Showing posts with label शरद सिंह के उपन्यासों में चेतना के विविध आयाम. Show all posts
Showing posts with label शरद सिंह के उपन्यासों में चेतना के विविध आयाम. Show all posts

Thursday, October 15, 2026

शरद सिंह के उपन्यासों में चेतना के विविध आयाम

अच्छा लगता है जब अपनी मेहनत से दूसरे की मेहनत जुड़कर एक नया इतिहास रचती है। एक ऐसी ही सुखद सूचना है भाई डॉ बहादुर सिंह परमार की वॉल से साभार 👇🌹🙏
*ज्योति पाण्डेय ने 'शरद सिंह के उपन्यासों में चेतना के विविध आयाम' पर किया महत्वपूर्ण शोध* 

*महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर के हिंदी विभाग में शोधार्थी ज्योति पांडे द्वारा अपने शोध उपाधि हेतु शोध प्रबंध का पूर्व प्रस्तुतीकरण सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। ज्योति पांडे ने अपना शोध कार्य शोध निर्देशक डॉ. बहादुर सिंह परमार के मार्गदर्शन में पूर्ण किया है। उनके शोध का विषय "शरद सिंह के उपन्यासों में चेतना के आयाम" रहा है।  
कार्यक्रम का शुभारंभ विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्राध्यापकों की उपस्थिति में माँ सरस्वती के पूजन एवं वंदना के साथ किया गया। इस कार्यक्रम में कला संकाय की अध्यक्ष प्रो उषा शुक्ला , हिंदी विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो गायत्री बाजपेई, हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो बहादुर सिंह परमार तथा हिंदी विभाग में सहायक प्राध्यापक नंदकिशोर पटेल, विषय विशेषज्ञ श्री दिनकर प्रसाद साकेत, स्वेच्छा पाठक, श्री विवेक तिवारी सहित जेआरएफ शोधार्थी और स्नातकोत्तर हिन्दी के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
शोध पूर्व प्रस्तुतीकरण के दौरान शोधार्थी ने अपने शोध प्रबंध की रूपरेखा एवं अध्याय विभाजन को विस्तार से प्रस्तुत किया,
जिसमें शरद सिंह का व्यक्तित्व एवं कृतित्व (प्रथम अध्याय): इसमें लेखक के जीवन परिचय, शिक्षा-दीक्षा, साहित्यिक प्रेरणा एवं उनकी प्रमुख कृतियों का समावेश किया गया है।  
चेतना का आशय एवं आयाम (द्वितीय अध्याय): चेतना शब्द की व्युत्पत्ति (संस्कृत की 'चित्' धातु) को स्पष्ट करते हुए अरस्तू और डॉ. रामविलास शर्मा के विचारों के आलोक में सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक चेतना के आयामों को रेखांकित किया गया। तृतीय, चतुर्थ एवं पंचम अध्याय
उपन्यासों में चेतना का विश्लेषण किया। शरद सिंह के उपन्यासों में विद्यमान सामाजिक चेतना, राजनीतिक चेतना तथा सांस्कृतिक चेतना पर विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया , जिसमें विशेष रूप से स्त्री अधिकारों व उनके हनन का मुद्दों पर विचार किया गया।* 
*समग्र मूल्यांकन:
प्रस्तुतीकरण के अंत में विषय विशेषज्ञों द्वारा शोध के विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श एवं मूल्यांकन किया गया। विशेषज्ञों ने माना कि शरद सिंह का साहित्य मानवीय दृष्टिकोण, सामाजिक संवेदनाओं, स्त्री चेतना और न्यायबोध से परिपूर्ण है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य सामाजिक जीवन की प्रक्रियाओं, प्रतिमानों और व्यवहारों का गहन अध्ययन करना रहा है।*

प्रिय ज्योति पांडे जी को हार्दिक बधाई 🌹 
आदरणीय भाई डॉ बहादुर सिंह परमार जी का हार्दिक आभार 🙏🚩
@highlight #mypost #followers 
#डॉसुश्रीशरदसिंह #DrMissSharadSingh #MissSharadSinghKaSahitya
#research #शोध