Saturday, July 18, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | अबे लौं में हमने जोई पाओ के सागर से नोंनो कोनऊं सहर नोंई | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टाॅपिक एक्सपर्ट
अबे लौं में हमने जोई पाओ के सागर से नोंनो कोनऊं सहर नोंई
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
हमाई जे बात पढ़ के, के सागर से नोंनो  कोनऊं सहर नोंई, बायरे वारे सोचहें के ईमें का खास? अपनों सहर सो सबई खों नोंनो लगत आए। औ भीतरे वारे सोचहें के आज जे बर्यान लगीं, ने तो सबसे नोंनो होबे की ऐसी का आए इते? सो, आप सब ओरें तनक सहूरी धरो औ हमाई जे एक्पर्ट राय ध्यान से पढ़त जाओ!
       का आए के अपनों जो सागर सई मायने को सागर आए। ईको लंबो-चौंड़ो इतिहास आए। जबे अपन मानुस हरें मों बोलत ने जानत्ते ऊ टेम पे बी अपने पुरखा इते रैत्ते। ऊ टेम पे इते रैबे वारे अपने पुरखन ने इतई आगी जलाबी सीखी औ इतई फथरा के औजार बनाने सीखे। जबके ऊ टेम पे इते कोनऊं अनवरसिटी ने हती। अब जे ने पूछन लगियो के अनवरसिटी बने के बाद इते का-का आबिष्कार भए। काए से के इते के आबिस्कारन को अनवरसिटी से कोऊ लेबो-देबो कभऊं रहओ नईं। अब का तेल भरे की कुप्पी घांईं कारीडोर की डिजाइन अनवरसिटी वारन ने बनाईं? कभऊं नईं! बाकी जा सब छोड़ो, अपने सागर को करेजा भौत बड़ो आए। इते जोन एक बेर आत आए बा इतई को हो जात आए। इते के लोग सबखों गले लगात आएं। जेई से मुतके अधिकारी रिटायर होबे के टेम पे इतई को ट्रांसफर ले लेत आएं। उने पतो आए के बे जात-जात इते कित्तोई खात-खवाई कर लें, इते कोऊ ने बोलहे। भौतई दयालु औ सहनसील आएं इते के लोग। खैर, कछू नईं, जेई तो खूबी आए इते की। बाकी जे सोई आए के अपने सागर में हिंदू, मुसलमान, जैन, सिख, ईसाई, बौद्ध - मने सबई हिलमिल के रैत आएं। सबरे एक-दूसरे के त्योहार पे खुसियां मनात आएं। इते बृंदाबन बाग आए तो जामा मस्जिद भी आए। इते गौराबाई को जैन मंदिर आए तो सेंट पीटर्स चर्च औ गुरुद्वारा साहिब भी आए। इते करोड़ों की लगत्त से संत रविदास जू को मंदर बी बन रओ। मनें सागर में इत्ती खूबी आएं के बा सबरी आजई नईं गिनाईं जा सकत। सो, जा कॉलम पढ़त रहियो औ खूबी जानत रहियो! राम-राम!
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Thank you Patrika 🙏
Thank you Dear Reshu Jain 🙏
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