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Monday, February 14, 2022

काव्य वसंत में प्रेम और मां की लोरी में नींद का संचार करता है - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

"काव्य साहित्यिक विधाओं में सर्वाधिक सशक्त विधा है। काव्य युद्ध भूमि में वीरता का संचार करता है तो वसंत ऋतु में हृदय में प्रेम को उद्दीप्त करता है। यह मां की लोरी में नींद का उपहार बन जाता है तो धर्म-चिंतन में धार्मिक महाकाव्य में ढल जाता है। अतः जो काव्यसृजन से जुड़ा है वह विशिष्ट है। इस विशिष्टता के साथ प्रत्येक कवि को अपना दायित्व समझते हुए सृजन करना चाहिए ताकि वह देश और समाज को जीवन के कठोर विषयों पर भी कोमलता से विचार प्रदान कर सके।" यह अपने अध्यक्षीय उद्बोधन मे मैंने कहा। अवसर था बुंदेलखंड हिंदी साहित्य-संस्कृति विकास मंच, सागर (म.प्र.) की 1413 वीं ऑन-लाईन साप्ताहिक संगोष्ठी क्रमांक 92 का।    
       यह आयोजन सागर के सुपरिचित कवि एवं प्रखर चिंतक आदरणीय बड़े भाई मणिकांत चौबे बेलिहाज़ जी को जिनकी संकल्पना का सुफल है कि विकट कोरोनाकाल में भी उन्होंने इस मंच के माध्यम से सभी साहित्यकारों को एक-दूसरे से जोड़े रखा और विचार- विनिमय तथा परस्पर भावनात्मक संबल बनाए रखने का आधार प्रदान किया। यह बेलिहाज़ जी का ही माद्दा है जो वे बुंदेलखंड हिंदी साहित्य-संस्कृति विकास मंच की गोष्ठियों की निरंतरता बनाए हुए हैं।  प्रशंसा के पात्र भाई डॉ नलिन जैन ‘‘नलिन’’ जी भी हैं जो अपनी तमाम व्यस्तताओं के बावज़ूद इन गोष्ठियों के संचालन के दायित्व को पूरी गंभीरता से निभाते रहते हैं। 
      इस अवसर पर मैंने काव्य पाठ भी किया।
#डॉसुश्रीशरदसिंह 
#DrMissSharadSingh