Wednesday, September 11, 2019

चर्चा प्लस ... वर्ल्ड रिकाॅर्ड बनाने वाले अक्षर गणेश कलाकार राज कांदालगांवकर - डाॅ. शरद सिंह

Dr (Miss) Sharad Singh
चर्चा प्लस ...

वर्ल्ड रिकाॅर्ड बनाने वाले अक्षर गणेश कलाकार राज कांदालगांवकर
- डाॅ. शरद सिंह


भारतीय परंपरा के अनुसार भगवान गणेश लेखन के विशेषज्ञ माने जाते हैं। पुराणों के अनुसार वे बुद्धि और कौशल के देवता हैं। उनकी आराधना कर अर्थ, विद्या, बुद्धि, विवेक, यश, प्रसिद्धि, सिद्धि सहजता से प्राप्त हो जाती हैं। श्रीगणेश मात्र भारत में ही नहीं पूजे जाते, बल्कि विश्व में कई अनेक देशों में उनकी पूजा होती है। ऐसे श्रीगणेश की आकृति को माध्यम बना कर नाम लिखने वाले विश्वविख्यात कलाकार का नाम है राज कांदालगांवकर। जो आज तक गणेश आकार में लगभग 25000 नामों का लेखन कर चुके हैं। नाम लेखन की यह शैली अपने आप में खूबसूरत और अद्भुत है।

Charcha Plus चर्चा प्लस ... वर्ल्ड रिकाॅर्ड बनाने वाले अक्षर गणेश कलाकार राज कांदालगांवकर - डाॅ. शरद सिंह

बुद्धि के स्वामी, विद्या सुखदाता भगवान गणपति के जीवन का हर अध्याय उनके अनुपम रूप की तरह ही अद्भुत है। विद्या और लेखनी के अधिपति माने जाने वाले गणपति जी को सभी देवों में सबसे अधिक धैर्यवान और स्थिर माना जाता है। उनकी लेखन की शक्ति भी अद्वितीय मानी गई है।
जब महर्षि वेदव्यास महाभारत नाम के महाकाव्य की रचना प्रारंभ करने जा रहे थे। अपने महाकाव्य के लिए वे एक ऐसा लेखक चाह रहे थे, जो उनके विचारों की गति को बीच में बाधित ना करे। इस क्रम में उन्हें भगवान गणेश की याद आई और उन्होंने आग्रह किया कि श्री गणेश उनके महाकाव्य के लेखक बनें। गणेश जी ने उनकी बात मान ली, लेकिन साथ ही एक शर्त रख दी। गणेश जी की शर्त थी कि महर्षि एक क्षण के लिए भी कथावाचन में विश्राम ना लेंगे। यदि वे एक क्षण भी रूके, तो गणेश जी वहीं लिखना छोड़ देंगे। महर्षि ने उनकी बात मान ली और साथ में अपनी भी एक शर्त रख दी कि गणेश जी बिना समझे कुछ ना लिखेंगे। हर पंक्ति लिखने से पहले उन्हें उसका मर्म समझना होगा। गणेश जी ने उनकी बात मान ली। इस तरह दोनों ही विद्वान जन एक साथ आमने-सामने बैठकर अपनी भूमिका निभाने में लग गए। महर्षि व्यास ने बहुत अधिक गति से बोलना शुरू किया और उसी गति से भगवान गणेश ने महाकाव्य को लिखना जारी रखा। इस गति के कारण एकदम से गणेश जी की कलम टूट गई, वे ऋषि की गति के साथ तालमेल बनाने में चूकने लगे। इस स्थिति में हार ना मानते हुए गणेश जी ने अपना एक दांत तोड़ लिया और उसे स्याही में डुबोकर लिखना जारी रखा। इस महाकाव्य को पूरा होने में तीन वर्ष का समय लगा। इन तीन वर्षों में गणेश जी ने एक बार भी ऋषि को एक क्षण के लिए भी नहीं रोका, वहीं महर्षि ने भी शर्त पूरी की। महाकाव्य के दौरान जब भी उन्हें तनिक विश्राम की आवश्यकता होती, वे कोई बहुत कठिन अंतरा बोल देते। शर्त के अनुसार गणेश जी बिना समझे कुछ लिख नहीं सकते थे। इसीलिए जितना समय गणेश जी उस अंतरे को समझने में लेते, उतनी देर में ऋषि विश्राम कर लेते।
ऐसे श्रीगणेश की आकृति को माध्यम बना कर नाम लिखने वाले विश्वविख्यात कलाकार का नाम है राज कांदालगांवकर। जो आज तक गणेश आकार में लगभग 25000 नामों का लेखन कर चुके हैं। नाम लेखन की यह शैली अपने आप में खूबसूरत और अद्भुत है।
यूं तो चित्रलिपि अर्थात् केलीग्राफ और हियरोग्लिफ का इतिहास बहुत प्राचीन है। चित्रलिपि ऐसी लिपि को कहा जाता है जिसमें ध्वनि प्रकट करने वाली अक्षरमाला की बजाए अर्थ प्रकट करने वाले भावचित्र (इडियोग्रैम) होते हैं। यह भावचित्र ऐसे चित्रालेख चिह्न होते हैं जो कोई विचार या अवधारणा (कॉन्सॅप्ट) व्यक्त करें। कुछ भावचित्र ऐसे होते हैं कि वह किसी चीज को ऐसे दर्शाते हैं कि उस भावचित्र से अपरिचित व्यक्ति भी उसका अर्थ पहचान सकता है। चीनी भाषा की लिपि और प्राचीन मिस्र की लिपि ऐसी चित्रलिपियों के उदाहरण हैं। वहीं हियरोग्लिफ मिस्री की उन चित्रलिपि को कहा जाता है जिसमें विभिन्न आकृतियों के द्वारा लेखनकार्य किया गया है। यह लगभग 4000 ईपू पुरानी मानी जाती है।
अक्षर गणेश कलाकार राज कांदालगांवकर की चित्रांकन शैली (मेरे विचार से) केलीग्राफी और हिरोग्लिफिक की मिश्रित शैली है जिसमें वे व्यक्तियों के नामों को गणेश की आकृति में चित्र के रूप में ढाल देते हैं। 06 अप्रैल 1974 को जन्मे मुंबई के डोंबीवली में रहने वाले अक्षर गणेश कलाकार राज बहुत ही सहज और सरल स्वभाव के हैं। एक आम युवा भारतीय की भांति उन्हें बाईक चलाना पसंद हैं। उन्हें प्रत्यक्ष प्रदर्शन के लिए आमंत्रित किया जाता है। वे अब तक लगभग 25000 चित्र बना चुके हैं। वे स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर, आशा भोंसले, महानायक अमिताभ बच्चन, राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे आदि के नामों के चित्र बना कर उन्हें भेंट कर चुके हैं। मेरे लिए यह प्रसन्नता का विषय रहा कि अक्षर गणेश कलाकार राज ने इन शब्दों के साथ ‘‘ जो मेरे कला को सन्मानित करता है .जो एक कलाकार को प्रोसाहित करता है उनका सम्मान करना कलाकार का धर्म है। धन्यवाद शरद जी ! आप हमारे मैत्री युग मंे गणेशरुपी स्वागत है खास 17 हजार 700 वे कला के रूप मे ... ’’ मेरे नाम को गणेश आकृति में चित्रित कर मुझे भेंट किया था। (वह चित्र यहां प्रस्तुत है।)
भारतीय चित्रकला शैली में अनेक विधाएं हैं जिनमें अक्षर गणेश चित्रकला के लिए राज कांदालगांवकर ‘‘ वर्ल्ड क्लास एंड वल्र्ड रिकाॅर्ड होल्डर इंडियन फस्र्ट नेम गणेश कलाकार’’ का खिताब उन्हें मिल चुका है। इसके अतिरिक्त वे अनेक सम्मानों से सम्मानित किए जा चुके हैं जिनमें कुछ प्रमुख सम्मान हैं- आदर्श कला रत्न पुरस्कार, महाराष्ट्र पत्रकार कला भूषण, अवाके इंडिया महाराष्ट्र गौरव, भास्कर भूषण कला भूषण पुरस्कार, महाराष्ट्र पोलीस मित्र अक्षररत्न पुरस्कार, भास्कर भूषण राष्ट्रीय आयकन अवार्ड, केसरी कलाश्रेष्ठ पुरस्कार आदि।
विदेशों में भी राज कांदालगांवकर की यह विशिष्ट चित्रकारी लोकप्रिय है। इंटरनेट पर उनकी कलाकृतियां बिक्री के लिए उपलब्ध रहती हैं। एक बड़े और ख्यातिनाम कलाकार होते हुए भी अभिमान से दूर राज कांदालगांवकर अत्यंत सहज और सरल स्वभाव के हैं। मित्रों के मित्र और कला के धनी राज कांदालगांवकर गणेशोत्सव के दौरान अत्यंत व्यस्त रहते हैं जब उनकी अनूठी कला के प्रदर्शन के लिए उन्हें अनेक आयोजनों में मुख्यअतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता हैं। वे अपनी इस प्रतिभा एवं प्रसिद्धि को श्रीगणेश की कृपा मानते हैं। भारतीय चित्रकला में राज कांदालगांवकर का विशेष स्थान है।
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संलग्न चित्र: लेखिका डाॅ. शरद सिंह नाम का लेखन अक्षर गणेश कलाकार राज कांदालगांवकर द्वारा।
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(दैनिक ‘सागर दिनकर’, 04.09.2019)
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