टाॅपिक एक्सपर्ट
झला परन लगे, अब उठ बैठो खतरा वारे घर औ स्कूलों के लाने
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
एक कहनात सबई ने सुनी हुइए ‘आवन लगी बरात, सो ओटन लगे कपास’। मने जबे खबर मिलीं के बरात बस दोरे पे आनेई वारी आए सो घराती-बाराती दोई के लाने हुन्ना-लत्ता बनाबे के लाने सूत-कपास तैयार करन लगे। अब आपई सोचो के का इत्ती झट्टई हुन्ना-लत्ता तैयार हो पाहें? औ का तुमाए हुन्ना-लत्ता के लाने बरात दोरे पे ठाड़ी-ठाड़ी बाट जोहत रैहे? रार सो परहेई। जेई दसा अपने इते उन घरों औ स्कूलों की रैत आएं जोन पुराने पर के गिरबे के जोग हो गए। ने तो जोन रिपेयरिंग मांग रए। सई पूछी जाए तो ऐसे घरों औ स्कूलों खों यां तो गिरा दओ चाइए, ने तो समै रैत में उनकी रिपेयरिंग करा दओ चाइए। मगर अपने इते ऐसो कभऊं होत आए का? राम के नांव लेओ! ऐसो कभऊं नईं होत। इते तो जब झला परन लगत आएं तब परसासन के लाने कोऊ-कोऊ अखबार वारे याद दिलान लगत आएं के मालक झला परन लगे मने बरसात दोरे पे ठाड़ी। अब अपनी आंखन खों खोलके तनक उन ओरें घरों औ स्कूलों खों हेर लेओ जो रग्दा गिरे में गिर सकत आएं। तब कऊं नोटशीट पे चिरइयां बैठत आएं। मुतकी बेर ऐसो हो चुको के रग्दा परे में मने भारी बारिश होत बेरा ऐसे मकान धंसक गए, ने तो उनकी छतें गिर परीं। औ तो औ पर की सालों में जिला अस्पताल की छतें लौं चुअत रईं।
अबकी साल सोई जेई भओ जा रओ के बरयाबर के झला परबे सुरू भए, बरसात को आबो पक्को हो गओ मनों सई-सई जे नईं पतो के कोन सो घर बरसात में गिरबे जोग आए औ कोन से स्कूलन में छत टपकबे को खतरा आए। मनों अबे बी टेम आए जो तनक फुरती दिखाई जाए सो बड़ो नुसकान से बचो जा सकत आए। काए सई कई के नईं!
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Thank you Patrika 🙏
Thank you Dear Reshu Jain 🙏
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