की संख्या 50 से अधिक नहीं। अंतिम संस्कार संबंधित कार्यक्रम में व्यक्तियों की संख्या 20 से अधिक नहीं। सार्वजनिक स्थानों पर थूकना दंडनीय होगा। सार्वजनिक स्थानों पर शराब, पान, गुटका, तंबाकू आदि का सेवन वर्जित है।

यह अनलाॅक एक बार फिर जनजीवन को पटरी पर वापस लाने का सुअवसर देगा। लेकिन एक चूक 68 दिन की तपस्या पर पानी फेर सकती है। संक्रमण से बचाव के नियमों को हमें ईमानदारी से अमल में लाना होगा। हम सभी को यह याद रखना होगा कि लाॅकडाउन से अनलाॅक होने का मतलब है कि अभी ताला खुला है लेकिन संकट नहीं टला है।        
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(दैनिक सागर दिनकर में 03.06.2020 को प्रकाशित)
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Friday, May 29, 2020

विशेष लेख : परीक्षा, प्रमोशन और पाॅलिटिक्स - डाॅ शरद सिंह


Dr (Miss) Sharad Singh
विशेष लेख    
परीक्षा, प्रमोशन और पाॅलिटिक्स
           - डाॅ शरद सिंह
             स्कूल से लेकर काॅलेज तक की परीक्षाओं को ले कर घमासान छिड़ा हुआ है। कुछ स्टूडेंट्स फेडरेशन चाहते हैं कि कोरोना लाॅकडाउन और कोरोना के संकट को देखते हुए छात्रों को परीक्षा में जरनल प्रमोशन दे दिया जाए। वहीं प्रशासन, अभिभावक और विद्यार्थियों का एक बड़ा प्रतिशत चाहता है कि परीक्षाएं होनी चाहिए। मध्यप्रदेश में जरनल प्रमोशन के पक्षधर ‘‘हैशटैग जरनल प्रमोशन टू एम पी स्टूडेंट्स’’ पर समर्थन में सोशल मीडिया अभियान चला रहे हैं। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री ने परीक्षाएं कराए जाने का निर्णय ले लिया है। तारीखें भी तय कर दी गई हैं। ऐसे में राजनीति न गरमाए, यह हो नहीं सकता। ज़ाहिर है कि एक बार फिर प्रतिभाशाली छात्र राजनीति के दो पाटों के बीच खड़े दिखाई दे रहे हैं। 

इन दिनों कुछ स्टूडेंट्स फेडरेशन सोशल मीडिया पर ‘‘हैशटैग जरनल प्रमोशन टू एम पी स्टूडेंट्स’’ ट्रेंड कराकर सुरक्षा की दृष्टि से और अलग-अलग परेशानियां बताकर जनरल प्रमोशन की मांग कर रहे हैं। यह सीएम और राज्यपाल को बताना चाह रहे हैं कि आईआईटी बॉम्बे जैसे संस्थानों ने स्टूडेंट्स को जनरल प्रमोशन देने का निर्णय लिया है। यह सभी की सुरक्षा के लिए बेहतर है। छात्र बड़ी संख्या में अपनी बात रख रहे हैं। उनके पास बड़े ठोस तर्क हैं। उनमें सबसे बड़ा तर्क है कोरोना वायस के संक्रमण का। इस बीच मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग एवं माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्य प्रदेश ने यूजी और पीजी तथा 12वीं, हायर सेकेंडरी के बचे हुए पेपर कराने का फैसला लिया है। तारीखें घोषित कर दी गई है। इस निर्णय पर सलाह-मशविरा करने को सीएम शिवराज सिंह चैहान अधिकारियों के साथ राज्यपाल लालजी टंडन से मिलने पहुंचे थे। इसके बाद निर्णय को अंतिम रूप दिया गया कि मध्यप्रदेश की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में किसी भी कक्षा में जनरल प्रमोशन नहीं दिया जाएगा। कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन को लेकर सभी परीक्षाओं को आगे बढ़ा दिया गया था। परीक्षा के दौरान शारीरिक दूरी के साथ अन्य नियमों का पालन भी करवाया जाएगा।
Charcha Plus Column of Dr (Miss) Sharad Singh, 29.05.2020
      राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने इसके लिए सहमति दी है। अब उच्च शिक्षा विभाग जल्द ही निर्देश जारी करेगा। तकनीकी विश्वविद्यालय की परीक्षा 16 से 30 जून के बीच होगी। फर्स्ट ईयर में नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का शिक्षण सत्र अक्टूबर से प्रारंभ होगा। प्रथम और द्वितीय वर्ष से द्वितीय और तृतीय वर्ष में जाने वाले विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र 1 सितंबर से प्रारंभ होगा। मध्य प्रदेश में स्नातक अंतिम वर्ष और स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 29 जून से 31 जुलाई के बीच होंगी। बाकी परीक्षाएं कोरोना संक्रमण ठीक होने के बाद आयोजित की जाएंगी। किसी भी कक्षा में जनरल प्रमोशन नहीं दिया जाएगा। शैक्षणिक सत्र जुलाई के बाद शुरू हो जाएगा। वैसे एमपी बोर्ड ने तो संशोधित टाइम टेबल भी जारी कर दिया है लेकिन जैसे-जैसे परीक्षा की तारीख नजदीक आ रही है स्टूडेंट्स भड़कते जा रहे हैं। वह किसी भी कीमत पर परीक्षा देने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा कक्ष में बैठने के कारण कोरोनावायरस का इंफेक्शन हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा?

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश में लॉकडाउन किया गया। लोगों का अपने घरों से बाहर निकलना सुरक्षित नहीं था। ऐसे में छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए और कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सभी राज्यों की तरह मध्यप्रदेश सरकार ने भी मार्च-अप्रैल में होने वाले शिक्षा कार्यक्रमों और परीक्षाओं को स्थगित कर दिया था। अब परिस्थितियों का आकलन करते हुए परीक्षा कराए जाने का निर्णय लिया गया। परीक्षा और जरनल प्रमोशन पर राजनीति करने वालों को सबसे बड़ा सहारा इस बात का मिला है कि परीक्षा के निर्णय को ले कर सभी राज्यों में एकरूपता नहीं है। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में अलग-अलग नीतियां निर्धारित की जा रही हैं जिससे पक्ष-विपक्ष दोनों को अपने-अपने मतलब की सनद मिल रही है। मसलन वे उदाहरण दे-दे कर अपने तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं। दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार ने माध्यमिक शिक्षा के अध्य्यनरत छात्रों को जनरल प्रमोशन दिया हैं। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष ने विश्वव्यापी महामारी कोविड 19 को मद्देनजर रखते हुए प्रदेश में सभी कॉलेजों के छात्रों को जनरल प्रमोशन दिए जाने को लेकर ज्ञापन सौंपा। इसके पहले छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के छात्र संगठनों ने भी जनरल प्रमोशन देने की मांग की थी। एबीवीपी छात्र नेता व पं. रविशंकर शुक्ल विवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ने भी जनरल प्रमोशन देने की मांग उठाई थी।

इस बीच एक और मंथन चलता रहा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से जारी दिशा निर्देशों के अनुसार अंतिम वर्ष के छात्रों को जनरल प्रमोशन नही दिया जाएगा, उन्हें भी इस महामारी में राहत दिलाने के लिए छात्रों ने परीक्षाओं का आयोजन होने पर इन छात्रों को परीक्षावार कोरोना बोनस अंक देने की मांग की है। इसके अंतर्गत जनरल प्रमोशन सिर्फ प्रथम और द्वितीय वर्ष के बीए, बीकॉम, बीएससी, बीबीए आदि कक्षाओं में दे सकते हैं। रहा मध्यप्रदेश में परीक्षाओं और पढ़ाई के सत्र का प्रश्न तो अब ग्रेजुएशन फाइनल ईयर और पोस्टग्रेजुएशन फाइनल ईयर की परीक्षाएं 29 जून से 31 जुलाई के बीच होंगी। किसी भी कक्षा में जनरल प्रमोशन नहीं दिया जाएगा। इधर सीबीएसई ने छात्रों को अपने निकट का परीक्षा सेंटर चुनने का विकल्प दे दिया है।

अब ध्यान दें परीक्षा पर पाॅलिटिक्स के प्रश्न पर, तो विचारणीय है कि जो दल छत्तीसगढ़ में जरनल प्रमोशन की मांग उठा रहे हैं वही दल मध्यप्रदेश में मांग क्यों नहीं उठा रहे हैं ? दरअसल, छात्रों को अपना भला-बुरा स्वयं तय करना चाहिए। उन्हें सरकारी व्यवस्थाओं पर भरोसा है और वे यह मानते हैं कि कोरोना संक्रमण से बचाव के सभी नियमों का पालन करते हुए सरकार उनकी परीक्षा ले सकती है तो उन्हें सरकार के क़दम का स्वागत करना चाहिए। यदि उन्हें सरकारी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर संदेह है तो परीक्षा तिथियां बढ़वाने की मांग करनी चाहिए, जरनल प्रमोशन की नहीं। जरनल प्रमोशन कोई सम्मानजनक स्थिति नहीं है। जरनल प्रमोशन से आगे बढ़े हुए छात्रों की योग्यता पर निजी क्षेत्र शंका की दृष्टि से देखेंगे। यदि जरनल प्रमोशन होता है तो उन छात्रों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा जो पढ़ाकू हैं और जिन्होंने इस कोरोना लाॅकडाउन के दौरान घर में रह कर जम कर पढ़ाई की है। आमतौर पर वे छात्र ही जरनल प्रमोशन की मांग के पक्ष में हैं जिन्होंने ढंग से पढ़ाई नहीं की है और अब जरनल प्रमोशन की बहती गंगा में नहा कर बिना परीक्षा के अगली कक्षा में पहुंच जाना चाहते हैं। छात्रों के भावी कैरियर के लिए जरनल प्रमोशन उचित नहीं ठहरता है। किन्तु जीवन की सुरक्षा से बढ़ कर कुछ नहीं होता है अतः यदि छात्रों को अपनी सुरक्षा का डर है तो उन्हें खुल कर अपनी बात प्रदेश सरकार के आगे स्वयं रखनी होगी। लेकिन जरनल प्रमोशन के मायाजाल को भुला कर। छात्रों को याद रखना ही होगा कि परीक्षाएं ही योग्यता को साबित करने का अवसर होती हैं और यह अवसर उन्हें राजनीतिक ‘‘तू-तू, मैं-मैं’’ में पड़ कर नहीं गंवाना चाहिए।          
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(दैनिक सागर दिनकर में 29.05.2020 को प्रकाशित)
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Thursday, May 28, 2020

इम्तिहां और भी हैं ....कोरोना की कबड्डी उस पर टिड्डी - डाॅ. (सुश्री) शरद सिंह


Dr (Miss) Sharad Singh
इम्तिहां और भी हैं ....
कोरोना की कबड्डी उस पर टिड्डी
         - डाॅ. (सुश्री) शरद सिंह
 #दैनिक_जागरण में प्रकाशित मेरा यह लेख बढ़ते संकटों पर ... आप भी पढ़िए...
हार्दिक आभार "दैनिक जागरण"🙏
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इम्तिहां और भी हैं ....
कोरोना की कबड्डी उस पर टिड्डी
  - डाॅ. (सुश्री) शरद सिंह
           जब भी लगता है कि हालात से समझौता करना हमें आ गया है उसी दौरान एक न एक नया संकट खड़ा हो जाता है। कोरोना वायरस की कबड्डी चल ही रही थी कि टिड्डी दल आ धमका। खेत के खेत चट कर जाने वाले टिड्डी दल के कहर से बुंदेलखंड भी नहीं बचा। वह तो गनीमत है कि ग्रामीण और किसान अपने स्तर पर पहले से ही तैयार थे इस संकट से जूझने के लिए। इसलिए फिलहाल उतने बड़े पैमाने पर नुकसान नहीं हुआ जितने की आशंका थी। ग्रामीणों और किसानों ने शोर मचा कर, धुंआ कर टिड्डी दल को अपने इलाके से निकालने में सफलता पाई। यद्यपि यह कहा जा रहा है कि पाकिस्तान भारत के सीमाक्षेत्र में टिड्डियों की ब्रीडिंग कर रहा है। अर्थात् यह संकट फिर आएगा। उधर बुहान की ‘बेटलेडी’ कहलाने वाली वैज्ञानिक का कहना है कोरोना से भी अधिक भयानक वायरस का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा लगता है कि देश के दोनों पड़ोसियों ने तय कर लिया है कि भारतीयों को चैन से नहीं रहने देना है। एक कोरोना भेज रहा है तो दूसरा टिड्डियां। और हमारे यहां दशा यह है कि लगभग चार माह से सैनेटाईज़र का उपयोग करते रहने के बाद अनुसंधान का कथित परिणाम बताया जाता है कि चालीस दिन तक लगातार सैनेटाईज़र उपयोग करने से शरीर को नुकसान पहुंचता है। इतना ही नहीं इस कोरोनाकाल में अनेक घटनाएं ऐसी हुईं जिनमें सीधे मनुष्यों पर सैनेटाईज़र का छिड़काव कर दिया गया। अभी हाल ही में एक कंटेनमेंट एरिया में स्त्रियों और बच्चों पर सैनेटाईज़र का स्प्रे कर दिया गया जिससे उन्हें आंखों और शरीर में जलन होने लगी। गोया टिड्डियों से निपटने के लिए स्प्रे नहीं है लेकिन मनुष्यों पर इस्तेमाल करने के लिए हानिकारक स्प्रे है।
Dainik Jagaran, Article of Dr (Miss) Sharad Singh, 28.05.2020
.     इसी वर्ष जनवरी के अंतिम सप्ताह में यह सूचना जारी की गई थी कि भारत में केरल में कोरोना वायरस का पहला मरीज मिला है। वह मरीज चीन के वुहान प्रांत में मेडिकल स्टूडेंट था और वहां से अन्य भारतीयों के साथ वापस भारत लाया गया था। पहले मरीज पाए जाने की यह घटना वर्षों पुरानी प्रतीत होती है क्योंकि तब से अब तक लगभग चार माह में कोरोना के आतंक के अनेक रंग सभी लोग देख चुके हैं। कोरोना ने बीमार किया, कोरोना ने क्वारंटाईन कराया, कोरोना ने लाॅकडाउन कराया, कोरोना ने मौत दी और कोरोना ने हजारों मजदूरों को बेघर, बेरोजगार बना दिया। कोरोना ने अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी। बुंदेलखंड ने भी यह सब झेला है और आज भी झेल रहा है। बुंदेलखंड देश का वह इलाका है जो हमेशा विकास की बाट जोहता रहता है। यहां बड़े उद्योगों का अभाव है। यहां बड़ी मंडी का अभाव है। यहां शिक्षा का स्तर अभी भी पिछड़ा हुआ है। यहां जलप्रबंधन की समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां के मजदूर किसान पलायन के लिए विवश रहते हैं। विगत वर्षों में सैंकड़ों छोटे किसानों ने अपनी खेती गंवाई और मजदूरी करने के लिए मजबूर हो गए। अपने क्षेत्र में काम की कमी के कारण उन्होंने महानगरों का रूख किया। मगर कोरोना संकट ने उनके लिए वह संकट खड़ा किया जिसके बारे में उन्होंने सोचा भी नहीं होगा। वे सारे प्रतिष्ठान, मिल, कारखाने आदि बंद हो गए जहां वे काम करते थे, वे सड़कें आॅटो, टैक्सी से खाली करा ली गईं जहां वे आॅटो, टैक्सी चला कर आजीविका कमाते थे। काम नहीं तो दाम नहीं। और दाम नहीं तो सिर पर छत नहीं। एक झटके में वे सारे श्रमिक मजदूर, कामगार हर चीज से बेदखल हो गए जो प्रवासी थे। जी हां, वे प्रवासी ही थे क्यों कि वे काम के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान भटकते थे। वे उन शहरों के निवासी नहीं थे। वहां उनका अपना घर नहीं था, अपनी पक्की रोज़ी नहीं थी। इसीलिए जब उन्हें महानगरों से बाहर धकेला गया तो वे अपने गांवों की ओर वापस चल पड़े। पैदल, सायकिल में, आॅटो में, पशुओं की भांति ट्रकों में। कहीं तो ठिकाना चाहिए था उन्हें।

बुंदेलखंड में भी सैंकड़ों मजदूर, कामगार वापस लौट आए हैं। निजी संस्थाओं और जनसेवकों ने उन्हें जिन्दा रहने के लिए दाना-पानी दिया, सहारा दिया। सरकार उन्हें मनरेगा के अंतर्गत काम दे रही है। 45 डिग्री की तपती धूप में सड़क बनाने, तालाब खोदने जैसा जीवट काम। पेट सब कुछ करा देता है। अपना और अपने परिवार का पेट भरने के लिए जी तोड़ मेहनत करने में 45 डिग्री की धूप उन्हें डरा नहीं सकती है। बुंदेलखंड का हरेक प्रवासी मज़दूर अपने कटु अनुभवों के आधार पर यही कहता है कि वह अब कभी उन महानगरों में काम करने वापस नहीं जाएगा। उनका यह निश्चय उन्हें हौसला दे रहा है 45 डिग्री की जलती गरमी में। उस पर एक फूहड़ मैसेज व्हाट्सएप्प पर वायरल किया गया था जिसमें कुछ इस तरह की बातें थीं कि ‘अब मज़दूर मज़दूर बहुत हो गया। मजदूर तो अपने घर पहुंच ही जाएंगे और उन्हें मनरेगा के पैसे मिलेंगे और वे आराम से रहेंगे।’ आदि-आदि इसी तरह की ऊटपटांग शब्दावली थी। इस मैसेज को जिसने बनाया और जिन्होंने मुस्तैदी से फार्वर्ड किया उन्हें मानसिक बीमार ही कहा जा सकता है। वरना ऐसे मैसेज के पक्षधरों को 45 डिग्री के तापमान में काम कराना तो दूर, मात्र दिन भर खड़ा रख कर मनरेगा से दूने पैसे भी दिए जाएं तो वे मनरेगा और मैसेज सब कुछ भूल जाएंगे। 

जब स्थिति संकटों से घिरी हुई हो यानी पहले कोरोना और अब टिड्डी दल, तो हौसला ही उबार सकता है सारे संकट से। यह हौसला विवेक और आपसी सद्भावनापूर्ण विचार तथा व्यवहार से ही पैदा होगा। यह भ्रमित होने का समय नहीं वरन् हर तरह की परीक्षाओं में पास होने का समय है। अगर शायर अल्लामा इकबाल इस दौर में भारत में होते तो यही कहते- 
मुसीबत से आगे जहां और भी हैं 
अभी तो कई  इम्तिहां और भी हैं 
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(दैनिक जागरण में 28.05.2020 को प्रकाशित)
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Wednesday, May 27, 2020

चर्चा प्लस ..कोरोना संकट : डर के आगे जीत है - डाॅ शरद सिंह


Dr (Miss) Sharad Singh
चर्चा प्लस ..
कोरोना संकट : डर के आगे जीत है

- डाॅ शरद सिंह

        समय  विपरीत है  लेकिन
        न  टूटे   हौसला   देखो
        न बढ़ने  पाए  संकट का
        कि अब ये सिलसिला देखो

सागर में आंकड़ा सौ तक पहुंचना ही इस बात का साबूत है कि कहीं न कहीं चूक हुई है। वह भी जिम्मेदार लोगों से चूक हुई है। जिसमें आमजनता में मौजूद जिम्मेदार व्यक्ति भी शामिल हैं। लाॅक डाउन में ज़रा-सी छूट मिलते ही सड़कों पर भीड़ के रूप में निकल पड़ना। दूसरे शहर जाना और फिर लौट कर अपनी जांच कराने में कोताही बरतना। यह जानते हुए भी कि यदि व्यक्ति संक्रमित हो गया है तो वह स्वयं के ही नहीं अपने सगे-संबंधियों और परिचितों के लिए भी संकट का कारण बना रहा है। एक गैरजिम्मेदाराना हरक़त यह भी कि कन्टेन्मेंट क्षेत्र से सपरिवार पलायन कर दूसरे मोहल्ले में जा कर रहने लगना, वह भी पार्षद जैसे महत्वपूर्ण पद पर होते हुए। एक मोहल्ले में पार्षद की भूमिका उस मोहल्ले के पालक अथवा अभिभावक की भांति होती है। अब यदि अभिभावक ही लाॅकडाउन या कन्टेन्मेंट के नियमों का पालन नहीं करेगा तो उस मोहल्ले में किसी से धैर्य की आशा कैसे की जा सकती है?
Charcha Plus, Column of Dr (Miss) Sharad Singh in Dainik Sagar Dinkar, 27.05.2020

इस दौरान ज़िलास्तर पर प्रशासनिक फेरबदल भी हो गया है। अभी तक के कोरोना कार्यकाल में कार्यरत महिला कलेक्टर का स्थानांतरण भोपाल कर दिया गया और भोपाल से एक अन्य अनुभवी कलेक्टर ने आ कर कार्यभार सम्हाल लिया। इसमें कोई संदेह नहीं है कि महिला कलेक्टर ने कोरोना प्रभावित क्षेत्रों में भी जा कर स्थितियों को संज्ञान में लिया। आमजनता ने भी उनके इस साहसिक कार्यप्रणाली को पसंद किया। उनके जाने पर शोक भी मनाया। किन्तु अपनी प्रिय कलेक्टर का कहना कितना माना इसके लिए अपने ग़िरेबांम में झंाकना होगा। जब भी लाॅकडाउन में छूट दी गई तो आमजनता से कलेक्टर की यही अपेक्षा रही कि लोग डिस्टेंसिंग का पालन करें, अति आवश्यक होने पर ही घर से निकलें और कोरोना के विरुद्ध सारे सुरक्षा नियमों का पालन करें। यदि इस अपेक्षा का ध्यान रखा गया होता तो सागर में कोरोना पीड़ितों की संख्या शून्य से बढ़ कर सौ तक न जा पहुंचती। कहने का आशय है कि प्रशासनिक फेरबदल को ले कर शोक मनाने अथवा प्रसन्न होने से कहीं अधिक जरूरी है कोरोना के विरुद्ध सुरक्षा नियमों का पालन करना। कतिपय लोग ऐसे भी हैं जिन्हें प्रशासनिक अथवा जनहित कार्यों के लिए लाॅकडाउन में निकलने का जो पास मिला हुआ है, उसका बेज़ा उपयोग कर के जोखिम पैदा करते रहते हैं। चार पहिया वाहन में एक ड्राईवर और दो सवारी के नियम का उल्लघंन करते हुए परिवार के चार से छः सदस्यों को गाड़ी में बिठा कर निकल पड़ते हैं। यदि कोई रोकता है तो सरकारी पास की धौंस तो है ही। ऐसे लोगों को सोचना चाहिए कि उनकी यह ‘ठसक’ एक दिन उनके सहित अनेक लोगों को मुसीबत में डाल सकती है।    

जहां तक कोरोना संक्रमण के शहर में निरंतर बढ़ने का प्रश्न है तो यह मानना होगा कि हर स्तर पर एक न एक चूक होती जा रही है। शहर में एक नर्स कोरोना पाॅजिटिव निकली। हिस्ट्री टटोलने पर पता चला कि उस नर्स ने एक डिलेवरी करायी थी। जांच की कड़ी जब प्रसूता तक पहुंची तब वह प्रसूता भी कोरोना पाॅजिटिव निकली। यह प्रकरण कई प्रश्न खड़े कर गया कि क्या डाॅक्टर और नर्स को प्रसूता में कोरोना के लक्षण दिखाई नहीं दिए अथवा कहीं कोई और चूक हुई? क्या नर्स के संपर्क में आए सभी लोग कोरोना निगेटिव पाए गए हैं या यहां भी कोई कड़ी छूट रही है?

भले ही यह प्रशासन की गाईडलाईन है कि कोरोना प्रभावित का नाम उजागर नहीं किया जाए लेकिन इस गाईड लाईन का प्रत्यक्ष असर यही है कि किसी मोहल्ले में एक भी कोरोना पाॅजिटिव केस सामने आता है तो अफ़वाहों और दहशत का बाज़ार गर्म हो जाता है। आपसी चर्चा के दम पर जब तक लोगों को कोरोना पाॅजिटिव का पता चला पाता है तब तक उससे संपर्क में आए लोग सावधान नहीं हो पाते हैं। यदि कोरोना पाॅजिटिव का नाम आधिकारिक तौर पर नहीं छिपाया जाए तो उसके संपर्क में आए लोग तत्काल चैकन्ने हांे सकेंगे और तत्काल अपनी जांच करवा सकेंगे। यूं भी इस संक्रमण के बारे में सभी को पता है। संक्रमित होना कोई लज्जाजनक स्थिति नहीं है। कोई भी व्यक्ति कभी भी स्वयं संक्रमित नहीं होना चाहेगा। अतः सभी को कोरोना संक्रमित के प्रति सहानुभूति रहती है और रहेगी। संक्रमण के प्रति समय रहते अलर्ट होने की दिशा में नाम छिपाने की गाईडलाईन पर जनहित में पुनः विचार किए जाने की आवश्यकता है।

जहां भय का संचार होता है वहां व्यक्ति से गलतियां भी होती हैं। जैसी कि उन तमाम लोगों से हुई जो सीधे कोरोना जांच कराने के बजाए झोलाछाप डाॅक्टर की शरण में गए। निश्चितरूप से उन्हें लगा होगा कि चुपचाप ईलाज करा कर काम चल जाए तो अच्छा है। कोरोना टेस्ट कराने के बाद वे कहीं किसी झमेले में न फंस जाएं। यदि यही सोच रही उनकी तो फिर मानना होगा कि अभी भी अनेक लोग डर के साए में जी रहे हैं और उनमें से कुछ संक्रमित भी पाए जा सकते हैं। यही स्थिति संक्रमण को रोकने के बजाए निरंतर बढ़ा रही है। जैसे भय के कारण पार्षद ने अपने परिवार सहित मोहल्ला बदल लिया। यदि वह या उसके परिवार का एक भी सदस्य संक्रमित हो चुका होगा तो वह कितने ही मोहल्ले बदल ले, संकट से बच नहीं सकता है। अतः जरूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने मोहल्ले, अपने घर में साहस से डटा रहे और अपने डर पर काबू रखे। वह कहावत है न कि-‘‘डर के आगे जीत है’’। तो, हम सभी अपने डर पर काबू पाएं, कोरोना के विरुद्ध सुरक्षा नियमों का पालन करें तो जल्दी ही संक्रमितों का यह आंकड़ा सौ से वापस शून्य पर पहुंच सकेगा।  
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(दैनिक सागर दिनकर में 27.05.2020 को प्रकाशित)
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Monday, May 25, 2020

वीर योद्धा महाराणा प्रताप एवं महाराज छत्रसाल जयंती - डॉ शरद सिंह

वीर योद्धा महाराणा प्रताप एवं महाराज छत्रसाल जयंती आज 25.05.2020 को मैंने भी परंपरागत ढंग से दीप जला कर मनाई ... 
🚩आप सभी को शुभकामनाएं 🙏
-डॉ शरद सिंह

Thursday, May 21, 2020

विशेष लेख - कोरानाकाल के कलंक : धिक्कार है ऐसे लोगों को - डाॅ शरद सिंह


 Dr (Miss) Sharad Singh
विशेष लेख 
 कोरानाकाल के कलंक : 
           धिक्कार है ऐसे लोगों को
              - डाॅ शरद सिंह
      कोरोनाकाल समूची मानवजाति के लिए एक अभिशाप की तरह है। प्रत्येक व्यक्ति जब इससे जूझ रहा हो, डर के साए में जी रहा हो, ऐसे वातावरण में भी अपराधी मनोवृत्ति के लोग अपराध करने से बाज नहीं आ रहे हैं। यह उनके मानव होने को भी कलंकित करती है।  
      हाल ही में एक 24 वर्षाीय महिला जिसे कोरोना की संभावना के चलते क्वारंटाईन किया गया था घृणित अपराध की शिकार हो गई। जिस परिसर में उसे क्वारंटाईन किया गया था वहां नहाते समय दो युवकों ने उसकी वीडियो बना ली। इसके बाद वे युवक उस महिला पर अवैध शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव बनाने लगे। साथ ही उन्होंने धमकी दी कि यदि उस महिला ने उनकी यह बात नहीं मानी तो वे वीडियो वायरल कर देंगे। यह अच्छी बात है कि उस महिला ने साहस की परिचय दिया और पुलिस के पास जा कर रिपोर्ट लिखा दी। इस घटना का अमानवीय पक्ष यह है कि एक कोरोना संभावित महिला जो स्वयं भयावह मानसिक दशा से गुज़र रही हो, उसे ब्लैकमेल करने का प्रयास किया गया। जबकि उसके प्रति सहानुभूति भरा दृष्टिकोण होना चाहिए था। दूसरा पक्ष यह भी कि उन हवस के अंधे युवकों को यह भी नज़र नहीं आया कि यदि कल को वह महिला कोरोना पाॅजिटिव निकलती है तो क्या वे उससे अवैध संबंध बनाने के बाद संक्रमण से अछूते रह जाएंगे? शायद ऐसे ही मानसिकता कें लोग छोटी बच्चियों को भी अपनी हवस का शिकार बनाते हैं। जिन्हें अपनी हवस के आगे उम्र, स्थिति, परिस्थिति, मानवता आदि कुछ भी दिखाई नहीं देती है। लानत है ऐसे लोगों को।
Charcha Plus, Column of Dr (Miss) Sharad Singh in Dainik Sagar Dinkar,  20.05.2020 
.         लाॅकडाउन के कारण अपराध का ग्राफ कुछ तो नीचे आया क्योंकि इस दौरान अधिकांश घर सूने नहीं रहे। लेकिन दूकानें चोरों कें लिए आसान निशाना रहीं। इस दौरान एक और तरह का अपराध तेजी से बढ़ा है। राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी और मार्च की तुलना में अप्रैल में महिलाओं संबंधी साइबर क्राइम की संख्या बढ़ी है। 25 मार्च से 25 अप्रैल तक साइबर अपराध की कुल 412 शिकायतें मिली हैं जिनमें 396 शिकायतें अश्लील प्रदर्शन, अश्लील वीडियो, धमकी, फिरौती की मांग से लेकर ब्लैकमेल करना तक की थीं।  महिलाओं की तस्वीरों में छेड़-छाड़ कर उनकी मॉर्फ्ड तस्वीरों को इंटरनेट पर अपलोड करने की धमकी दिए जाने संबंधी शिकायतें मिलीं। जब पूरा देश बंद है, लोग घर से काम कर रहे हैं और इंटरनेट पर काफी समय बिता रहे हैं तो साईबर अपराधी भी सक्रिय हो गए हैं। हर किसी को जो इंटरनेट से जुड़ा है उसे भी सतर्क रहना होगा।

लाॅेकडाउन 1.0, 2.0, 3.0 और अब 4.0 में आम जन-जीवन की अधिकांश गतिविधियां बंद रहीं लेकिन अपराधियों की गतिविधियां इस दौरान भी ज़ारी रहीं। चरित्र पर संदेह के कारण हत्या, आपसी रंजिश के कारण हत्या, बेटे द्वारा पिता की हत्या, प्रेमियों द्वारा आत्महत्या, आर्थिक तंगी से परेशान हो कर आत्महत्या, बलात्कार, मारपीट, चोरी-डकैती थमी नहीं।

सागर शहर के भगवानगंज इलाके में आॅटोपार्टस और हार्डवेयर की कई छोटी-बड़ी दूकानें हैं। उनमें से एक दूकान में पिछवाड़े से दरवाज़ा तोड़ कर अज्ञात बदमाश घुस गए। उन्होंने दूकान के लाॅकर में रखे एक लाख सत्तर हज़ार रुपयों पर हाथ साफ़ कर दिया। भगवानगंज से ही लगे हुए इलाके सदर में एक सूने मकान से चोरों ने लगभग 80 हज़ार रुपए के सोने-चांदी के ज़ेवर चुरा लिए। उल्लेखनीय है कि यह सदर क्षेत्र इनदिनों कोरोना ब्लास्ट का केन्द्र होने और कंटनमेंट जोन बनने के कारण 24 घंटे पुलिस की सख्त निगरानी में है। जिनके घर से जेवर चोरी गए वे दम्पत्ति पिछले दो माह से शहर से बाहर थे। इसी सप्ताह घर लौटने पर उन्हें वरदात का पता चला।

चोरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने सागर शहर के ही मोतीनगर थाना क्षेत्र में एक दालमिल के निकट के एक मंदिर के ताले तोड़ कर दानपेटी में रखी नगदी उड़ा दी। विडम्बना यह कि एक ओर मंदिर पुजारी संघ मंदिरों पर ताले डल जाने के कारण उत्पन्न अपने आर्थिक संकट के बारे में सरकार से गुहार लगाने को विवश हो गया और वहीं दूसरी ओर चोर-मंडली मंदिरों की दानपेटियों पर धावा बोल रही है।

बात अपराधियों के हौसलों की कही जाए तो दमोह के गैसाबाद थाना के हिनौता कला में एटीएम में की गई डकैती की चर्चा आएगी ही। हिनौता कला में रात 9.05 बजे एटीएम बूथ में लूट की वारदारत को फिल्मी स्टाईल अंजाम दिया गया। एटीएम बूथ में लूट की वारदात को अंजाम देने के लिए पहुंचे बदमाशों ने पहले बूथ में डायनामाइट फिट किया फिर उसमें बाइक से तार जोड़कर विस्फोट किया। शायद उन्हें इस बात की जानकारी थी कि बैंक के सीसीटीवी कैमरे बंद हैं। विस्फोट के कारण एटीएम में रखे रुपए हवा में उड़ने लगे। अपराधी उन्हें बटोरने में जुट गए। उसी दौरान ग्रामीणों ने विस्फोट की आवाज़ सुन कर एटीएम की ओर रुख किया लेकिन डकैतों ने माउजर लहरा कर ग्रामीणों को धमकाया और वहां से रुपए ले कर निकल गए।

कोरोना महामारी से बढ़ कर इस समय कोई संकट नहीं है। यह एक ऐसा संकट है जिसने सभी लोगों को एक ही नाव पर सवार कर दिया है। सोशल डिक्टेंसिंग, प्रवासी मजदूरों का सैंकड़ों की तादाद में सागर, दमोह, टीकमगढ़ से हो कर गुरज़ना। शहर के भीतरी तबके में कोरोना ब्लास्ट। कुलमिला कर संकटों की कोई कमी नहीं। लम्बे हो चले लाॅकडाउन से उकताई हुई जनता। बिना थके डटे हुए कोरोना वारियर्स। इस सारे परिदृश्य के बीच निरंतर बढ़ते अपराध के आंकड़े देख कर अपराधियों को कोसने का मन करता है। एक तो लोग पहले से परेशान हैं और उस पर आए दिन चोरों के धावे। इन चोरों, अपराधियों को शर्म भी नहीं आती है क्या? पुलिसतंत्र जनता की सुरक्षा हेतु लाॅकडाउन को टूटने से बचाने, आमजन की मदद करने में व्यस्त है। अब महाराष्ट्र तथा अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश के लिए सागर से हो कर गुज़रने वाले प्रवासी श्रमिकों को सुरक्षित उत्तर प्रदेश की सीमा तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी पुलिस पर ही है। अब वे कोरोना से जुड़ी व्यवस्थाएं सम्हालें या चोरों और अपराधियों के पीछे भागें? जब पूरा शहर, पूरा समाज, पूरी मानवता जीवन-संकट के दौर से गुज़र रही हो तब अपराध घटित होना मानवता पर दाग़ लगने के समान है। धिक्कार है ऐसे लोगों को जो मानवता के लिए संकट की घड़ी में अपराध जैसे अमानवीय कृत्य कर रहे हैं।
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(दैनिक सागर दिनकर में 20.05.2020 को प्रकाशित)
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Wednesday, May 20, 2020

लोग कोरोना त्रस्त, अपराधी अपराध में मस्त - डाॅ. शरद सिंह, दैनिक जागरण में प्रकाशित

Dr (Miss) Sharad Singh

लेख 

लोग कोरोना त्रस्त, अपराधी अपराध में मस्त
  - डाॅ. शरद सिंह

         बुंदेली में एक कहावत है कि ‘एक तो दूबरे ऊपे से दो असाढ़ें’। यानी एक तो पहले ही बड़ा गहरा संकट और उस पर एक और संकट आ जाना। कोरोना महामारी से बढ़ कर इस समय कोई संकट नहीं है। यह एक ऐसा संकट है जिसने सभी लोगों को एक ही नाव पर सवार कर दिया है। सोशल डिक्टेंसिंग, प्रवासी मजदूरों का सैंकड़ों की तादाद में सागर, दमोह, टीकमगढ़ से हो कर गुरज़ना। शहर के भीतरी तबके में कोरोना ब्लास्ट। कुलमिला कर संकटों की कोई कमी नहीं। लम्बे हो चले लाॅकडाउन से उकताई हुई जनता। बिना थके डटे हुए कोरोना वारियर्स। इस सारे परिदृश्य के बीच निरंतर बढ़ते अपराध के आंकड़े देख कर अपराधियों को कोसने का मन करता है। एक तो लोग पहले से परेशान हैं और उस पर आए दिन चोरों के धावे। इन चोरों, अपराधियों को शर्म भी नहीं आती है क्या? पुलिसतंत्र जनता की सुरक्षा हेतु लाॅकडाउन को टूटने से बचाने, आमजन की मदद करने में व्यस्त है। अब महाराष्ट्र तथा अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश के लिए सागर से हो कर गुज़रने वाले प्रवासी श्रमिकों को सुरक्षित उत्तर प्रदेश की सीमा तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी पुलिस पर ही है। अब वे कोरोना से जुड़ी व्यवस्थाएं सम्हालें या चोरों और अपराधियों के पीछे भागें? जब पूरा शहर, पूरा समाज, पूरी मानवता जीवन-संकट के दौर से गुज़र रही हो तब अपराध घटित होना मानवता पर दाग़ लगने के समान है। 
सागर शहर के भगवानगंज इलाके में आॅटोपार्टस और हार्डवेयर की कई छोटी-बड़ी दूकानें हैं। उनमें से एक दूकान में पिछवाड़े से दरवाज़ा तोड़ कर अज्ञात बदमाश घुस गए। उन्होंने दूकान के लाॅकर में रखे एक लाख सत्तर हज़ार रुपयों पर हाथ साफ़ कर दिया। भगवानगंज से ही लगे हुए इलाके सदर में एक सूने मकान से चोरों ने लगभग 80 हज़ार रुपए के सोने-चांदी के ज़ेवर चुरा लिए। उल्लेखनीय है कि यह सदर क्षेत्र इनदिनों कोरोना ब्लास्ट का केन्द्र होने और कंटनमेंट जोन बनने के कारण 24 घंटे पुलिस की सख्त निगरानी में है। जिनके घर से जेवर चोरी गए वे दम्पत्ति पिछले दो माह से शहर से बाहर थे। इसी सप्ताह घर लौटने पर उन्हें वरदात का पता चला। चोरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने सागर शहर के ही मोतीनगर थाना क्षेत्र में एक दालमिल के निकट के एक मंदिर के ताले तोड़ कर दानपेटी में रखी नगदी उड़ा दी। विडम्बना यह कि एक ओर मंदिर पुजारी संघ मंदिरों पर ताले डल जाने के कारण उत्पन्न अपने आर्थिक संकट के बारे में सरकार से गुहार लगाने को विवश हो गया और वहीं दूसरी ओर चोर-मंडली मंदिरों की दानपेटियों पर धावा बोल रही है। 
टीकमगढ़ में तो शराबी सीधे पुलिस से ही भिड़ गए। हुआ यूं कि लाॅकडाउन के कारण लोग अपने-अपने घरों में थे मगर कुंवरपुरा रोड स्थित ब्राह्मण कॉलोनी के सामने एक मकान में कुछ युवक शराब पीकर मोहल्ले में गाली-गलौज करने लगे। मना करने पर वे युवक लड़ने के लिए उतारू हो गए तो मोहल्ले के लोगों ने डायल 100 को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर उन्हें थाने चलने को कहा तो वे पुलिस से ही भिड़ गए।

बात अपराधियों के हौसलों की कही जाए तो दमोह के गैसाबाद थाना के हिनौता कला में एटीएम में की गई डकैती की चर्चा आएगी ही। हिनौता कला में रात 9.05 बजे एटीएम बूथ में लूट की वारदारत को फिल्मी स्टाईल अंजाम दिया गया। एटीएम बूथ में लूट की वारदात को अंजाम देने के लिए पहुंचे बदमाशों ने पहले बूथ में डायनामाइट फिट किया फिर उसमें बाइक से तार जोड़कर विस्फोट किया। शायद उन्हें इस बात की जानकारी थी कि बैंक के सीसीटीवी कैमरे बंद हैं। विस्फोट के कारण एटीएम में रखे रुपए हवा में उड़ने लगे। अपराधी उन्हें बटोरने में जुट गए। उसी दौरान ग्रामीणों ने विस्फोट की आवाज़ सुन कर एटीएम की ओर रुख किया लेकिन डकैतों ने माउजर लहरा कर ग्रामीणों को धमकाया और वहां से रुपए ले कर निकल गए।
लाॅकडाउन के कारण अपराध का ग्राफ कुछ तो नीचे आया क्योंकि इस दौरान अधिकांश घर सूने नहीं रहे। लेकिन दूकानें चोरों कें लिए आसान निशाना रहीं। इस दौरान एक और तरह का अपराध तेजी से बढ़ा है। राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी और मार्च की तुलना में अप्रैल में महिलाओं संबंधी साइबर क्राइम की संख्या बढ़ी है। 25 मार्च से 25 अप्रैल तक साइबर अपराध की कुल 412 शिकायतें मिली हैं जिनमें 396 शिकायतें अश्लील प्रदर्शन, अश्लील वीडियो, धमकी, फिरौती की मांग से लेकर ब्लैकमेल करना तक की थीं।  महिलाओं की तस्वीरों में छेड़-छाड़ कर उनकी मॉर्फ्ड तस्वीरों को इंटरनेट पर अपलोड करने की धमकी दिए जाने संबंधी शिकायतें मिलीं। जब पूरा देश बंद है, लोग घर से काम कर रहे हैं और इंटरनेट पर काफी समय बिता रहे हैं तो साईबर अपराधी भी सक्रिय हो गए हैं। हर किसी को जो इंटरनेट से जुड़ा है उसे भी सतर्क रहना होगा। 

लाॅेकडाउन 1.0, 2.0, 3.0 और अब 4.0 में आम जन-जीवन की अधिकांश गतिविधियां बंद रहीं लेकिन अपराधियों की गतिविधियां इस दौरान भी ज़ारी रहीं। चरित्र पर संदेह के कारण हत्या, आपसी रंजिश के कारण हत्या, बेटे द्वारा पिता की हत्या, प्रेमियों द्वारा आत्महत्या, आर्थिक तंगी से परेशान हो कर आत्महत्या, बलात्कार, मारपीट, चोरी-डकैती थमी नहीं। क्योंकि लोग कोरोना से त्रस्त है और अपराधी अपराध में मस्त हैं। 
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(दैनिक जागरण में 20.05.2020 को प्रकाशित)
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