Thursday, January 8, 2026

बतकाव बिन्ना की | देख तो बिन्ना, जे को जाने का-का हो रओ | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह | बुंदेली कॉलम

बतकाव बिन्ना की    
       
देख तो बिन्ना, जे को जाने का-का हो रओ                             
- डाॅ. (सुश्री) शरद सिंह


‘‘संकारे से अखबार में इन्दोर की खबरें पढ़-पढ़ के दिमाक खराब सो हो रओ तो। इंसान पानी पियत आए जिन्दा रैबे खों औ उते पानी पी के जाने जा रईं। कोन सोच सकत्तो के प्रदेस की सबसे साफ-सुथरी कहाबे वारी सिटी में सबसे गंदो पानी पिलाओ जा रओ। अपन ओरों की होय तो कछू समझ में आए के इते तो ऊंसई पानी की सल्ल मची रैत आए औ संगे गंदगी सोई फैली रैत आए। मनो उते देखो का से का भओ जा रओ। सई में देखो तो बिन्ना को जाने का-का हो रओ। जा सब सुन-सुन के जी डरात आए।’’ भौजी ने कई।
‘‘कै तो आप सई रईं मनो ऐसो कोनऊं सिटी में कोनऊं के संगे ने होए सो अच्छो। काए से अपनों को खोबे की पीरा का होत आए बा कोरोना ने मुतके जनों खों समझा दई आए। मैंने सोई झूली आए।’’ मैंने भौजी से कई।
‘‘जेई से तो हम कै रए के, ईके बाद बी इत्ती बड़ी लापरवाई करी गई। अरे अब तो सबई खों जीवन को मोल समझो चाइए।’’ भौजी बोलीं।
‘‘हऔ, बाकी अपने इते बी अब पानी की टंकियन पे ध्यान दओ गओ आए। कई ठों टंकियन में गिलावो औ गंदगी मिली।’’ भैयाजी बोले।
‘‘जेई तो मोए समझ में नई आत आए के परसासन कोनऊं बड़ी घटना होबे को इंतजार काए करत रैत आए? अब इन्दोर में जब गंदे पानी पीबे से मौतें होन लगीं तो सबरे शहर के परसासन वारे जा उठे, औ ईके पैले पल्ली ओढ़ के सो रए हते। ऐसईं जब कोनऊं रोड पे मुतके एक्सीडेंट हो जात आएं तब परसासन खों लगत आए के चल के उते एक ठइयां बोर्ड ठाड़ो कर दओ जाए के इते खतरा आए। अरे, पैले लगा देते तो का जातो?’’ मैंने कई।
‘‘अरे, सो अबई देख लेओ! ठंडी परन लगी हती औ संकारे से कोहरा सो सोई छान लगो रओ मनो स्कूल को टेम ने बदलो जा रओ हतो। जब अखबार वारन ने लिखो तो तब टेम बदरवे की सुद आई। जे तो कओ के बच्चा हरें बीमार ने परे, ने तो बड़ी सल्ल बींदती।’’ भैयाजी बोले।
‘‘अरे, चाए आबारा कुत्तन को झुण्ड फिरत रए चाए सांड बीच सड़क पे लड़त रएं, को ध्यान दे रओ। औ हमें तो लगत आए के सांड़ पकरबे वारे सोई एक मोहल्ला के सांड पकर के दूसरे मोहल्ला में छोर आउत आएं। जीसें देखत में नओ सांड़ रए औ ऊकी ब्यावस्था बी ने करने परे। परसासन वारों को तो बस मों चलाबो आउत आए।’’ भौजी बोलीं।
‘‘औ इत्तोई नोंई, ऊपे नेता हरें फिजूल की बतकाव करन लगे, बा बी पत्रकारन से।’’ मैंने कई।
‘‘बा तो ई लाने बिन्ना के असली मुद्दा पांछू रै जाए औ खबरों में तू-तू, मैं-मैं चलत रए। के उन्ने ऐसी काए कई, के उन्ने ऐसी काए ने कई? बा जो मर गए औ जोन मरत जा रए उनके लाने का हो रओ जा पे कोनऊं बात ने चले।’’ भैयाजी बोले।
‘‘का कओ जाए बिन्ना, पूरी दुनिया में घिनौच-सी मची। जोन खों तनक पावर मिल गओ बोई गर्रान लगत आए औ दोंदरा देन लगे आए। अब ट्रम्प खोंई देख लेओ। इत्तो बड़ो देस को राष्ट्रपति आए, सो तनक अपनो बड़प्पन दिखातो। कोनऊ सई रास्तो पकरतो। मगर नईं, ऊको तो अपनी दादागिरी दिखाने। सो, वेनेजुएला पे चढ़ बैठो। अब तुम कोन होत आओ दूसरे देस के मामलन में टांग अड़ाबे वारे? उनखों खुदई निपटन-सुलझन देओ। पर नईं, उने तो अपनी गर्राहट दिखाने।’’ भैयाजी बोले।
‘‘अरे ऊ दिनां जब जा खबर छपी रई तो मिसराइन मोसे कै रई हती के कऊं ऐसो ने होए के कोऊ दिनां जो ट्रम्प इते अपने देस में घुस आए इते सब कछू नेहरू जी के जमाने से बिगरो परो, सो हम इको सुदारबे आ गए। सो हमने मिसराइन से कई के जो भारत आए, कोनऊं वेनेजुएला नोंई, के मों उठाए चले आए। इते थपड़िया दओ जैहे। सो तुम ने डरो’’ भौजी बोलीं।
‘‘कओ थपड़ियाबे के संगे कछू सयाने उनकी तारीफ में इत्ती कबिताएं पढ़न लगें के बे खुसी में फूल-फूल के खुदई फट जाए। अपने इते चमचोईं करबे वारों की कमी नोईं। कोऊ कै भर देवे के हमाई चमचोईं करो हम तुमें बड़ो सो पुरस्कार देवा दैहें, सो बे कओ चमचोईं के पूरो रिकार्ड तोड़ डारें।’’ मैंने हंस के कई।
‘‘सई कै रईं बिन्ना! बाकी पैले बी तो ऐसई होत्तो। कछू ऐसे जने हरेक राजा के दरबार में पाए जात्ते। बे राजा साब की बड़वारी करत्ते औ कऊं राजकवि बन जात्ते, तो कऊं जगीरें पा जात्ते। बाकी बड़वारी करे में कोनऊं गलत नोंई, जो बड़वारी करे जोग होय सो करो, ने तो उनकी गलतियां बताओ। ईसे बे खुद खों सुदार सकें।’’ भैयाजी बोले।
‘‘बिन्ना हमने तो पानी उबाल के औ छान के पीनों सुरू कर दओ आए।’’ भौजी बोलीं।
‘‘आप सो आरो लेबे वारी हतीं?’’ मैंने पूछी।
‘‘हओ सोची तो रई, बाकी हमने तुमाओ एक लेख पढ़ लओ रओ जीमें तुमने लिखो रओ के आरो लगाए से मुतको पानी बेकार चलो जात आए सो हमने बिचार बदल दओ रओ। अबे पैले पीबे के पानी में तनक फिटकरी चला देत्ते, मनो जब से इन्दोर वारी खबर सुनी तब से उबाल के औ छान के पियन लगे। तुम सोई उबाल रईं के नईं?’’ भौजी ने मोसे पूछी।
‘‘अबे तो नईं। खाली छान के पी रई। उबलो पानी इठैलो सो लगत आए। पियो कोन जात आए!’’ मैंने कई।
‘‘अरे, कैसऊं लगे बिन्ना, जान आए तो जहान आए।’’ भैयाजी बोले।
‘‘आप ओरें इत्तो ने डराओ, अपने इते इत्ती दसा नईं बिगरी। औ अब तो इते सोई परसासन सात कुआं झांक रई।’’ मैंने कई।
‘‘जे भुलाए में ने रओ, बिन्ना! उते इन्दोर में कोन ने सोची हुइए के पानी इत्तो बुरओ कर दैहे। सो तनक सम्हर के चलबे में ई भलाई आए।’’ भैयाजी बोले।
‘‘हऔ, बात तो आप सांची कै रए। मैं सोई पानी उबाल लओ करहों।’’ मैंने कई।
‘‘ऊंसई इत्ती ठंडी पर रई के ईमें उबलो भओ कुनकुनो पानी पियो चाइए।’’ भौजी बोलीं।  
जेई पे से फेर जड़कारे की बतकाव चल निकरी।   
बाकी बतकाव हती सो बढ़ा गई, हंड़िया हती सो चढ़ा गई। अब अगले हफ्ता करबी बतकाव, तब लों जुगाली करो जेई की। औ सोचो के का करो जाए के इन्दोर वारी घटना औ कऊं ने घटे। परसासन खों जगाए राखबे के लाने अपन को का करने परहे ई के बारे में तनक सोचियो। 
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बुंदेली कॉलम | बतकाव बिन्ना की | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | प्रवीण प्रभात
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