Saturday, October 3, 2026

टॉपिक एक्सपर्ट | कागा कां गए, करै दिन कढ़े जा रए | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | पत्रिका | बुंदेली कॉलम

टाॅपिक एक्सपर्ट
कागा कां गए, करै दिन कढ़े जा रए
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
संकारे से भैया जू अपनी छत पे ठांड़े ‘कां-कां’ कर रए हते। कुल्ल देर हमने उनकी ‘कां-कां’ सुनीं, फेर जो रहाई ने परी सो हम सोई छत पे जा पौंचे। ऊ टेम पे बी बे ‘कां-कां’ कर रए हते। हमने उनसे पूछी, “काए भैया जू, हमें तो जे पतो आए के करै दिन में कागा खों बरा ख्वाए जात हैं, मनों उनकी बोली में चिचियाओ बी जात आए, जे मोए पता ने हती। का जो कोनऊं नओ ट्रेंड आए?”
“काए को नओ ट्रेंड? हम तो कागा हरों खों टेर रए।” भैया जू बोले।
“काए टेर रए? आपके टेरे से बे आ जैहें? आप तो घंटा खांड़ से चिंचिया रए, अबे लौं एक ने आओ।” हमने भैया जू से कई।
“जेई से तो हमें टेंशन हो रई। जो कागा खों भोग ने लगो तो पितर खफा हो जैहें।” भैया जू बोले।
“जे बी खूब रई! परकी साल आपई ने अपने दोरे को नीम को पेड़ कटा दओ, कागा हरों खों बेघर कर दओ, औ अब कां-कां करबे दते हो आप! अरे, अब बे जां रै रए हुइएं, उतई दिखाहें। इते काए खों ढू़कहें?” हमने सोई खरी-खरी कै दई।
“बात तो सांची आए! जब से नीम को पेड़ो काटो है एक बी कागा ने दिखाने। बाकी उत्तो ध्यान बी नईं गओ। बा तो करै दिन में उनकी जरूरत परत है।” भैया जू बोले।
“भैया जू ऐसो आए के कागा हरें ऊंचे पेड़न पे घोंसला बनाऊंत आएं। जो बड़े पेड़ ने बचाहो तो कागा बी ने बचहें।” हमने उनें समझाओ।
“मनो अबे हम का करें?” बे घबड़ाए से बोले।
“अब तो जेई करो के कागा के नांव को बुजुर्गन खों ख्वाओ औ उनकी सेवा करो। पितर हरें खुस हो जैहें। आपकी मताई आपखों टेर रईं, उनकी सुनो, उने टेम से खाबे खों औ दवाई देओ करो। कागा बी आपखों माफ कर दैहें।” हमने उने समझाई।
    बाकी बे कित्तो समझे पतो नईं? मनों आप ओंरे समझदार आओ सो, हमाई कई समझ लइयो ।
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 Thank You Patrika 🙏
Thank you Reshu Jain 🙏
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