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Saturday, October 3, 2026

डॉ (सुश्री) शरद सिंह ने की गांधी जयंती समारोह की अध्यक्षता

2 अक्टूबर 2026 की शाम काव्यायन एवं सहकार भारती संस्था के संयुक्त तत्वाधान में महात्मा गांधी जयंती समारोह का आयोजन किया गया जिसमें कार्यक्रम की अध्यक्षता मुझे सौंपी गई। इस अवसर पर संस्था द्वारा भारतीय सेना के सेवानिवृत्ति तीन सैन्य अधिकारियों, कृषिकों एवं साहित्यकारों का सम्मान किया गया।🇮🇳🏆🇮🇳
     इस अवसर पर मैंने अपनी पुस्तक राष्ट्रवादी व्यक्तित्व "महात्मा गांधी" की चर्चा करते हुए महात्मा गांधी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर संक्षेप में प्रकाश डाला तथा गांधी जी पर केंद्रित अपनी एक कविता "गांधी होना आसान नहीं" का भी पाठ किया।📖🎤🌹🎙️🌹

   श्रीमती ममता भूरिया जी को साहित्य एवं समाज सेवा के लिए सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई 🌹💐🌹
       इस अवसर पर अधिवक्ता संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एडवोकेट भाई अंकलेश्वर दुबे "अन्नी", उपाध्यक्ष एडवोकेट उत्कर्ष श्रीवास्तव कभी सम्मान किया गया। आयोजन मे समाज के विभिन्न कार्य क्षेत्र के विशिष्ट व्यक्ति उपस्थित रहे।🪷
       होटल यशोदा पैलेस के सभागार में आयोजित इस सफल आयोजन के लिए आयोजक द्वय अधिवक्ता भाई रामनरेश सिंह राजपूत एवं भाई आलोक जैन जी को हार्दिक बधाई एवं उनका हार्दिक आभार 💐🙏💐
      भाई अभय सिंह जी को भी हार्दिक धन्यवाद जिन्होंने आयोजन में अपनी सक्रियता बनाए रखी।💐
#डॉसुश्रीशरदसिंह #DrMissSharadSingh 
#गांधीजयंती #महात्मागांधीजयंती

Tuesday, July 14, 2026

महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है - डॉ शरद सिंह | प्रलेस सागर की गोष्ठी में

"महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है तथा जागरूक होकर ऐसे माहौल बनाने की जरूरत है जिसमें महिलाएं घर से बाहर निकलने पर भी सुरक्षित महसूस करें।" कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मैंने ( Sharad Singh ) अपना यह विचार रखा। अवसर था  प्रगतिशील लेखक संघ सागर की मकरोनिया इकाई की बैठक का।
    कल संपन्न हुई इस बैठक में महिला सुरक्षा को लेकर विचार विमर्श के साथ वर्तमान ज्वलंत विषयों पर कविताएं पढ़ी गईं। 
    गोष्ठी में प्रदेश के सागर इकाई के अध्यक्ष टीकाराम त्रिपाठी जी, प्रदेश महासचिव एडवोकेट पेट्रिस फुसकेले, गज़लकार डॉ गजाधर सागर, आशुकवि नलिन निर्मल, कवि वीरेंद्र  प्रधान, सजलकार ज.ल. राठौर, विद्यार्थी जी, मुकेश तिवारी, नमृता फुसकेले, सुमन झुडेले, हर्षिता ठाकुर आदि बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित थे। 
   श्री संजय श्रीवास्तव एवं श्री अजय श्रीवास्तव जी के सौजन्य से सुंदरलाल श्रीवास्तव हायर सेकेंडरी स्कूल के सभागार में आओ इस गोष्ठी का संचालन किया कवि एवं साहित्यकार सतीश पांडे जी ने।
समाचारपत्रों में -
#लेखिकाशरदसिंह #अध्यक्षता #DrMissSharadSingh #प्रलेस #गोष्ठी  #महिलासुरक्षा

Monday, September 8, 2025

मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन के कहानी पाठ में डॉ (सुश्री )शरद सिंह द्वारा अध्यक्षता

कल दोपहर मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन की सागर इकाई के द्वारा "सागर के कथाकार" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुझे इस आयोजन की अध्यक्षता करने का सुअवसर मिला, जिसके लिए मैं आभारी हूं मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन तथा भाई पलाश सुरजन जी की, साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य महेश प्रकाश श्रीवास्तव जी, सागर इकाई के अध्यक्ष भाई आशीष ज्योतिषी जी एवं सागर इकाई के सचिन भाई पुष्पेंद्र दुबे जी की 🌹🙏🌹

🚩 अपना अध्यक्षीय श्री उद्बोधन देते हुए मैंने कहा कि कथाकारो द्वारा पढ़ी गई कहानियों में स्त्री विमर्श का गाढ़ा रंग तथा समाज विमर्श, वृद्ध विमर्श आदि कई शेड्स देखने को मिले। कहानी वाचिक परंपरा की विधा है। यूं कहानी कही जाती है लिखी नहीं जाती। किंतु कहानी को सुनाने की जो वाचिक परंपरा रही उसमें एक वाचक से दूसरे वाचक तक कहानी के प्रवाह में मूल कथानक बदलता चला जाता था और वह कहानी अपना मूल स्वरूप खो कर लोक कथा में परिवर्तित हो जाती थी। मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए कहानी को लिपिबद्ध किया जाने की आवश्यकता महसूस की गई होगी और तभी से कहानी को लिखने का चलन आरंभ हुआ होगा। 

       एक बात और जो मैं व्यक्तिगत रूप से मानती हूं की कथानक कहानीकार को स्वयं चुनता है कहानीकार कथानक को नहीं और कथानक ही अपनी लंबाई-चौड़ाई निर्धारित करता है, जिससे कोई कथानक लघु कथा में सिमट जाता है तो कोई उपन्यास का आकार ले लेता है।
        सागर में कथा लेखन की समृद्ध परंपरा रही है शिवकुमार श्रीवास्तव, रमेश दत्त दुबे, ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी, ज़हूर बख़्श, अनिलचंद्र मैत्रा और अकिंचन जी आदि कथाकारों की कथाएं तत्कालीन सागर  के परिवेश से परिचित कराती हैं। इन्हें पढ़ा जाना चाहिए।"
    होटल सुकून के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का कुशल संचालन किया भाई पुष्पेंद्र दुबे कुमार सागर ने, स्वागत उद्बोधन दिया भाई आशीष ज्योतिषी जी ने तथा आभार प्रदर्शन किया भाई महेश प्रकाश श्रीवास्तव जी ने।
(07.09.2025)

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Friday, February 3, 2023

स्व. महेंद्र फुसकेले जी ने साहित्य में जीवन को और जीवन में साहित्य को लिखा - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

"स्व. महेंद्र फुसकेले जी ने साहित्य में जीवन को और जीवन में साहित्य को लिखा। इस बात पर हम गर्व कर सकते हैं कि हम महेंद्र फुसकेले  जी जैसे साहित्यकार के समय में हम पैदा हुए  और उनसे संवाद करने का हमें सौभाग्य मिला। आज उनके जैसा व्यक्तित्व मिलना कठिन है क्योंकि कॉमरेड महेंद्र फुसकेले होना आसान नहीं !" आयोजन के अध्यक्ष के रूप में मैंने (डॉ सुश्री शरद सिंह) अपने विचार व्यक्त करते हुए उनके वैचारिक व्यक्तित्व पर केंद्रित अपनी ताज़ा कविता का भी पाठ किया।
       अवसर था प्रगतिशील लेखक संघ की सागर इकाई द्वारा कल शाम इकाई के पूर्व अध्यक्ष, साहित्यकार, अधिवक्ता एवं समाजवादी विचारों के प्रबल समर्थक स्व.महेंद्र फुसकेले जी की 90 वीं जन्मजयंती के आयोजन का। इस अवसर पर इकाई के सदस्यों के साथ ही नगर के अनेक साहित्यकार मौज़ूद थे। इस आयोजन के सूत्रधार थे स्व. फुसकेले जी के पुत्र अधिवक्ता श्री पेट्रिस फुसकेले एवं पुत्रवधू कवयित्री श्रीमती नमृता फुसकेले।
📸 छायाचित्र साभार सौजन्य : श्री मुकेश तिवारी एवं श्री पेट्रिस फुसकेले 🙏

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