Wednesday, July 24, 2013

ये कैसी श्रद्धा है ?


5 comments:

  1. AAJ IS KALIYUG MAIN - MATA AUR GAU MAATA KE SAATH KAI JAGAH YAHI HO RAHA HAI,

    HUM SABHI KAHIN NAA KAHIN DOHRI HII JINDAGI JEETE HAIN,

    ReplyDelete
  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 25/07/2013 को चर्चा मंच पर दिया गया है
    कृपया पधारें
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  3. करनी और कथनी का अंतर आज के जीवन की सबसे बड़ी बिडंबना है !

    ReplyDelete
  4. सहमत हूं आपकी बात से ... ये दोगलापन है इन्सान का ...

    ReplyDelete



  5. गाय माता को कूड़ा-कचरा खाने के लिए छोड़ देने वाले तो दोहरी मानसिकता वाले हैं ही
    आदरणीया डॉ. शरद सिंह जी !
    लेकिन उन्हें क्या कहा जाए जो अपनी जन्मदात्री माता को भी वृद्धावस्था में बेसहारा छोड़ देते हैं!

    हार्दिक शुभकामनाओं सहित...
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

    ReplyDelete