Wednesday, February 9, 2022

चर्चा प्लस | ‘इंडिया’ क्यों? सिर्फ़ भारत क्यों नहीं ? | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह

चर्चा प्लस  
‘इंडिया’ क्यों? सिर्फ़ भारत क्यों नहीं ?
 - डाॅ. (सुश्री) शरद सिंह                                                                                        
      दुनिया में क्या कोई और देश है जिसके तीन नाम हों? मेरी जानकारी में तो नहीं हैं। एक हमारा देश ही है जो जिसके तीन नाम हैं- भारत, इंडिया और हिन्दुस्तान। इनमें ‘इंडिया’ सबसे अधिक प्रचलित। तीन नामों पर हम गर्व कर सकते थे यदि ‘इंडिया’ अंग्रेजों की देन न होता। वस्तुतः यह तो गुलामी की निशानी है। तो फिर ‘इंडिया’ सिर्फ़ भारत क्यों नहीं हो सकता है। एक देश, एक नाम, एक पहचान - यह जरूरी है देश के वैश्विक गौरव के लिए और भावी पीढ़ी के लिए।
मेरी सहेली की बेटी हैदराबाद से छुट्टियों में सागर आई हुई थी इसलिए उसने मुझे दोपहर के खाने पर आमंत्रित किया था। ताकि मैं उसकी बेटी से भी मिल लूं क्योंकि उसकी बेटी मुझसे भारतीय इतिहास के बारे में कुछ चर्चा करना चाहती थी। दोपहर के खाने में मेरी सहेली ने दाल-बाटी बनवाई थी। खाते समय मैंने उससे कहा कि पिज्जा, बर्गर चाहे जितना भी खा लो लेकिन अपने भारतीय व्यंजन, विशेषकर बुंदेली व्यंजन की तो बात ही अलग है। जो स्वाद दाल-बाटी में है वह पिज्जा बर्गर में नहीं। यह सुनकर उसकी बेटी बोल उठी, ‘‘यू मीन इंडियन डिशेज?’’ मैंने कहा, ‘‘हां, इंडियन डिशेज यानी भारतीय व्यंजन।’’ वह बोली, ‘‘तो आप इंडिया क्यों नहीं कहतीं, भारत क्यों कहती है? दुनिया में सभी जगह इस देश का नाम इंडिया जाना जाता है, तो आप लोग भारत क्यों बोलते हैं?’’ मुझे उसकी बात सुनकर बड़ा अटपटा लगा। ऐसा लगा कि वह भारतीय बेटी नहीं है बल्कि  किसी और देश की बेटी है जो भारत के बारे में इस अजीब ढंग से बात कर रही है। फिर मैंने गहराई से सोचा तो मुझे लगा कि इसमें दोष उसका नहीं है। वह तो खुद तय नहीं कर पाती होगी कि वह खुद को भारत की बेटी कहे या इंडियन डॉटर? स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 21वीं सदी के दूसरे दशक तक आ गए फिर भी हम अपने देश का एक नाम तय नहीं कर पाए - भारत, इंडिया या हिन्दुस्तान? तो नई पीढ़ी हमें उलाहना देगी ही।
भारत या इंडिया, क्या नाम है इस देश का? हिन्दुस्तान सिर्फ बोलचाल में है अथवा पुराने अभिलेखों में, किन्तु ‘इंडिया’ और ‘भारत’ आज भी समान रूप से प्रयोग में लाया जा रहा है। सन् 2012 में लखनऊ की सामाजिक कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा ने केंद्र सरकार से यह प्रश्न किया था। सूचना के अधिकार के अंतर्गत उर्वशी शर्मा ने पूछा था कि सरकारी तौर पर भारत का नाम क्या है? उन्होंने अपने प्रश्न पूछे जाने का कारण बताते हुए उल्लेख किया था कि “इस बारे में हमारे बीच काफी असमंजस है। बच्चे पूछते हैं कि जापान का एक नाम है, चीन का एक नाम है लेकिन अपने देश के दो नाम क्यूं हैं।“ इसीलिए वे यह जानना चाहती हैं कि वे बच्चों को सही-सही उत्तर दे सकें और आने वाली पीढ़ी के बीच इस बारे में कोई संदेह न रहे। उर्वशी ने कहा कि  “हमें सुबूत चाहिए कि किसने और कब इस देश का नाम भारत या इंडिया रखा? कब ये फैसला लिया गया?“
उर्वशी का तर्क था कि यह एक भ्रम की स्थिति है जो सरकारी स्तर पर भी देश के दो नामों का प्रयोग किया जाता है। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि ‘‘मैं केवल ये जानना चाहती हूं कि भारत का सरकारी नाम भारत है या इंडिया क्योंकि सरकारी तौर पर भी दोनों नाम इस्तेमाल किए जाते हैं।“ उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में लिखा है- ’इंडिया दैट इज भारत’। अर्थात् देश के दो नाम हैं। सरकारी कामकाज में ’गवर्नमेंट ऑफ इंडिया’ और ’भारत सरकार’ दोनों का प्रयोग किया जाता है। अंग्रेजी में भारत और इंडिया दोनों का इस्तेमाल किया जाता है जबकि हिंदी में भी इंडिया कहा जाता है। उर्वशी ने कहा था कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लेती हैं क्योंकि ये देश की पहचान का सवाल है। उर्वशी को प्रधानमंत्री कार्यालय से जवाब मिला जिसमें कहा गया कि उनके आवेदन को गृह मंत्रालय के पास भेजा गया हैं। किन्तु गृह मंत्रालय में इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था। इसलिए इसे संस्कृति विभाग और फिर वहां से राष्ट्रीय अभिलेखागार भेजा गया, जहां जानकारी की ढूंढ-खोज शुरू हुई। राष्ट्रीय अभिलेखागार 300 वर्षों के सरकारी दस्तावेजों का खजाना है। आज भी उर्वशी को अपने प्रश्न के उत्तर की प्रतीक्षा है।
देश के नामों को ले कर उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करके मांग की जा चुकी हैै कि ‘इंडिया’ का नाम बदल कर भारत किया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया था कि महाराजा परीक्षित, कुरु वंश के अंतिम दुर्जेय सम्राट की मृत्यु तक, पूरी दुनिया भारतवर्ष के रूप में जाना जाता था। इसके अलावा दुनिया के एक महान सम्राट का शासन था । भारत ऋग्वेद में उल्लेख किया है। इस पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा। यह याचिका को महाराष्ट्र के सामाजिक कार्यकर्ता निरंजन भटवाल ने दायर की थी। मुख्य न्यायाधीश एच एल दत्तू और न्यायाधीश अरूण मिश्रा की पीठ ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस जनहित याचिका पर नोटिस भी जारी किया। इस याचिका में केंद्र को किसी सरकारी उद्देश्य के लिए और आधिकारिक पत्रों में इंडिया नाम का उपयोग करने से रोकने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता निरंजन भटवाल ने आग्रह किया कि न केवल सरकारी अपितु गैर सरकारी संगठनों और कॉरपोरेट्स को भी सभी आधिकारिक और अनाधिकारिक उद्देश्यों के लिए देश का नाम ‘भारत’ का उपयोग करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।  दुर्भाग्यवश लगभग छह माह बाद भी याचिकाकर्ता को कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
भारत का इतिहास सदियों से काफी गौरवशाली रहा है। भारत का नाम प्राचीन वर्षों में ‘भारतवर्ष’ था। इसके पूर्व भारत नाम जम्बूदीप था। देश का नाम भारत होने के संबंध में एक सर्वमान्यकथा प्रचलित है कि कुरूवंशीय राजा दुष्यंत और शकुंतला के प्रतापी पुत्र भरत के नाम पर ही देश का नाम भारतवर्ष पड़ा। यद्यपि कई आधुनिक विद्वान इस इस कथा को प्रमाण के अभाव में खारिज करते हैं किन्तु पुराणों में ‘भारतवर्ष’ नाम का उल्लेख नकारा नहीं जा सकता है। ‘वायु पुराण’ में इस बात की पुष्टि होती है कि देश का नाम भारतवर्ष क्यों पड़ा। इस संदर्भ में ‘वायु पुराण’ का यह श्लोक ध्यान देने योग्य है जिसमें कहा गया है कि हिमालय पर्वत से दक्षिण का वर्ष अर्थात क्षेत्र भारतवर्ष है-
 हिमालयं दक्षिणं वर्षं भरताय न्यवेदयत।
 तस्मात्तद्भारतं वर्ष तस्य नाम्ना बिदुर्बुधाः।

इंडिया नाम तो अंग्रेजों की गुलामी के साथ आया जबकि पुराणों में भारत के प्राचीन नाम जम्बूद्वीप का भी उल्लेख मिलता है। जम्बूदीप का अर्थ है समग्र द्वीप। भारत के प्राचीन धर्म ग्रंथों में हर जगह जम्बूदीप का उल्लेख आता है। उस समय भू-भाग एक विस्तृत द्वीप था जिसे आगे चल कर भारतीय उपमहाद्वीप कहा गया। ‘वायु पुराण’ में ही दी गई एक अन्य कथा के अनुसार त्रेता युग में देश का नाम भारतवर्ष पड़ा। ‘वायु पुराण’ के अनुसार त्रेता युग के प्रारंभ में स्वंयभू मनु के पौत्र और प्रियव्रत के पुत्र ने भरत खंड को बसाया था। लेकिन राजा प्रियव्रत के कोई भी पुत्र नहीं था इसलिए उन्होंने अपनी पुत्री के पुत्र अग्नींध्र को गोद ले लिया था जिसका पुत्र नाभि था। नाभि की एक पत्नी मेरू देवी से जो पुत्र पैदा हुआ उसका नाम ऋषभ था और ऋषभ के पुत्र का नाम भरत था और भरत के नाम पर ही देश का नाम भारतवर्ष पड़ा था।
विश्व का सबसे बड़ा गणतंत्र का दर्जा रखने वाला देश - भारत, हिन्दुस्तान या इंडिया। एक देश जिसके तीन नाम। आधिकारिक तौर पर दो नाम हैं-इंडिया और भारत। बार-बार इस बात की मांग उठती रही है कि देश का एक नाम रहे-‘भारत’। लगभग साल भर पहले जैन संत आचार्य विद्यासागर जी ने ‘इंडिया’ शब्द की व्याख्या करते हुए देश का नाम ‘भारत’ रखे जाने पर तार्किक पक्ष रखे थे और ‘भारत बोलो’ मुहिम का आह्वान किया था। विचारणीय है कि जब कम्बोडिया अपना नाम बदल कर मौलिक नाम कम्पूचिया कर सकता है, सिलोन अपने मौलिक नाम श्रीलंका को अपना सकता है तो इंडिया सिर्फ भारत क्यों नहीं हो सकता है। एक देश, एक नाम, एक पहचान - यह जरूरी है देश के वैश्विक गौरव के लिए।              
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1 comment:

  1. यकीनन हो सकता है इंडिया, भारत ! हम सब यदि इसे भारत कहें तो

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