टाॅपिक एक्सपर्ट
बे टीचर आएं मकोय के जरेटा नोईं, उने सोई लू-लपट लगत आए
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
जनगनना होए चाए ढोरन गिनबे को काम सरकारी टीचरन की ड्यूटी पैले लगा दई जात आए। मने गिनवाबे वारों को उनकी योग्यता पे पूरो भरोसो कहानों। जे नोंनी बात आए। लेकन उतई जब बात रैत आए अपने मोड़ा-मोड़ी औ पोता-पोती खों स्कूल में भरती करबे की सो सरकारी टीचरन वारो बा भरोसो कपूर घांईं उड़ जात आए। ऊ टेम पे सरकारी टीचरन के पढ़ाए पे भरोसो नईं रैत, ऊ टेम पे पिराइवेट स्कूलें दिखात आएं। चलो कछू नईं जे तो बरहमेस से होत आ रओ। चुनाव कराने होए सो टीचर औ पब्लिक खों गिनने होए सो टीचर। मनों टीचर कम परे में आंगनबाड़ी वारी सोई लगा दईं जात आएं। बे तो ऊंसईं कच्ची लोई कहानी। जित्तो ऊनसे बन परत आए उत्तो बे जी-जान से फारम भरवाऊत रैत आएं। बाकी जे ने पूछियो के कित्तो सई कर पाऊत आएं औ कित्तो नईं? काए से के ऊमें उनको कोनऊं दोस नईं रैत। अब मनों कोनऊं प्रायमरी वारे खों सीदे यूपीएससी की परीच्छा में बैठा देओ तो बा कोसिस तो करहे, मनो परीच्छा में कित्तो सई लिख पाहे जे को कै सकत आए? चलो, जेबी सई। अब ड्यूटी तो सबई खों करनेई पड़त आए। सो करन देओ ड्यूटी।
मनों जे बात सोई सोचबे की आए के गनना को काम मूंड़ चटकाबे वारी गरमी में काए कराओ जा रओ? सो, आप कैहो के जे मई-जून मेंईं तो टीचरन की छुट्टियां रैत आएं। चलो जे बी ठीक बात आए। पर एसी कमरा में बैठ के आडर देबे वारों खों तनक सोचो चाइए के 44-45 डिगरी से ऊपरे जात भई गरमी में उने दोरे-दोरे फिरा के उनकी पूरई छुट्टी करबे की मंसा आए का? जा काम का साजे मोसम में कराओ नईं जा सकत? काए से बे टीचर आएं मकोय के जरेटा नोईं, उने सोई लू-लपट लगत आए। तरे ऊपरे वारे सबई जने तनक सोचियों ई बारे में।
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Thank you Patrika 🙏
Thank you Dear Reshu Jain 🙏
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