टाॅपिक एक्सपर्ट
राजा हिमांचल के दमाद भोले दूला बने
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
लेओ आ गई शिवरातें। अपने बुंदेलखंड में शिवरातों को ऐसी धूम मचत आए, ऐसी धूम मचत आए के ने पूछो। सगरे शिव मंदरन में संकारे से भीर लगन लगत आए। भीर काए ने परे अखीर शिवरातें में शिव औ पारबती को ब्याओ होत आए। शिव मने सबको भलो करबे वारे औ पारबती माता सो ऊंसईं ठैरीं ई जगत की जननी मने मताई। सो, ई जगत की भलाई लाने जो ई जगत के पालनहार औ जगत की मताई को को ब्याओ होए तो खुसी तो मनाई जाहे। मनो जे सोचबे की बात आए के अपनी संस्कृति में शिव घांईं देवता सादगी के उदारण आएं। बे हिमांचल राजा के दमाद इएं मनो बे कोनऊं मैंगो कपड़ा नईं पैंनत, बे तो एक ठइयां बघम्मर लपेटे रैत आएं। गले मे सोना-चांदी की माला की जांगा एक ठइयां नागदेव पैने रैत आएं। मोटर-कार की जांगा बैलवा पे चढ़ के चलत आएं। मनो छवि ऐसी नोंनी के उने पाने के लाने पारबती जू ने तप करी। ऐसे देव देवी को ब्याओ होए मानुस ब्याओ को गानों ने गाऐं ऐसो कैसे हो सकत? अपने बुंदेलखंड में मुतके लोकगीत आएं जीमें शिव पारबती के ब्याओ को सजीब वर्नन आए। जैसे एक गीत आए- “बन्ना जे देखे पेलऊ पेल, बैल पे झूमत आवे जू,
शंकर महादेव को ब्याव, भूतन की बारात आवे जू।”
एक औ गीत आए जीमें गौरा जी को शिव जी के ब्याहबे आबे की बात करी गई आए-
"हरे बांस मंडप छाए, गौरा जी को शिव जी बिहाने आए,
सेहरा में सांप विराजे, मुख पे भसम रमाए,
गौरा जी को शिव जी बिहाने आए..."
औ जोन ने भोला की बरात देख लई ऊको इठलाबो देखतई बनत आए,-
"में तो देख आई, हे में तो देख आई,
लगन भोले की बारात, में तो देख आई,
अजब बारात है, अजब दूल्हा है..."
सो जे आए अपने इते की शिवरातों के मजे। सो, सबई जने हिलमिल के मंदर जइओ, शिव-पारबती के ब्याओ में शामिल हुइयो औ सबई के कल्यान की सोचियो।
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Thank you Patrika 🙏
Thank you Dear Reshu Jain 🙏
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