"पर्यावरण और जीवन के संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति में एक जुनून जागने की जरूरत है। जब हर व्यक्ति इस बात को समझेगा कि पर्यावरण और जीवन को नुकसान पहुंचा कर हम स्वयं के लिए कितना खतरा उत्पन्न कर रहे हैं तो वह जागरूक होगा और पॉलिथीन के उपयोग जैसे हर कार्य करना बंद कर देगा जिससे पर्यावरण और जीवन को चोट पहुंचे। इस प्रकार की परिचर्चा एवं संगोष्ठियों के द्वारा पर्यावरण और जीवन के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दिया जा सकता है यह एक सार्थक कदम है।" - कल बतौर मुख्य अतिथि मैंने पर्यावरण जीवन संरक्षण परिषद, सागर द्वारा आयोजित परिचर्चा समारोह में अपने विचार रखे। मैंने कहा कि "पर्यावरण और जीव संरक्षण एक ऐसा ज्वलंत विषय है जिस पर गंभीरता से बार-बार विचार करने की आवश्यकता है।"
परिचर्चा समारोह की अध्यक्षता की सेवानिवृत्त फॉरेस्ट कंजरवेटर (IFS) बी पी उपाध्याय जी ने। विशिष्ट अतिथि थीं श्रुतिमुद्रा सांस्कृतिक समिति सागर की अध्यक्ष डॉ. कविता शुक्ला जी।
पर्यावरण जीवन संरक्षण परिषद, सागर संस्था के अध्यक्ष एवं से. नि. सहायक वन संरक्षक आदरणीय आर सी चौकसे जी तथा संस्था के संरक्षक से.नि. सहायक वन संरक्षक आदरणीय पी एन मिश्रा ने जी श्यामलम संस्था के श्री उमाकांत मिश्र जी के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस सफल आयोजन में सहभागी संस्थाएं थीं- भारत विकास परिषद सागर, राष्ट्रीय कल्चुरी परिषद सीहोर व सागर, सहज योग संस्था सागर तथा क्लीन सागर - ग्रीन सागर संस्था, सागर।
सरस्वती वंदना की श्री मुकेश तिवारी जी ने तथा सफल संचालन किया श्री यू .एस.बी.गौर जी ने।
इस आयोजन में शामिल होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई क्योंकि पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के प्रति मैं अत्यंत संवेदनशील हूं तथा मैं हमेशा चाहती हूं कि उस पर चर्चा, विचार -विमर्श और चिंतन किया जाए ताकि हम सभी एक आम नागरिक की हैसियत से जलवायु परिवर्तन की गति को कम करने में अपनी भूमिका समझ सकें।
समारोह में श्री संतोष श्रीवास्तव 'विद्यार्थी', श्रीमती सुनीला सराफ, श्रीमती वर्षा जी, श्री हरि शुक्ला, श्रीसंतोष पाठक आदि बड़ीसंख्या में साहित्यकार एवं समाजसेवी उपस्थित थे।
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