Thursday, April 2, 2026

बतकाव बिन्ना की | जे चिल्लम-चिल्ली कभऊं बंद हुइए के नईं | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह | बुंदेली कॉलम

बतकाव बिन्ना की
जे चिल्लम-चिल्ली कभऊं बंद हुइए के नईं ? 
- डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
    मैं और भौजी बैठी बतकाव कर रई हतीं, इत्ते में भैयाजी आ पौंचे औ उनके संगे खाना पकाबे की गैस को सिलेंडर वारो हतो।
‘‘अई गजब! आपने तो मैदान मार लओ, भैयाजी! ई टेम पे सिलेंडर को जुगाड़ सबसे बड़ो जुगाड़ आए।’’ मैंने भैयाजी की तारीफ करी।
‘‘ने कछूं, तुम तो ऊंसईं भाव दे रईं।’’ भैयाजी मुस्कात भए बोले।
‘‘नईं। हम सांची कै रए। ई टेम पे जबे सिलेंडरन की मारा-मारी चल रई, ऐसे में भरो सिलेंडर घरे ले आने से बड़ों कोनऊं काम नईं।’’ मैंने भैयाजी से कई।
‘‘अरे, जोन तुम समझ रईं, बा कछू नईं आए। जे सिलेंडर वारे भैया तो हमें दोरे के चार कदम उते पे मिल गए। सो हम ओरे संगे चले आए। मनो हमने दो दिनां पैले नंबर लिखाओ रओ औ जा गैस खुदई से हमाए इते आ गई आए। मनो मारा-मारी हुइए, लेकन हमाई ई ऐजेंसी में तो नइयां। ने तो जे भैया कां से चले आउते सिलेंडर पौंचाबे के लाने?’’ भैयाजी बोले।
‘‘हऔ, हमाए इते ऐसो कछू नइयां। अबे तो मुतके सिलेंडर गोडाउन में आएं। बाकी जो कोनऊं जे चाए के बिना नंबर लिखाए ऊको सिलेंडर मिल जाए सो बा नईं हो रओ।’’ बा सिलेंडर वारो अपने माथा से पसीना पोंछत भओ बोलो। 
‘‘ने पूछो भैया, बड़ी गदर मची आए। जो टीवी पे, ने तो माबाईल पे देख लेओ तो ऐसो लगत आए के मानों लड़ाई इतई छिड़ी जा रई।’’ बा सिलेंडर वारे से भौजी बोलीं।
‘‘अरे बे पगला हरें। बे तो ऐसे बखानत आएं जैसे बे ईरान वारों के गोदी में बैठे होंए के ट्र्म्प के पलकां पे डरे होंए। मनो दोई उनई से पूछ-पूछ के मिसाइलें छोड़ रए हों।’’ भैयाजी बोले।
‘‘हऔ, कलई सो हम मोबाईल पे देख रए हते एक जने कै रआ हतो के ईरान ने घनों दोंदरा दे रखो आए औ घंटा भर बाद बोई आदमी कैत मिलो के अमेरिका ने ईरान खों माटी में मिलाबे की ठान रखी आए। मोए तो समझ नईं परत के बा कोन की तरफी आए?’’ बा गैस सिलेंडर वारो जात-जात बोलो। 
‘‘जे आजकाल के चैनल वारे कोनऊं के सगे नोंई। इने तो अपनी टीआरपी बढ़ाबे की परी रैत आए। फेर ऊके लाने कछू बी अल्ल-गल्ल बकने होए सो बकत रैत आएं। जरूरी बात पे उनको मों खोलत नईं बनत।’’भैयाजी बोले।
‘‘अरे, भैयाजी! मोए जरूरी बात पे बोलबे पे से याद आई के अबे मैं बा जलसेवा के उद्घाटन में गई रई।’’ मैंने कई।
‘‘कोन सी जल सेवा?’’ भैयाजी ने टोंकत भए पूछी।
‘‘अरे बोई जोन हरेक साल श्रीराम सेवा समिति वारे करत आएं। सागर के रेलवे स्टेशन पे सबरे यात्रियन खों मुफत में ठंडो पानी पिलाबे को पुन्न काम। बा ऊके अध्यक्ष मोरे लोहरे भैया डाॅ विनोद तिवारी आएं। बे सोई सांझ-संकारे एक करत रैत आएं। सो, उते का भओ के उद्घाटन के लाने आए हते समाजवादी चिन्तक दादा रघु ठाकुर जू औ भैया रमाकांत यादव जू जोन पिछड़ावर्ग आयोग वारे ठैरे। सो रमाकांत यादव भैया ने अपने भाषन में बड़ी पते की बात कई। बे बोले के जे जो रुपैया को चलन बंद करत जा रए ऊके लाने कछू करो चाइए। मोए उनकी जा बात भौतई पुसाई। काए से जोन को डिजिटल रुपैया से काम करत बनत आए उनके लाने तो कछू नईं, कोनऊं परेसानी नोंई, बाकी जोन खों ढंग से मोबाईल चलाउत नईं बनत, ने तो ऊके लिंगे सस्तो सो बटन वारो मोबाईल आए, बा बिचारो का करहे? जो कोऊ नईं सोचत। सबखों ईरान औ अमेरिका की लड़ाई की ऐसी परी के मनो बे दोई इतई तिगड्डा पे लड़ रए होएं।’’ मैंने कई।
‘‘सई कई उन्ने। जा बाकई भौत बड़ी वारी समस्या आए। पर कोनऊं खों ऊकी परी नईयां।’’ भैयाजी बोले।
‘‘हऔ, औ तनक औ करबे की चली तो बे बाई, का नांव ऊको?? अरे हऔ बा फिलम वारी बाई, बा राहुल गांधी के लाने कछू ने कछू बकन लगत आए। जीसें फालतू के बातकाव चलत रए औ काम की बात ने होने पाए।’’ भौजी बोलीं।
‘‘अरे, बा सब पब्लिक को ध्यान भटकाबे को काम चलत रए। पब्लिक फजूल की गिरगिटर करत रएं, काम की बात सोंचे बी नईं। मनो बा तो पब्लिक बी अब समझन लगी आए, लेकन जा लड़ाई खों ले के जा कमी, बा कमी की कैबे में का रखो? जित्तों को संकट नोंई, उत्ते को दोंदरा देत फिर रए। जा सई आए के तनक चौकन्ने रओ, फिजूलखर्ची ने करो सो कछू फरक नईं परने।’’ मैंने कई।   
‘‘हम तो कैत आएं के जे जो जित्ते टीवी पे कांव-कांव करबे वारे चैनल आएं, सब खो बंद कर दओ जाए। कम से कम तब तक के लाने जब तक जे जो लड़ाई चल रई।’’ भौजी बोलीं। 
‘‘अब का कओ जाए भौजी! आजकाल कछू औरई दिमाग चल रओ लोगन को। अब आपई देख लेओ के एक फिलम आई ‘धुरंधर’। मोए बा तनकऊ ने पुसाई काए से के ऊमें भर-भर के गालियां हतीं। मनो भौत से लोगन खों बा भौतई पुसाई। सबने ऊकी खूबई तारीफ करी। उतई एक फिलम औ आई ‘‘केरला स्टोरी’’। बा हती तारीफ करबे जोग, मनो ऊपे बोले में लोग डरात दिखे। जबके ‘केरला स्टोरी’ में लव जिहाद को कच्चो चिट्ठा रओ। ऊपे भौतई कम बात करी लोगन ने। सो, आजकाल कछू कैबो मुस्किल आए के कोन का चा रओ?’’ मैंने कई।
‘‘सो तो सई कई!’’भैयाजी बोले।
‘‘औ तनक जे देखो के राशन की दुकान पे राशन लेत समै उंगलियन को निसान लेबे को नियम कर दओ, मनो बोट डालत समै काए नईं फिगर प्रिंट लेत आएं? ईसे एकऊ गलत बोट ने पड़ पाहे। काए सई कई के नईं?’’ मैंने भैयाजी से पूछी।
‘‘कई तो सई तुमने, मनो तुमाई को सुन रओ।’’ भैयाजी बोले।
‘‘अरे तुम ओरें कां की ले के बैठ गए? हम तो सिरफ इत्तई कै रए हते के जे लड़ाई खों ले के बेफालतू की चिल्लम-चिल्ली ने करी जाए। काए से ईसे डर सो फैलत आए।’’ भौजी बोलीं।
‘‘तुम जे डर की कै रईं? औ बा जोन जो सीरियल में दिखा रए बसीकरण औ चुड़ैल को साया सो बो का आए? ऊको काए नई रोको जात आए? जोन जो पढ़े-लिखे आएं बे सोई ई सब के बारे में सोचन लगे अब तो। अभईं कल मोए मास्साब जी मिले सो कैन लगे के उनके मोड़ा खों कोनऊं ने नजर लगा दई आए जोन से बा बीमार डरो आए। सो हमने उनसे गई के आप तो पढ़े लिखे आओ, आप सो ऐसो ने बोलो। कछू गलत खा पी लओ हुइए आपके बालक ने सो ऊकी तबीयत बिगर गई। सो जे तो हाल आए।’’ भैयाजी बोले।
‘‘सो, जेई तो हम कै रए के जोन जे चिंचियात रैत आएं औ अंधबिस्वास फैला रए, इन ओरन पे पाबंदी लगो चाइए।’’ भौजी बोलीं। 
भौजी कै तो सई रई हतीं, मनो उनकी कोऊ सुन ले सो अच्छो, ने तो टीवी चैनल वारे अपनी टीआरपी की चकिया में ऐसई पीसत रैंहें। कैबे खों प्राईम टाईम औ कऊं किले को भूत के बारे में बताहें तो कहूं कोनऊं चमत्कार के बारे में।  
बाकी बतकाव हती सो बढ़ी गई, हड़ियां हती सो चढ़ा गई। अब अगले हप्ता करबी बतकाव तब तक लौं जेई की जुगाली करो। मनो सोचियो जरूर के फिजूल की चिल्लम-चिल्ली करबे वारे चैनलों पे रोक लगने चाइए के नईं?  
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बुंदेली कॉलम | बतकाव बिन्ना की | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | प्रवीण प्रभात
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