Thursday, April 4, 2024

बतकाव बिन्ना की | चुनाव की बेरा सबई बर्रयान लगत आएं | डाॅ. (सुश्री) शरद सिंह | बुंदेली कॉलम

बुंदेली कॉलम | बतकाव बिन्ना की | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | प्रवीण प्रभात
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बतकाव बिन्ना की
चुनाव की बेरा सबई बर्रयान लगत आएं    
   - डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
       ‘‘ऊ पार्टी के दोरे हमाए लाने खुल जाएं सो हम सोई उते पिंड़ जाएं।’’ लोहरे दाऊ मन मसोसत भए बोले। उनके मों पे उनकी इच्छा छपी सी दिखा रई हती। लोहरे दाऊ को अपनो एक राजनीतिक इतिहास आए। बे चार दफा निर्दलीय ठाड़े भए रए, मनो चारो की चारो बेर उनकी जमानतें जब्त हो गई। मोय तो उनके बारे में जे समझ में कभऊं नहीं आओ के हर बेर जमानत जब्त कराबे के लाने उनके लिंगे रुपैया कां से आ जात आएं? खैर, करत हुइएं कोनऊ जुगाड़। अपनो देश ऊंसई जुगाड़न को देश आए। इते सब कछू जुगाड़ से चलत रैत आए। अब कैने को तो क्रेडिट भगवान जी खों दे दओ जात आए के इते सब कछू भगवान भरोसे चलत आए। बाकी सई कई जाए तो भगवान भरोसे नोईं जुगाड़ भरोसे चलत आए।
अब जेई से तो देख लेओ के पैले जां ‘‘मेड इन इंडिया’’ कओ जात्तो, उतई अब ‘‘मेक इन इंडिया’’ कओ जान लगो। इते-उते से पुरजा जुगाड़ो औ बना लओ कछू ने कछू। जेई टाईप को जुगाड़मेंट तो ई टेम पे अपने इते की चुनावी राजनीति में चल रओ आए। सबई अपनी-अपनी जुगाड़ लगाबे में भैराने से फिर रए। कछू ऊ पार्टी में जाबे के लाने लेन लगा के ठाड़े दिखा रए जोन में पौंच के कछू मिलबे औ जीतबे की उम्मींदे ज्यादा आएं। औ कछू सोच रए के उते तो कओ कोऊ पूछे ना, सो ईसे अच्छो आए के जिते धरे, उतई धरे रओ। बाकी कछू लोहरे दाऊ घांई बी आएं जो चुनाव को टेम आतई साथ बर्रयान लगत आएं। बे इते जात आएं, उते जात आएं औ जब दोरे-दोरे फिरत-फिरत कछू हाथ नई लगत, ऊपर से गोड़े औ दुखन लगत आएं तब बे निर्दलीय ठाड़े हो के अपनो गम गलत करत आएं।
‘‘दाऊ आप तो बरहमेस निर्दलीय ठाड़े होत रए हो, फेर ई बेर काय सोच रए के कोनऊं पार्टी में घुसो जाए?’’ मैंने लोहरे दाऊ से पूछी।
‘‘हऔ, ठीक जेई हम पूछो चा रए हते।’’ भैयाजी सोई बोल परे।
‘‘तुम ओरे का समझो जे राजनीति की बातें? तुमें तो चुनाव में खाली बटन दबाने आए। तुम ओरन खों कोन कछू मेनत करने। जे तो हम ओरन से पूछो जोन खों चुनाव में ठाड़े होने परत आए।’’ लोहरे दाऊ ऐंड़ देत भए बोले।
‘‘काय, ऐसी कोन सी मजबूरी कहानी जो तुमाओ चुनाव में ठाड़े होने जरूरी आए?’’ भैयाजी ने पूछी। उने लोहरे दाऊ की ऐंड़ ने पोसाई।
‘‘मजबूरी आए भैया, बड़ी मजबूरी आए। जो हम ओरें ठाड़े ने होंय तो चुनाव कोन के बीच हुइए?’’ अब की बेर लोहरे दाऊ मुस्क्या के बोले।
‘‘सो आप ने ठाड़े हुइयो, तो कोनऊं तो हुइए। औ जो कोनऊं एकई उम्मीदवार रओ सो ऊको ऊंसई जीत मिली कहाई।’’ भैयाजी ने कई।
‘‘जेई तो बात आए। तुमें का पतो के कोनऊं उम्मीदवार अपने विरोधी के बिगैर चुनाव नई लड़न चात आए। जो अकेलो ठाड़ो हो जाए औ जीतो कहा जाए, तो खबर का बनहे? जा कां से कई जाहे के उन्ने अपने विरोधी खों इत्ते हजार वोटों से हराओ। सो सिंगल वाली जीत तो ऊ फटफटिया घांईं कहाई के नांव तो आए फटफटिया मनो आवाज फुस्स की बी ने होए।’’ लोहरे दाऊ ने बाकायदा उदाहरण दे के हम दोई खों समझाओ।
‘‘पर दाऊ, आप जे कैसे कै रए के हम ओरें जो वोटें डारबे वारे आएं, उने कछू मेनत नईं करनी परत आए? हम ओरन खों सोई सोचने परत आए के कोन खों वोट दओ जाए औ कोन खों ने दओ जाए? कई दफा तो सबरे उम्मींदवार अपने चिनारी वारे निकर आत आएं, ऐसे में सो औरई सोचने परत आए के कोन खों देबे में अपने वोट की इज्जत रैहे?’’ मैंने लोहरे दाऊ से कई।
‘‘हऔ, औ हम ओरन की उंगरिया में सबसे घनी ताकत रैत आए। हमाई उंगरिया जोन को बटन दबा देवे, बोई को उद्धार हो जात आए। जे मानो के वोट डारबे वारन की उंगरिया पे जुगल किशोर जू को सुदर्शनचक्र वोटिंग पावर के रूप में आत जात आए। एक बटन दबाए से जोन बदमाश दिखानो, ऊको राजनीतिक कैरियर कटत भए देर नई लगत।’’ भैयाजी बोले।
‘‘वाह भैयाजी! आपने खूबई नोनों उदाहरण दओ आए। वोट मने सुदर्शनचक्र। बुरए नेताओं से अपने क्षेत्र को बचाबे वारो हथियार। खूब कई आपने।’’ मोय भैयाजी की बात भौतई अच्छी लगी। कभऊं-कभऊं भैयाजी गजब की बात बोल जात आएं।
‘‘औ बे नोटा दबाबे वारन के बारे में का बिचार है आप दोई को?’’ लोहरे दाऊ ने चुटकी सी ले लई।
‘‘हमाए बिचार से तो जे नोटा-मोटा को बटन निकार फेकबो चाइए। जो वोट डारबे जा रए हो तो या तो जिताओ, ने तो हराओ। जे का के हमें कोनऊं नोई पोसा रओ को बटन चटका के आ गए। का उते कोनऊं स्वयंबर हो रओ के तुमें जिनगी भर के लाने सोचने? अरे खाली पांच बरस के लाने चुन लेओ, औ ने तो बीच में छोर-छुट्टी करा के दफा करो जा सकत है। बो का आए, एक विज्ञापन एक बिस्कुट को दिखाओ जात आए ने के अंदर की खूबी तो ट्रायल लेबे में पता परत आए।’’ भैयाजी बोले।
‘‘हऔ बात तो आप सांची कै रए भैयाजी! बाकी बा विज्ञापन मोय नई पोसात। बा विज्ञापन में एक कोच दिखाओ जात आए औ मोड़ी की मां कैती आए के अंदर की खूबी तो आजमाने पे पता परत आए। अब आपई सोचो के जो कोनऊं कोच मोड़ी की मताई के कैबे में आ के अंदर की कोनऊं और खूबी देखन लगो तो बोई दसा हुइए जो अपने इते की महिला पहलवानों की भई। सो ऐसो विज्ञापन मोय नई अच्छो लगो।’’ मैंने भैयासे कई।
‘‘अरे हऔ, जे तो हमने सोचई ने हती! तुमें कां से सूझी?’’ भैयाजी अचरज कर भए पूछन लगे।
‘‘मोरो सोई ध्यान नई गओ रओ। बा तो एक भौजी आएं उन्ने जा बात कई, सो मोय सोई सोचने परी के बे कै तो सई रईं।’’ मैंने भैयाजी खों बताई।
‘‘तुम ओरें कां से कां पौंच गए? बात चल रई हती नोटा के बटन की औ तुम ओरे अंदर की खूबी ले के बैठ गए।’’ लोहरे दाऊ नाराज होत भए बोले। उने हम ओरन की बात अपने मतलब की नईं लगी।
‘‘सो, आप बताओ के जो आपके लाने बा बड़ी पार्टी के दोरे खुल जाएं सो आप का करहो?’’ मैंने लोहरे दाऊ से पूछी। मोरो सवाल सुन के लोहरे दाऊ ऐसे खुश भए जैसे राजा बिक्रमादित्य के कंधा पे बैठो भूत फेर के पीपर के पेड़ पे लटक के खुश हो गओ होय।
‘‘जो हमाए लाने उते के दोरे खुल जाएं सो हमें टिकट सोई मिल जाहे।’’ लोहरे दाऊ उचकत भए बोले। मनो उने टिकट मिलत भई दिखान लगी।
‘‘दाऊ, नींद में ने निंगो, गिर जैहो!’’ मैंने कई।
‘‘का मतलब?’’ दाऊ ने चैंक के पूछी।
‘‘मतलब जे के आप सपनोई देखत रैहो, उते सबरी टिकट खतम भई जा रईं।’’ मैंने लोहरे दाऊ खों याद कराई।
‘‘सो होन देओ खतम। बे हमें टिकट ने दें, सो ने दें। हम वोट सो काटई लेबी।’’ लोहरे दाऊ चतुराई से मुस्काए।
उनकी बात सुन के अब की बेरा मैं चैंक गई। काय से के उनको हर-हर दइयां चुनाव में ठाड़ो होबो और अपनी जमानतें जब्त कराबे को चक्कर कछू-कछू समझ में आ गओ।
‘‘सो जा बात आए!’’ मोरो मों से निकर परो।
मोरी बात सुन के भैयाजी ने मोरो हाथ दबा के मोए चुप रैबो को इशारो करो औ धीरे से बोले,‘‘दाऊ खों बर्रयान तो देओ। चुनाव के टेम पे सबई बर्रयान लगत आएं। तुम औ ने छेड़ो, ने तो जे अबई अपने दोई की खपड़िया खा जैहें।’’
भैयाजी की बात सुन के मोय हंसी आ गई। बाकी उनकी बात सई हती, सो मैं उठ खड़ी भई औ लोहरे दाऊ से टाटा-बाय-बाय करी। जो लौं भैयाजी सोई बोले के,‘‘मोय सोई कटरा जाने, फिर मिलबी दाऊ! जो आपके लाने दोरे खुल जाएं सो बतइयो।’’
हम दोई उते से खसक गए। दाऊ बी कोऊ और खों पकरबे के लाने निकर परे। बाकी बतकाव हती सो बढ़ा गई, हंड़ियां हती सो चढ़ा गई। अब अगले हफ्ता करबी बतकाव, तब लों जुगाली करो जेई की।
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