Saturday, March 14, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | पब्लिक खों अंधरा काए बनात रैत | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टॉपिक एक्सपर्ट | पब्लिक खों अंधरा काए बनात रैत | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम
टाॅपिक एक्सपर्ट
पब्लिक खों अंधरा काए बनात रैत
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
         दो दिनां पैले की बात आए हम मकरोनिया चौराए से कढ़े, वा बी रात के साढ़े ग्यारा बजे। अब आप ओरें सोचहो के हम रात को साढ़े ग्यारा बजे उते कां फिर रए हते? काए से अपने इते को जो चलन आए के जोन बात जानो चाइए ऊ छोर के ई जानबे में ज्यादा मन लगत आए के को कां, काए को,  कोन के संगे घूम रओ तो? सो ऐसे जिज्ञासुअन के लाने बताबो जरूरी आए के हम अनरय करके बंडा से लौट रए हते। अनरय मने कोनऊं के घरे गमी के बाद को पैलो त्योहार। पर गई ठंड? चलो, अब आगे की असल बात सुनो के हमने मकरोनिया चौराए पे देखी के उते मसीन से गड्ढा सो खोदो जा रओ तो। बा देख के हमाए मों से निकरो के “इते जो का हो रओ?” जा सुन के हमाए डिराइवर भैया ने कई के “को जाने का करत रैत आएं? कभऊं गोलचक्का (रोटरी) पटा देत आएं, तो कभऊं जा तिकुनियां (आईलैंड) बना देत आएं। अब को जानें का कर रए?” 
     “हमें लगत आए के जे फेर के इते रोटरी बना रए।” हमाई संगवारी बोलीं। तभई हमाई संगवारी के संगवारे बोले के “हमें तो लग रओ के कछू पानी की पाईप को काम आए।” 
   “अरे नईं, आप ओरें का जानों के उने खुदई पता ने हुइए के बे इते काए के लाने गढ़ा खोद रए।” संगवारे के सालेजू ने ठिठोली करी। जा सब सुन के मोए बा एक हाथी औ चार अंधरा की किसां याद आ गई। जीमें चारों अंधरा हाथी खों थथोल-थथोल के अपनों-अपनों बखान करत आएं। बाकी अपने सागरे में सोई दसा अंधरन घांईं आए। करबे वारन के अलावा कोनऊं खों पतो नईं रैत के कब कां, का होन लगहे। पब्लिक को पइसा, मनो पब्लिक खों पैले नईं बताओ जात के का करबे जा रए। अरे एक ठइयां न्यूज छपाबे में का जा रओ? जे पब्लिक खों अंधरा सो काए बनात रैत आएं? तनक सोचियो!
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Thank you Patrika 🙏
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