टाॅपिक एक्सपर्ट
सिर्फ एक दिनां नोंईं, हर दिन मनो चाहिए पर्यावरण दिवस
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
कढ़ गओ 05 जून। मन गओ पर्यावरण दिवस। गड्ढा खुदो, पौधा लगे, भासन भए, रासन भए, पेड़ बचाबे पे बड़ी-बड़ी बातें भईं। सब कछू अच्छो-अच्छो भओ। मनो दूसरे दिनां कोनऊं ने खबर लई के उनके लगाए पौधन को का भओ? नईं लई हुइए। काए से के दूसरे दिनां तो जे देखने परत आए के पौधा लगाते भए की फोटू अखबार में छपी के नईं। औ जो फोटू संगे खबर छप गई तो ऊको सोसल मीडिया में भी डारबे को काम रैत आए। सो, दूसरे दिनां कोन खों परी के पौधन कों हेरबे जाए। ऊंसई पर्यावरण दिवस तो एक दिनां को रैत आए जोन टाईप से शिक्षक दिवस, महिला दिवस, फादर दिवस मने किसम-किसम को दिवस। एक दिनां लुगाइयन के जैकारे करे और दूजे दिनां से बोई मार-कुटव्वल। जो पेरेंट्स डे भओ तो एक दिनां मताई-बाप खों गिफट-मिफट दे के पूछ लओ औ दूसरे दिनां से मूंड़ से मूंड़ जोर के सोचन लगे के अब कोन से वाले भैया के इते उने टिपाओ जाए? बस, जेई दसा रैत आए पर्यावरण की। ने तो आपई सोचो के जो हरेक साल लगाए गए पौधा सई से रै पाते औ बड्डे हो पाते तो आज पर्यावरण बचाबे की फ़िक्र ने करने परती। तनक जा बी सोचियो के पड़ोस के जिला में, जोन अपनईं संभाग में आए छतरपुर को बक्सवाहा में हीरा निकारबे के लाने पेड़े कट रए औ अबे औ कटहें। का कोनऊं इते चीं बी बोल रओ? कोनऊं नईं! चलो उते की छोरो, अपने इते सागर में कालोनियां तो मनों मुतकीं बढ़ गईं लेकन का सहर में उत्ते पेड़ें लगाए गए? जो लगाए जाते तो पूरी गरमी नौतपा घांईं काए खों तपती? सो, भैया-भैन हरों, अपन खों पर्यावरण दिवस एक दिनां मना के नईं रै जाने, हर दिन मनाने है। तभईं अपन औ अपनों सहर अच्छें रैहें।
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Thank you Patrika 🙏
Thank you Dear Reshu Jain 🙏
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