Saturday, March 7, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | बे उते इमली के पत्ता पे कुलाटां खा रए | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टॉपिक एक्सपर्ट | बे उते इमली के पत्ता पे कुलाटां खा रए | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम
टाॅपिक एक्सपर्ट
बे उते इमली के पत्ता पे कुलाटां खा रए
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
     कछू जने कछू ज्यादई स्याने होत आएं। पलकां पे परे-परे मोबाईल पे उंगरिया फेर-फेर के मनो स्क्रीन की मसाज कर रए होंए, लेकन जो उनसे पूछो के काए भैया, ऊ कार्यकरम आप ने दिखाने? सो, बे जेई कैंहें के का कएं बेजा बिंधे रए। मनो ऊनसे ज्यादा बिजी तो ई दुनिया ने हुइए। जेई से बा कहनात कई जात आए के फुरसत के मारे टेम नइयां। बाकी अपने इते एक से बढ़ के एक कहनात कई जात आएं। जैसे, चित्त तुमाई पट्ट तुमाई - मने दोई तरफी से लाभई-लाभ। जाके जैसी नदियां- नारे ऊसईं ओके भरका - मने जोन जैसो हुइए वा की संगत औ करम सोई ऊसईं हुइएं। एक कहनात औ आए जो सबई खों पता आए के जबरा मारे औ रोन न दे। मने एक तरफी तो परेसान कर रए औ ऊपे से सिकायत बी नईं करन दे रए।

     आप ओरें सोच रए हुइयो के जे सबरी कहनातें हमें काए याद आ रईं? सो, बात जे आए के अपने ई सहर में टिरेफिक की दसा ऊंसईं होत जा रई के इते के बराती ने उते के न्यौतार। मने कोऊ पूछबे, देखबे वारो नइयां। खास- खास चौराए में टिरेफिक की बत्ती हप्ता-खांड़ बंद डरी रैत आए, मनो कोनऊं खों फिकर नईं। झुंड के झुंड कुत्ता सगरे में फिर रए, मनो कोनऊं खों फिकर नईं। औ बा टाटा की लेन सो भांटा निकरी। कां तो चौबीस घंटा पानी की कई गई रई, मनों दो दिनां में नल आ जाएं सो खुद को रामधनी समझो। लीकेज देखबे वारो सो ऊंसई कोनऊं नईंयां। सो, अखीर में जे कहनात औ सुन लेओ के अपन इते टेंसूआं ढा रए औ बे उते इमली के पत्ता पे कुलाटां खा रए। अब ईको मतलब आप ओरें खुदई सोचियो। जै रामजी की!
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Thank you Patrika 🙏
Thank you Dear Reshu Jain 🙏
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