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Thursday, August 1, 2024

स्वर्गीय विश्वनाथ सिंह जी( बाबू भाई) स्मृति व्याख्यान म डॉ.(सुश्री) शरद सिंह

आज शाम एक विशुद्ध वैचारिक आयोजन... स्वर्गीय विश्वनाथ सिंह जी( बाबू भाई) स्मृति व्याख्यान के अंतर्गत "चुनाव सुधार" विषय व्याख्यान... अतिथि वक्ता थे पूर्व कुलपति, वरिष्ठ पत्रकार श्री दीपक तिवारी तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता की समाजवादी चिंतक दादा श्री रघु ठाकुर जी ने। विशिष्ट अतिथि के रूप में ग्वालियर से पधारे वरिष्ठ पत्रकार श्री तोमर तथा डॉ (सुश्री) शरद सिंह यानी आपकी यह मित्र थी। 
      व्याख्यान के दौरान चुनाव सुधार, वर्तमान राजनीतिक स्थितियां तथा आमजन की मानसिकता को लेकर अनेक विचारों ने जन्म लिया जिस पर अलग से किसी दिन लेख लिखूंगी।
      पूर्व सांसद श्री लक्ष्मी नारायण यादव गांधीवादी श्री शुकदेव तिवारी जी, पूर्व विधायक श्री सुनील जैन, डॉ बद्री प्रसाद, डॉ. शशि कुमार सिंह,श्री शैलेंद्र ठाकुर, डॉ श्याम मनोहर सीरोठिया, श्री राजकुमार तिवारी, भाई पप्पू गुप्ता, श्री रामकुमार पचौरी, श्री रफीक गनी, श्री प्रशांत ठाकुर, डॉ विनोद तिवारी, श्री सिंटू कटारे, श्री हरीसिंह ठाकुर आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
#डॉसुश्रीशरदसिंह #DrMissSharadSingh

Thursday, July 9, 2020

अब तो विकास होना चाहिए जब सितारा बुलंदी पर हो - डॉ.(सुश्री) शरद सिंह, दैनिक जागरण में प्रकाशित

Dr (Miss) Sharad Singh

अब तो विकास होना चाहिए जब सितारा बुलंदी पर हो - डॉ.(सुश्री) #शरद_सिंह

आज #दैनिक_जागरण में प्रकाशित मेरा यह लेख ...

हार्दिक आभार "दैनिक जागरण" 🙏
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विशेष लेख :

अब तो विकास होना चाहिए जब सितारा बुलंदी पर हो 
- डॉ.(सुश्री) शरद सिंह

बुंदेलखंड के सितारे इन दिनों बुंलंदी पर हैं। शिवराज सरकार के मंत्रिमण्डल के नए विस्तार में पहली बार तीन नेताओं को एक साथ मंत्रीमंडल में स्थान दिया गया है। बुन्देलखण्ड अंचल से अब कुल चार मंत्री हो गए जिनमे भूपेंद्र सिंह, गोविंद सिंह राजपूत, बृजेन्द्र प्रताप सिंह एवं पं. गोपाल भार्गव शामिल है। एक साथ तीन नेताओं को मंत्रीपद मिलना बुंदेलखंड के विकास के लिए शुभसंकेत माना जा सकता है। बशर्ते ये तीनों-चारों मंत्री अपने विधान सभा क्षेत्रों के अलावा समूचे बुंदेलखंड के विकास पर मिल कर महत्वपूर्ण कदम उठाएं।

Dainik Jagaran, Article of Dr (Miss) Sharad Singh, 09.07.2020

इनमें से विधायक गोपाल भार्गव बुंदेलखंड के ही नहीं वरन् एमपी विधानसभा के सबसे सीनियर नेता हैं और अब वरिष्ठ  मंत्री भी बन गए हैं। पंडित भार्गव को प्रदेश राजनीति का एक लम्बा अनुभव है। वे उमा भारती से लेकर शिवराज सिंह के चैथे मंत्रिमण्डल तक में शामिल रहने वाले भार्गव सागर जिले की गढाकोटा विधानसभा क्षेत्र से लगातार आठवीं दफा चुनाव जीत चुके हैं जो कि अपने आप में एक रिकाॅर्ड है। पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह को दूसरी दफा मंत्री बनने का मौका मिला है। सीएम शिवराज सिंह के सबसे करीबियों में से एक भूपेंद्र सिंह छह बार चुनाव लड़े है। चार बार जीते है। वे एक कद्दावर नेता के रूप में प्रदेश राजनीति में अपनी साख स्थापित कर चुके हैं। ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह पन्ना से चुनाव से चुनाव जीत कर आए हैं और एक कर्मठ नेता के रूप में उनकी छवि है। कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल होने वाले सुरखी विधान सभा क्षेत्र के चिरपरिचित नेता गोविंद सिंह राजपूत को मंत्रीमंडल में शामिल किए जाने से उनका वह पक्ष मजबूत हो गया है जिसमें यह माना जा रहा था कि भाजपा खेमें के कुछ लोग उनसे नाखुश हैं। यद्यपि अभी गोविंद सिंह राजपूत को उपचुनाव का सामना करना है लेकिन मंत्रीपद मिल जाने से उनकी साख में जो वृद्धि हुई है वह चुनाव परिणाम उनकी झोली में आसानी से डाल सकती है। यूं भी गोविंद सिंह राजपूत की अपने सुरखी विधान सभा क्षेत्र में अच्छी पकड़ है और वे इलेक्ट्राॅनि माध्यमों द्वारा भी अपने क्षेत्र की जनता से संपर्क बनाए रखते हैं।
इतिहास गवाह है कि जब भी कोई मंत्रीमंडल बनता है अथवा मंत्रीमंडल का विस्तार किया जाता है तो कहीं खुशी, कहीं ग़म का माहौल बन ही जाता है। मध्यप्रदेश विधान में बुंदेलखंड के तीन नेताओं को एक साथ मंत्रीपद मिलने से जहां खुशी की लहर दौड़ गई वहीं नाराज़गी भी उभर कर सामने आई। सागर नगर विधान सभा क्षेत्र के विधायक जो भाजपा को लगातार विजयी बनाते आ रहे हैं, मंत्रीमंडल के इस विस्तार में वंचित रह गए। जिससे उनके समर्थकों में निराशा की लहर दौड़ गई। निराश समर्थकों ने विधायक शेलेन्द्र जैन को मंत्री बनाने की मांग को ले कर ने जल सत्याग्रह करके विरोध जताया। मगर एक कुशल राजनीतिज्ञ की भांति विधायक शैलेन्द्र जैन ने अपने समर्थकों के विरोध को शांत करने के लिए बाकायदा एक सार्वजनिक अपील की। उल्लेखनीय है कि पिछली विधान सभा चुनावों के पूर्व टिकटों की घोषणा नहीं होने पर भी शैलेन्द्र जैन जनसंपर्क में जुटे रहे थे जबकि उस समय यह सुनिश्चित नहीं था कि टिकट उन्हें मिलेगा भी या नहीं। उनकी यही खूबी उन्हें एक लोकप्रिय नेता बनाती है और इसका दूसरा पक्ष यह भी कि ऐसे समर्पित नेता को मंत्रीमंडल में लिए जाने का कयास जोर पर था।
नरयावली विधान सभा के विधायक प्रदीप लारिया भी मंत्रीपद से वंचित रह गए। लेकिन उन्होंने भी अनुशासन का परिचय दिया। अर्थात् जब माहौल शांत हो और मिलजुल कर काम करने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही हो तो यह आशा की जा सकती है कि अब समूचे बुंदेलखंड नहीं तो कम से कम सागर संभाग के पांचों जिलों बुनियादी समस्याएं दूर हो सकेंगी। बुंदेलखंड के अनेक अंचल ऐसे हैं जो आज भी रेल सुविधा की बाट जोह रहे हैं। जिन्हें रेल मार्ग मिल गया है उन्हें गिनती की रेलें मिली हैं।

शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, परिवहन और स्वच्छता में पिछड़े हुए इन पांचों जिलों को विकास करने का समुचित अवसर मिल सकेगा। रोजगार के संदर्भ में युवाओं द्वारा कई बार मांग उठाई जा चुकी है कि बुंदेलखंड में आईटी सेक्टर की स्थापना की जाए ताकि युवाओं को अच्छे रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में न भटकना पड़े। किन्तु बात वहीं आवागमन के साधनों की कमी पर आ कर अटकती है। कोई भी मल्टीनेशनल कंपनी आईटी सेक्टर मंे तभी निवेश करने का मन बनाएगी जब विदेशों से आने वाले उनके प्रतिनिधियों को आवागमन की बेहतर सुविधाएं सुलभ होंगी। समूचे बुंदेलखंड में एकमात्र खजुराहो ही ऐसा हवाई अड्डा है जहां से यात्री उड़ाने भरी जाती हैं किन्तु वह भी गिनती की हैं और वहां से सभी महत्वपूर्ण शहरों के लिए उड़ानों की कमी है। इस स्थिति में जरूरी हो जाता है कि ऐसे हवाई अड्डे स्थापित किए जाएं जहां सस्ती उड़ान सेवाएं सुलभ हो सकें और बुंदेलखंड के निवासी देश के अन्य क्षेत्रों से हवाई मार्ग द्वारा जुड़ सकें। बुंदेलखंड में चिकित्सा साधनों की भी कमी यथावत बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्र एवं गरीब तबका आज भी नीम हकीमों के हाथों अपनी जान का खतरा उठाता रहता है। विकास की दर कछुआ चाल से ही चलती रही है। इस प्रकार की अनेक छोटी-बड़ी समस्याएं हैं जो क्षेत्र के विकास में बाधा बनती रहती हैं। इन बाधाओं को दूर करने का सुनहरा अवसर आ गया है जब क्षेत्र के चारों मंत्री मिल कर संभाग का नया उज्ज्वल भविष्य लिख सकते हैं।

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(दैनिक जागरण में 09.07.2020 को प्रकाशित)
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Thursday, June 25, 2020

बुंदेलखंड में आज भी कमी है महिला उद्योगों की - डॉ.(सुश्री) शरद सिंह


Dr (Miss) Sharad Singh
दैनिक जागरण में प्रकाशित मेरा यह लेख ... आप भी पढ़िए...
हार्दिक आभार "दैनिक #जागरण"🙏
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विशेष लेख

बुंदेलखंड में आज भी कमी है महिला उद्योगों की 
- डॉ.(सुश्री) शरद सिंह

     वे सिर पर दो-दो, तीन-तीन घड़े उठाए चार-पांच किलोमीटर जाती हैं और अपने परिवार की प्यास बुझाने के लिए सिर पर पानी ढो कर लाती हैं। पहाड़ी या घाटी भी इनका रास्ता रोक नहीं पाती है। बढ़ते अपराध और सूखे की मार भी इन्हें डिगा नहीं पाती है। कोरोना भी इन्हें अपने परिवार के लिए मेहनत करने से नहीं रोक पाया है। जीवट हैं बुंदेलखंड की महिलाएं। बुंदेलखंड में महिलाएं घर-परिवार की अपनी समस्त जिम्मेदारियां निभाती हुई अपने परिवार के पुरुष सदस्यों का हाथ खेतीबारी में बंटाती आ रही हैं। दोहरी-तिहरी जिम्मेदारी के तले दब कर भी उफ न करने वाली बुंदेली महिलाओं के लिए मुसीबतों की कमी कभी नहीं रही। देश की आजादी के अनेक दशक बाद भी बुंदेली महिलाओं में साक्षरता का प्रतिशत कम है। उन्हें झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की गाथाएं तो हमेशा सुनाई और रटाई गईं किन्तु लक्ष्मीबाई जैसी शिक्षा, आत्मरक्षा कौशल अथवा आर्थिक संबल उन्हें प्रदान नहीं किया गया। फिर भी यह बुंदेली महिलाओं की जीवटता थी कि वे बीड़ी निर्माण, वनोपज संग्रहण आदि के द्वारा अपने परिवार की हरसंभव आर्थिक मदद करती रही हैं। लेकिन अब बीड़ी उद्योग और वनोपज संग्रहण के क्षेत्र में आमदनी के अवसर कम हो चले हैं। बीड़ी उद्योग तो स्वयं ही घाटे में चल रहा है। विगत दो-तीन वर्ष में सात से अधिक बीड़ी कारखाने बंद हो गए। 
Dainik Jagaran, Article of Dr (Miss) Sharad Singh, 25.06.2020
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    महिला सशक्तीकरण की दिशा में अभी और प्रयास किये जाने की जरूरत है, ताकि महिलाओं को रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो और ज्यादा संख्या में महिला उद्यमी तैयार करने लायक माहौल बन सके। सरकारों को समझना होगा कि देश में महिला श्रमशक्ति की भागदारी बढ़ाने के लिये महिलाओं को क्षमता विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराने को बढ़ावा देने, देश भर में रोजगार के अवसर उत्पन्न करने, बड़ी संख्या में चाइल्ड केयर केन्द्र स्थापित करने तथा केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा हर क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने सम्बन्धी प्रयास किया जाना बेहद जरूरी है।
आर्थिक पिछड़ेपन का दृष्टि से जो स्थान भारत के मानचित्र में उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश का है, वही स्थिति झांसी तथा सागर सम्भाग के जनपदों के दतिया-ग्वालियर सहित है। यहां पर विकास की एक सीढ़ी चढ़ना दुभर है। बुंदेलखंड का प्रत्येक ग्राम भूख और आत्महत्याओं की करुण कहानियों से भरा है। बुंदेलखंड में महिलाओं की शिक्षा एवं आर्थिक विकास की क्रियाओं में भागेदारी भी अपेक्षाकृत न्यून है। इस स्थिति में यदि गांवों का औद्योगीकरण करना है तो पहले महिलाप्रधान ग्रामोद्योग को बढ़ावा दिया जाना जरूरी है। इसके लिए बाहर से उद्योगपति को गांव में आमंत्रित करने की आवश्यकता ही नहीं है। इस काम के लिए महिलाओं को ही सक्षम बनाना पर्याप्त होगा। समूह आधारित सहकारिता के माध्यम से यह काम बखूबी किया जा सकता है। बुंदेलखंड के बाहर के क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा खड़े किए सेवा बैंक और लिज्जत पापड़ तो इसके अनुकरणीय उदाहरण हैं। 
मध्यप्रदेशीय बुंदेलखंड में भी महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने व प्रदेश के क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए शासन ने महिलाओं को उद्योगों में बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर कई कदम उठाए गए। महिला उद्यमी प्रोत्साहन योजना- 2013 के तहत औद्योगिक इकाई लगाने वाली महिलाओं को ऋण पर छूट प्रदान की जाने लगी। लेकिन बुंदेलखंड में उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है। इसे तथ्य को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश शासन ने उद्योगों में महिलाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया। महिलाओं को गुह एवं लघु उद्योग के लिए ऋण दिए जाने का प्रावधान रखा गया। बुंदेलखंड में लागू इस योजना मेें ऋण लेकर उद्यम लगाने वाली महिलाओं को पांच प्रतिशत की दर से एक साल में अधिकतम पचास हजार और पांच साल में ढाई लाख रुपये ब्याज में छूट देने का प्रावधान किया गया। लेकिन यहां भी आड़े आ गई साक्षरता की कमी। एक सबसे बड़ी बाधा यह भी है कि पुरुषसत्तात्मक बुंदेलखंड में आज भी महिलाओं को स्वनिर्णय का अधिकार पूरी तरह नहीं मिल सका है, विशेषरूप से आर्थिक मामलों में। जिस प्रकार राजनीतिक क्षेत्र में पंच, सरपंच, पार्षद आदि स्तर पर महिलाएं रबर स्टैम्प की भांति पदासीन रहती हैं और उनके सारे राज-काज उनके पति यानी पंचपति, सरपंचपति, पार्षदपति सम्हालते हैं उसी प्रकार आर्थिक क्षेत्र में महिलाओं को सरकार द्वारा अनेक योजनाओं के अंतर्गत दिए जाने वाले ऋण एवं लघु उद्योग का वास्तविक संचालन महिलाओं के हाथों में न हो कर उनके परिवार के पुरुषों अथवा उनके पति के हाथ में होता है। इसीलिए बुंदेलखंड में महिलाओं के लिए उस प्रकार के उद्योगों की विशेष आवश्यकता है जो पूर्णरूप से महिलाओं द्वारा संचालित हों और जिनमें महिलाओं को निर्णय लेने का पूरा अधिकार हो। इस प्रकार के उद्योगों की स्थापना से ही बुंदेली महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भता को बढ़ावा मिल सकेगा और वे बुंदेलखंड के आर्थिक विकास में अपना भरपूर योगदान दे सकेंगी।   
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(दैनिक जागरण में 25.06.2020 को प्रकाशित)
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