Tuesday, March 24, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | होंए जालपा चाए ज्वाला माई,परन न देवें दुख की छांई | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टाॅपिक एक्सपर्ट
होंए जालपा चाए ज्वाला माई,परन न देवें दुख की छांई
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
चैत की नवरातें आतई साथ पूरे सागरे में देवी मैया के जयकारे गूंजने लगत आएं। चाए दीनदुखी होंएं, चाए सुखी मानुस, सबई माता के दोरे पे माथा टेकबे के लाने निकर परत आएं। कोऊ रानगिर वारी हरसिद्धि माई के लिंगे जात आए तो कोऊ बाघराज वारी हरसिद्धि माई के इते। ऊंसई अपने सागरे में माई के दरबार चारों खूंट में आए। जेई लाने तो भगतें गाई जात आएं के-
होंए जालपा चाए ज्वाला माई। परन ना देवें दुख की छांई ।।
   सागर से खुरई जात में जरुआखेड़ा से जलंधर के लाने रोड  कटत आए। आप जोन जलंधर पौंचे सो मनो ज्वाला देवी के दरबार के दोरे पे पौंच गए। उते ऊंची पहरिया पे माई को मंदिर आए। जो छिड़ियां चढ़ के ऊपरे ज्वालामाई के दरबार में पौंचो तो भौतई अच्छो लगत आए, काए से उते से चारो तरफी पहरियां दिखात आएं। बे पहरियां बी अबे जंगल वारी आएं। ज्वालामाई की सौं, उते भौतई नोनों लगत आए। ऐसो लगत आए के उते सजीवन माता उतर आई होंए।
   मनो होत का आए के जां सब साफ-सुथरो होय, लोग बी नोने जी से कऊं पौंचें तो उते देवी मैया को वास सो फील होत आए। माता सो माता आएं, बे अपने बच्चन खों चाए दो लपाड़े लगा लेवें मनो कभऊं साथ नईं छोरत आएं। मनों अपन ऐसो काम काए खरें के माई अपन खो थपड़िआएं। कैबे को मतलब जे के जो अपन अपने पूरे सागरे खों साफ-सुथरो औ अच्छो राखें तो हरसिद्धि माई, जालपा माई औ ज्वाला माई सबई की किरपा अपने सहर पे बनी रैहे।  सो, बोलो जै माई की!    
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