Thursday, January 22, 2026

बतकाव बिन्ना की | एक ने कई औ सैंकड़न ने दोहराई | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह | बुंदेली कॉलम

बतकाव बिन्ना की | एक ने कई औ सैंकड़न ने दोहराई | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह | बुंदेली कॉलम
बतकाव बिन्ना की  
   एक ने कई औ सैंकड़न ने दोहराई
  - डॉ. (सुश्री) शरद सिंह

‘‘बिन्ना कछू पूछें?’’ भैयाजी ने तनक गंभीर होत भए कई। 
मोए धड़का सो लगो के जे ऐसो काए कै रए? मोसे कछू मिस्टेक हो गई का, जो भैयाजी ऐसी पूछ रए? का भओ हुइए?
‘‘हऔ भैयाजी पूछो!’’ मैंने डरात-डरात कई।
‘‘जो बताओ के मुतके जने बुरई बात पकर के काए बैठ जात आएं?’’ भैयाजी ने पूछी।
जा सुन के मोरो मूंड़़ चकरा गओ। काए से के मोए लग रओ हतो के भैयाजी कछू मोरे बारे में पूछबे वारे आएं। पर बे तो मुतके जने की बात कर रए। बाकी जे मुतके जने की बतकाव कऊं मोरे बारे में तो नोंईं? का हो सकत आए? औ फिकर भई।
‘‘भैयाजी मोए समझ ने पर रई के आप पूछो का चा रए? काए मोसे कछू गलती हो गई का?’’ मैंने भैयाजी से कई।
‘‘अरे नईं! हम तुमाई नईं कै रए। हम तो दीन-दुनिया की कए रै।’’ भैयाजी ने कई। जा सुन के मोए तनक सहूरी भई। भैयाजी लगाई-बुझाई वारों पे कान देबे वारे नोंई, पर कनकुतरों की का, कछू बी कोनऊ के बारे में कान भरत रैत आएं।
‘‘सो बताओ आप काए के बारे में कै रए?’’ मैंने पूछी।
‘‘हम जा कै रए के लोग बड़े-बड़े लोगन की कथा सुनबे जात आएं। पर उनकी नोनी बात पे कोनऊं बतकाव नईं करी जात आए। है के नईं?’’ भैयाजी ने पूछी।
‘‘हऔ जा तो आए। बात तो करत आएं बाकी ज्यादा नईं।’’ मैंने कई।
‘‘ज्यादा नईं? हम तो कै रए के ऊके सामने तो उत्तो बी नईं जित्तो जो बे कछू गलत बोल जाएं तो बे ट्रोल कर दए जात आएं। बे बी इंसान आएं, गलती उनसे बी हो सकत आए।’’ भैयाजी बोले।
‘‘हऔ! जा तो आए। पर पब्लिक उनको भगवान घांई मानन लगत आए। मोए लगत के जेई से उने बुरौ लगत आए।’’ मैंने कई।
‘‘पब्लिक खों तो कम, ट्रोलर हरों को ज्यादा मजो आत आत आए। और बाकी अकल के अंधरा हरें उनको दोहरान लगत आएं। जे ई पे मोए गुस्सा आत आए।’’ भैयाजी बोले।
‘‘लेकन आप इत्तो काए सोच रए? जा तो दुनिया आए। इते सबई तरां के लोग रैत आएं।’’ मैंने भैयाजी से कई।
‘‘बा तो ठीक आए, बाकी हमें जा सोच के पीरा होत आए के लोग गलत बातन पे कित्तो ज्यादा जुट जात आएं। मनो उने गलत बात ई अच्छी लगत होए।’’ भैयाजी बोले।
बात तो उनकी सई हती। कोऊ चाए सई कए, चाए गलत मनो ट्रोलर हरों को तो ट्रोल करबे में मजो आउत आए, चाए ऊको रिजल्ट कैसो बी रए। सई कई जाए तो जा बी एक तरां की पगलेटपना आए। अच्छी अंग्रेजी में कई जाए तो साइको पना। बे को आ कोऊं खों जज करबे वारे? मनो बे अपने को ऐसई मानत आएं। सो भैयाजी जो कै रए, बे गलत नोईं कै रए। को जाने का होत जा रओ के लोग बुरौ देख के ऊकी जुगाली करबे में ज्यादा जुटे रैत आएं, अच्दी बातन के जांगा।
‘‘भैयाजी, जे टेम ई ऐसो चल रओ। को तो एक जमाना में रामलीला होत्ती, फेर आरकेस्ट््रा चलो, औ अब बा बी घटिया सो होन लगो। मने पैले बच्चा हरें बी रामलीला में राम औ लछमन खों देखत्ते तो उनई के जैसे बनो चात्ते। अब बे ‘लाॅलीपाॅप-लाॅलीपाॅप’ देखत आएं तो ऊंसई कूल्हा मटकात फिरत आएं। का कओ जाए।’’ मैंने कई।
‘‘सई में, आजकाल जे कै-सुने के संत हरें कछू के कछू बकत रैत आएं औ दूसरे उनकी बेई बातें दोहरात आएं। उने बा सब याद नई रैत जो उन्ने अच्छी-अच्छी बातें करी हतीं। औ आजकाल तो मनो फैशन सो चल रओ के लुगाइन के बारे में अंटशंट बको औ नांव कमा लेओ। काए से उनके लाने बदनामी में बी नामी होत आए।’’ भैयाजी बोले। 
‘‘सई कै रए आप भैयाजी! जेई पे से मोए बा किसां याद आ गई के एक देस में एक राजा हतो। ऊको एक दिनां लगो के महल से बायरे ज के पतो करो जाए के ऊकी परजा ऊको कित्तो जानत आए। सो ऊने भेस बदरो औ अपने मंत्री को संग ले के संझा खों निकर परो। फिरत-फिरत रात को दूसरो पहर हो गओ मनो ऊको कोनऊ ऐसो ने मिलो जीको अपने राजा के बारे में ज्यादा पतो होय। जा जान के राजा बड़ो दुखी भओ। ऊने मंत्री से पूछी के का करो जाए? सो मंत्राी बोलो के महराज ऐसो करो जाए के आपकी बड़ी-बड़ी फोटुएं बनबा के हरेक गली-चौराए पे लगवा दई जाए। ईसे सबई आपखों रोज-रोज देखहें औ चीनने लगहें। राजा को मंत्री को जो आइडिया भौतई नोनो लगो। ऊने दूसरई दिन अपनी मुतकी फोटुएं बनवाई और अपने राज के सबरे चैराए पे टंगवा दईं। पैले दिनां तो सबने देखी औ ऊके बारे में बतकाव करी, मनो दूसरे दिनां बे अपने-अपने काम में लग गए। फेर को आ पूछ रओ तो राजा की फोटुअन को? राजा फेर एक दिनां ऊंसई भेस बदर के निकरो। ऊने देखो के कोनऊं ऊके बारे में बतकाव नईं कर रओ। सो ऊको बड़ो दुख भओ। ऊने फेर के मंत्री से कई के कछू करो के जीसें परजा हमाई बात करे। ईपे मंत्री बोलो के जो हो तो सकत आए, बाकी आप खों ईके लाने राजी होने हुइए। राजा बोलो के हमें कोनऊं परेसानी नईं, तुम तो जो समझ परे सो करो। ईपे मंत्री ने का करो के दूसरे दिन ऊने राजा की दूसरी फोटुएं बनवाईं औ ऊके संगे धमकी वारी कछू बुरई बातें लिखवा दईं। ऊके बाद तो पूरी परजा में हल्ला मच गओ। ऊके दस दिनां बाद राजा फेर के पता करबे निकरो। बा जां बी गओ परजा ऊकोई गरियात मिली। राजा को जा सब देख के अचरज भओ। तब मंत्री ने राजा को समझाओ के लोग बुरई बातन पे ज्यादा बतकाव करत आएं औ ज्यादा याद रखत आएं जेई लाने ऊको राजा जू खों खलनायक बना के सामने करो। राजा ने जा देखों-सुनो तो बा दंग रै गओ। ऊको अपनी परजा से जा उमींद ने हती। ऊको पतो ने हतो के बुराई की लम्बी दुम होत आए जो जो कुल्ल दिनां तक हलत रैत आए।’’ मैंने भैयाजी खों किसां सुनाई।
‘‘बिलकुल सई किसां आए। पैले ऐसो रओ के ने रओ बाकी आजकाल तो जेई चल रओ।’’ भैयाजी बोले। हम दोई फिकर करत बैठे रए।  
मनो बतकाव हती सो बढ़ा गई, हंड़ियां हती सो चढ़ा गई। अब अगले हफ्ता करबी बतकाव, तब लों जुगाली करो जेई की। जे जरूर सोच के देखियों के हमें हमें अच्छी बातें दोहराओ चाइए के बुरई बातें?  
---------------------------
बुंदेली कॉलम | बतकाव बिन्ना की | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | प्रवीण प्रभात
---------------------------
#बतकावबिन्नाकी #डॉसुश्रीशरदसिंह  #बुंदेली #batkavbinnaki  #bundeli  #DrMissSharadSingh #बुंदेलीकॉलम  #bundelicolumn #प्रवीणप्रभात #praveenprabhat  

No comments:

Post a Comment