"महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है तथा जागरूक होकर ऐसे माहौल बनाने की जरूरत है जिसमें महिलाएं घर से बाहर निकलने पर भी सुरक्षित महसूस करें।" कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मैंने ( Sharad Singh ) अपना यह विचार रखा। अवसर था प्रगतिशील लेखक संघ सागर की मकरोनिया इकाई की बैठक का।
कल संपन्न हुई इस बैठक में महिला सुरक्षा को लेकर विचार विमर्श के साथ वर्तमान ज्वलंत विषयों पर कविताएं पढ़ी गईं।
गोष्ठी में प्रदेश के सागर इकाई के अध्यक्ष टीकाराम त्रिपाठी जी, प्रदेश महासचिव एडवोकेट पेट्रिस फुसकेले, गज़लकार डॉ गजाधर सागर, आशुकवि नलिन निर्मल, कवि वीरेंद्र प्रधान, सजलकार ज.ल. राठौर, विद्यार्थी जी, मुकेश तिवारी, नमृता फुसकेले, सुमन झुडेले, हर्षिता ठाकुर आदि बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित थे।
श्री संजय श्रीवास्तव एवं श्री अजय श्रीवास्तव जी के सौजन्य से सुंदरलाल श्रीवास्तव हायर सेकेंडरी स्कूल के सभागार में आओ इस गोष्ठी का संचालन किया कवि एवं साहित्यकार सतीश पांडे जी ने।
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