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Saturday, May 31, 2025

टॉपिक एक्सपर्ट | उते तो खुसी, मनो इते गम्म | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

पत्रिका | टॉपिक एक्सपर्ट | बुंदेली में
टॉपिक एक्सपर्ट
उते तो खुसी, मनो इते गम्म
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

      जोन टाईप से आजकाल मोसम एक सो नई रैत, ओई टाईप से अपने इते की जिनगी चल रई। अब जेई देखो के संकारे बदरा से दिखात आएं, सो, जी करन लगत आए के दुफारी में इते चलो जाए, उते चलो जाए। मनो दुफारी होत-होत सूरज दाऊ उते ऊपरे से आंखें दिखाऊत आएं के तनक निकर के तो दिखाइयो, फेर हम बताएं! जेई दसा अपने इते जिनगी की आए। सहर में कछू अच्छे काम हो रए, जैसे महाराना प्रताप की स्टेचू, गीता के ग्यान के स्टेचू घांई किसम-किसम की स्टेचू लग रईं। महाराना प्रताप जंयती पे अच्छे बड्डे-बड्डे दो-दो ठइयां जलूस निकरे। कोऊं भले ईको सक्ती प्रदर्सन को जलूस कए, मनो हमें तो खुसी भई। खुसी तो मनो ई बात पे बी हो रई के अपने सहर में साहित्य वारो बुंदेली मेला लगबे वारो आए। ऊमें बायरे से पाऊना बी आहें। अच्छो रैहे। सो, जे तो भई खुसी वारी बात, अब गम्म वारी सोई सुन लेओ।
     बाकी जे गम्म कोनऊं नओ नईयां। कओ जात आए के बारा बरस में घूरा के दिन फिर जात आएं, पर इते तो छत्तीस बरस में आवारा पशुअन की समस्या हल ने हो पाई। सहर में गाड़ियां बढ़ गईं, मनो उने खड़ी करबे की जांगा अबे लौं ने बन पाई। सो होत का आए के सबरे फुटपाथ गाड़ियां ठाड़ी करबे को अड्डा बने रैत आएं। अब आपई सोचो के जो कऊं बिलकुल बायरे के पाऊंना आहें तो जे सब देख के का सोचहें? जेई तो सल्ल आए के भैया-बैन हरों खों जलूस से फुरसत नईयां औ  जलूसन के मारे प्रसासन भैरानों सो फिर रओ औ हम उते खुसी, इते गम्म में मरे जा रए।
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Thank you Patrika 🙏
Thank you Dear Reshu Jain 🙏
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