🚗 🚩🚙 एक और घुम्मकड़ी... जी हां, एक धार्मिक घुम्मकड़ी..., बांदकपुर के देव जागेश्वर नाथ शिव मंदिर का भ्रमण... कल 23जून को...
🚩मध्य प्रदेश के सागर संभाग के दमोह जिले में बांदकपुर में स्थित देव श्री जागेश्वर नाथ जी मंदिर बुंदेलखंड का एक प्रमुख और सिद्धपीठ शिव मंदिर है। यहाँ स्वयंभू शिवलिंग है जिसे देश का तेरहवां ज्योतिर्लिंग भी माना जाता है। प्रचलित विश्वास के अनुसार यह शिवलिंग हर साल आकार में बढ़ता यानी चौड़ा होता जा रहा है।
🚩 बांदकपुर के जागेश्वर नाथ जी मंदिर की सागर से सड़क मार्ग से दूरी लगभग 103 किलोमीटर है। यह स्टेट हाईवे 14 पर स्थित है। वैसे बांदकपुर में रेलवे स्टेशन भी है।
🔸मैं सड़क मार्ग से सागर से दमोह बाईपास होते हुए बांदकपुर पहुंची। लगभग ढाई घंटे का समय लगा।
🚩"स्कंद पुराण" में भी इस जागृत शिवलिंग का उल्लेख है। मान्यता है कि चारों धाम की यात्रा करने के बाद भी, यदि माँ नर्मदा के जल से भगवान जागेश्वर का अभिषेक नहीं किया जाए तो उनकी तीर्थ यात्रा अधूरी मानी जाती है। बांदकपुर धाम में स्थापित शिवलिंग किसी मनुष्य द्वारा निर्मित नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक स्वयंभू लिंग है, जिसे पुराणों में अत्यंत जाग्रत और कल्याणकारी माना गया है।
🔸जागेश्वर शिव (जागेश्वर महादेव) का उल्लेख स्कंद पुराण के मानस खंड और कुमारिका खंड के विभिन्न श्लोकों में मिलता है। स्कंद पुराण में जागेश्वर धाम को वह पवित्र स्थान माना गया है जहाँ पृथ्वी पर सबसे पहले शिवलिंग की पूजा शुरू हुई थी।
🔱"तंत्र जागेश्वर लिंग श्री रामेण स्वपूजिता" श्लोक का उल्लेख आता है। इसका अर्थ है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने दंडकारण्य (या उत्तराखंड क्षेत्र) में स्वयं जागेश्वर महादेव की पूजा की थी।
इस श्लोक का भावार्थ है- "वहां (बांदकपुर) स्थित स्वयंभू जागेश्वर शिवलिंग की पूजा स्वयं भगवान श्री राम द्वारा की गई थी।"
- यह श्लोक मूल रूप से स्कंद पुराण के कुमारिका खंड से उद्धृत माना जाता है। वर्ष 1940 में बांदकपुर के प्रख्यात विद्वान कवि भैरव प्रसाद बाजपेई द्वारा रचित प्रसिद्ध पुस्तक "बांदकपुर जागेश्वर रहस्यम" में इस श्लोक का विशेष रूप से उल्लेख और संकलन किया गया है।
🚩मुख्य जागेश्वर मंदिर से पूर्व दिशा की ओर लगभग 100 फीट की दूरी पर माता पार्वती का भव्य मंदिर स्थित है।
🚩 पार्वती मंदिर के द्वार पर जागेश्वर मंदिर की ओर मुख किए नंदी की प्रतिमा है। मान्यता है कि इस प्रतिमा के कानों में अपनी जो भी इच्छा व्यक्त की जाए यानी नंदी जी को जो भी अपनी इच्छा बताई जाए वह भगवान जागेश्वर तक अवश्य पहुंचती है और भगवान जागेश्वर शिव उस इच्छा को पूर्ण करते हैं।
🔸मैंने भी नंदी जी के कानों में अपनी इच्छा कह डाली।😊 क्या कहा यह सीक्रेट है 😃
🚩 वैसे लोग जो कहते हैं की देवता या देवी स्वयं बुलाती हैं, कभी-कभी यह बात सच लगती है.. क्योंकि बांदकपुर यात्रा का पहले से कोई विचार नहीं था। अप्रैल में मैहर और ओरछा जाने का कार्यक्रम बना किंतु अत्यधिक गर्मी के कारण और कुछ और समस्या आ जाने के कारण दोनों जगह जाना कैंसिल हो गया और अब अचानक विचार आया की बांदकपुर जाना चाहिए वर्षों हो गए जागेश्वर नाथ शिव के दर्शन किए... अचानक कार्यक्रम बना और दो दिन के भीतर उसे कार्यक्रम पर अमल भी हो गया... यद्यपि इस कार्यक्रम के बने के बाद चित्रकूट जाने का भी सुयोग बन रहा था किंतु बाबा जागेश्वर नाथ की मर्जी थी कि उनके दरबार में मैं पहुंचूं और मत्था टेकूं🙏🚩🙏
🚩लगभग 2.25 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस परिसर में यज्ञ मंडप, अमृत कुंड, काल भैरव, श्री रामजानकी और हनुमान जी के अन्य छोटे मंदिर भी बने हुए हैं।
🚩 मंदिर सुबह खुलता है तथा दोपहर 12:00 भगवान को भोग लगाने के बाद विश्राम के लिए बंद कर दिया जाता है फिर दोपहर 3:00 बजे फिर मंदिर खुलता है जो रात्रि की आरती के बाद बंद किया जाता है। मंदिर के दर्शन के समय की जानकारी की भी फोटोग्राफी कर ली तथा उसे पोस्ट कर रही हूं ताकि जो भी व्यक्ति वहां जाना चाहे वह दर्शन का समय देखकर पहुंच सकें।
🔱महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी के त्योहारों पर मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ती है। दूर-दूर से कांवड़िए और भक्त जल चढ़ाने आते हैं। सोमवती अमावस्या दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र कुंड में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं।
🚩 मैं ठीक 3:00 बजे बांदकपुर मंदिर परिसर में पहुंची। पहले मेरा कार्यक्रम सोमवार को जाने का था किंतु किसी ने मुझे सलाह दी कि सोमवार को भारी भीड़ रहती है इसलिए किसी और दिन का चयन करूं तो मैं मंगलवार का दिन किया।
🔱फिर भी 3:00 बजे मंदिर के द्वार खुलते ही अच्छी खासी भीड़ उमड़ आई। कोई मनौती मानने आया था, तो कोई अपने परिजनों के विवाह का कार्ड चढ़ाने आया था, तो कोई अभिषेक करने... गर्भगृह के संकरे द्वार से सभी श्रद्धालु बड़ी शालीनता से पंक्तिबद्ध प्रवेश करते गए यद्यपि भीड़ के कारण स्पष्ट फोटो लेना संभव नहीं हो सका 😌
🚩 यहां मनौती के संबंध में कुछ दिलचस्प परंपराएं हैं... जैसे मनौती पूर्ण होने पर श्रद्धालु अपनी इच्छा और हैसियत के अनुरूप धन्यवाद ज्ञापित करते हैं यानी कुछ लोग जागेश्वर शिव का जलाभिषेक करते हैं, तो कुछ कीमती सामग्री का चढ़ावा भी चढ़ाते हैं।
🔱मनौती पूरी होने पर पार्वती मंदिर की भित्तियों पर महावर से हथेलियों की छाप लगाई जाती है।
🚩🚙 दोपहर लगभग 1:00 बजे जब मैं सागर से रवाना हुई थी उस समय सागर में बारिश के आसार दिखाई पड़ने लगे थे। काले बादल छाने लगी थे। मौसम सुहाना हो चला था। 🌨️⛈️ लेकिन दमोह पहुंचते-पहुंचते मौसम बदल गया। बांदकपुर में भारी गर्मी थी। 🌞
🙋मंदिरों में दर्शन करने के बाद मैंने ठेले पर पानी पुरी खाईं और कोल्ड ड्रिंक पिया।🍛🧋
🚩फिर बांदकपुर से वापसी का सफर शुरू हुआ 🚙 बांदकपुर और दमोह की गर्मी के बाद सागर आते-आते मौसम बदलता चला गया और सागर जिले में प्रवेश करते ही बारिश ने स्वागत किया। रास्ते में बिजलियों की चमक और बादलों की गरज के साथ भारी बारिश देखने को मिली। इस बारिश ने घर पहुंचने तक साथ दिया। उसे देखकर लगा कि अब सही में मानसून दस्तक दे रहा है।
❗🔱🚩 देखा जाए तो यह मेरी धार्मिक घुमक्कड़ी थी... मेरे विचार से इस तरह की घुम्मकड़ी अवश्य करना चाहिए इससे लोगों की आस्था ईश्वर के प्रति समर्पण और हमारी धार्मिक संस्कृति को निकट से देखने का अवसर मिलता है साथ ही ईश्वरीय विचार और प्रकृति का सुंदर संयोग भी अनुभव किया जा सकता है।... इस प्रकार की घुम्मकड़ी से शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की ऊर्जा मिलती है। अत्यंत व्यस्त और विपरीतता से भारी जीवन में इस तरह की यात्राएं जीवन में भी ऊर्जा का संचार करती हैं। कम से कम मेरा तो यही मानना है 🌹😊🌹
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23 जून 20 26
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🌹 घुम्मकड़ी चाहे धार्मिक हो यह मात्र पर्यटन की दृष्टि से हमेशा आनंददायक ही रहती है... दुनिया को देखने का एक अलग नज़रिया देती है... और हौसला देती है उत्साह और साहस के साथ जीने का...🚩🎉🙋
🚩If you explore the places you were finds Everything is special. - Dr (Ms) Sharad Singh's advice 🙋🤩❤️
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