टाॅपिक एक्सपर्ट
बड़े पते की आएं जे कहनातें, इनें छुड्डा में गठियां लेओ
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
मार्च को मईना लगत साथ ऐसी गरमी परन लगी रई मनो मई को मईना आ गओ होए। कछू नई तो पूरो मईना तपो। बस, अखीर-अखीर में नाएं-माएं पानी गिरन लगो। बा जोन मोसम बिभाग वारे कैत आएं ने के गरज के संगे छींटें परहें, सो, ऐसोई कछू होन लगो। ई टाईप से मोसम बदले में तबीयत सोई बिगरन लगत आए। ऊंसई देखो जाए तो मार्च औ अप्रेल को मईना चैत औ बैसाख कहाउत आएं, जोन के लाने घाघ औ भड्डरी ने खींब पते की कहनातें कईं आएं। जेसे चैत के लाने उन्ने खाबे-पीबे को सई हिसाब बताओ आए के का खाओ चाइए औ का नईं खाओ चाइए -
चैते गुड़, बैसाखे तेल,
जेठे महुआ, आषाढ़े बेल
- मने चैत में गुड़, बैसाख में तलो-फुलो, जेठ के मईना में महुआ औ असाढ़ मईना में बेल नईं खाओ चाइए। जेई के संगे घाघ कैत आएं के का खाओ चाइए जोन से सेअत सही रए-
चैत मास में नीम सेवती,
बैसाखहि में खाय बासमती
- मने चैत में नीम की नईं-नईं पत्तियां खाए से औ बैसाख में बासमती घांई बिना मांड़ को भात खाए से सेअत अच्छी रैत आए।
बाकी घाघ औ भड्डरी ने मोसम के लाने सोई कओ आए के-
चैत मास दसमी खड़ा, जो कहुं कोरा जाइ।
चौमासे भर बादरा, भली-भांति बरसाइ।।
- मने चैत मईना के शुक्ल पक्ष की दशमी को जो बदरा ने छाएं तो पूरे चौमासे झमाझम पानी बरसत आए। मनो उतई जो-
जब बरखा चित्रा में होय
सगरी खेती जावै खोय
- मने जो चित्रा नक्षत्र में पानी बरस गओ तो समझो सगरी खेती चौपट। सो, इन कहनातों को फिजूल ने मानियो, जे सेअत ठीक राखबे औ मोसम की दसा समझबे को गुर बताउतीं आएं। अगली दफा कछू औ कहनातें बताबी,जो लौं इनें छुड्डा में गठियां लेओ। राम-राम !
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Thank you Patrika 🙏
Thank you Dear Reshu Jain 🙏
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