पूरे 5 वर्ष... हां, मेरी मां साहित्य साधिका डॉ. विद्यावती "मालविका" जी को मुझसे दूर गए पूरे 5 वर्ष हो गए... आज ही के दिन 20 अप्रैल 2021 को वे चिरनिद्रा में लीन हो गई थीं... 😔
मां के जाने पर दीदी डॉ वर्षा सिंह जी ने यह पोस्ट लिखी थी कि
"छोड़ गईं मां हमें अकेला | स्वर्गीय माता जी डॉ. विद्यावती "मालविका" की स्मृतियों को नमन | डॉ. वर्षा सिंह"
https://varshasingh1.blogspot.com/2021/04/blog-post_22.html?m=1
तब क्या पता था की मां के जाने के ठीक 13 दिन बाद दीदी भी मुझे हमेशा के लिए छोड़ कर चली जाएंगी... 😥
ये दुख एक चट्टान की तरह मेरे सीने पर ताज़िंदगी रखे रहेंगे... 😔
Miss You Maa 💔
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मां की एक कविता ...
प्रिय है धरा बुंदेली
- डॉ. विद्यावती "मालविका"
मैं मालव कन्या हूं मुझको,
प्रिय है धरा बुंदेली।
शिप्रा मेरी बहिन सरीखी,
सागर झील सहेली।।
उज्जैयिनी ने सदा मुझे स्नेह दिया
विक्रम की धरती ने मेरा मान किया,
बुंदेली वसुधा ने मुझे दुलार दिया
गौर भूमि ने मुझे सदा सम्मान दिया,
सदा लुभाती मुझको सुंदर ऋतुओं की अठखेली।
मैं मालव कन्या हूं मुझको,
प्रिय है धरा बुंदेली।।
महाकाल के चरणों में बचपन बीता
रहा न मेरा अंतस साहस से रीता,
यहां बुंदेली संस्कृति को अपनाने पर
हुई समाहित मेरे मन में ज्यों गीता,
ऋणी रहूंगी मैं नतमस्तक, बांधे युगल हथेली।
मैं मालव कन्या हूं मुझको,
प्रिय है धरा बुंदेली।।
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मां के साथ मेरी ये आखिरी तस्वीर ... तमाम परेशानियों के बाद भी तब हम बहुत खुश रहा करते थे क्योंकि मां साथ थीं...😔
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