टाॅपिक एक्सपर्ट
दिवारी आ रई, पटाखा फोरबे वारे बच्चा हरों को तनक ध्यान राखियो
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
दिवारी आत-आत घर को महौल बदल जात आए। लिपाई, पुताई, ढिग धराई सबई कछू समै पे निपटाबे की परी रैत आए। इत्तोई नोंई, खुरमा, पपरियां, गूझा, बरफी बनन लगत आए। मनो जोन घरे बनावे वारी अकेली होए सो बा यां तो खाना पकाबे वारी से मदद ले लेत आए। ने तो आजकाल मिठाई की दुकान वारे सोई घर घांई मुतको सामान मिलत आए। बाकी घर के बने की बात औ रैत आए। लेकन लरका-बच्चा को तो खाली खाबे औ पटाखा फोरबे से मतलब रैत आए। उने तो दसेरा से पटाखा पाबे की धुन सवार हो जात आए। फेर दिवारी नजीक आत-आत सो बे औ पगलान लगत आए। औ पगलाए काए नईं अकेरी दिवारी के टेम पे उने पटाखा फोरबे मिलत आएं। सो उने पटाखा जरूर द्वाएं जाएं मनो पटाखा द्वाबे औ चलाबे के टेम पे बच्चा हरों खों ध्यान राखबो जरूरी आए। ईके लाने सबसे अच्छो आए के उनें पटाखा के लाने रुपइया देबे की जांगा खुदई जा के उने पटाखा द्वा दए जाएं। ईसे का हुइए के उनकी उम्मर के हिसाब से उने पटाखा मिलहें। ने तो होत का आए के लोहरे हरन खों लगत आए के हमाए दाऊ तो बम घाल रए, सो हम सोई बम घांले। उने बम घालबे को खतरा को पता कोन रैत आए।
बच्चा हरों खों पटाखा द्वाबे के समै जा बी ध्यान राखबे जरूरी आए के बे कऊं चाइनीज वारे ने होंए। ऊंसे तो सरकार ने चाइनीज पटाखों पे रोक लगा रखी आए मानों कोऊ ओई टाईप को बेच रओ होए तो कमा से कम बच्चा हरों को तो ने मिले। काए से चाइनीज पटाखा औ बड़े पटाखा बच्चन के लाने ठीक नईं रैत। औ बच्चा हरों भर को काए, दिल के मरीजन के लाने, सांस की बीमारी वारन के लाने, मां बनबे वारी लुगाइयन के लाने ठीक नईं रैत आए। सो, अच्छो तो जे आए के बच्चा हरों खों खुदई जा के उनके जोग पटाखा द्वाओ औ खुदई की निगरानी में चलवाओ। एक बात औ के पटाखा खरीदत समै मैंगाई को ध्यान सोई राखियो। कऊं पटाखा के चक्कर में घर को बजट ने बिगरे। ईंसे पटाखा बी चलहे औ सब कछू अच्छो-अच्छो रैहे।
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