बतकाव बिन्ना की | जो पगला प्रेमी घांईं काए खों लरत फिर रओ? | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह | बुंदेली कॉलम
बतकाव बिन्ना की
जो पगला प्रेमी घांईं काए खों लरत फिर रओ?
- डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
‘‘भौजी मोए जे समझ नई पर रई के जे हो का रओ?’’ मैंने भौजी से कई।
‘‘काए के बारे में कै रईं?’’ भौजी ने पूछी।
‘‘जेई, जे ट्रम्प पूरोई पगला गओ का?’’ मैंने कई।
‘‘अब का करो ऊ पगला ने?’’ भौजी ने ऐसे ढंग से पूछी मनो बे अपनी गली के कौनऊं पगला के बारे में पूछ रई होंए। इत्ती फजीयत तो ई दुनिया में कभऊं कोनऊं प्रेसीडेंट की ने भई हुइए।
‘‘ने पूछो के का करो। बा कै रओ आए के ईरानी सभ्यता को बा पूरोई मिटा दैहे। भला जा कोन सी बात भई? तुमें कोनऊं परधानमंत्री औ प्रेसीडेंट से तकलीफ होए तो ऊको मिटाबे की कओ, उते की पब्लिक ने तुमाओ का बिगारो के तुम उते के बच्चा, बूढ़ा, लुगाइयां, सबई खों मार डारबे की कै रए। अरे जो तुम पूरी सभ्यता मिटाहो तो ईको मतलब कहाओ के तुम उते के दूद पीते बच्चा खों लौं छोड़बो नईं चात हो। कित्ती घटिया बात आए जो।’’ मैंने भौजी से कई।
‘‘बात तो सई आए तुमाई। मनो मोए एक बात लगत आए।’’ भौजी कछू सोचती सी बोलीं।
‘‘का लगत आए?’’ मैंने पूछी।
‘‘मोए लगत आए के जा ट्रम्प खों ईरान से कछू पर्सनल खुन्नस आए।’’ भौजी ने कई।
‘‘का मतलब?’’ मैंने पूछी।
‘‘मतलब जे के ट्रम्प कोनऊं ईरानी लुगाई के पांछू पड़ो रओ हुइए। मनो ऊने ट्रम्प खों घास ने डारी हुइए। तभई से ट्रम्प के जी में लगो रओ हुइए के जे ईरानियन खों छोरने नइयां। इनें पूरोई मिटा देबी। जेई से तो बा पर्सनल दुस्मनी सी भांज रओ आए।’’ भौजी ने कई।
‘‘अई गजब! जे तो मैंने सोचई ने रई। जे बी हो सकत आए। ने तो ऐसी कोन-सी खेती काट लई ईरान ने बा ट्रम्प की के बा अपने देस वारन की बी नई सुन रओ औ पिलो परो आए ईरान के पांछू।’’ मोए भौजी की बात में दम दिखानी।
ने तो आपई ओरें सोचो के ऐसी का बात हो गई के बा पूरी ईरानी सभ्यता को मिटाबे की कैन लगो। ऐसो तो कोनऊं ने ना करी। कछू तो पर्सनल ऐंगल हुइए। औ जो ऊको तेल के कुआ चाउंने तो ऊको बोई तेल के कुआ में डुबो दओ चाइए।
‘‘देख तो भौजी, ऊके मारे अपने इते बेरोजगारी बढ़ रई।’’ मैंने भौजी से कई।
‘‘हऔ, कल हम औ तुमाए भैयाजी संझा को तिगड्डा लौं गए रए। उते हमाओ चाट खाबे को जी करो। हम ओरन को खास चाट वारो ठेला आए। हम तो उतई चाट खात आएं। मनो बा उते ने दिखानो। सो हमने उते दूसरे ठिलिया वारो से ऊके बारे में पूछी सो बोलो के ऊको गैस को सिलेंडर ने मिल रओ हतो सो ऊको अपनी ठिलिया बंद करनी परी। हम ओंरे सोई दो-चार दिनां औ चलाबी, फेर हम ओरन खों सोई दुकान बढ़ानी परहे। काए से के जो गैस ने मिलहे तो काए में चाट समोसा बनाहें? सो मैंने पूछी के बा गओ कां? तो बा दूसरे वारे ने बताई के बा अपने गांव खों चलो गओ आए। मैंने पूछी के बा उते का करहे? सो बा बोलो के का करहे? कछू नईं। उते कछू काम ने मिलत्तो सो बा इते भग के आओ रओ औ अब इते से फेर उते जा के का मिल जाहे? मनो इत्तोई आए के इते घर को किराओ देन परत्तो, बा ने देने परहे। औ उते बाप-मताई एक रोटी में आधी ऊको औ ऊके लरका बच्चा को ख्वा दैहें। रामधई बिन्ना! ऊकी बात सुन के मोए फुरूरी-सी आ गई औ कोरोना वारे दिन याद आन लगे। ऐसई परेसानी ऊ टेम पे आई रई। बस, इत्तोई आए के ऊ टेम पे सब कछू एकदम से होत चलो गओ रओ औ अब ई टेम पे अपन देखत जा रए औ समझत जा रए। मनो कर कछू नईं सकत।’’ भौजी बोलीं।
‘‘सई कई भौजी। अबे ऊ टेम के दुख सो भूले नइयां औ जे पापी ने सब खों हैरान करबो सुरू कर दओ। ईको कभऊं कोऊं माफ ने करहे।’’ मैंने कई।
‘‘बाकी जे सबरे मीडिया वारे का कर रए? जे काए नईं पतो लगा रए के बा को आए जोन के ठुकराबे पे जा पगला रओ।’’ भौजी बोलीं।
‘‘हऔ, ऐसे तो मीडिया सबई में अपनी नाक घुसात फिरत आए।’’ कैत भए मोए हंसी आ गई। जा बात मोए कोनऊं फिल्मी स्टोरी घांईं लगी। इत्ते में भैयाजी आ गए। बे बजरिया गए रए सब्जी लेबे खों।
‘‘का बतकाव चल रई?’’ आतई सात भैयाजी ने हम दोई से पूछी।
‘‘भौजी ने बड़े पते की बात बताई।’’ मैंने कई।
‘‘का बात?’’ भैयाजी ने पूछी।
‘‘बात जे के बा ट्रम्प की कोऊ लवस्टोरी रई हुइए जोन में ऊको लिप्ट ने मिली, सो बा पगलाओ सो ईरान के पांछू परो आए।’’ मैंने बताई।
‘‘तुमाई भौजी बी! जां ने पौंचे रवि, उते पौंचे तुमाई भौजी।’’ भैया हंसत भए बोले। फेर कैन लगे के ई लड़ाई ने तो सगरी दुनिया के देसन अर्थब्यबस्था हला दई आए। अभई हमने देखी के सब्जी के दाम बढ़ गए आएं। जो हमने पूछी सो बे सब्जी वारे कैन लगे के डीजल, पेट््रोल सई से ने मिले तो सबई कछू मैंगो होन लगत आए। बात ऊकी सई हती।’’ भैयाजी बोले।
‘‘हमने तो आपसे कई रई के एक फतकुली औ एक सेम की बेलें लगा लेओ, मनो अपने सुनी नईं ने तो अबे अपने घरे की मुप्त की सब्जी मिल रई होती।’’ भौजी ने सोई मोका ताक के अपनी बात कै डारी।
‘‘तुमें खाली सब्जी की परी? औ का-का उगा लैहो? जे फसल कटबे को टेम आए। औ आजकाल कटाई, थराई सबई कछू गाड़ियन से होत आए। बो का कहाऊत आएं, हार्वेस्टर! एक तो बा किराए में लेन परत आएं औ बे सोई डीजल-मीजल से चलत आएं। सो उनके दाम बी तो बढ़े हुइएं।’’ भैया जी बोले।
‘‘हऔ, औ ऊपरे से जो पानी गिरन लगत आए। दूबरे औ दो असाढ़।’’ भौजी बोलीं।
‘‘सई में भौजी। अपने इते सब कछू कित्तो ठीक चल रओ हतो, मनो ई पगला के मारे सब बिगरो जा रओ। अखीर आपई सोचो के जो उते इत्ता मिसाईलें घल रईं सो का ऊको पूरी धरती पे असर ने परत हुइए? ओजोन परत में ऊंसई छिद्दा भए डरे, ऊपे से जे सब का पलूशन ने फैला रए हुइएं?’’ मैंने कई।
‘‘जा बात बी तुमने सई कई बिन्ना।’’ भैयाजी बोले।
‘‘जे सब बी तो सोचबे वारी बात आए भैयाजी! जोन टेम पे कोन ऊं लड़ाई छिड़त आए तो पैले दोई तरफी के मारे गए सेना वारे गिने जात आएं, फेर पब्लिक वारे गिने जात आएं। मनो पसु-पक्षियन की तो कोन ऊं की परी नई रैत आए। न जाने किते कुत्ता, बिल्ली, पंछी, कीरा-पतूला सबई कछू तो मारे जात आएं। इत्तेई नईं, पेड़ पौधा सोई जल-बर जात आएं, सो उनको को गिनत आए? कोन ऊं बी लड़ाई लड़त आएं मानुस, मनो मरत आए सबई कछू। फेर बी कोनऊं ईके बारे में नईं सोचत आए।’’ मैंने कई।
‘‘हऔ बिन्ना! जो इत्ते सोचत तो लरतई काए खों? अपन पढ़त नइयां का के महाभारत भई इंची भर जमीन ने देने परे ईके लाने, मनो दोई तरफी के न जाने कितेक लोग मरे। औ बा खांडव बन वारी घटना। उते सोई सबरे पसु-पक्षी जल के मर गए रए। तुमई ने एक लेख लिखो रओ के दूसरे विश्व युद्ध में कित्ते कुत्ता, बिल्ली मारे गए रए।’’ भैयाजी बोले।
‘बा तो हमने हिल्डा कीन की ‘द ग्रेट कैट एंड डाॅग मैसेकर’ किताब पढ़ी रई, सो हमें पता परी रई के द्वितीय विश्व युद्ध होतई साथ सात लाख कुत्ता औ बिल्ली मारे गए रए।’’ मैंने कई।
‘‘जेई से तो हम सोचत आएं के अब जा लड़ाई खतम होन चाइए। भौत हो गई।’’ भैयाजी बोले।
बाकी बतकाव हती सो बढ़ी गई, हड़ियां हती सो चढ़ा गई। अब अगले हप्ता करबी बतकाव तब तक लौं जेई की जुगाली करो। मनो सोचियो जरूर के जा लड़ाई से कोऊ को का मिलहे? जो प्रेमी पगला घांईं काए खों लरत फिर रओ?
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बुंदेली कॉलम | बतकाव बिन्ना की | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | प्रवीण प्रभात
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