चर्चा प्लस
हम कितने तैयार हैं प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए?
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
एक दिन अचानक सभी के मोबाईल पर रेड अर्लट बजा। चेतावनी थी मौसम विभाग की ओर से। साथ ही मैसेज भी था कि तीन घंटे में तेज हवाएं चलेंगी। तीन क्या, तेरह घंटे निकल गए लेकिन रेड अलर्ट वाली तेज हवाएं नहीं चलीं। बहरहाल, लोगों को रेड अर्लट बजने का अनुभव तो हुआ। लेकिन यदि सही में तेज तूफानी हवाएं चलतीं तो आमजन को क्या करना चाहिए इसका उन्हें कोई पता नहीं था। चूंकि तूफानी हवाएं नहीं चलीं तो मामला हंसी-मजाक में दब गया। लेकिन प्रकृति कभी मजाक नहीं करती। इसका जाता उदाहरण वेनेजुएला में आया भूकंप है। गूगल के मौसम विभाग ने चेतावनी भी दी थी किन्तु हताहतों की संख्या दस हजार से अधिक रही। क्योंकि उन्हें पता नहीं था कि वे अपना बचाव कैसे करें? वेनेजुएला कैरेबियन प्लेट पर स्थित है। भूकंपों की यह श्रृंखला 7.2 तीव्रता के भूकंप से शुरू हुई और 39 सेकंड बाद पास ही में 7.5 तीव्रता का एक और भूकंप आया। वेनेजुएला सम्हल नहीं सका। क्या हम सम्हल सकेंगे?
24 जून 2026 को वेनेजुएला में शाम के समय दो शक्तिशाली भूकंप आए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार पहले 7.1 और दूसरे 7.5 तीव्रता के भूकंप ने काराकास में कई इमारतें गिरा दीं। लोग सड़कों पर आ गए। सुनामी की चेतावनी भी जारी की गई। पहला भूकंप 7.1 तीव्रता का था, जिसका केंद्र मोरॉन समुदाय के पश्चिम में था। ये देश के कैरेबियन तट पर स्थित है, काराकास से करीब 168 किलोमीटर दूर। इसकी गहराई 13 किलोमीटर थी। कुछ मिनट बाद दूसरा और भी बड़ा 7.5 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। केंद्र मोरॉन से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था। इन भूकंपों ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। लोग सड़कों पर निकल आए, इमारतों की दीवारें गिर गईं और धूल के गुबार उठते दिखे। इसके साथ ही कई राज्यों में झटके महसूस किए गए, खासकर काराकास के अल्तामिरा इलाके में भारी नुकसान हुआ। लोगों से बाहर रहने और आफ्टरशॉक्स से सावधान रहने की अपील की गई।
भूकंप पृथ्वी की टेक्टॉनिक प्लेट्स की गति से होते हैं। वेनेजुएला कैरेबियन प्लेट और साउथ अमेरिकन प्लेट की सीमा पर स्थित है। भूगर्भीय वैज्ञानिकों के अनुसार कैरेबियन प्लेट साउथ अमेरिकन प्लेट के सापेक्ष पूर्व दिशा में लगभग 20 मिलीमीटर प्रति वर्ष की गति से खिसक रही है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से ट्रांसफॉर्म बाउंड्री है, जहां प्लेट्स एक-दूसरे के बगल से गुजरती हैं, जैसे सैन सेबेस्टियन और एल पिलार फॉल्ट स जब प्लेट्स फंस जाती हैं और तनाव बढ़ता है, तो अचानक फिसलन होती है, जिससे भूकंप आता है। इस बार के भूकंप उथले थे (10-13 किमी गहराई), इसलिए उनका प्रभाव ज्यादा था। उथले भूकंप सतह पर ज्यादा कंपन पैदा करते हैं। यह क्षेत्र सदियों से सक्रिय है। सन 1812 और 1900 में भी काराकास के आसपास 7$ तीव्रता के भूकंप आए थे. इस प्लेट बाउंड्री का बड़ा हिस्सा श्लॉक्डश् है यानी तनाव जमा हो रहा है, जो 8 तीव्रता तक के भूकंप पैदा कर सकता है। इस डबलेट इवेंट (फोरशॉक के तुरंत बाद मेनशॉक) ने ऊर्जा रिलीज की, जो क्षेत्र की जटिल भू-संरचना का नतीजा है। उत्तर पश्चिम और दक्षिण पूर्व दिशा की सहायक फॉल्ट्स भी यहां सक्रिय हैं, जो स्ट्राइक-स्लिप मोशन पैदा करती हैं।
ध्यान देने की बात यह है कि वेनेजुएला ‘‘रिंग ऑफ फायर’’ का हिस्सा नहीं है, जहां भूकंप, विशेष रूप से उच्च तीव्रता वाले भूकंप, अपेक्षाकृत आम हैं। यही कारण है कि इस तीव्रता का भूकंप वेनेजुएला जैसे स्थान पर जापान की तुलना में कहीं अधिक नुकसान पहुंचा। क्योंकि ‘‘रिंग ऑफ फायर’’ में या उसके निकट होने कारण जापान इस प्रकार की घटनाओं के लिए कहीं अधिक तैयार रहता है। वहां बच्चों को भी स्कूल में प्रशिक्षण्या दिया जाता है कि भूकंप की चेतावनी मिलने पर स्वयं को किस तरह सुरक्षित रहना है। हमारे देश में आम नागरिकों को नही पता कि बाढ़, भूकेप या ट्विस्टर आने पर किस तरह अपना बचाव करना है?
ऐसा नहीं है कि कैरेबियन प्लेट में पहले कभी भूकंप नहीं आए, कैरेबियन प्लेट के दक्षिणी भाग में बड़े भूकंप आते रहते हैं। पिछले 100 वर्षों में इस क्षेत्र में 7 या उससे अधिक तीव्रता के पांच भूकंप आ चुके हैं। सितंबर 2025 में, उत्तरी वेनेजुएला में दो भूकंपों का एक साथ कहर बरपा लेकिन इसकी तीव्रता वर्तमान भूकंप से कम थी यानी रिक्टर स्केल पर 6.2/6.3 तीव्रता। यद्यपि 6.3 तीव्रता का भूकंप भी बड़ा होता है, लेकिन यह प्रायः व्यापक, विनाशकारी क्षति का कारण नहीं बनता है। 7.5 तीव्रता का भूकंप अन्य भूकंपों की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली होता है। इसमें खराब ढंग से निर्मित या बिना सुदृढ़ीकरण वाली इमारतों को भारी नुकसान पहुंचता है। जिससे अधिक जनहानि भी होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष की घटना तीव्रता और उत्सर्जित ऊर्जा के आधार पर पिछले वर्ष की तुलना में कम से कम 63 गुना अधिक शक्तिशाली थी । उत्तरी वेनेजुएला में आए इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के बारे में यूएसजीएस के आकलन के अनुसार, ष्कुल मिलाकर, इस क्षेत्र की आबादी भूकंप के झटकों के प्रति संवेदनशील संरचनाओं में रहती है, हालांकि कुछ संरचनाएं भूकंप प्रतिरोधी भी हैं। सबसे अधिक संवेदनशील भवन प्रकार बिना सुदृढ़ीकरण वाली ईंटों की चिनाई और मिट्टी के ब्लॉक से निर्मित हैं।
2018 में, 7.3 तीव्रता का भूकंप वेनेजुएला के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के कम आबादी वाले क्षेत्र (काराकास क्षेत्र में नहीं) के तट से काफी दूर उत्तर में आया था। इस घटना के परिणामस्वरूप मध्यम स्तर की क्षति हुई और कुछ लोगों की मौत हुई।
सन 1997 में, कैरियाको के उत्तर में अंतर्देशीय क्षेत्र में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम 81 लोगों की मौत हुई थी। सन 1967 में, तटरेखा के पास 6.6 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 240 लोगों की मौतें हुई और ऊंची-ऊंची अपार्टमेंट इमारतों के ढहने सहित व्यापक क्षति हुई थी। सन् 97 वर्ष पूर्व, सन् 1929 में, समुद्र तट से दूर 6.7 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके परिणामस्वरूप सुनामी भी आई थी। ताजा भूकंप यानी जून 2026 में आए दोहरे भूकंपों की घटना वेनेजुएला के आबादी वाले हिस्सों में, समुद्र तट से दूर नहीं, बल्कि अंतर्देशीय क्षेत्र में हुई, यह एक 7.5 तीव्रता के भूकंप से होने वाले दोहरे भूकंपों की तुलना में अधिक समय तक चली और इसलिए पिछली सदी में आए किसी भी भूकंप की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली रही। यूएसजीएस का अनुमान है कि मृतकों की संख्या 1,000 से अधिक हो जाएगी और संभावित रूप से 10,000 से भी अधिक हो सकती है।
वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप का भारतीय उपमहाद्वीप की जियोलॉजिकल (भूगर्भीय) संरचना से सीधा संबंध नहीं है, लेकिन भूवैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के अनुसार यह भारत के लिए सजग रहने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की एक बहुत बड़ी चेतावनी जरूर है।
वेनेजुएला में जो तबाही हुई, वह हमें निम्नलिखित कारणों से भारतीय उपमहाद्वीप के लिए सबक देती है कि भारत में हिमालयी क्षेत्र, उत्तर-पूर्व के राज्य, अंडमान-निकोबार, गुजरात, कच्छ और दिल्ली-एनसीआर अत्यधिक संवेदनशील भूकंपीय ज़ोन 4, 5 में आते हैं। इन क्षेत्रों के नीचे इंडियन प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिससे कभी भी वेनेजुएला जैसे या उससे भी बड़े तीव्र झटके (8.0$ मैग्नीट्यूड) आ सकते हैं।
वेनेजुएला के भूकंप के कुछ दिन दिल्ली, एमसीआर और उत्तर भारत के कई शहरों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। वेनेजुएला में आए भूकंप का केंद्र धरती की सतह से काफी उथला था (10 से 20 किलोमीटर की गहराई), जिसके कारण धरती की सतह पर कंपन बहुत भयानक हुआ। हिमालय और उत्तर भारत के भूकंप भी अक्सर उथले होते हैं, जो अत्यधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।
वेनेजुएला में भारी तबाही का एक बड़ा कारण वहां की इमारतों का भूकंपरोधी न होना था। ठीक इसी तरह, दिल्ली-एनसीआर और देश के अन्य संवेदनशील शहरों में अधिकांश निर्माण अनियोजित हैं। यदि भारत में ऐसा भूकंप आता है, तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। भूकंपीय संवेदनशीलतारू नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, भारत के 29 प्रमुख शहर उच्च भूकंप जोखिम वाले क्षेत्रों में स्थित हैं।
प्रकृति में होने वाले निरंतर परिवर्तन जिन्हें हम जलवायु परिवर्तन भी कहते हैं लगातार किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा की चेतावनी दे रहा है लेकिन हम कागजी कार्यवाहियों में व्यस्त हैं। न तो गगनचुंबी इमारतों की ठीक से जांच होती है कि वे भूकंपरोधी हैं या नहीं और न भूकंप के समय सुरक्षित रहने का उपाय आमजन को सिखाया जाता है। यह कटु सत्य है कि जिन शहरों में इमारतों के आग से बचाव के उपाय की ही जांच नहीं की जाती है वहां प्राकृतिक आपदा से बचाव कहां सिखाया जाएगा? अब खुद आमजन को प्राकृतिक आपदा से बचना सीखना होगा जबकि यह आपदाप प्रबंधन तथा जिला प्रशासनों का दायित्व है। -----------------------
(दैनिक, सागर दिनकर में 01.07.2026 को प्रकाशित)
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